तृप्ति को चोदा इंटरव्यू के बाद

antarvasna antarvassna Indian Sex Kamukta हेल्लो दोस्तों आप का दोस्त मुनीर हाजिर हूँ फिर से एक हॉट स्टोरी ले के. मुझे बहुत सारे लोगों के रेस्पोंस आयें मेरी पहले की स्टोरी पर. शुक्रिया पसंद करने के लिए. जैसे की आप लोग जानते हैं मैं एक एम्एनसी में काम करता हूँ. मेरी बॉडी मस्त हैं और अब तक १०-१२ लडकियां चोद चूका हूँ.

यह बात लास्ट विक की हैं. मेरे मेनेजर ने मुझे कहा मुनीर एक काम करो तुम, अलहाबाद जाओ और कुछ इंटरव्यू लेने हैं वो काम देख लो. इस से पहले भी मैंने ऐसा काम किया हुआ था इसलिए मैंने कहा ठीक हैं बॉस. अगले दिन सुबह मुझे जाना था इसलिए रात में मैं पेकिंग कर के सो गया. अगले दिन दोपहर से पहले मैं अलहाबाद में था.

कंपनी के लोगों ने मुझे वेलकम किया और फिर हमने कुछ देर बातें की. मैंने लंच किया और फिर इंटरव्यू लेने का टाइम आ गया. हमें कोई भी पर्सन जो ६०% आन्स्वर सही दे तो उसे सिलेक्ट कर लेना था.

सब से पहले एक लड़का आया, उसका नोलेज सही था इसलिए हमने उसे सिलेक्ट कर लिया.

उसके बाद इंटरव्यू देने के लिए एक मस्त लड़की एंटर हुई. उसे देख के मन ही मन मैं बोल पड़ा वाऊ! वो बहुत ही खुबसूरत थी. उसने व्हाईट स्यूट पहना था. एकदम गोरी थी और वो गुजराती थी. वैसे भी गुजराती लड़कियां बहुत ही स्वीट होती हैं. मैंने उसे कुछ क्वेस्चन पूछे और पुरे इंटरव्यू में मेरी नजर उसकी छाती पर ही थी. मैं उसे भी सिलेक्ट कर लिया.

उसका इंटरव्यू ख़तम हुआ तो वो बहार चल पड़ी. मैं पीछे गया और कहा, एक्सक्यूज़ मी तृप्ति.

वो पीछे पलट गई और बोली, बोलिए सर.

मैंने कहा, मुझे मुनीर बुलाओ.

उसने कहा, सर मैं आप का नाम कैसे ले सकती हूँ.

उसने आगे पूछा, सर मेरा इंटरव्यू कैसा था?

मैंने कहा, ठीक था लेकिन कम्पीटीशन बहुत हैं.

उसने हलके से आवाज में कहा, सर प्लीज़ मुझे सिलेक्ट कर लेना मुझे काम की बहुत ज़रूरत हैं. यह मेरा चौथा इंटरव्यू हैं और अभी तक कोई सिलेक्शन नहीं हुआ हैं.

मैंने कहा, मैं देखूंगा डियर बाकी तुम्हारी किस्मत.

फिर मैंने कहा, एक काम करो मुझे शाम को ७ बजे कॉल कर के चेक कर लेना एक बार.

इतना कह के मैंने अपना कार्ड उसके हाथ में पकड़ा दिया.

शाम को ७ बजे उसका कॉल आया. मैंने उसे सिलेक्ट कर लिया था. उसने कहा, सर मेरा सिलेक्शन हो गया.

मैंने कहा, ट्रीट देनी पड़ेंगी.

वो ख़ुशी से उछल पड़ी और बोली, सर आप कहा हो. मैं अभी आती हूँ.

मैंने कहा, मैं होटल स्टार में ठहरा हूँ.

वो बोली, मैं आती हूँ पांच मिनिट में.

और पांच मिनिट में वो एक्टिवा ले के आ गई. वो मुझे पास के एक होटल में खाने के लिए ले गई. खाते खाते रात के ९ बज गए. उसने खाते हुए मुझ से पूछा, आप वापस कब जा रहे हो. मैंने कहा, कल सुबह.

मैंने कहा, चलो अभी ९ बजे हैं मेरे रूम पर. मुझे भी कुछ कंपनी मिल जायेंगी और मैं कुछ काम भी बता दूंगा आप को. पहले तो वो झिझक उठी लेकिन फिर बोली ठीक हैं.

कमरे में आते ही मैंने उसे बैठने के लिए कहा.

मैं उसे देख रहा था और वो मुझे. तृप्ति के होंठो को देख के मेरा लौड़ा खड़ा हो रहा था.उसकी आँखों में भी मुझे हवास दिख रही थी. उसने मुझे पूछा, ऐसे क्यूँ देख रहे हो?

तृप्ति तुम बहुत खुबसूरत हो.

मैंने कहा तो वो निचे देखने लगी, उसके गाल लाल हो गए थे शर्म से. मैं उसके पास जा बैठा और उसके कंधे पर हाथ रख दिया. फिर मैंने कहा, मुझे ख़ुशी होगी तुम्हारे जैसे खुबसूरत कलिग के साथ काम कर के. वो कुछ नहीं बोली और मैंने उसके कंधे को थोडा दबा दिया. तृप्ति कुछ नहीं बोली. मैंने निचे झुक के महसूस किया की उसकी साँसे बढ़ रही थी. उसकी नजरें अभी भी निचे थी. मैंने उसके होंठो पर एक किस दे दी. तृप्ति ने चौंक के कहा, सर ये क्या कर रहे हो!

मैं कुछ नहीं बोला और उसे अपनी बाहों में भर लिया. तृप्ति ने जैसे समर्पण का मन बना लिया था. वो कुछ नहीं बोली और मैंने उसे अपने गले से लगा लिया. उसके बूब्स मेरी छाती पर रगड़ गए. मैंने उसके बूब्स पर हाथ रख दीया. उसने मेरा हाथ पकड के पीछे कर दिया. मैंने फिर से बूब्स पकड लिए. उसकी शर्ट के दो बटन के बिच से मैंने अंदर हाथ किया और उसके ब्रा को महसूस किया. मैंने उँगलियाँ अंदर कर दी और उसके बूब्स को टच कर दिया. मैंने उसके होंठो को चूसते हुए उसके बटन खोलना चालू कर दिए. कुछ ही देर में उसके सब बटन खुल गए. उसके सेक्सी बूब्स ब्रा में दिख रहे थे. मैंने पीछे हाथ कर के ब्रा का हुक खोल दिया. तृप्ति ने शर्म से दोनों हाथ से अपने बूब्स छिपा दिए. मैंने उसके हाथ प्यार से हटा दिए. तृप्ति ने अपनी आँखे बंध की और मेरे होंठ उसके निपल्स पर जा गड़े. मैं उसके बूब्स का रस पिने लगा. तृप्ति की आहें बढ़ गई और वो मुझे चिपक गई.

मैं उसकी जींस की बटन खोली और वो हिचकिचाहट दिखाने लगी. धीरे से मैंने उसकी जींस निकाल दी, उसकी काली पेंटी में उसकी चिकना बदन बहुत ही सेक्सी लग रहा था. उसकी चूत पर हलकी सी झांटे थी. मैंने धीरे से अपना हाथ चूत पर रखा और सहलाने लगा. तृप्ति की चूत बहुत गरम हो गई थी.

अब मैं खड़ा हुआ और अपने कपड़े उतारे. मेरा लंड देख के तृप्ति चौंक पड़ी. मेरा टूल पूरा कडक था और खड़ा हो गया था. तृप्ति को मैंने लंड हाथ में दे दिया. वो लंड को सहलाने लगी. मैंने अपनी एक ऊँगली को चूत में डाला और हिलाने लगा. तृप्ति के मुहं से आह आह निकल रहा था. मैंने चूत को बिलकुल गिला किया और फिर लंड को उसकी चूत पर रख दिया. एक झटके में मैंने लंड को अंदर धक्का दिया. उसकी चूत इतनी भी टाईट नहीं थी जैसे मैंने सोचा था. लंड बिना रोकटोक के अंडर चला गया. तृप्ति मुझे चिपक गई और मैं अपने लंड को उसकी चूत में धीरे धीरे अंदर बहार करने लगा. आह आह सर आह आह्ह्ह्ह तृप्ति मोन करती जा रही थी और मैं उसे ठोक रहा था.

५ मिनिट तक ऐसे ही चोदने के बाद मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी और तृप्ति भी अपनी गांड को उठा उठा के चुदवाने लगी. मेरे लंड के झटके लेने में उसे बहुत मजा आ रहा था.

फिर मैंने अपना लंड निकाला और तृप्ति को उल्टा किया. कुतिया वाली स्टाइल में भी मैंने उसकी पांच मिनिट और चुदाई की. फिर जब मेरा निकलनेवाला था तो मैंने लंड बहार निकाल के उसके कूल्हों पर ही वीर्य छिडक दिया.

तृप्ति खड़ी हुई और कपडे पहनने लगी.

मैंने कहा, तृप्ति ऑफिस में मेरी बगल में ही केबिन रखवाऊंगा तुम्हारी. और सेलरी वगेरह का भी मैं देख लूँगा…!

तृप्ति हंस पड़ी और वो कमरे से बहार चली गई.