भाभी ने कहा आज नहीं बल्लू – [भाग 1]

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बल्लू ने भाभी के कमरे में झाँका, भाभी अपने मुन्ने को दूध पिला रही थी. बिस्तर पे अंजलि भाभी का हसबंड कांति बैठा हुआ था, उसके हाथ में देसी दारु की आधी बोतल थी जिस से वो चुस्कियां ले रहा था. बल्लू ने दरवाजे पर नोक किया.

कौन हैं बे, कांति की आवाज आई.

मैं बल्लू हूँ भैया, माँ ने अचार मंगवाया था भाभी से.

अरे बल्लू आजा यार अंदर आजा, शराबी कांति ने एक घोंट और लगाते हुए कहा.

बल्लू जैसे ही अंदर आया भाभी ने उसे देख के आँखे निकाली. मुन्ने के मुहं में अपनी निपल को बदलते हुए भाभी ने कहा, आओ बल्लू, जरा ठहरो मैं मुन्ने को दूध पिला के अचार देती हूँ.

बल्लू वही बैठ गया निचे जमीन पर और तिरछी नजर से भाभी के बूब्स को देखने लगा. ब्लाउज से ढंके हुए बूब्स मुन्ने के मुहं के आगे खुले हुए थे. उसे देख के ही बल्लू आँखे सेक रहा था. मुन्ने ने दूध पीना ख़तम किया और भाभी ने उसे कमर पर थपकार के सुला दिया. बल्लू के हाथ से कटोरी ले के लज्जा भाभी किचन में गई.

1 मिनिट में किचन से आवाज आई, अजी सुनते हो जरा बरनी उतार देना मुझे.

ये बेन्चोद पिने भी नहीं देती हैं आराम से, कांति गालियाँ निकालने लगा.

आप बैठो भैया मैं देखता हूँ, बल्लू कांति के कुछ कहने के पहले ही उठ खड़ा हुआ. वो किचन की और बढ़ा और उसने मुड़ के देखा की कांति फिर से पिने लगा था.

किचन में आते ही उसने भाभी के बूब्स पर हाथ लगाया और उसे दबाने लगा.

भाभी ने हलके से कहा, बल्लू तुम मरवाओगे मुझे, कांति घर में हो तब महरबानी कर दिया करो तुम. चलो अब अचार ले के चलते बनो. कांति ने देख लिया तो मेरी चूत की जगह तुम्हारी गांड में गोली धर देगा.

अरे भाभी आप तो भड़कती बहुत हो, वो शराबी उठने के होश में नहीं हैं और ख़ाक गांड में गोली देंगा. मैं तो हमारे मुन्ने को देखने आया था बस. और आज रात में आऊंगा पीछे का दरवाजा खुला रखना.

नहीं नहीं आज नहीं, ये शराबी यही होंगा आज तो, भाभी प्याली में अचार डालते हुए बोली.

माँ चुदाने दो उसे उसकी, मेरा लंड नहीं मानता हैं बहुत दिन से, बल्लू इतना कह के किचन से निकल गया.

अंजलि भाभी मनोमन गुस्सा कर रही थी. उसने दो गलतियाँ की थी पहली की इस 18 साल के जवान लड़के को अपनी चूत दिखलाई थी और दूसरा उसे यह भी कह दिया था की मुन्ना उसके लंड की ही पेदाश हैं. बल्लू मुन्ने के बहाने दिन में घर में दस बार आता था और किसी के देखने से अंजलि को हमेशा डर लगा रहता था. उसने वापस बहार आके देखा की कांति अब पूरी बोतल ख़त्म करने पर आया हुआ था. उसकी आँखे लाल हुई पड़ी थी और उसके बदन में कंपन आ रहे थे. उसने नजरें उठा के अंजलि के सामने देखा और हंस पड़ा.

अंजलि कुछ कहे उसके पहले ही कांति बोला, आ जा मेरी रानी सेक्स करते हैं.

अंजलि मन ही मन कांति को गालियाँ दे रही थी की साले तेरे उठने के होश नहीं और तेरा लंड कैसे उठेंगा मादरचोद.

लेकिन कांति के खराब स्वभाव के चलते वो कुछ कहने की हिम्मत नहीं जुटा पाई. उसने खिड़की को बंध किया और अपने ब्लाउज के बटन खोलने लगी. वो पेटीकोट और पेंटी उतार के नंगी हो गई. कांति ने अपनी पतलून खोली और वो खड़ा होनेगया, लेकिन वो लडखडा गया और उसने गिरने से बचने के लिए दिवार का सहारा लिया. अंजली के बड़े बूब्स हवा में थे और उसके काले निपल्स उसके बूब्स की खूबसूरती को और भी बढ़ा रहे थे. कुछ देर पहले ही बल्लू के छूने से वो एक्साईट हुए थे और अब कांति के चोदने की बात से फिर से उनमें अकड आ गई थी. कांति ने बूब्स दबाये और अंजलि की गांड पर हाथ फेर दिया. अंजलि ने कांति के होंठो से शराब की बदबू को अपने से दूर रखने के लिए उसे अपने आलिंगन में भर लिया. कांति ने सीधे ही अपना लंड चूत के छेद में धर दिया और उसे अंदर करने की कोशिश करने लगा. खड़े हुए लंड अंदर जाता कैसे, वो तो अंजलि की मोटी जांघो के बिच में घिस रहा था. 1 मिनिट में ही कांति का स्खलन हो गया और उसने सेक्स के नाम पर सिर्फ अंजलि की जांघे चोदी थी. वो तुरंत बिस्तर पे लेट गया. अंजलि ने उसकी लुल्ली को पेंट में डाला और उसकी ज़िप को बंध किया. यही थी अंजलि और कांति के सेक्स की कहानी जो पिछले डेढ़ साल से ऐसी ही थी. मिल बंध होने से कांति शराबी हो गया था और वो नशे में ऐसा धुत रहता था की बीवी की चूत सुख से विमुख हो गई थी. अंजलि के बाप की और से पैसे की बहुत मदद आती थी क्यूंकि वो पुलिस में हवलदार थे और पैसो की कमी नहीं थी. बस अंजलि का सेक्स जीवन टूट गया था, इसी सेक्स समस्या के चलते भाभी ने बल्लू को अपने बस में कर के उस से पहली बार पेलवाया था. अंजलि लोगो के वांझ होने के ताने नहीं सुनना चाहती थी इसलिए एक बच्चे के लिए उसने बल्लू का लंड लिया था. लेकिन अब उसे लगता था की उसकी सेक्स की दुनिया का तारणहार ही बल्लू हैं. दो मिनिट में ही कांति सो गया और उसके खर्राटे रूम में गूंजने लगे.

अंजलि भाभी ने अपने मोबाइल से बल्लू को मेसेज किया, मेसेज में सिर्फ उसने इतना लिखा के पौने नव बजे.

मेसेज पढ़ के बल्लू बहुत ही खुश हुआ.

साधे आठ बजे से ही वो भाभी के घर के पिछवाड़े के चक्कर लगा रहा था. कब दरवाजा खुले और वो अंदर घुस जाए.

पौने नव बजे दरवाजा आधा खुला. इधर उधर देख के बल्लू अंदर घुस गया. ये दरवाजा किचन में खुलता था. बल्लू ने अंदर नजर की और देखा की कांति बेड में सोया हुआ हैं. अंजलि का हाथ तुरंत बल्लू के लंड पर जा पहुंचा. बल्लू के होंठो भाभी के होंठो पर चिपक गए. वो भाभी को मस्त लिप किस कर रहा था, अंजलि की जबान को उसने अपनी जबान के साथ लपेट लिया था जिसे चूस चूस के उसने लाल कर दिया था. अंजलि ने भी अपनी बाहों में बल्लू को ऐसे कैद किया था जैसे वो उसे कभी जाने ही नहीं देंगी. बल्लू के लौड़े को मुठ्ठी में बंध कर के वो उसके ऊपर अपना पूरा हक़ जता रही थी. बल्लू ने भाभी को सहायता करने के लिए अपने लंड को ज़िप खोल के बहार निकाल दिया. अंजलि भाभी ने लंड को पकड के उसे हिला दिया. बल्लू अब धीरे धीरे भाभी के कंधे और गले के ऊपर चुम्मे देने लगा था. जब उसके होंठ भाभी के बदन को छूते थे तो भाभी के मुहं से आह, उह्ह निकल आता था.

बल्लू का लंड बहार आते ही भाभी अपने घुटनों पर बैठ गई. बल्लू के लंड को उसने अपने मुहं में ले लिया और उसे चूसने लगी. बल्लू के हाथ में भाभी का माथा था जिसे वो अपने लंड पर दबा रहा था. भाभी ने पूरा लंड अंदर ले रखा था जिसके ऊपर जबान घुमा के वो बल्लू को स्वर्ग की अनुभूति करवा रही थी. बल्लू की आंखे बंध हो गई थी और उसके सात इंच के लंड को भाभी ने पूरा अपने मुह में घुसेड़ा हुआ था.

2 मिनिट और लंड चूसने के बाद भाभी ने लंड को बहार निकाला. बल्लू ने भाभी की पेटीकोट को खोला और पेंटी को साइड में कर दिया. जांघ के ऊपर चिकनाहट देख के वो हंस के बोला, तो आज आप ने फिर से अपनी जांघे चुदवाई हैं भाभी?

अंजलि कुछ नहीं बोली और उसने सामने हंस दिया. मनोमन वो कह रही थी, चुद्वाऊन्गी तो मैं तुझ से और तेरे जवान लंड का रस पी लूँगी…!

बल्लू ने भाभी की चूत का क्या हस्र किया वो इस हिंदी सेक्स कहानी के अगले भाग में पढना ना भूलें…!