मेरी हवस की शिकार बनी मेरी माँ 2

भाग 1 से आगे की कहानी ……

antarvasna antarvassna Indian Sex Kamukta Chudai Hindi Sex उसे ये पहचानने में देर नहीं हुई कि ये चांग का वीर्य है. वो समझ गयी कि रात में उसने बिस्तर पर ही मुठ मारा होगा. लेकिन वो जरा भी बुरा नहीं मानी. वो गौर से अपने बेटे का लंड देखने लगी. वो उसके बगले में लेट गयी और और उसके सीने पर हाथ फेरते हुए उसे उठाई. चांग की ज्यों ही नींद खुली बसंती ने उसके लंड पर हाथ फेरते हुए कहा -देख तो, तुने क्या किया?, कल रात को तुने बिस्तर पर ही अपने लंड से माल निकाला था क्या? चांग – हाँ माँ, वो बिस्तर पर ही दो बार मार लिया. बसंती ने कहा – कोई बात नहीं बेटा, जा कर बाथरूम में अपना बदन साफ़ कर ले. मै बिछावन साफ़ कर लुंगी. चांग बिना कपडे पहने ही बाथरूम गया. और अपने बदन पर से अपना वीर्य धो पोछ कर वापस आया तब उसने तौलिया लपेटा. तब तक बसंती ने वीर्य लगे बिछावन को हटा कर नए बिछावन को बिछा दिया. फिर उस रात ज्यों ही बिस्तर पर दोनों लेटे त्यों ही चांग ने मुठ मारना शुरू कर दिया. बसंती अँधेरे में चांग को देख तो नही पा रही थी लेकिन वो समझ गयी कि चांग मुठ मार रहा है. वो भी गर्म हो गयी. उसने भी अपनी पेंटी खोल दी और अपने चूत में उंगली डाला और वो भी शुरू हो गयी. अब दोनों ही बिस्तर पर एक साथ मुठ मार रहे थे. हालांकि चांग नही जान पाया कि उसकी माँ भी मुठ मार रही है. उसने अचानक कहा – माँ कोई कपड़ा दे ना. माल निकालना है. बसन्ती ने अपनी पेंटी उसके हाथ में थमा दी और बोली – इसमें निकाल ले. चांग – क्या है ये? बसंती – जो भी है, तू माल निकाल इसी में. चांग ने जोरदार आवाज के साथ अपनी पिचकारी छोड़ी और सारा माल अपनी माँ की पेंटी में गिरा दिया. फिर उसने वो पेंटी अपनी माँ को थमा दिया.

अब बसंती ने भी अपना माल उसी पेंटी में गिराया फिर उस पेंटी को पहन ली.दोनों अपने अपने माल को निकाल कर निढाल हो कर सो गए. लेकिन बसंती की आग बढ़ती ही जा रही थी. अगली रात बसंती ने सिर्फ ब्रा और पेंटी पहना था. जबकि चांग बिलकूल नंगा सोया था. चांग और बसंती रोज़ की तरह एक ही बिस्तर पर आस पास ही सोये हुए थे. आधी रात को चांग ने अपना एक हाथ बसंती के चूची के ऊपर रख दिया. बसंती उसकी तरफ पीठ कर के सोयी थी. चांग ने ज्यों ही उसके ऊपर हाथ रखा वो जाग गयी लेकिन उसने कुछ नहीं कहा. चांग धीरे धीरे बसंती के बदन में सट गया और उसकी चुचियों और जांघ पर हाथ फेरने लगा. हालांकि उसे पता चल गया था कि उसकी माँ जाग गयी है वो अपने लंड को बसंती के गांड के ऊपर सहलाने लगा. बसंती को मस्ती चढ़ रही थी. उसे भी अपने बेटे का लंड अपने गांड पर चुभना काफी अच्छा लग रहा था. अचानक वो सीधे हो के लेट गयी. अब चांग उसके दोनों चुचियों को आराम बारी बारी से दबा रहा था. चांग धीरे धीरे अपनी माँ से पूरी तरह सट गया. अब चांग को ज्यादा बर्दाश्त नहीं हुआ चांग ने अपनी एक टांग बसंती के ऊपर चढ़ाई फिर धीरे धीरे उसके बदन पर पूरा चढ़ गया. बसंती सिर्फ गरम गरम साँसे फ़ेंक रही थी. चांग का लंड बसंती के पेंटी के ऊपर था और ऐसा लग रहा था की उसकी पेंटी को फाड़ कर बसंती की चूत की चुदाई कर देगा. चांग ने अपने होठों को बसंती के होठों से सटाया. बसंती ने अपना मुंह खोला और उसके उसके होठों को चूमने लगी फिर चूसने लगी.

बसंती ने अपने दोनों हाथ को चांग के पीठ पर लाया और धीरे से कहा – क्या चाहिए बेटे? चांग – मुझे तेरे चूत पर माल निकालना है. बसंती – तो निकाल ले ना. चांग – आज तू मार दे ना मेरी मुठ. बसंती – ठीक है. आ जा मेरे ऊपर. दे अपना लंड मेरे हाथ में. चांग बसंती के बदन पर चढ़ गया और बसंती ने उसके लंड को अपने हाथ में ले कर उसका मुठ मारने लगी. आज बसंती अपने जवान बेटे के लंड के साथ खेल रही थी. थोड़ी ही देर में उसका लंड ने माल निकालना शुरू कर दिया. चांग ने अपने लंड को अपनी माँ के चूत के पेंटी के ऊपर सटा दिया और सारा माल बसंती के पेंटी पर गिरा दिया. बसंती चुप-चाप उसके गर्म गर्म वीर्य से अपने पेंटी को भींगते रहने का अहसास करती रही. और मन ही मन खुश होती रही कि अब उसका बेटा ही उसकी प्यास शांत करने के लिए तैयार हो रहा है. चांग मुठ मरवाने के बाद निढाल हो कर अपनी माँ के बदन पर से हट गया और सो गया. बसंती ने भी अपनी पेंटी खोल कर मुठ मारा और पेंटी को वापस पहन कर सो गयी. सुबह तक वो उसी पेंटी में थी.. वो चांग के बगले में सट कर बड़े ही प्रेम से चांग को जगाया. चांग जागा तो बसंती ने उसके लंड के बाल में अपनी उंगली फिराते हुए कहा – कल रात तुने कहाँ माल निकाल दिया, तुझे पता है? देख तो मेरी पेंटी का क्या हाल हो गया है? पूरा भींग गया है. रात भर मै इसी तरह सोयी रही. तू भी एकदम पगला है. चांग — अभी भी भीगा है क्या? बसंती – हाँ, छू के देख ले. चांग ने अपनी माँ के पेंटी के ऊपर हाथ फेरा और देखा कि सचमुच अभी तक भींगा है. वो मुस्कुरा के बोला – इसे खोल दे न. बसंती – तेरे सामने? चांग – अरे नहीं. मेरे कहने का मतलब है इसे खोल कर दूसरी पहन ले. बसंती –

अच्छा ठीक है. वो कर लुंगी. मुझे कल ही पता चला तेरा लंड काफी बड़ा है रे. मेरा बेटा अब जवान जो हो गया है. चल उठ तैयार हो जा. तुझे कारखाना भी तो जाना है न? चांग उस दिन काफी खुश था और काम ख़त्म होते ही वो वापस घर आया और अपनी माँ को ले कर फिल्म दिखाने ले गया. रात को बाहर खाते हुए वापस घर आया और खाना खाते ही अपने सारे कपडे खोल कर नंगा हो गया. फिर माँ के सामने ही लंड को सहलाने लगा और सिगरेट पीने लगा. बसंती ब्रा और पेंटी पहन कर उसके बगल में लेटी हुई थी. चांग ने उसे पकड़ कर उसकी चूची ब्रा के ऊपर को दबाने लगा. बसंती भी चांग के लंड को सहलाने लगी. अचानक चांग ने कहा – माँ, तू सिगरेट पीयेगी? बसंती – नहीं रे . चांग – अरे पी ले, ये बिलकूल गाँव के हुक्के की तरह ही है. वहां तो तू हुक्का पीती थी कभी कभी . ये ले पी सिगरेट . कहते हुए अपनी सिगरेट माँ को दे दिया. और खुद दुसरा सिगरेट जला दिया. बसंती ने सिगरेट से ज्यों ही कश लगाया वो थोड़ी खांसी . चांग ने कहा – आराम से माँ. धीरे धीर पी. पहले सिर्फ मुह में ले. धुंआ अन्दर मत ले. बसंती ने वैसा ही किया. 3 -4 कश के बाद वो सिगरेट पीने जान गयी.

आज वो बहुत खुश थी. चांग – माँ एक बात कहूँ. बसंती – हाँ बोल. चांग – तेरी चूची दबाने में बड़ा मज़ा आता है. बसंती – सच कहूँ, तो मुझे भी कल तेरा मुठ मारने में बड़ा मज़ा आया था. . अब जब भी मन हो मेरी चूची दबा लिया करना. इसमें क्या जाता है. तुने इस से दूध पिया है. इस पर तेरा हक है. चांग ने अपना हाथ बसंती की चूची पर रख दिया और कहा – इसे खोल ना.. आज मै तेरी ब्रा खोल कर तेरी चूची को दबाना चाहता हूँ. बसंती – तो अभी मेरी ब्रा उतार दे. और जितनी मर्जी हो दबा ले. चांग ने बसंती का ब्रा उतार दिया. दरअसल वो भी अब मस्त होना चाहती थी. वो तो अब पेंटी उतारने के लिए भी तैयार थी.. वो भी चाहती थी कि उसका बेटा उसके बदन को अच्छी तरह से देखे. बसंती ने अपने ब्रा को खोल कर बेटे के सामने खड़ी हो कर मुस्कुराते हुए बसंती अब सिर्फ पेंटी में थी. उसकी चूची खुली हवा में विशाल रसगुल्ले की तरह दिख रहे थे. बसंती को सिर्फ पेंटी में और विशाल चूची को यूँ नंगी देख चांग का माथा खराब हो गया. वो कभी सोच भी नहीं सकता था कि उसकी माँ इतनी जवान है. उसका मन किया कि वो लपक कर अपनी माँ की गोरी गोरी चुचियों को मुंह में ले के चूसने लगे. लेकिन उसने अपने आप पे कंट्रोल रखा.