सुल्ताना भाभी के मम्मे–[भाग 1]

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हल्लो दोस्तों मेरा नाम अब्बास हैं और मैं लखनऊ का रहनेवाला हूँ. ये कहानी नहीं हैं बल्कि मेरी जिन्दगी की १००% वास्तविकता और नसीब हैं जो मुझे सुल्ताना भाभी ने बक्शा था. सुल्ताना भाभी मेरे चाचा के बेटे फिरदोस की वाइफ हैं और उनका माइका बनारस में पड़ता हैं. फिरदोस भाई का बालू का ठेका हैं और वो दो नम्बर में बालू और ईंटो का काला बाजार भी करते हैं. उनके पास बहुत पैसे हैं. इधर मैं एक जुलाहा हूँ और मेरी दाल रोटी मुश्किल से निकलती हैं.

मैं भी शादीसुदा हूँ और मेरी बीवी का नाम मुनिरा हैं. हम दोनों का सेक्स जीवन काफी अच्छा था और मेरी बीवी हमेशा मेरी तारीफ़ करती हैं. हालांकि हमारी शादी को अभी सिर्फ ४ महीने ही हुए हैं. मुनिरा और सुल्ताना भाभी की भी अच्छी बनती हैं और सुल्ताना भाभी कभी कभी हमारे लिए अच्छे पकवान भी भेजती हैं.

बात लास्ट मंथ की हैं. साडी के सीजन ख़राब थे और मेरे पास कोई काम नहीं था. सुल्ताना भाभी ने मुनिरा को कहा था की बच्चो की छुट्टियों में हम लोग साथ बनारस जायेंगे. मैं भी एक अरसे से बनारस जाने का सोच रहा था. वो साडी का बड़ा हब हैं इसलिए मैं रोजी के लिए ट्राय करना चाहता था और उस से पहले एक बार जा के शहर को देखना चाहता था. मुनिरा ने मुझे कहा था की अगले हफ्ते सुल्ताना भाभी कार ले के बनारस जा रही हैं हम भी साथ हो लेंगे. इस से पैसे भी बचेंगे और आप बनारस में अपना काम भी देख लेना.

मैंने कहा ठीक हैं मुनिरा.

लेकिन बदकिस्मती से बनारस निकलने वाले दिन को ही मुनिरा की तबियत ख़राब हो गई. वो सफ़र नहीं करना चाहती थी. उसने मुझे कहा आप चले जाओ भाभी के साथ.

मैंने कहा, पागल मैं कैसे अकेला जाऊँगा भाभी के साथ.

उसने कहा, अरे आप की भाभी ही तो हैं. वैसे भी फिरदोस भाई को अपने ठेके के काम से फुर्सत नहीं हैं इसलिए उन्होंने हमें साथ में आने के लिए कहा था. अब अगर आप मना करोंगे तो बेचारी भाभी निकल नहीं सकेंगी.

मैंने कहा चलो ठीक हैं मैं चला जाता हूँ उनके साथ में.

कसम से वाचक मित्रो, उस वक्त तक मेरे दिमाग में भाभी के लिए कोई बुरा इरादा नहीं था. लेकिन सफ़र के अन्दर भाभी ने अपने ऐसे रंग दिखाए की मैं अपनी बीवी को धोखा देने पर मजबूर हो गया.

लखनऊ छोड़े अभी हमें डेढ़ घंटा हो गया था. मैं भाभी के साथ आगे की सिट में था. पीछे भाभी के दोनों बच्चे मोहसिन और हिना सो रहे थे. गाडी चलाते चलाते भाभीजान ने हिंदी सोंग लगाये हुए थे. तभी वो फेविकोल से चिपका दे वाला सोंग आया और भाभी हंस पड़ी.

मैं भी हंस पड़ा.

भाभी ने मेरी और देखा औत बोली, तुम क्यों हँसे?

मैंने कहा क्या बेतुके गाने बना रहे हैं ये लोग आजकल, फेविकोल, झंडू बाम वगेरह वगेरह.

भाभी ने हंस के कहा, मैं तो किसी और चीज के लिए हंसी थी.

मेरे माथे पर सवाल के निशान देख के भाभी बोली, फेविकोल जितना चिपकाऊ भी होता हैं क्या कभी!

बाप रे भाभी ने एकदम खुल्ली बात कर दी थी. मैं साफ़ समझ गया था की उनका मतलब लंड से निकलते हुए वीर्य से था. मैं सन्न हो गया था लेकिन भाभी का मन रखने के लिए मैंने उनके सामने स्माइल दे दी.

उन्चाहर के पास भाभी ने गाडी को एक होटल के पास रोका और हम दोनों ने चाय मंगवा ली. भाभी ने कहा बच्चो को यही रहने देते हैं, इसलिए वो दोनों को गाडी में छोड़ के ही हम लोग होटल में घुसे थे. कोर्नर वाला टेबल था जहाँ से कार साफ़ दिख रही थी. चाय के घूंट लेते हुए भाभी मेरे सामने एक अलग अंदाज से ही देख रही थी. वो अपने होंठो के ऊपर जबान फेर रही थी और चाय की बुँदे उसकी लाल लिपस्टिक से चिपक के फिर जबान के साथ अन्दर चली का रही थी. भाभी की वेधक नजरों से मैंने बहुत बचने का प्रयास किया, जो सब व्यर्थ थे.

मुनिरा आप की बहोत तारीफ़ करती हैं, भाभी ने कहा.

हां, भाभी वो भी बड़ी भली हैं मेरी दस्तहाली में बड़ा सपोर्ट हैं उसका!

और वो बिस्तर में कैसी हैं?

बाप रे, आज भाभी मुझे एक के ऊपर एक झटके दे रही थी.

मैंने पूछा, क्या?

अरे सीधे तो पूछा मैंने, बिस्तर में कैसी हैं मुनिरा?

यह क्या कह रही हैं भाभीजान!

अरे भाभी देवर में सब चलता हैं, आप तो बड़े सीधे बन रहे हो!

मैंने कोई जवाब नहीं दिया.

वैसे मुनिरा ने मुझे बताया की आप लम्बी देर तक सेक्स करते हो.

इतने में वेइटर बिल ले के आया इसलिए भाभी ने अपनी जबान रोक ली. वेइटर के जाते ही वो बोली.

आप के भाई भी काश आप के जैसे होते! उन्हें तो बस अन्दर निकाल के सोने की आदत हैं. दो बच्चे हो गए मेरे लेकिन मेरी प्यास तो एक कुंवारी लड़की की रह गई.

मैं मन ही मन सोच रहा था की भाभी को आज क्या हुआ हैं. लेकिन वो तो बड़ी स्वस्थ थी और मेरी नजरों में नजरे मिला के ही देख रही थी. मैंने ऊपर देखा तो भाभी बोली, आप मेरे साथ सोयेंगे क्या?

मुझे हल्का हल्का गुस्सा आ रहा था की साली अपनी घर की औरत ऐसी नंगी. लेकिन फिर वाक्य जो भाभी ने कहा उस से मेरा गुस्सा दया में बदल गया.

भाभी ने अपनी जुल्फे साइड में करते हुए कहा, आप घर के हैं इसलिए मैं दिल खोल दिया आप के सामने. घर वाले से ही यह सब कह सकते हैं.

मैंने कहा, भाभी आप थोडा सब्र क्यूँ नहीं करती हैं, मैं भाईजान से बात करूँ?

सब्र ही तो किया इतने साल से, आप ही कहो एक औरत को क्या यह सब जरुरी नहीं होता हैं. आप के भाई बस काम में मरे रहते हैं. कभी कभी तो मन करता हैं की जहर खा लूँ.

मैंने भाभी के कंधे पर हाथ रखा और हलके से दबाया. उन्होंने मेरी और देखा तो उनकी आँख में आंसू थे. मैंने कहा, भाभी रोये नहीं कोई देखेंगा तो अच्छा नहीं लगेगा.

आप ने मेरे सवाल का जवाब नहीं दिया!

मैंने हां में सर हलाया और भाभी ने अपने बटवे से बील के पैसे टेबल पर रखे और हल लोग कार की और निकल पड़े.

भाभी ने कार स्टार्ट की और बोली, बनारस में ही करना पड़ेंगा हमें सब कुछ, लखनऊ में तो मुश्किल हैं.

मैं ह्म्म्म किया.

आप मेरी माँ के वही रुक जाना. दो दिन रुकना हैं मुझे आप रुक सकते हो साथ में?

मुनिरा अकेली हैं भाभी, मैं शाम को वापस आने को सोच रहा था.

मुनिरा को अपनी अम्मी के घर भेज दीजिये ना आप. मैं आप के भाई से कह के गाडी भिजवा दूंगी. आप कह देना की काम का चांस हैं इसलिए रुकना पड़ेंगा.

भाभी ने सब कुछ सोच के ही रखा था.

दो घंटे के बाद हम लोग बनारस में थे. भाभी ने अपने मइके में ही गाडी ले ली थी. वैसे मेरा इरादा कही और उतरने के था लेकिन अब भाभी को शांत भी तो करना था. भाभी के मइके में केवल उनकी माँ और बहन थे. उनकी बड़ी बहन जो बेवा हैं. भाभी के अब्बू की पावरलूम थी और वो पूरा दिन वही रहते थे. भाभी ने मुझे अपनी बगल में दुसरे मजले पर ही कमरा दिखाया और बोली, मैं आधे घंटे में आउंगी आप के पास, आराम करने के बहाने काम कर लेंगे.

मैं नाहा के पलंग में बैठा था. भाभी की बहन मुझे चाय और स्नेक्स दे के गई. मैं चाय पी रहा था की दरवाजा धीरे से खुला. भाभी एक पतली नाइटी पहन के अंदर घुसी और चोरो की तरह दरवाजा बंध किया.

कैसी लग रही हु मैं, उन्होंने धीरे से कहा!

मैं तो कहने वाला था की क़यामत लग रही हो भाभीजान. लेकिन भाभी के बड़े मम्मे और सफ़ेद रंग का पेट देख के मैं बोल ही नहीं पाया. भाभी ने जैसे पलंग के ऊपर जम्प ही लगा दिया. उनके बदन से खुसबू आ रही थी और उनके बाल अभी भी कुछ गिले थे. शायद वो कुछ देर पहले ही नाहा के आई थी. मेरा हाथ उनके बालों को सहला रहा था. भाभी ने धीरे से अपना हाथ मेरी लुंगी के वो हिस्से पर रख दिया जहाँ मेरा लंड था. मैंने अन्दर लंगोट नहीं पहनी थी और भाभी को मेरे गर्म गर्म मर्दाने अंग का स्पर्श हो गया. वो खुश हो गई क्यूंकि छूने से उन्हें पता लग गया था की मेरा लंड काफी तगड़ा था. उन्होंने लंड को दबाया और मेरे होंठो के ऊपर अपने होंठो रख दिए. मेरी मुछ के बाल उन्हें चिभ रहे थे लेकिन उन्होंने उसकी जरा भी परवाह नहीं की और मुझे चुम्मा देने लगी. मेरे हाथ उनकी कमर के इर्दगिर्द लिपट गए और हम दोनों एक दुसरे को चुमते रहे. भाभी का हाथ इसी दरमियान मेरी लुंगी में कब घुस गया पता ही नहीं चला. वो मेरे लंड को अपने हाथ से दबाने लगी.

मेरी सांस की रफ़्तार बढ़ गई थी और मैं और भी जोर जोर से भाभी के होंठो को चूस रहा था. मेरा लौड़ा खड़ा हो के क़ुतुबमीनार बन चूका था. सुल्ताना भाभी ने अब धीरे से लुंगी को ऊपर कर के मेरा लंड बहार कर दिया.

मेरे लंड को देख के वो बोली, आप का तो आप के भाई बड़ा हैं!

उनके ऐसा कहते ही मैं हंस पड़ा.

सच में उनका आप से अस्सी फीसदी होंगा बस.

ऐसा कह के वो लंड को मुठ्ठी में बंध कर के कस के दबाने लगी. मेरा हाथ भाभी के मम्मो पर गया और मैं उन्हें दबाने लगा. भाभी के बूब्स मस्त मुलायम थे और उन्होंने अन्दर ब्रा नहीं पहनी थी इसलिए मैं उन्हें सीधे टच कर सकता था. कुछ देर दबाने के बाद मैंने भाभी से कहा, आप मुझे अपने मम्मे चूसने दो ना.

आप भी मुझे अपना लंड चूसने दो पहले.

मैंने हंस के कहा, एक काम करते हैं हम एक साथ यह करते हैं. आप मुझे चूसो और मैं आप को.

मेरा ऐसा कहते ही भाभी ने अपना मुहं मेरी लुंगी में घुसा दिया. उनके होंठो से मेरे लंड का छुअन बड़ा ही सेक्सी और प्यारा था. वो लंड को चुम्मे दे रही थी और मैंने अपने होंठो को उनके बाएं निपल पर रख दिए थे. भाभी ने सिसकी ली और मेरे लौड़े को आधा अपने मुह में ले लिया.

बाप रे क्या लंड चूस रही थी भाभीजान तो. लंड को अपनी जबान से लपेट रही थी और फिर धीरे धीरे उसे चाटने लगी थी. मेरा तो एकदम टाईट हो गया था. मैंने एक हाथ से भाभी का बायाँ मम्मा दबाया और दायें मम्मे को मैं जोर जोर से चूस रहा था. भाभी ने अब लंड को और थोडा अन्दर कर लिया. मुझे लगा की मैं सातवें आसमान पर हूँ. भाभी के गले से ग्ग्ग्ग ग्ग्ग्ग की आवाज आ रही थी और वो लंड को मस्ती से चुस्ती जा रही थी. अब मैंने दोनों हाथ से भाभी के दोनों मम्मो को दबोच लिया और दोनों निपल्स के ऊपर अपनी जबान को रगड़ने लगा. भाभी को भी मस्ती चढ़ी और उन्होंने पूरा लंड अपने मुहं में ले लिया. मैं जोर जोर से निपल्स को चाट रहा था और भाभी की बेताबी बढती ही जा रही थी. वो मेरे टटों को दबा रही थी और लंड को अपने गले तक ले चुकी थी. कसम से आजतक मेरी बीवी मुनिरा ने भी ऐसे लंड नहीं चूसा था मेरा.

भाभी के मम्मे चूसते हुए अब मैंने एक ऊँगली उनकी चूत पर रख दी. भाभी की चूत तो उबल रही थी जैसे, कितनी गरम हो गई थी यार. मैंने चूत के होंठो पर ऊँगली को फेरा और मेरे हाथ में उनकी चूत का दाना आ गया. मैंने उसे हलके से दबाया और भाभी के मुह से सिसकी निकल पड़ी.

अब्बास मुझे मत तडपाओ, मेरी चूत को चाटो ना!

भाभी मरी जा रही थी अपनी चूत को चटवाने के लिए….! आगे क्या हुआ वो कहानी के अगले भाग में पढना ना भूले!