मुझसे चुद्वाकर दीदी खुस हुई भाग-3

“तुम्हे तो अब मालुम चल ही गया है, और हम दोनों इसके बारे में बातें भी कर रहे हैं..है ना antarvasna antarvassna Indian Sex Kamukta Chudai Hindi Sex मैं तो तुम्हे सिर्फ पैसे बनाने का तरीका बता रहा हूँ, जरा सोचो, छुट्टियाँ आने वाली है, मम्मी पापा तो चाचा – चाची के साथ हर साल की तरह पहाड़ों में कैंप लगाने चले जायेंगे,और पीछे हम दोनों घर पर बिना पैसो के रहेंगे, अगर ये पैसे होंगे तो हम भी मौज कर सकते हैं, लेट night पार्टी, और अगर चाहो तो कही बाहर भी जा सकते हैं…छुट्टियों के बाद अपने दोस्तों से ये तो सुनना नहीं पड़ेगा की वो कहाँ कहाँ गए और मजे किये, हम भी ये सब कर सकते हैं ..हम भी अपनी छुट्टियों को यादगार बना सकते हैं , जरा सोचो..”

“अगर मैं मना कर दूं तो” ऋतू बोली “तो तुम क्या करोगे”

“नहीं तुम ऐसा नहीं करोगी,” मैंने कहा “ये एक अच्छा आईडिया है, और इससे किसी का कोई नुक्सान भी नहीं हो रहा है, विशाल और सन्नी तो तुम्हे देख देखकर पागल हो जाते हैं, वो ये सब बाहर बताकर अपना मजा खराब नहीं करेंगे, मेरे और उनके लिए ये सब देखने का ये पहला और नया अनुभव है.”

“और अगर मैंने मन कर दिया तो मैं ये सब नहीं करूंगी, और ये छेद भी बंद कर दूँगी, और आगे से कभी भी अपने रूम में ये सब नहीं करूंगी, फिर देखते रहना मेरे सपने…”ऋतू बोली.

“please ऋतू..” मैं गिढ़गिराया “ये तो साबित हो ही गया है के तुम काफी उत्तेजना फील करती हो और अपनी उत्तेजना को शांत करने के लिए अपनी मुठ मारती हो और इस डिल्डो से मजे भी लेती हो, अगर तुम्हे और कोई ये सब करते देखकर उत्तेजना में अपनी मुठ मारता है तो इसमें बुरे ही क्या है, तुम भी तो ये सब करती हो और तुम्हे देखकर कोई और भी मुठ मारे तो इसमें तुम्हे क्या परेशानी है.”

“मेरे कारण वो मुठ मारते हैं, मतलब विशाल और सन्नी ? वो आश्चर्य से बोली.

“मेरे सामने तो नहीं, पर मुझे विश्वास है घर पहुँचते ही वो सबसे पहले अपनी मुठ ही मारते होंगे ” मैंने कुछ बात छिपा ली.

“और तुम ?..क्या तुम भी मुझे देखकर मुठ मारते हो.??”

“हाँ !!मैं भी मारता हूँ , मैंने धीरे से कहा, “मुझे लगता है की तुम इस दुनिया की सबसे खुबसूरत और आकर्षक जिस्म की मालिक हो.”

“तुम क्या करते हो ?”उसकी उत्सुकता बदती जा रही थी.

“मैं तुम्हे नंगा मुठ मारते हुए देखता हूँ और अपने ममम..से खेलता हूँ.” मैं बुदबुदाया ..

“और क्या तुम….मेरा मतलब है ..~!!

“क्या ?” मैंने पूछा.

“क्या तुम्हारा निकलता भी है जब तुम मुठ मारते हो..?:

“हाँ , हमेशा..मैं कोशिश करता हूँ की मेरा तब तक ना निकले जब तक तुम अपनी चरम सीमा तक नहीं पहुँच जाओ, पर ज्यादातर मैं तुम्हारी उत्तेजना देखकर पहले ही झड जाता हूँ”

“मुझे ये सब पर विश्वास नहीं हो रहा है” ऋतू ने अपना डिल्डो उठाया और उसको वापिस बेद के निचे draw में रख दिया.

“देखो ऋतू, मैं तुम्हे इसमें से आधे पैसे दे सकता हूँ, बस जरा सोच कर देखो, वैसे भी मेरे हिसाब से ये रूपए तुमने ही कमाए है.”

“हाँ ये काफी ज्यादा पैसे है, मैंने तो इतने कभी सपने में भी नहीं सोचे थे”

“तुम ये आधे रूपए रख लो और बस मुझे ये बोल दो की तुम इस बारे में सोचोगी” मैंने कहा.

“लेकिन सिर्फ एक शर्त पर”…ऋतू बोली.

“तुम कुछ भी बोलो…मैं ख़ुशी से उछल पड़ा “मैं तुम्हारी कोई भी शर्त मानने को तैयार हूँ”

“तुम मुझे देखते रहे हो, ठीक “

“हाँ तो ?”

“मैं भी तुम्हे हस्त्मेथुन करते देखना चाहती हूँ.” ऋतू बोली..

“क्या ……….!!!!???”

“तुम अभी हस्त्मेथुन करो…मेरे सामने, .

“नहीं ये मैं नहीं कर सकता,,,मुझे शर्म आएगी ..”मैंने कहा.

“तो फिर भूल जाओ, मैं इस बारे में सोचूंगी भी नहीं..

“अगर मैंने करा तो क्या तुम सोचोगी”

“हाँ ! बिलकुल”.. ऋतू ने अपनी गर्दन हाँ में हिलाई.

“और कभी कुछ भी हो जाए, तुम ये अलमारी का छेद कभी बंद नहीं करोगी.” मैंने एक और शर्त राखी.

“अगर तुम मुझे बिना बताये अपने दोस्तों को यहाँ लाये तो कभी नहीं..”

” wow , क्या सच में ” मुझे तो अपने कानो पर विश्वास ही नहीं हुआ.

“तो क्या तुम अभी मेरे सामने हस्मेथुन करोगे..” उसने फिर से पूछा.

“हाँ”

“तो ठीक है “स्टार्ट now …..”

मैंने शर्माते हुए अपनी जींस उतारी और अपना boxer भी उतार कर साइड में रख दिया, और अपने लंड को अपने हाथ में लेकर मन ही मन में बोला , चल बेटा तेरे कारनामे दिखाने का टाइम हो गया..धीरे -२ उसने विकराल रूप ले लिया और मैं उसे आगे पीछे करने लगा.

मैंने ऋतू की तरफ देखा तो वो आश्चर्य से मुझे मुठ मारते हुए देख रही थी,उसकी आँखों में एक ख़ास चमक आ रही थी.

मैं अपने हाथ तेजी से अपने लंड पर चलने लगा, ऋतू भी धीरे-२ मेरे सामने आ कर बैठ गयी, उसका चेहरा मेरे लंड से सिर्फ एक फूट की दुरी पर रह गया, उसके गाल बिलकुल लाल हो चुके थे, उसके गुलाबी लरजते होंठ देखकर मेरा बुरा हाल हो गया, वो उनपर जीभ फेरा रही थी और उसकी लाल जीभ अपने गीलेपन से उसके लबों को गीला कर रही थी. मेरा लंड ये सब देखकर १ मिनट के अन्दर ही अपनी चरम सीमा तक पहुँच गया और उसमे से मेरे वीर्य की पिचकारी निकल कर ऋतू के माथे से टकराई, वो हडबडा कर पीछे हुई तो दूसरी धार सीधे उसके खुले हुए मुंह में जा गिरी और पीछे होते होते तीसरी और चोथी उसकी ठोड़ी और गले पर जा लगी.

“wow …मुझे इसका बिलकुल भी अंदाज़ा नहीं था..” ऋतू ने चुप्पी तोड़ी.

“मतलब तुमने आज तक ये….मेरा मतलब असली लंड नहीं देखा..” मैंने पूछाउसने ना में गर्दन हिलाई.

“और मुझे इस बात का भी अंदाज़ा नहीं था की ये पिचकारी मारकर अपना रस निकलता है. लेकिन ये रस है बड़ा ही टेस्टी.” ऋतू ने अपने मुंह में आये वीर्य को निगलते हुए चटखारा लिया..

“क्या इसका स्वाद तुम्हारे रस से अलग है..” मैंने पूछा. “मैंने भी तुम्हे डिल्डो को अपनी योनी में डालने के बाद चाटते हुए देखा है”

“हाँ..थोडा बहुत,,तुम्हारा थोडा नमकीन है..पर मुझे अच्छा लगा.”

“मेरा इतना गाड़ा नहीं है पर थोडा खट्टा-मीठा स्वाद आता है…..क्या तुम टेस्ट करना चाहोगे.” ऋतू ने मुझसे पूछा.

“हाँ….बिलकुल…क्यों नहीं..पर कैसे.”

वो मुस्कुराती हुई धीरे धीरे अपने बेड तक गयी और अपना डिल्डो निकला,उसको मुंह में डाला और मेरी तरफ हिला कर फिर से पूछा…”क्या तुम मेरा रस चखना चाहोगे..”

मैंने हाँ में अपनी गर्दन हिलाई..

उसको डिल्डो चूसते देखकर मेरे मुरझाये हुए लंड ने एक चटका मारा..जो ऋतू की नजरों से नहीं बच सका..

फिर उसने अहिस्ता से अपनी जींस के बटन खोले और उसको उतार दिया, हमेशा की तरह उसने अंडर वेअर नहीं पहना हुआ था, उसकी चूत मेरी आँखों के सामने थी, मैंने पहली बार इतनी पास से उसकी चूत देखि, उसमें से रस की एक धार बह कर उसकी जींस को गीला कर चुकी थी, वो काफी उत्तेजित थी.

फिर वो अपनी टाँगे चोडी करके बेड के किनारे पर बैठ गयी, और वो डिल्डो अपनी चूत में दाल कर अंदर बाहर करने लगी..मैं ये सब देखकर हैरान रह गया, वो आँखे बंद किये, मेरे सामने, २ फीट की दुरी से अपनी चूत में डिल्डो डाल रही थी.जब वो डिल्डो उसके अन्दर जाता तो उसकी चूत के गुलाबी होंठ अन्दर की तरफ मुद जाते और बाहर निकालते ही उसकी चूत के अन्दर की बनावट मुझे साफ़ दिखा जाते. मैं तो उसके अंदर के गुलाबीपन को देखकर और रस से भीगे डिल्डो को अन्दर बाहर जाते देखकर पागल ही हो गया. मैं मुंह फाड़े उसके सामने बैठा था. उसने अपनी स्पीड बड़ा दी और आखिर में वो भी जल्दी ही झड़ने लगी, फिर उसने अपनी आँखे खोली, मेरी तरफ मुस्कुराते हुए देखा और अपनी चूत में से भीगा हुआ डिल्डो मेरे सामने करके बोली…”लो चाटो इसे …घबराओ मत..तुम्हे अच्छा लगेगा…चाटो..”

मैंने कांपते हाथों से उससे डिल्डो लिया और उसके सिरे को अपनी जीभ से छुआ, मुझे उसका स्वाद थोडा अजीब लगा,पर फिर एक दो बार चाटने के बाद वोही स्वाद काफी मादक लगने लगा और मैं उसे चाट चाटकर साफ़ करने लगा..ये देखकर ऋतू मुस्कुराई और बोली..”कैसा लगा.” ?

“इट्स रेअल्ली टेस्टी ” मैंने कहा.

ऋतू ने डिल्डो मेरे हाथ से लेकर वापिस अपनी चूत में डाला और खुद ही चूसने लगी..और बोली “मज़ा आया”.

“हाँ”

“मुझे भी मज़ा आता है अपने रस को चाटने मैं, कई बार तो मैं सोचती हूँ की काश मैं अपनी चूत को खुद ही चाट सकती..”

“क्या तुमने कभी अपना रस चखा है..”उसने मुझसे पूछा..

“नहीं …क्यों..”

“ऐसे ही…एक बार ट्राई करना”

“आज रात सब के सोने के बाद तुम मेरे लिए एक बार फिर से मुठ मारोगे और अपना रस भी चाट कर देखोगे..” ऋतू बोली.

“मैं अपना वीर्य चाटूं ???पर क्यों.” मैंने पूछा.

“क्योंकि मैं चाहती हूँ, और अगर तुमने ये किया तभी मैं तुम्हे अपना जवाब दूंगी.” ऋतू ने अपना फैसला सुनाया.

ठीक है… मैंने कहा.

ऋतू : “अब तुम जल्दी से यहाँ से जाओ, मुझे अपना होमेवोर्क भी पूरा करना है.”

मैंने जल्दी से अपना underwear और जींस पहनी, लेकिन मेरे खड़े हुए लंड को अन्दर डालने में जब मुझे परेशानी हो रही थी तो वो खिलखिलाकर हंस रही थी, और उसके हाथ में वो काला डिल्डो लहरा रहा था. मैं जल्दी से वहां से निकल कर अपने रूम में आ गया.

अपने रूम में आने के बाद मैंने छेद से देखा तो ऋतू भी अपनी जींस पहेन कर पढाई कर रही थी.

रात को सबके सोने के बाद मैंने देखा की उसके रूम की लाइट बंद हो चुकी है, थोड़ी ही देर मैं मैंने अपने दरवाजे पर हलकी दस्तक सुनी, मैंने वो पहले से ही खुला छोड़ दिया था, ऋतू दरवाजा खोलकर अन्दर आ गयी.उसने nightgown पहन रखा था.

“चलो शुरू हो जाओ ” वो अन्दर आते ही बिना किसी भूमिका के बोली.

मैं चुपचाप उठा और अपना पायजामा उतार कर खड़ा हो गया, अपने लंड के ऊपर हाथ रखकर आगे पीछे करने लगा, वो मंत्र्मुघ्ध सी मुझे मुठ मारते हुए देख रही थी, इस बार वो और ज्यादा करीब से देख रही थी, उसके होठों से निकलती हुई गर्म हवा मेरे लंड तक आ रही थी..मैं जल्दी ही झड़ने के करीब पहुँच गया,

तभी ऋतू बोली “अपना वीर्य अपने हाथ में इक्कठा करो.”

मैंने ऐसा ही किया, मेरे लंड के पिचकारी मारते ही मैंने अपनी मुठ से अपने लंड का मुंह बंद कर दिया और सारा माल मेरी हथेली में जमा हो गया.

“वाह …मजा आ गया, तुम्हे मुठ मरते देखकर सच में मुझे अच्छा लगा…अब तुम इस रस को चख कर देखो” ऋतू बोली.

मैंने झिझकते हुए अपने हाथ में लगे वीर्य को अपनी जीभ से चखा.

ऋतू ने पुचा “कैसा लगा” ?

“तुम्हारे रस से थोडा अलग है” मैंने जवाब दिया.

ऋतू : “कैसे “?

मैं : “शायद इसमें मादकता कम है”.

वो मुस्कुराई.

ऋतू : “चलो मुझे भी चखाओ “

मैं : “ये लो”

और मैंने अपना हाथ ऋतू की तरफ बड़ा दिया, वो अपनी गरम जीभ से धीरे धीरे उसे चाटने लगी फिर अचानक सड़प-२ कर वो मेरा पूरा हाथ साफ़ करने के बाद बोली…यम्मी ..मुझे तुम्हारा रस बहुत स्वाद लगा. और काफी मीठा भी. क्या तुम मेरे रस के साथ अपने रस को compare करना चाहोगे.

मैं : “हाँ हाँ …क्यों नहीं”

फिर वो थोडा पीछे हठी और अपना gown आगे से खोल दिया..मैं देख कर हैरान रह गया, वो अन्दर से पूरी तरह नंगी थी.

उसकी ३४ब साइज़ की सफ़ेद रंग की चूचियां तन कर खड़ी थी, और उन स्तनों की शोभा बढ़ाते दो छोटे-२ निप्पल्स किसी हीरे की तरह चमक रहे थे.

फिर उसने अपने हाथ अपनी जांघो के बीच में डाला और अपनी चूत में से वो काला डिल्डो निकाला , वो पूरी तरह से गीला था, उसका रस डिल्डो से बहता हुआ ऋतू की उँगलियों तक जा रहा था,

मैंने उसके हाथ से डिल्डो लिया और उसको चाटने लगा, गर्म और ताज़ा,मैं जल्द ही उसे पूरी तरह से चाट गया, वो ये देखकर खुश हो गई.

मैं : ” मुझे भी तुम्हारा रस अच्छा लगा”हटा तो उसकी आँखों में मेरे लिए एक अलग ही भाव था. मैंने कहा “मुझे तो तुम्हारी चूत का रस काफी अच्छा लगता है, काफी मीठा है, मुझे तो अब इसकी आदत ही हो गयी है…”

वो उठी और बोली “लाओ अब मैं तुम्हारा लंड चूस देती हूँ…”

“नेकी और पूछ पूछ..” मैं तेजी से उठा और अपना पायजामा jocky समेत उतार दिया और बेड के किनारे पर लेट गया.

वो मेरे सामने बैठी और बोली “मेरे पास डिल्डो सिर्फ एक वजह से है क्योंकि मेरे पास ये चीज असली में नहीं हैं..” उसने मेरे लंड को अपने हाथों में लिया और मसलने लगी.. नरम हाथों में आते ही मेरा पप्पू अपनी औकात पर आ गया और फूल कर कुप्पा हो गया.

“ये कितना नरम और गरम है” ऋतू बोली.

फिर उसने मेरे लंड को ऊपर नीचे करना शुरू कर दिया..जल्दी ही मेरे लंड के सिरे पर precum की बूँद चमकने लगी, वो थोडा झुकी और अपनी गुलाबी जीभ निकाल कर उसे चाट गयी और फिर धीरे धीरे अपनी जीभ मेरे लंड के सुपदे पर फिरने लगी, मैं कोहनियों के बल बैठा आँखे फाड़े ये सब देख रहा था, फिर ऋतू ने अपने होंठ खोले और मेरे लंड को अपने मुंह में दाल लिया…वो तब तक नहीं रुकी जब तक मेरा सात इंच का लंड उसके गले से नहीं टकरा गया. फिर उसने अपने लब बंद कर लिए और अन्दर ही अन्दर अपनी जीभ मेरे लंड के चारो तरफ फिराने लगी.

मेरा तो बुरा हाल हो गया, उसके मुंह के अन्दर जाते ही वो कुछ ज्यादा ही मोटा और बड़ा हो गया था, मैं अपने लंड की नसें चमकते हुए देख सकता था. फिर उसने धीरे-२ लंड को बाहर निकला और बोली…ये तो टेस्टी भी है,,,और ये कहकर दुगने जोश के साथ उसको फिर मुंह में लेकर चूसने लगी. वो अपने एक हाथ से मेरी बाल्स को भी मसल रही थी, मैं जल्दी ही झड़ने के कगार पर पहुँच गया और जोर -२ से साँसे लेने लगा, वो समझ गयी और जोर से चूसने लगी, तभी मेरे लंड ने पिचकारी मार दी जो सीधे उसके गले के अन्दर टकराई, वो रुकी नहीं और हर पिचकारी को अपने पेट में समाती चली गयी, और अंत में जब कुछ नहीं बचा तभी उसने मेरा लंड छोड़ा..”वओ …मजा आ गया…लंड चूसने में तो मजा है ही…रस पीने का मजा भी अलग ही है.”

“ईट फील unbelievable ” मैंने उखड़ी सांसो से कहा.

“वेल… गुड night ” वो बोली और उठते हुए मेरे लंड पर एक kiss करदी.

“गुड night “

फिर वो अपना gown पहन कर चुपके से अपने रूम मैं चली गयी और मैं कल के बारे में सोचकर रंगीन सपने बुनने लगा.

अगले दिन ऋतू को स्कूल छोड़कर जब मैं collage गया तो मेरा मन पढाई में नहीं लगा, सारा दिन मैं होने वाली रात के बारे में सोचता रहा, जब सन्नी और विकास ने भी मुझसे बात करने की कोशिश की तो उन्हें भी मैंने कहा बाद में बात करेंगे, वो दरअसल अगले “शो” के बारे मैं जानना चाहते थे. शाम को जब मैं घर पहुंचा तो मुझे ऋतू का इन्तजार था, थोड़ी देर में ही दरवाजे की बेल बजी और मैं भागकर गया, दरवाजा खोला तो ऋतू अपनी सहेली पूजा के साथ खड़ी थी, मुझे देखते ही ऋतू ने मुझे आँख मारी और बोली “भाई दरवाजे पे ही खड़े रहोगे या हमें अन्दर भी आने दोगे.” और ये कहकर वो पूजा की तरफ देखकर जोर से खिखिअकर हंस दी. मैं साइड हो गया, पूजा ने अन्दर जाते हुए मुझे मुस्कुराके धीरे से hi बोला, मैं तो उसकी white शर्ट में फंसी हुई चूचियां ही देखता रह गया, जो शर्ट फाड़कर बाहर आने को तैयार थी, मैंने मन में सोचा ये लडकियां इतना भार अपने सीने पर संभालती कैसे हैं?.

अन्दर जाकर दोनों ने change किया ,डिन्नर के टाइम में दोनों स्कूल, बोयस, movies और आने वाली छुट्टियों के बारे में ही बातें करते रहे, फिर दोनों अपने रूम में चले गए, मैंने जल्दी से जाकर छेद से देखा तो दोनों बेड पर बैठकर पढाई कर रहे थे, मैं वापिस आकर लेट गया…उसके बाद कई बार चेक किया पर हर बार उन्हें पड़ते हुए ही पाया.

१ घंटे बाद मम्मी पापा ने सबको गुड night बोला और अपने कमरे में सोने चले गए, मैंने फिर से छेद में देखा टी पाया की दोनों अपनी कीताबें समेत रही हैं, फिर थोड़ी देर बैठकर बातें करने के बाद ऋतू ने धीरे से अपना gown खोल दिया …लेकिन आज उसने अन्दर ब्रा और पेंटी पहन रखी थी, फिर पूजा ने भी अपनी टी शर्ट और केप्री उतार दी, उसने अन्दर ब्लैक कलर का सेट पहन रखा था. फिर दोनों ने बारी बारी से बाकी बचे कपडे भी उतार दिए, मेरी नजर अब सिर्फ पूजा पर ही थी, क्या ग़जब के चुचे थे यार..एकदम गोल-२ और तने हुए ऐसा लग रहा था जैसे कोई ताकत उन्हें ऊपर खींच रही है, और वो तन कर खड़े हुए हैं,उसके निप्पलस डार्क ब्लैक कलर के थे और एरोहोले काफी बड़े और फैले हुए थे, पेट एकदम सपाट, नाभि अन्दर की और घुसी हुई ,चूत पर हलके – २ काले रंग के बाल थे, मोती टाँगे और कासी हुई पिंडलियाँ, वो पलटी तो उसकी गांड देखकर ऐसा लगा की कोई गद्दा फिट किया हुआ हाई साली ने अपनी गांड में….मैंने एक मिनट में ही उसकी बॉडी का xray कर डाला, मेरा पप्पू अपने फुल मूड में आ चूका था.

ऋतू ने बेड के नीचे से अपना काला डिल्डो निकाला और मुंह में चूस कर पूजा को दिखाया, फिर दोनों हंसने लगी, ऋतू बेड पर लेट गयी और अपनी उँगलियों से अपनी चूत मसलने लगी, फिर पूजा लेटी और वो भी अपनी उंगलियाँ अपनी चूत में डालकर आँखें बंद करके मजे लेने लगी, उसकी चूत के अन्दर की बनावट मुझे साफ़ नजर आ रही थी, वो भी एकदम गुलाबी रंग की थी, थोड़ी फूली हुई, लेटने से उसकी गांड का छेद भी दिखाई दे रहा था, भूरा और एकदम tight

दोनों सिस्कारियां ले लेकर अपनी उंगलियाँ अपनी चूत में डाल रही थी.

फिर ऋतू ने डिल्डो उठाया और अपनी चूत में डालकर तेजी से अन्दर बाहर करने लगी, पूजा अभी भी अपनी उँगलियों से मजे ले रही थी, थोड़ी देर बाद ऋतू ने अपने रस से भीगा हुआ डिल्डो पूजा की चूत में लगाया, उसने आँखे खोली और साँसे रोककर ऋतू की तरफ देखा, ऋतू आगे बड़ी और अपने होंठ पूजा के खुले हुए लबों पर रख दिए, दोनों एकदम गीले थे, फिर ऋतू ने एक ही झटके में पूरा डिल्डो पूजा की नाजुक चूत में उतार दिया, उसकी आँखें बाहर की और निकल आई और वो छत्पटाने लगी, पर ऋतू ने उसके होंठ जकड़े हुए थे तो उसकी सिर्फ गूऊऊओ.गूऊऊऊऊ की आवाज ही सुनाई दी.मैंने अपना लंड बाहर निकाला और जोर जोर से मुठ मारने लगा.

फिर ऋतू ने उसके होंठ छोड़ दिए, वो एकदम लाल हो चुके थे, उसके खुले मुंह से एक लार निकल कर उसके चुचे पर गिर गयी, ऋतू थोडा झुकी और पूजा की लार के साथ साथ उसके चुचे भी चाटने लगी, बड़ा ही कामुक द्रश्य था, पूजा अपने निप्पलस पर हुए इस हमले से मचलने लगी, उसके निप्पलस एकदम सख्त हो चुके थे, और लगभग एक इंच बाहर नजर आ रहे थे.

फिर ऋतू ने अपना पूरा ध्यान पूजा की चूत में लगा दिया, वो तेजी से डिल्डो अन्दर बाहर करने लगी, थोड़ी ही देर में एक आनंदमयी सीत्कार के साथ पूजा झड़ने लगी, उसका शरीर कांपते हुए चूत के जरिये अपना अनमोल रस छोड़ने लगा.

पूजा ने ऋतू का हाथ पकड़कर उसे रोक दिया, डिल्डो अभी भी पूजा की चूत में धंसा हुआ था, और पूजा का रस चूत में से रिस रहा था, ऋतू ने उसे निकाला और उसपर लिपटा हुआ जूस लपलपाकर चाटने लगी, फिर वोही डिल्डो अपनी चूत में डालकर पूजा के मुंह के आगे कर दिया, वो भी उसे चाटने लगी, तब तक ऋतू बेड पर उसी pose में लेट गयी, अब पूजा ने धीरे -२ पूरा डिल्डो ऋतू की चूत में उतार दिया, वो भी उसके मजे लेने लगी, वो पहले से ही उत्तेजित थी तो झड़ने में ज्यादा वक़्त नहीं लगा, झड़ते ही उसने झटके से पूजा की गर्दन पकड़ी और एक गहरा चुम्बन उसके होंठो पर जड़ दिया. पूजा ने डिल्डो निकाल कर उसे चाटना शुरू कर दिया, रस ख़तम होने के बाद फिर से उसने चूत में डिल्डो डुबाया और चाटने लगी, जैसे चटनी के साथ समोसा खा रही हो.

थोड़ी देर बातें करने के बाद दोनों बेड पर लेट गयी और एक दुसरे की चूत पर हाथ रखकर उसे मसलने लगी, दोनों की आँखें बंद थी, फिर ऋतू धीरे से उठी और सीधे पूजा की चूत पर अपना मुंह लगा दिया, उसने पूजा की दोनों जांघे पकड़ रखी थी पूजा ने ऋतू के बालों में अपनी उंगलियाँ फंसा दी और बेड पर जल बिन मछली की तरह तड़पने लगी, ऋतू उसकी चूत नीचे से ऊपर तक चाट रही थी, और फिर अपनी जीभ से उसकी चूत कुरेदने लगी, पूजा अपने कुल्हे हवा में उठा कर सिसकारी ले रही थी,

आआआआआअ.रीईईईइतूऊऊऊउ मैं माआआआआआर गैईईईईईईईई …..

आआआआआआआआआआह्ह्ह ……जूऊऊऊऊऊऊर्र्र्र सीईईईईईईईईई ……अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह
!!!!!!!!!!!!!!!!हाआआआआन हाआआआआआन चाआआतो मेरीईईईइ चूऊऊऊऊओत … आआआआआह.

और फिर वो झड़ने लगी.

ऋतू ने सारा रस ऐसे पिया जैसे coke पी रही हो, और फिर वो खड़ी हो गयी, उसका पूरा चेहरा भीगा हुआ था.

पूजा का चेहरा एकदम लाल सुर्ख हो गया था, आँखें नशे में डूबी हुई लग रही थी, और वो होले से मुस्कुरा रही थी.

फिर उसने ऋतू को धक्का देकर बेड पर लिटाया,

पूजा अब ऋतू के सामने आकर लेट जाती है, उसकी पाव रोटी जैसी फूली हुई चूत देखकर उसके मुंह में पानी आ जाता है, वो थोडा झुकती है और चूत के चारो तरफ अपनी जीभ फिराने लगती है, पर ऋतू की वासना की आग इतनी भड़की हुई थी की वो उसका मुंह पकड़ कर सीधे अपनी चूत पर लगा देती है, पूजा भी समझ जाती है और अपनी जीभ ऋतू की चूत में दाल कर उसे चूसने लगती है, ऋतू के मुंह से आआआआअह आआआआआह की आवाजें निकलने लगती है, उसका एक हाथ पूजा के सर के ऊपर और दूसरा अपनी चुचियों को मसलने में लग जाता है, वो अपने निप्पलस को बुरी तरह से मसल रही थी जिसकी वजह से वो पिंक color से रेड color में बदल गए थे…वो तेजी से अपने चर्मोकर्ष पर पहुँचने वाली थी……आआआआआआआआह …..mmmmmmmmmmmm.. माआआआआआआआर दाआआआआआआआअलाआआआआ ……….

और तेज……
और तेज……हाँ चाआआआअत मेरीईईई चूऊऊऊऊऊउत ……

हाआआआआआआआआआआआअ.

और वो तेजी से झड़ने लगती है.

पूजा को काफी रस पीने को मिला. मेरे मुंह में भी पानी आने लगा…और लंड में भी….मैं जल्दी से अपने लंड को झटके देने लगा और आखिर मैंने भी ४-५ लम्बी धार अपनी अलमारी के अन्दर मार दी.

फिर थोड़ी देर माद दोनों नंगी ही चादर के अन्दर घुस गयी और अपनी लाइट बंद कर दी.

मैं थोड़ी देर वहीँ खड़ा रहा पर जब लगा की अब कुछ और नहीं होगा तो अपने बेड पर आकर लेट गया.

अगले दिन सुबह दोनों को breakfast table पर देखकर ऐसा नहीं लगा की दोनों इस तरह की है, दोनों ने नाश्ता किया और स्कूल चली गयी मैं भी collage गया और सारा दिन दोनों के बारे में सोचता रहा, शाम को घर पहुंचकर ऋतू का इंतज़ार करने लगा,

वो स्कूल से आते ही सीधे मेरे रूम में घुसी और मुझसे लिपट गयी…

और मुझसे पुछा…”तुमने देखा…कैसा लगा…मजा आया के नहीं…बोलो न.”

“अरे हाँ, मैंने देखा, और बहुत मजा आया”

“हाइ… मैं तुम्हे क्या बताऊँ, पूजा की चूत का रस इतना मीठा था के मजा आ गया..” और मेरे लंड पर हाथ रखकर बोली “पर इसका कोई मुकाबला नहीं हा हा ..”“क्या तुम्हे देखने में अच्छा लगा” उसने आगे पूछा.“हाँ, मेरा मन तो कर रहा था की काश मैं तुम्हारे रूम में होता, तुम्हारे साथ.”“कोन जाने , शायद एक दिन तुम भी वहां पर हो, हम दोनों के साथ” उसने एक रहस्यमयी मुस्कान के साथ कहा.“तो क्या मैं सन्नी और विकास को बुला लूं तुम दोनों का शो देखने के लिए, तुम्हे कोई आपत्ति तो नहीं है न ?”ऋतू : “तुम कितना चार्ज करोगे उनसे”मैं : “१००० एक बन्दे से, यानी टोटल दो हजार रूपए पर शो”ऋतू : ” पर अब हम दो लोग हैं, क्या तुम्हे नहीं लगता की तुम्हे ज्यादा चार्ज करना चाहिए”

मैं : “हाँ, बात तो सही है, कितने बोलू उनको…पंद्रह सो ठीक है क्या..?”ऋतू :”हाँ १५०० ठीक हैं..”मैं : “तो ठीक है, अगला शो कब का रखे, पूजा कब आ सकती है दुबारा तुम्हारे साथ रात को रुकने के लिए ?”ऋतू :”उसको जो मजे कल रात मिले है, मैं शर्त लगा कर कह सकती हूँ, वो रोज रात मेरे साथ बिताने के लिए तैयार होगी..” और वो हंसने लगी.ऋतू :”मुझे भी एक आईडिया आया है, जिससे हम और ज्यादा पैसे कम सकते हैं”मैं :” कैसे”

ऋतू :”अगर मैं भी अपनी friends को अपने रूम में बुलाकर तुम्हे मुठ मारते हुए दिखाऊं तो….. “मैं :”मुझे मुठ मारते हुए…इसमें कौन रूचि लेगा..”ऋतू :”जैसे तुम लड़के, लड़कियों को नंगा देखने के लिए मचलते रहते हो, वैसे ही हम लड़कियां भी लडको के लंड के बारे में सोचती हैं और उत्तेजित होती हैं , अगर कोई लड़की तुम्हे मुठ मारते हुए देखे तो इसमें तुम्हे क्या आपत्ति है ?”मैं :” लेकिन ये तुम करोगी कैसे”ऋतू :” मैं कल पूजा को अपने साथ लेकर ४ बजे घर आउंगी, तुम ३:३० पर ही आ जाते हो, तुम ठीक ४:०० बजे मुठ मारनी चालू कर देना, मैं उसको बोलूंगी की मेरा भाई रोज ४:०० बजे अपने रूम में मुठ मारता है, और मैं इस छेद से रोज उसको देखती हूँ, मुझे विश्वास है की वो भी तुम्हे देखने की जिद करेगी तब मैं उससे पैसो के बारे में बात करके तुम्हे मुठ मारते हुए दिखा दूँगी….क्यों कैसी रही??”

मैं :” वाह मैं तो तुम्हारी अक्ल का कायल हो गया…तुम तो मुझसे भी दो कदम आगे हो”ऋतू : “आखिर बहन किसकी हूँ हा हा …”मैं : “और तुम उससे कितना चार्ज करोगी?”ऋतू : “वोही…एक हजार रूपए, ठीक है ना ..”

मैं : “ठीक है…”

ऋतू : “और फिर रात को सन्नी और विकास भी आ सकते हैं और वो दोनों, हम दोनों को देखने के ३००० हजार रूपए अलग से तुम्हे देंगे…तो हम एक दिन में चार हजार रूपए कमा सकते हैं”

मैं तो अपने दिमाग में calculate करना शरू किया की ४००० एक दिन के, हफ्ते में ३ बार, अगर लड़के या लडकियां बढती हैं तो ज्यादा भी हो सकते है, और इस तरह से १ महीने में कितना हुआ….शायद calculator की मदद लेनी होगी..”

ऋतू : “अरे क्या सोचने लगे”

मैं :”कुछ नहीं…कुछ नहीं”

ऋतू :”वैसे एक बात बताऊँ, मुझे काफी exitement हो रही थी की तुम मुझे छेद से वो सब करते हुए देख रहे हो, काफी मजा आ रहा था “

मैं : “मुझे भी काफी मजा आ रहा था, मेरा लंड तो अभी भी कल की बातें सोचकर खड़ा हुआ है”

ऋतू : “अगर तुम चाहो तो मैं तुम्हारा लंड चूस सकती हूँ”

मैं : “अभी….मम्मी पापा आने वाले हैं, तुम मरवाओगी “

ऋतू : “अरे इसमें ज्यादा वक्त नहीं लगेगा…please …अपना लंड निकालो न..जल्दी”

मैंने जल्दी से अपनी पैंट नीचे उतारी और ऋतू झट से मेरे सामने घुटनों के बल बैठ गयी, मेरा underwear एक झटके में नीचे करके मेरे फड़कते हुए लंड को अपने नरम हाथों में लेकर ऊपर नीचे किया और फिर उसे चूसने लग गई, उसकी बेकरारी और मेरी उत्तेजना लायी और सिर्फ एक मिनट में ही मैंने एक के बाद एक कई पिचकारी उसके मुंह में उतार डाली.

वो उठी और अपना मुंह साफ़ करी हुई बोली “मुझे तो तुम्हारा वीर्य ने अपना दीवाना ही बना दिया है..और फिर मेरे लंड को पकड़ कर मेरे चेहरे पर अपनी गरम साँसे छोडती हुई बोली “आगे से तुम इसे कभी व्यर्थ नहीं करोगी…समझे न.”

मैंने हाँ में गर्दन हिलाई.

मैं : “अगर तुम चाहो तो बाद मैं मैं भी तुम्हारी चूत चूस सकता हूँ ” मैंने धीरे से कहा.

ऋतू : “तुमने तो मेरे दिल की बात छीन ली…मैं रात होने का इन्तजार करुँगी.”

मैं : “मैं भी रात होने का इन्तजार करूँगा …बाय”

ऋतू : “बाई”

रात को खाना खाने के बाद सब अपने-अपने रूम में चले गए, मैं अपने बेड पर लेटा हुआ सोच रहा था की पिछले कुछ दिनों में, मैं और ऋतू एक दुसरे से कितना खुल गए हैं, लंड-चूत की बातें करते हैं,मुठ मारना एक दुसरे को नंगा देखना और छुना कितना आसान हो गया है. मैं अपनी इस लाइफ से बड़ा खुश था.

मैंने अपना लंड बाहर निकाला और उसे मसलना शुरू कर दिया, मुझे ऋतू का इन्तजार था, मुझे ज्यादा इन्तजार नहीं करना पड़ा, करीब पंद्रह मिनट में ही वो धीरे से मेरे कमरे का दरवाजा खोल कर अन्दर आ गयी और मुझे अपना लंड हिलाते हुए देखकर चहक कर बोली.

“वाह, तुम तो पहले से ही तैयार हो, लाओ मैं तुम्हारी मदद कर देती हूँ”

मैं : “पर मैंने कहा था की मैं तुम्हारी चूत चुसना चाहता हूँ..!”

ऋतू :”कोई बात नहीं, तुम मेरी चूत चुसो और मैं तुम्हारा लंड, हम 69 की position ले लेते हैं.”

मुझे ये आईडिया पसंद आया.

ऋतू ने जल्दी से अपना gown खोला, हमेशा की तरह आज भी वो अन्दर से पूरी तरह से नंगी थी, उसके भरे हुए मुम्मे और तने हुए निप्पल्स देखकर मेरे लंड ने एक-दो झटके मारे, और मैंने नोट किया की आज उसकी चूत एकदम साफ़ थी, चिकनी.

शायद उसने आज अपनी चूत के बाल साफ़ किये थे… मेरे तो मुंह में पानी आ गया.

वो झुकी और अपने गीले मुंह में मेरा लंड ले लिया और अपनी टाँगे उठा कर घुमाते हुए, जैसे कोई घोड़े पर चढ़ रहा हो, बेड पर फैलाई और उसकी चूत सीधे मेरे खुले हुए मुंह पर फिक्स हो गयी, उसके मुंह में मेरा लंड था पर फिर भी उसके मुंह से एक लम्बी सिसकारी निकल गयी, उसकी चूत जल रही थी, एकदम गरम, लाल, गीली, रस छोडती हुई…मैं तो अपने काम में लग गया, उसकी चूत के लिप्स को अपनी उँगलियों से पकड़ के मैंने अन्दर की बनावट देखि, उबड़ खाबड़ पहाड़ियां नजर आई, और उन पहाड़ियों से बहता हुआ उसका जल…मैंने अपनी लम्बी जीभ निकाली और पहाड़ियां साफ़ करने में लग गया, पर जैसे ही साफ़ करता और पानी आ जाता…मैं लगा रहा…लगा रहा..साथ ही साथ मैं अपनी एक ऊँगली से उसकी clit भी रगड़ रहा था.

मेरे लंड का भी बुरा हाल था वो उसको आज ऐसे चूस रही थी जैसे कुल्फी हो..अन्दर तक ले जाती जीभ से चारों तरफ circle बनाती और फिर बाहर निकालते हुए हलके से दांतों का भी इस्तेमाल करती..वो लंड चूसने में परफेक्ट हो चुकी थी.

मैंने अब उसकी चूत के मुंह पर अपने दोनों होंठ लगा दिए, और बिना जीभ का इस्तेमाल किये बिना चुसना शुरू कर दिया, किसी vaccum cleaner की तरह suck करने लगा, वो तो बिफर ही गयी मेरे इस हमले से और उसकी चूत में से ढेर सारा रस निकलने लगा और वो झड़ने लगी…मैं भी अब कगार पर था, मेरे लंड ने भी विराट रूप ले लिया और पूजा ने जैसे ही मेरी बाल्स को अपने हाथ में लेकर मसलना शुरू किया, मैं झड गया और वो मेरा पूरा माल हड़प कर गयी..

फिर हम दोनों उठे और एक दुसरे की तरफ देखा, दो के चेहरे गीले थे हम ये देखकर हंसने लगे.

ऋतू :”तुमने तो मुझे अपने juice की लत्त लगा दी है..कितना मजा आता है तुम्हारा लंड चूसने में और तुम्हारा वीर्य पीने में.”

मैं : “मैं भी तुम्हारे मीठे रस का आदि हो चूका हूँ, जी करता है सारा दिन तुम्हारी चूत चूसता रहूँ.”

मेरा लंड अभी भी खड़ा हुआ था, वो मेरे साथ लेट गयी, उसके मोटे-२ चुचे मेरे सीने से लगकर दब गए, उसने एक हाथ से मेरा लंड पकड़ा और उसे ऊपर नीचे करने लगी, मैंने अपनी आँखे बंद करली और मजे लेने लगा.उसकी गरम साँसे मेरे कानो पर पड़ रही थी.उसकी एक टांग मेरे ऊपर थी और वो उसको रगड़ रही थी जिससे ऋतू की गीली चूत मेरी जांघ से रगड़ खा रही थी.

ऋतू : “wow , तुम्हारा तो अभी भी खड़ा हुआ है…मेरी चूत के अन्दर भी कुछ कुछ हो रहा है…”