मेरी प्यासी आंटी की चूत चोदी

मेरा नाम वेद है, मैं २३ साल का हूँ और रांची में रहता हूँ Antarvasna Kamukta Indian Sex Hindi Sex Stories Chudai मेरी ६.३ फुट की लम्बाई है और देखने में ठीक-ठाक लगता हूँ। हाँ.. जिम करता हूँ इसलिए मेरा जिस्म काफ़ी भरा-पूरा दिखती है। मैं एक सम्मिलित परिवार में रहता हूँ। यह कहानी मेरे आंटी के बारे में है। यह घटना आज से दो साल पहले की है जब मैं अपने कॉलेज के पहले साल में था।
मैं गर्मी की छुट्टियों में गाँव गया हुआ था और वहाँ मैं पूरे परिवार के साथ आया हुआ था। मेरी आंटी भी हम सबके साथ आई थीं जिनके बारे में यह कहानी है।
वैसे तो मेरी आंटी अपने बच्चों की पढ़ाई की खातिर शहर में रहती हैं। लेकिन उस समय सभी की गर्मी की छुट्टी चल रही थीं तो वो लोग भी गाँव आए हुए थे।
आंटी की शादी को करीब दस साल हो गए हैं और उनके दो बच्चे भी हैं, लेकिन चूँकि उनकी शादी बहुत कम उम्र में हुई थी, इसलिए अभी भी वो मेरे चाचा जी के मुकाबले काफी जवान हैं।उनकी शादी 16 साल में ही कर दी गई थी इसलिए अभी उनकी उम्र 26 साल थी। जब उनकी शादी हुई, उस समय मैं बहुत छोटा था तो मुझे आंटी के लिए कुछ ख़ास फीलिंग नहीं थी, लेकिन जैसे-जैसे मैं जवान होता गया, वो मुझे अच्छी लगने लगीं, मेरे दिल में उनके लिए कोई ऐसी गलत फीलिंग नहीं थी।
मैं पहले भी शहर उनके यहाँ बहुत बार जा चुका हूँ और हमारी काफ़ी बातें होती रहती हैं।
वो मुझसे बहुत मज़ाक करती हैं और मुझे मेरी शादी को लेकर अक्सर चिढ़ाती भी रहती हैं, तो मैं उन्हें बोलता हूँ कि मैं आपकी तरह नहीं हूँ जो इतनी जल्दी शादी कर लूँ। तो वो बोलती हैं- मेरी तरह जल्दी शादी कर लेते, तो आज जन्नत की मौज में रहते।
हमारे बीच ऐसी बातें होती रहती हैं लेकिन कभी इसके आगे कुछ नहीं हुआ।
मेरी आंटी दिखने में बहुत ही सुंदर हैं, दो बच्चे होने के बाद भी उनका फिगर खराब नहीं हुआ, वो खुद को बहुत सजा-संवार कर रखती हैं।
उनके जिस्म में उनके मम्मे 36 इन्च के कमर 28 की और उनकी चूतड़ 34 इन्च के हैं, वो देखने में बहुत गोरी लगती हैं।
जब भी साड़ी पहन कर कहीं बाहर जाती हैं तो क़यामत लगती हैं।
हाँ, तो अब सीधे कहानी पर आते हैं। बात गर्मी की छुट्टियों की है, जब गाँव में घर के सारे लोग आए हुए थे।
चूँकि वहाँ लाइट बहुत कम ही रहती है और नीचे कमरे में सोने पर गर्मी बहुत ज़्यादा लगती है, तो सब लोग छत पर सोते हैं।
एक रात जब मैं छत पर सोया हुआ था तो रात को मौसम कुछ ज़्यादा ही ठंडा हो गया और मुझे ठंड लगने लगी, उस समय यही कोई दो बज रहे होंगे।
चूँकि मैं रात को चादर लेकर नहीं सोया था इसलिए सोचा कि नीचे चलकर ही सो जाता हूँ इसलिए मैं नीचे कमरे में सोने आ गया।
जैसे ही मैं वहाँ पहुँचा तो देखा कि वहाँ पहले से ही आंटीजी सो रही हैं। तो मैंने सोचा कि लगता है इन्हें भी ऊपर ठंड लगी होगी इसलिए नीचे चली आईं।
उस कमरे में थोड़ी-थोड़ी हवा आती है इसलिए वहाँ सोने में आराम लगता है। आंटी को देखकर मैंने सोचा कि चल कर अपने कमरे में ही सोया जाए, तभी मेरी नज़र आंटी के पैरों पर पड़ी, देखा तो सोने की वजह से उनकी नाइटी ऊपर होकर उनके जांघों तक आ गई थी।
उनकी नाइटी भी अस्त-व्यस्त हो चुकी थी |

जिसके उनके मम्मे भी थोड़े-थोड़े दिखाई दे रहे थे। यह सब देख कर मुझे कुछ-कुछ होने लगा और मुझ पर वासना सवार होने लगी। मैंने बहुत सोचा फिर अंत में वहीं उनके बगल में जाकर सो गया। मैं थोड़ी देर तक ऐसे ही पड़ा रहा जब उनकी तरफ से कोई हलचल नहीं हुई तो मैंने करवट बदली और अपना एक पैर उनके पैरों के ऊपर रख दिया। चूँकि उनकी पीठ मेरी तरफ थी तो मुझे पता नहीं चल पाया कि वो सो रही हैं या जाग रही हैं। जैसे ही मैंने अपना पैर उनके ऊपर रखा वो अचानक से उठीं मेरी तरफ देखा और वहाँ से उठ कर चली गईं। अब तो ये देख कर मेरी हालत खराब होने लगी, मुझे डर लगने लगा कि पता नहीं ये किससे क्या बोल दें, फिर पता नहीं बाकी लोग क्या सोचेंगे। यही सब सोच-सोच कर मेरे पसीने छूटने लगे। मैंने बहुत सोचा फिर सोचा कि चल कर आंटीजी से इन सारी चीज़ों से माफी माँग ली जाए, फिर शायद वो किसी से ना कहें, यही सब सोच कर मैं माफी माँगने के लिए उनके कमरे में चला गया। उधर देखा तो वो अपने बिस्तर पर लेटी हुई थीं, मैंने जाकर जो कुछ भी हुआ उसके लिए उनसे बोला- सॉरी… आप प्लीज़ किसी से कुछ मत कहना नहीं तो मुझे बहुत डाँट पड़ेगी। आप यह कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है | वो मुझे घूर कर देखने लगीं, फिर बोलीं- ठीक है, पर उससे पहले आपको मैं जो पूछूँ वो बताना पड़ेगा। मैंने कहा- ठीक है, जो पूछना है पूछिए।
तो उन्होंने पूछा- अभी आपने ऐसे क्यों किया?
तो मैंने सोचा कि झूठ बोल देता हूँ और बोला- मुझे ठंड लग रही थी इसलिए नीचे सोने आया था और मुझे पता नहीं था कि आप बगल में सो रही हो, इसलिए ग़लती से पैर रख दिया।
तो वो बोलीं- ठीक है, आप मत बताओ मुझे सच बात.. मैं बाकी लोगों को यह बात बता दूँगी।
तो मरता क्या ना करता मैंने बोला- ठीक है मैं सब बताता हूँ।
फिर मैंने बोला- आप बहुत सुंदर हैं और मुझे बहुत अच्छी लगती हैं और जब आज मैं सोने आया और आपको ऐसे देखा तो खुद को रोक नहीं पाया।
यह सुन कर वो थोड़ा मुस्कुराने लगीं, तब मेरी थोड़ी जान में जान आई और मुझे लगा कि अब शायद ये किसी से कुछ नहीं कहेंगी और शायद इनको भी ये सब सुनना अच्छा लग रहा है।
फिर उन्होंने पूछा- मैं आपको अच्छी क्यों लगती हूँ?
तो मैंने फिर से कहा- आप बहुत सुंदर हैं।
तो वो मुस्कुराते हुए बोलीं- क्या सुंदर है मुझमें?
मैं सोचने लगा कि क्या बोलूँ.. तो वो फिर बोलीं- क्या सोचने लग गए… बताना है या मैं सबको जाकर बता दूँ कि आपने क्या किया। आप यह कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है |
तो मैंने डरते-डरते कहा- मुझे आपकी फिगर बहुत अच्छी लगती है।
तो यह सुन कर वो थोड़ा और मुस्कुराने लगीं और अब थोड़ा अंजान बनते हुए हुए पूछा- फिगर मतलब.. उसमें क्या अच्छा लगता है..?
ऐसा क्या है मेरे फिगर में?
तो मैं समझ गया कि इनको भी अपनी तारीफ सुनने में मज़ा आ रहा है।
फिर भी मैंने डरते-डरते कहा- आपके ऊपर में जो है वो।
तो अब उन्होंने शरारत करते हुए पूछा- ऊपर में क्या है?
मैं समझ गया कि इनको भी ये सब सुनने का दिल कर रहा है।
फिर मैंने कहा- आपके मम्मे। वो एकदम से चौंक गईं।

तो मैं समझ गया कि इनको भी अपनी तारीफ सुनने में मज़ा आ रहा है, फिर भी मैंने डरते-डरते कहा- आपके ऊपर में जो है वो!
तो अब उन्होंने शरारत करते हुए पूछा- ऊपर में क्या है?
मैं समझ गया कि इनको भी यh सब सुनने का दिल कर रहा है।
फिर मैंने कहा- आपके मम्मे!
वो एकदम से चौंक गईं।
पर फिर उन्होंने यh सुन कर एक शरारत भरी सी मुस्कान दी और कहा- अच्छा… ऐसा क्या है मेरे मम्मों में?
तो मैंने कहा- उनको देख कर मुझे उसे छूने का दिल करता है। तो उन्होंने पूछा- अभी तक किसी का छुआ है या नहीं?
तो मैंने ‘ना’ में सिर हिला दिया।
तो उन्होंने पूछा- छूना है क्या.. किसी का?
तो मैंने अंजान बनते हुए बोला- किसका?
तो वो नशीले अंदाज में बोलीं- अपनी आंटी का… जो आपको बहुत अच्छी लगती है।
ये सब बोलते वक़्त मैंने देखा कि उनकी आँखें लाल हो गई थीं शायद उनके ऊपर भी काम-वासना हावी हो गई थी।खैर… मुझे क्या, मुझे तो यकीन नहीं हो रहा था कि वो खुद ऐसे बोल रही हैं।
फिर उन्होंने इशारे से मुझे अपने करीब बुलाया और बोला- खुद से छू कर देख लो।
मैंने डरते-डरते हाथ लगाया, मेरे हाथ काँप रहे थे।
तो उन्होंने बोला- आपको तो छूना भी नहीं आता, आप तो अभी बच्चे हो।
यh सुन कर मुझे थोड़ा गुस्सा आया और जोश भी और मैं जोश में आकर नाइटी के ऊपर से ही उनके मम्मे ज़ोर-ज़ोर से दबाने लगा। आप यह कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है | उनके मुँह से सिसकारियों की आवाज़ निकलने लगी, मैं समझ गया कि इन्हें भी मज़ा आ रहा है। फिर वो बोली- थोड़े प्यार से दबाइए।
फिर मैंने आराम-आराम से उनके मम्मे दबाने लगा, वो भी मज़े लेने लगी। मम्मे दबाते-दबाते मैंने उनकी नाइटी थोड़ी सी नीचे की ओर खींच दी, जिससे उनके मम्मे मेरे हाथों से छूने लग गए।
उन्होंने नीचे ब्रा नहीं पहनी थी, फिर मैं नाइटी के अन्दर हाथ डालकर उनके मम्मे दबाने लगा।
अब उन्हें और मज़ा आ रहा था और वो ज़ोर-ज़ोर से आवाज़ निकालने लगीं, मुझे भी बहुत मज़ा आ रहा था।
यह सब करते-करते मैं बिस्तर पर चढ़ गया था और उनके पीछे जाकर बैठ गया था।
अब मैं दोनों हाथों से उनके मम्मे दबा रहा था।
मेरा लण्ड अब तक बेकाबू हो रहा था और पूरा खड़ा हो गया था। ऐसे बैठने से मेरा लण्ड उनकी गाण्ड पर रगड़ खा रहा था। आप यह कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है | शायद उनको भी इसमें मज़ा आ रहा था, तभी उन्होंने कुछ नहीं बोला। फिर मैंने एक हाथ से उनके मम्मे को दबाना चालू रखा और दूसरे हाथ को उनके पीछे ले आया और उनकी नाइटी के ऊपर से ही उनकी गाण्ड पर हाथ फेरने लगा।लेकिन मुझे उतना मज़ा नहीं आ रहा था तो मैंने उनसे बोला- आप थोड़ा ऊपर उठो, मुझे आपकी नाइटी निकालनी है।
उन्होंने बिना कुछ बोले अपने आप को थोड़ा ऊपर उठा लिया, अब उन्हें भी मज़ा आ रहा था।
मैंने उनकी नाइटी उठा कर उनके कमर तक कर दी।
अब उनकी गाण्ड मेरे सामने थी बस बीच में एक पैंटी थी। खैर मैंने पैंटी के ऊपर से ही एक हाथ उनके अन्दर ले गया और उनकी नंगी गाण्ड का मज़ा लेने लगा और उनकी चूतड़ों को सहलाने लगा।
फिर मैंने थोड़ा और हिम्मत करते हुए अपनी एक ऊँगली उनकी गाण्ड के छेद पर रख दी और धीरे-धीरे उनको सहलाने लगा और छेद को थोड़ा-थोड़ा दबाने लगा।
वो ज़ोर से सिसकारी लेने लगीं फिर मैंने उनको धीरे से लेटने के लिए बोला, वो बिना कोई विरोध किए आराम से लेट गईं। आप यह कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है | उतार दी अब उनका ऊपर वाला हिस्सा पूरा नंगा था, बस नीचे एक पैंटी बची थी। फिर मैं उनके बगल में लेट गया और उन्हें चूमने लगा।

वो भी मेरा साथ देने लगीं, अब तक वो पूरी गर्म हो चुकी थी।

चूमते-चूमते मैं उनके मम्मे भी दबाता रहा और फिर एक हाथ उनके पेट पर से सहलाते हुए उनकी चूत तक ले गया
और पैंटी के ऊपर से ही चूत को सहलाने लगा।

उनको भी मज़ा आ रहा था और वो ज़ोर-ज़ोर से मुझे चूमने लगीं फिर मैंने एक ऊँगली से उनकी पैन्टी उठाई, अपना हाथ उसके अन्दर डाल दिया और उनकी चूत को सहलाने लगा।

वो ज़ोर-ज़ोर से सिसकारी लेने लगी और मुझे और ज़ोर से चूमने लगी। फिर मैंने अपनी एक ऊँगली उनकी चूत में डाली तो वो चिहुंक उठीं।
उनकी चूत एकदम गीली हो चुकी थी और मेरी ऊँगली आराम से अन्दर घुस गई।

मैंने दाने को ऊँगली से छेड़ना शुरू कर दिया। इसके साथ ही मैं चूमते हुए आगे बढ़ा और उनके मम्मे चूमने लगा।

अब तो वो एकदम जोश में आ गई और अजीब-अजीब सी आवाज़ें निकालने लगीं।

खैर.. मैंने एक मम्मे को मुँह में लिया और उसे चूसने लगा।

उन्हें बहुत अच्छा लग रहा था तभी वो एक हाथ से मेरे सर को अपने मम्मे पर दबा रही थीं।

मैं अपनी ऊँगली धीरे-धीरे उनके अन्दर-बाहर करने लगा। उन्हें ये बहुत ही अच्छा लग रहा था।
थोड़ी देर तक मम्मे चूसने के बाद मैं उनके ऊपर 69 की अवस्था में चढ़ गया और अब मेरा लण्ड उनके मुँह के ऊपर था और उनकी चूत मेरे मुँह के ऊपर थी। आप यह कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है |

मैंने अपना मुँह उनकी चूत के ऊपर रखा तो उनकी सिसकारी निकल पड़ी। थोड़ी देर मेरे चाटने के बाद उन्होंने भी मेरे पैंट को नीचे सरका दिया और मेरा 7″ का लण्ड उनके हाथों में आ गया।

कहानी जारी है… आगे की कहानी पढ़ने के लिए निचे दिए गए पेज नंबर पर क्लिक करे |

उसे देख कर वो बोली- हाय राम.. वेद.. आपका तो बहुत बड़ा है, इतना तो आपके चाचा का भी नहीं है।

फिर वो अपने आप उसे हाथों में लेकर सहलाने लगीं और फिर अपने मुँह में डाल लिया।

क्या बताऊँ.. ऐसा लग रहा था जैसे मैं जन्नत में पहुँच गया होऊँ।

अब वो गपागप मेरा लण्ड चूस रही थीं और मैं उनकी चूत चचोर रहा था, बीच-बीच में मैं जीभ अन्दर-बाहर भी कर रहा था।

तभी उन्होंने पानी छोड़ दिया और झड़ गईं।

मेरा भी माल उनके मुँह में ही निकल गया और उसे वो पूरा चूस गईं और बोली- अहा.. बहुत टेस्टी था।

फिर उन्होंने मुझे बताया कि मेरे चाचाजी ने कभी उनकी चूत नहीं चाटी थी और उन्हें बहुत मज़ा आया।

अब हम दोनों एक-दूसरे के सामने बिल्कुल नंगे बैठे थे।

उनके उठे हुए मम्मों को देख कर मेरा लण्ड फिर से खड़ा हो गया तो वो उसे देख कर हँसने लगीं और बोलीं- यह तो फिर से खड़ा हो गया।

मैंने बोला- आपको सलामी दे रहा है।

तो वो बोलीं- तब तो इसकी सलामी स्वीकार करनी पड़ेगी।

तो मैंने कहा- कीजिए।

फिर वो बोलीं- सलामी कैसे स्वीकार करूँ?

तो मैंने बोला- लेट कर।

तो वो पीठ के बल लेट गईं और मैं उनके ऊपर आ गया और अपने लण्ड को उनकी चूत के मुँह पर रख दिया और लवड़े उनकी चूत पर रगड़ने लगा, उनसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था।

वो बोली- अब देर मत कीजिए वेद और दे दीजिए सलामी।

तो मैंने अपना लण्ड उनकी चूत पर टिकाते हुए एक ज़ोर का धक्का दिया और मेरा आधा लण्ड उनके अन्दर चला गया।

वो थोड़ा कसमसाई लेकिन फिर मैंने दुबारा धक्का दिया और मेरा पूरा लण्ड उनकी चूत में चला गया।
चूँकि उनकी चूत गीली थी इसलिए कोई दिक्कत नहीं हुई।

वो थोड़ा चिल्लाईं लेकिन मैंने अपना मुँह उनके होंठों पर रख कर उन्हें चुप करा दिया।

फिर वो मज़े लेकर मुझ से जोर के धक्के लगाने को कहने लगीं और मैं भी अपना लण्ड उनके अन्दर-बाहर करने लगा।

मैं उन्हें ज़ोर-ज़ोर से चोदने लगा। आप यह कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है |

वो बीच-बीच में ‘आह.. उउह’ कर रही थीं जिससे पता चल रहा था कि उन्हें बहुत मज़ा आ रहा है और बीच-बीच में बोल भी रही थीं- और तेज करो.. बहुत मज़ा आ रहा है।

उनको चोदने के दौरान मैं उनका एक दूध चूस रहा था, तो उन्हें और मज़ा आ रहा था।

उनको काफ़ी देर इस तरीके में चोदने के बाद मैंने उन्हें उठाया और घोड़ी बनने को बोला।

वो उठीं और घोड़ी बन गईं और फिर मैंने अपना लण्ड पीछे से उनक चूत में पेल दिया।

उन्हें इस तरह से चुदने में बहुत मज़ा आया।

वो ज़ोर-ज़ोर से सिसकारी लेने लगीं उनको काफ़ी देर इस तरह से चोदने के बाद मैं झड़ने ही वाला था और इस बीच वो दो-तीन बार झड़ चुकी थी।

जब मेरा छूटने वाला था तो मैंने अपना लण्ड उनकी चूत से निकाल कर उनके मुँह में दे दिया।

वो मेरा सारा माल गटक गईं और मेरे लण्ड को चाट कर साफ़ कर दिया।

फिर हमने एक चुम्मी ली। आप यह कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है | उन्होंने मुझे बताया कि उन्हें मेरे साथ बहुत मज़ा आया और बोला- तुम्हारे चाचा उन्हें कभी इस तरह से नहीं चोदते।

उस रात हमने एक बार और चुदाई की और उसके बाद भी मैंने उन्हें कई बार चोदा, वो सब कभी और सुनाऊँगा।

समाप्त |