तलाक सुदा औरत की चुदाई भाग

कुछ दिन गुज़र गये पर रवि ने किसी से कुछ नही कहा. में समझी
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शायद उसने मुझे ना देखा हो पर उस दिन के बाद मेने छुपकर देखना
बंद कर दिया.

शनिवार के दिन राज और रश्मि ने अपने कुछ दोस्तों के साथ पिक्निक
मानने चले गये. मेने सोचा की चलो आज घर में कोई नही में
भी तोड़ा आराम कर लूँगी.

मेने अपने सारे कपड़े उत्तर दिए और नंगी हो गयी. एक रोमॅंटिक
नॉवेल ले में सोफे पर लेट पढ़ने लगी. बेखायाली मे मुझे याद नही
रहा की मेने दरवाज़ा कैसे खुला छोड़ दिया. मुझे पता तब चला
जब मेने रवि की आवाज़ सुनी, “किताब पढ़ी जेया रही है.”

मेने तुरंत अपना हाथ अपने नाइट गाउन की तरफ बढ़ाया पर रवि ने
मेरे गाउन को मेरी पहुँच से डोर कर दिया था. मेने झट से एक
हाथ से अपनी चुचियों को ढाका और दूसरे हाथ से अपनी छूट को
ढाका.

“तुम यहाँ क्या कर रहे हो? तुम तो राज के साथ पिक्निक पर जाने वेल
थे?” मेने तोड़ा चिंतित होते हुए पूछा.

“पता नही क्यों मेरा मान नही किया उनके साथ जाने को. उस दिन के बाद
मेने सोचा आप अकेली होंगी चल कर आपका साथ दे दूं. आपको ऐतराज़
तो नही?” रवि ने जवाब दिया.

“ज़रूर ऐतराज़ है. आज में आकेयलए रहना चाहती हूँ. अब तुम यहाँ से
चले जाओ.” मेने अपनी आवाज़ पर ज़ोर देते हुए कहा.

रवि ज़ोर से हँसने लगा और अपने कपड़े उत्तर दिए, “में थोड़ी देर
आपके साथ बिताकर चला जौंगा.”

में उसके व्यवहार को लेकर चिंतित हो उठी. जब उसने कपड़े उत्तरने
शुरू किए तो में चौंक पड़ी. मेने गौर से उसके लंड की तरफ
देखा, मुरझाए पं की हालत में भी वो कम से कम 6′ इंच लंबा
दिख रहा था. मेने अपनी नज़रें हटाई और पेट के बाल लेट गयी
जिससे उसकी नज़रों से अपने नंगे बदन को छुपा साकु.

“इसमे इतनी हैरानी की क्या बात है. तुम मुझे इससे पहले भी नंगा
देख चुकी हो.” उसने कहा.

उसे पता था की में उन लोगो को चुप कर देख चुकी हूँ और में
इनकार भी नही कर सकती थी. उसने एक बार फिर मुझे चौंका दिया
जब वो मेरे नग्न चुततादों को सहलाने लगा.

साइड टेबल पर पड़ी तेल की शीशी को देख कर वो बोला, “प्रीतितुम्हारे चुतताड वाकई बहोट शानदार है और तुम्हारा फिगर. लाओ में
तोड़ा तेल लगा कर तुम्हारी मालिश कर देता हूँ.”

मेने महसुस्न किया को वो मेरे कंधों पर और पीठ पर तेल दल रहा
है. फिर वो तोड़ा झुकते हुए मेरे बदन पर तेल मलने लगा. उसके
हाथों का जादू मेरे शरीर मे आग सी भर रहा था. उसका लंड अब
खड़ा होकर मेरे चुततादों की दरार पर रग़ाद खा रहा था. मेने
अपने आप को छुड़ाना चाहा पर वो मुझे कस कर पकड़े तेल मलने
लगा.

मेरे कंधों और पीठ पर से होते हुए उसके हाथ मेरी पतली कमर पर
मालिश कर रहे थे. फिर और नीचे होते हुए अब वो मेरी नगञा
जांघों को मसल रहे थे. अब वो मेरी गांद पर अपने हाथ से धीरे
धीरे तेल लगाने लगा. बीच मे वो उन्हे भींच भी देता था. एक अजीब
सी सनसनी मेरे शरीर में दौड़ रही थी.

रवि काफ़ी देर तक यूँही मेरी मालिश करता रहा. गांद की मालिश
करते हुए कभी वो मेरी जांघों के बीच मे भी हाथ दल देता था.

फिर उसने मुझे कंधे से पकड़ा और पीठ के बाल लिटा दिया. इससे
पहले की में कोई विरोध करती उसने मेरे होठों को अपने होठों मे ले
चूसना शुरू कर दिया. अब मुझसे अपने आपको रोक पाना मुश्किल लग
रहा था आख़िर इतने दीनो से में भी तो यही चाहती थी. मेने अपने
आपको रवि के हवाले करते हुए अपना मुँह तोड़ा खोला और उसने अपनी
जीभ मेरे मुँह में दल घूमने लगा.

रवि मेरे निचले होठों को चूस्टे हुए मेरी थोड़ी फिर मेरी गर्दन
को चूम रहा था. जब उसने मेरे कांके लाउ को चूमा तो एक अजीब सा
नशा छा गया.

अपनी जीब को होल होल मेरे नंगे बदन पर फिरते हुए नीचे की और
खिसकने लगा. जब वो मेरी चुचियों के पास पहुँचा तो उसने मेरी
चुचियों को हल्के से मसालने लगा. मेरे ताने हुए निपल पर अपनी
जीब फिरने लगा. अजीब सी गुदगुदी मच रही थी मेरे शरीर मे.
कितने सालों से में इस तरह के प्यार से वंचित थी.

रवि मेरी आँखों में झँकते हुए कहा, “तुम्हारी चुचियों बड़ी
शानदार है.”

में उसके छूने मात्रा से झड़ने के कगार पर थी. रवि ने मुझे
ऐसे हालत पे लाकर खड़ा कर दिया था की मेरी छूट मात्रा चुने से
पानी छोड़ देती.

वो मेरी चुचियों को चूसे जेया रहा था और दूसरे हाथ से मेरी
जांघों को सहला रहा था. झड़ने की इक्चा मेरे में त्रव होती जेया
रही थी. मेरी छूट में आग लगी हुई थी और उसका एक स्पर्श उसकी
उठती आग को ठंडा कर सकती थी.मेने उसे अपनी बाहों में जकड़ते हुए कहा, “रवि प्लीज़ प्लीज़…..”

“प्लीज़ क्या प्रीति बोलो ना? तुम क्या चाहती हो मुझसे? क्या तुम झड़ना
चाहती हो?’ जैसे उसने मेरी मान की बात पढ़ ली हो.

“हन रवि मेरा पानी चूड़ा दो, में झड़ना चाहती हूँ.” मेने जैसे
मिन्नत माँगते हुए कहा.

उसने मेरी दोनो चुचियों को साथ साथ पकड़ कर मेरे दोनो निपल को
अपने मुँह में लेकर ज़ोर से चूसने लगा. अपनी मुँह हटा कर वो फिर
से वही हरकत बार बार दोहराने लगा जब तक में अपने कूल्हे ना
उकचलने लगी.

जैसे ही उसका हाथ मेरी छूट पर पहुँचा उसने अपनी उंगली मेरी गीली
हुई छूट में घुसा दी. फिर उसने अपनी दो और उंगली मेरी छूट में
घुसा कर अंदर बाहर करने लगा.

रवि फिर मेरी टॅंगो के बीच आ गया और मेरी छूट को अपने मुँह मे
ले लिया. उत्तेजना के मारे मेरी छूट फूल गयी थी. वो मेरी छूट को
चूस और छत रहा था. रवि अपनी लंबी ज़ुबान से मेरे गंद के छेड़
से चाटते हुए मेरी छूट तक आता और फिर अपनी ज़ुबान को अंदर घुसा
देता.

उसके इस हरकत ने मेरी टॅंगो का तनाव बढ़ा दिया और एक पिचकारी की
तरह मेरी छूट ने उसकी मुँह मे पानी छोड़ दिया. मेरे शरीर मारे
उत्तेजना के कांप रहा था और मुँह से सिसकारिया निकल रही थी.

रवि ने आक्ची तरह मेरी छूट को छत कर साफ किया और फिर खड़े
होते हुए मेरी ही पानी का स्वाद देते हुए मेरे होठों को चूम लिया.

“देखा तुम्हारी छूट के पानी का स्वाद कितना अक्चा है. और तुम्हारी
छूट पानी भी पिचकारी की तरह छोड़ती है.” उसने कहा.

“हन राज मेरी छूट उत्तेजना में फूल जाती है और पानी भी इसी
तरह छोड़ती है. मेरे पति का अक्चा नही लगता था इसीलिए वो मेरी
छूट को चूसना कम पसंद करता था.” मेने कहा.

“में समझ सकता हूँ. अब में तुम्हे आराम से प्यार करना चाहता हूँ
और तुम भी मज़े लो.” कहकर रवि मेरी चेहरे पर हाथ फिरने लगा.

रवि उठ कर खड़ा हो गया और उसका लंड और टन कर खड़ा हो गया.
में अपनी जिंदगी में सबसे लंबे और मोटे लंड को देख रही थी.
रवि का लंड मेरे पति के लंड से दुगना था लंबाई मे. वो काँसे कम
9’इंच लंबाई मे और 5′ इंच मोटाई मे था. मेरा जी उसके लंड को
मुँह मे लेने को मचल रहा था और में दर भी रही थी क्योंकि
मेने आज तक इतने लंबे लंड को नही चूसा था.उसने मुझे धीरे से सोफे पर लिटा दिया. में आराम से लेट गयी और
अपनी टाँगे फैला दी. उसने अपने लंड को मेरी छूट के मुँह पर रखा
और धीरे से अंदर घुसा दिया.

मेने कस कर रवि को अपनी बाहों में जाकड़ लिया था. उसके लंड की
लंबाई से मुझे दर लग रहा था की कहीं वो मेरी छूट को सही मे
फाड़ ना दे.

रवि धीरे से अपने लंड को बाहर खींचता और फिर अंदर घुसा देता.
मेने अपनी टाँगे उठा कर अपनी छाती से लगा ली जिससे उसको लंड
घुसने में आसानी हो. जब उसका लंड पूरा मेरी छूट मे घुस गया
था तो वो रुक गया जिससे मेरी छूट उसके लंड को अड्जस्ट कर सके.
मुझे पहली बार लग रहा था की मेरी छूट भर सी गयी है.

रवि ने मेरी आँखों मे झाँका और पूछा, “प्रीति तुम ठीक तो हो
ना?”

मेरे मुँह से आवाज़ नही निकली, मेने सिर्फ़ गर्दन हिला कर उसे हन
कहा और अपने बदन को तोड़ा हिला कर अड्जस्ट कर लिया. मुझसे अब
रहा नही जेया रहा था.

“पल्ल्ल्ल्ल्लेआआअसए अब मुज्ज़ज्ज्ज्ज्झे चूऊओदो.” मेने धीरे से उससे
कहा.

रवि ने मुस्कुराते हुए अपने कूल्हे हिलने शुरू कर दिए. पहले तो वो
मुझे धीरे धीरे छोड़ता रहा, जब मेरी छूट गीली हो गयी और उसका
लंड आसानी से मेरी छूट मे आ जेया रहा था अचानक उसने मेरी टाँगे
उठा कर अपने कंधों पर रख ली और ज़ोर ज़ोर के धक्के लगाने लगा.

उसका हर धक्का पहले धक्के ज़्यादा ताकतवर था. उसकी साँसे तेज हो
गयी थी और वो एक हुंकार के साथ अपना लंड मेरी छूट की जड़ों तक
दल देता. अब में भी अपने कूल्हे उछाल उसका साथ दे रही थी. में
भी अपनी मंज़िल के नज़दीक पहुँच रही थी.

“चूऊऊदो राआआआवी आईसस्स्स्स्स्ससे ही हााआअँ ओह मेरााा
छुउतने वााआाअल हाईईइ.” में उखड़ी सांसो के साथ बड़बड़ा रही
थी.

“हाआआं प्रीईएटी चूऊऊद डूऊऊ अपनााआ पाणिीईई मेरे
लिईई.” कहकर वो ज़ोर ज़ोर से छोड़ने लग गया.

रवि मुझे जितनी ताक़त से छोड़ सकता था छोड़ रहा था और मेरी
छूट पानी पर पानी छोड़ रही थी. मेरा शरीर उत्तेजना मे कांप रहा
था, मेने अपने नाख़ून उसके कंधों पे गाड़ा दिए. मेरी साँसे संभली
भी नही थी की रवि का शरीर अकड़ने लगा.”ओह प्रीईईटी मेरााआआआ भी चूऊऊथा ओह ये
लो.” रवि ने एक आखरी ढकाया लगाया और अपना वीर्या मेरी छूट मे
छोड़ दिया.

पिचकारी पिचकारी मेरी छूट मे गिर रही थी. जैसे ही हम संभले
मेने अपनी टाँगे सीधी कर ली. रवि तक कर मेरे शरीर पर लुढ़क
गया, हम दोनो का शरीर पसीने से तार बतर था.

“चलो नहा लेते है.” रवि ने मुझे चूमते हुए कहा.

अब मुझे अपने किए हुए पर शरम नही आ रही थी. में नंगी ही
उठी और रवि का हाथ पकड़ बत्रोंम की और बढ़ गयी. हम दोनो
गरम पानी के शवर की नीचे खड़े हो अपने बदन को सेकने लगे. हम
दोनो एक दूसरे की बदन को सहला रहे थे और एक दूसरे की बदन पर
साबुन माल रहे थे. मेने रवि के लंड और उसकी गोलियों पर साबुन
लगाना शुरू किया तो उसका लंड एक बार फिर टन कर खड़ा हो गया.

में उसके मस्ताने लंड को हाथों मे पकड़े सहला रही थी. मुझमे भी
फिर से छुड़वाने की इक्चा जाग उठी. मेने उसके लंड को अपनी छूट पर
रख रगड़ने लगी.

रवि भी अपने आपको रोक नही पाया उसने मुझे बातरूम की दीवार के
सहाहे खड़ा किया और मेरे चुततादों को अपनी और खींचते हुए अपना
लंड मेरी छूट मे घुसा दिया.

उसके हर धक्के के साथ मेरी पीठ दीवार मे धँस जाती. में अपने
बदन का बोझ अपनी पीठ पर दल अपनी छूट को और आयेज की और कर
देती और उसके धक्के का साथ देती. थोड़ी ही देर में हम दोनो का
पानी छूट गया.

हम दोनो एक दूसरे को बाहों मे लिए शवर के नीचे थोड़ी देर खड़े
रहे. फिर में उसे अलग हुई तो उसका लंड मुरझा कर मेरी छूट से
फिसल कर बाहर आ गया. मेरे मान में तो आया की में उसके
मुरझाए लंड को अपने मुँह मे ले दोनो के मिश्रित पानी का स्वाद चखू
पर ये मेने बहाविष्या के लिए छोड़ दिया.

पूरा दिन हमे मज़े करते रहे. कभी हम टीवी देखते तो कभी एक दूसरे
को छेड़ते. पूरे दिन हम कई बार चुदाई कर चुके थे. मेने रत के
लिए भी रवि को रोक लिया. रात को एक बार फिर हुँने जमकर चुदाई
की और एक दूसरे की बाहों मे सो गये.

दूसरे दिन मे सो कर उठी तो मान में एक अजीब सी खुशी और शरीर मे
एक नशा सा भरा था. मेने रवि की तरफ देखा जो गहरी नींद मे
सोया हुआ था. उसका लंबा मोटा लंड इस समय मुरझाया सा था. उसके
लंड को अपने मुँह मे लेने से मे अपने आपको नही रोक पाई.