सौतेली माँ की गांड मारी

हेल्लो मित्रो, मेरा नाम अनिल हैं और यह कहानी मेरे पहले देसी सेक्स की हैं Hindi Sex Stories Antarvasna Kamukta Sex Kahani Indian Sex Chudai antarvasna1 यह बात आज से 4 साल पहले की हैं जब मैंने अपनी सौतेली माँ के साथ सेक्स के मजे लिए थे. मेरी उम्र अभी 23 साल हैं और तब मैं 19 साल का गभरू जवान था. मेरी सगी माँ को मरे हुए तब 2 साल हो चुके थे. मेरे पिताजी ने मेरी छोटी बहन जिसकी उम्र अभी 8 साल की थी उसे सँभालने के लिए दुबारा शादी की थी. लेकिन पिताजी के पैसो के चलते उन्हें एक कुंवारी कन्या शादी के लिए मिल गई थी. मेरी यह सौतेली माँ का नाम पुष्पा था और वो एक भारी शरीर वाली युवती थी. आइए अब आप को सीधे उस दिन की बात बताऊँ जब मैंने यह देसी सेक्स किया था. उस दिन मुझे सुबह से बुखार थी मैं अपने कमरे में लेटा हुआ था. पिताजी ने डॉक्टर को बुलाया था. उसने बताया की मामूली फ्ल्यू हैं और शाम तक ठीक हो जाएगा. उसने मुझे दो टेब्लेट दी जिसे मैंने तभी पी लिया. पिताजी को यह सुन के अच्छा लगा की मुझे मामूली बुखार था.

पुष्पा ने (मैं उसे कभी भी माँ, मम्मी या आंटी कह के नहीं बुलाता था) मेरी बहन को तैयार कर के स्कुल भेज दिया. पिताजी भी दोपहर से पहले ही अपनी फेक्ट्री के लिए चल दिए. घर के दोनों नौकर दोपहर का खाना होने के बाद घर के पीछे अपने रूम में चले गए. मेरे सर के ऊपर पुष्पा ठन्डे पानी की पट्टी लगा रही थी जिस से मुझे आराम मिलता था. इस ठन्डे अहेसास के चलते मुझे कब नींद आ गई पता ही नहीं चला. जब मैंने आँख खोली तो देखा की मेरे लंड के उपर अपने हाथ रख के पुष्पा भी लेटी हुई हैं. मुझे लगा की जैसे उसने जानबूझ के वहाँ हाथ रखे हैं. क्या उसे मेरे साथ देसी सेक्स करने की इच्छा थी, क्या उसके साथ देसी सेक्स किया जा सकता हैं…? मैं अजब कस्मकस में था. फिर मैंने सोचा की चलो देखें की क्या यह और आगे जाती हैं इस से ज्यादा. अगर वो आगे गई तो मैं भी उसके साथ देसी सेक्स जरुर करूँगा. मैं अपनी आँखे बंध किये हुए सोने का ढोंग करता रहा. मैंने महसूस किया की वो धीरे धीरे आगे बढ़ रही थी. उसके साथ धीरे धीरे मेरे लंड को सहला रहे थे.वो जरुर देसी सेक्स के लिए तैयार थी.

फिर भी मुझे अभी जल्दबाजी करना ठीक नहीं लगा. हो सकता हैं की वो सच में सो रही हो और आगे जाने पे पिताजी के हाथो मार खानी पड़े. और तो और लोग क्या कहेंगे की सौतेली माँ की चूत में डालने गया और दबोच लिया गया…!!! मैं यही सब बातो में उलझा हुआ था. सच बताऊँ तो मुझे पता ही नहीं चला की मेरी बुखार कब गायब हो गई. सच में सौतेली माँ के लंड को पकड़ते ही जैसे की सारी बुखार उड़ सी गई. मैं अब पुष्पा की हिलचाल पर नजर किये हुए था. वो सच में मेरे लंड को सहला रही थी, उसके हाथ धीमे धीमे मेरे लंड को उत्तेजित करने में लगे हुए थे. मुझ से जरा भी रहा नहीं जा रहा था और मैं अब उसके साथ देसी सेक्स के लिए बिलकुल तैयार था.

मैंने भी अब जैसे की मैं सो रहा हूँ वैसा ढोंग चालू रखते हुए अपने हाथ को करवट बदलने की स्टाइल में उसके बूब्स के उपर टिका दिया. पुष्पा के बूब्स बहुत ही सॉफ्ट और ठन्डे ठन्डे थे. मेरे हाथ लगते ही मुझे लंड के अंदर एक अजब सी ख़ुशी दौड़ गई हो ऐसा अहसास हुआ. मैंने हाथ को बूब्स के ऊपर ही रहने दिया और देखने लगा की पुष्पा क्या रेस्पोंस देती हैं. जैसा मेरे दिमाग में थे वही हुआ, उसकी तरफ से कोई भी रेस्पोंस नहीं आया. अब मुझ से रहा नहीं गया और मैंने अपना दूसरा हाथ भी हटाया और चूत के पास जा के रख दिया. मैं अपने हाथ के ऊपर चूत के अंदर उभरी हुई गर्मी साफ़ साफ महसूस कर रहा था. ऐसी गर्मी तो तभी उभरती हैं जब इंसान को देसी सेक्स की चाह हो. ऐसी ही कुछ गर्मी मेरे लंड में भी अभी हाल में थी क्यूंकि वो भी देसी सेक्स के लिए तड़प रहा था. मेरे चूत के उपर हाथ रखने के बाद पुष्पा थोड़ी हिली और उसने भी एक्टिंग करते हुए अपने हाथ को मेरे हाथ से ऊपर दबाया. उसके ऐसा करने से मेरा हाथ उसकी चूत के ऊपर और भी जोर से टच करने लगा.

अब तो चुदाई के लिए सारी फाटक खुल गई थी और मेरी एक कदम मुझे चूत के अंदर ले जा सकती थी. फिर क्या था मैंने पुष्पा के चूत के ऊपर ऊँगली दबाई और साथ ही में दुसरे हाथ से उसके चुंचो को ले दबोचा. उसकी हलकी सिसकी निकल पड़ी, जिस से यह भी साबित हुआ की वो भी जाग रही थी. उसने भी मेरे लंड को जोर से दबाया. मेरे लंड को दबाते ही मुझे गुस्सा आया और मैंने जोर से उसके कंधे के ऊपर अपने दांत गाड़ दिए. मेरे लंड को पुष्पा अब बड़े ही प्यार से सहला रही थी.
मैंने अब सभी शर्म के परदे हटाते हुए खड़े हो के अपने कपड़े उतारने चालू कर दिए. पुष्पा ने जब मेरे 9 इंच के लौड़े को देखा तो उस से भी रहा नहीं गया. वो सीधे आ के मेरे पास बैठ गई और लंड को मुहं में ले के उसे जोर जोर से चूसने लगी. लंड पूरा के पूरा खड़ा हो चूका था और अब बस चूत के दरवाजे खुलने की ही देर थी. पुष्पा ने 2 3 मिनट तक लंड को चूसा और फिर वोह खड़ी हुई और अपने कपडे भी उतारने लगी. यार सच में यह तो मेरी बीवी बनने के लायक थी और कहाँ मेरे बाप की बीवी बन गई. उसकी पतली कमर, बिना बाल वाली चूत सब कुछ बहुत ही सेक्सी लग रहा था. मैंने उसके चूत के होंठो को हाथ से थोडा खोला. उसके अंदर से कामरस की बुँदे निकल रही थी.

मैंने अब जरा भी समय गवाएं बिना उसको वही उल्टा लिटा के उसकी चूत में पीछे से लंड दे दिया. आह आह आह ओह ओह ओह आह्ह्ह्हह्ह होता रहा और मेरे लंड से मेरी सौतेली माँ चुदती रही. देसी सेक्स की यह दास्ताँ 10 मिनिट तक चालू रही, और उसके बाद मैं पुष्पा की चूत के अंदर ही झड़ गया. उसने मेरे लंड को और अपनी चूत को साफ़ किया और फिर हम लोग चिपक के सो गए. इस दिन के बाद से तो पुष्पा जैसे की मेरी रखेल हो गई हैं और मैंने हर तीसरे दिन उसकी चूत या गांड पे हमला करता रहेता हूँ

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