जीना मुस्किल हो गया जालिम दुनियामे

मैं 42 साल की, दो बार तलाकशुदा औरत हूँ! मेरी कोई औलाद नहीं है Hindi Sex Stories Antarvasna Kamukta Sex Kahani Indian Sex Chudai antarvasna1 मैं अपने माँ बाप के साथ महाराष्ट्र में रहती हूँ! मेरी कहानी एक ऐसी दुःख भरी है, जिस पर शायद लोगो को यकीन ना हो! लेकिन इस बेरहम ज़ालिम दुनिया ने मुझे दुखो के सिवा कुछ नहीं दिया है!

जब मैं 24 साल की थी, और नागपुर में नौकरी कर रही थी! तभी मेरी मुलाकात एक ऐसे शक्श से हुई, जो हमारी ही कंपनी में काम करता था! वो पुणे, महाराष्ट्र से था! हम दोनों की खूब जमी और फिर उसका मेरे घर पर आना जाना शुरू हो गया! मेरे घर वाले ओपन थे तो, उसके घर आने जाने पर कोई रोक-टोक नहीं थी! हम दोनों अब बहुत करीब आ चुके थे, और उससे मैं दो बार प्रेग्नेंट भी चुकी थी! लेकिन शादी से पहले बच्चा, हम लोगो के समाज में अच्छा नहीं मना जाता, तो मुझे दो बार एबॉर्शन भी करवाना पड़ा!

अब हम दोनों के बीच सिर्फ एक पवित्र बंधन ही रह गया था, जिसे लोग शादी कहते हैं! और कुछ समय बाद हम दोनों इस शादी के पवित्र बंधन में भी बंध गये! मेरे घर वाले इस शादी के लिए तैयार थे, लेकिन उसके घरवालो ने इस शादी से इन्कार कर दिया था! लेकिन वो लड़का अपनी बात पर अड़ गया, और हम दोनो, शादी के इस पवित्र बंधन में बंध गये! मैं अपने ससुराल गयी, लेकिन मुझे कोई आदर सत्कार नहीं मिला! हम दोनों के जीवन की गाडी चलती रही! और कुछ समय बाद मेरे ससुरजी का देहांत हो गया, और मेरी सास अब बिलकुल अकेली हो गयी! मैंने अपने पति को अपनी सास को संभालने को कहा, क्यूंकि मेरी सास मुझे पसंद नहीं करती थी! फिर भी मेरे दिल में उनके लिए इज्जत थी! अब मेरे पति अधिकतर समय अपनी माँ को संभालने में लगाते, ताकि उन्हें अकेलापन ना खटके! और अब उन्होंने रात को अपनी माँ के पास ही सोना शुरू कर दिया! मुझे कोई तकलीफ नहीं थी!

एक साल तक इस तरह चलता रहा, मेरे पति मुझे अब बहुत ही कम समय देते, और ज्यादातर समय अपनी माँ के पास बिताते! एक दिन रात को मेरी नींद खुली और मैंने अपनी सासू माँ के कमरे से कुछ आवाजे सुनी! घर में अँधेरा था, और मैं धीरे से अपने कमरे का दरवाजा खोल कर, अपनी सासू माँ के कमरे की और चल दी, जिसमे एक खिड़की थी, और खिड़की खुली थी! मैंने धीरे से अन्दर झाँका और दंग रह गयी!

जिसे मैं पति समझती थी, वो कमीना आज मेरी सासू माँ यानि अपनी माँ के साथ बिस्तर पर नग्नावस्था में सम्भोग कर रहा था! माँ बेटे का ये रिश्ता देखकर मैं दिल में रो पड़ी! मैं अपने कमरे में वापस आ गयी! ये बात मैंने किसी को नहीं बताई! और यही सोच कर की मैं अपने पति को समझा लुंगी!उसने मेरे साथ आने से मना कर दिया! मैंने फिर कई बार माँ और बेटा एक साथ बिस्तर पर देखे! मैंने चार साल अपने पति का इंतज़ार किया, लेकिन जब मुझे विश्वास हो गया कि, अब वो मेरे पास नहीं आयेगा तो, मैंने 1999 में नागपुर में अपने पति से तलाक के लिये कोर्ट में अर्जी दी! जिसमे मैंने माँ बेटे के शारीरिक सम्बन्ध होने की बात कही, और कोर्ट ने उसे नहीं मना! जो मैं अपनी आँखों से देख चुकी थी! लेकिन 2002 में मुझे तलाक मिल गया!

तलाक के एकसाल बाद मुझे एक और लड़का मिला, जो दिल्ली से था, लेकिन नागपुर में किसी प्राइवेट कंपनी में काम कर रहा था, हम दोनों मिलते रहे! वो एक अच्छा लड़का था, हम दोनों एक दुसरे के करीब आये और फिर उस लड़के ने दिल्ली में ट्रान्सफर ले लिया! हम दोनों के शारीरिक सम्बन्ध भी हो चुके थे! दिल्ली आने के बाद उस लड़के ने मुझसे कांटेक्ट करना बंद कर दिया! मैंने उसे बहुत फ़ोन किये, लेकिन शायद वो कोई जवाब नहीं दे रहा था! मुझे उसके घर का पता मालूम था! और एक दिन मैं उसके घर पहुच गयी! उसके घर में उसकी माँ से मिली और सब बातें बताई, बातो से पता चला कि, वो लड़का पहले से ही शादीशुदा था! और एक बच्चे का बाप भी था! मेरे पाँव के नीचे से जैसे जमीन सरक गयी हो. और मैं स्तब्ध रह गयी!

शाम को उस लड़के से मिलने पर, उसका कहना की वो मुझे सब कुछ (जैसे घर, गाडी और पैसा) देगा, लेकिन हम दोनों के बीच क्या हुआ, किसी को मत बताना! मैं और हैरान हो गयी जब उसने कहा कि, वो अपनी बीवी और बच्चे को बहुत प्यार करता है, और चाहता है की मैं वहाँ से चली जायू! मैंने अपना सामान उठाया और उस रात किसी होटल में चली गयी! कुछ दिन होटल में रहने के बाद, मैंने अब दिल्ली में ही रहने का सोचा! क्यूंकि अब मुझे इस लड़के को सबक सिखाना था! मेरी ज़िन्दगी में अब कुछ नहीं बचा था! हर कोई मुझे गिद्ध की नजरो से देखता था!

इस बीच मेरी मुलाकात एक ऐसे औरत से हुई, जो धंधे वाली थी! मेरा तो सब कुछ लुट चुका था और अब मेरे पास खोने और के लिये कुछ नहीं था! पैसे की कमी भी हो रही थी! तो मुझे उस धंधे वाली औरत का सहारा लेना पड़ा! और उसने मुझे भी, दूसरी लडकियों की तरह अपने क्लाइंट्स के पास भेजना शुरू किया! एक साल पैसा कमाने के बाद मैंने उस देल्ही वाले लड़के को फ़ोन किया, और उससे मिलने को कहा! आज मैंने उसे होटल में बुलाया था वो मेरी चमक दमक देखकर हैरान था! उस दिन हम दोनों फिर एक बार एक दुसरे में समां गये! लेकिन मुझमे तो जैसे बदले की आग लगी हुई थी! और मैंने अब उसकी बीवी को फ़ोन करके उसके बारे में बताया, और मैं वहाँ से चली गयी!

इस दौरान मुझे इन्टरनेट चैट पर दिल्ली का एक और लड़का मिला! दोनों ने फ़ोन नंबर एक दुसरे को दिये! मैंने उसे अपने बारे में सब कुछ सच सच बताया, उसने विनम्रता पूर्वक कहा की इस दुनिया में सभी मर्द एक जैसे नहीं हॊते! उसका इतना कहना था कि, मेरे मुह से मर्दों के लिए गालियों की बरसात शुरू हो गयी! वो सुनता रहा, और जब मैं चुप हुई तो, बोला अगर ख़त्म हो गया हो तो मैं कुछ बोलू? मेरा कहना था कि, आज तक मुझे किसी मर्द ने कभी कोई इज्जत नहीं दी है! उसने कहा एक काम करो तुम मेरे घर आओ, मैं तुम्हे अपने घर पर सबसे मिलवाता हूँ! शायद मैं अपना आप खो चुकी थी! लेकिन वो बड़े ही प्यार से बात कर रहा था! हम दोनों ने करीब एक घंटे बात करी, फिर उसे शायद किसी काम से जाना था! तो, वो चला गया!

अगले दिन सुबह मैंने उसे बोला कि, आज दिन में कहीं लंच के लिए चलते हैं! वो छुट्टी का दिन था और वो घर पर काम कर रहा था! उसने कहा की आज नहीं और मैंने फ़ोन काट दिया! थोड़ी देर में मैंने उसे फिर फ़ोन किया कि, मुझे बहुत भूख लग रही है! उसने कहा तुम एक काम करो, तुम मेरे घर आ जाओ! मैं मेड से कह देता हूँ कि, वो तुम्हारे लिए भी खाना तैयार कर देगी! मेरे कहने पर कर की मैं सच में आ जायू? उसने कहा हाँ!

मैं 2 बजे उसके घर पहुची, उसने अपनी माँ अपनी बहन से मुझे मिलवाया! उन्होंने मुझे इतनी इज्जत दी शायद मैं वो दिन अपनी लाइफ में
कभी नहीं भूल सकती! उसकी माँ को मैंने अपनी सारी बात बताई, उन्होंने मुझे भगवान में ध्यान लगाने को कहा और योग की शिक्षा दी! जिस दिल्ली में मुझे मर्दों ने बस एक ही नज़र से देखा था, और जो मुझे अपने घर अकेले में ही बुलाना पसंद करते थे! आज उस इंसान ने वो दिखाया जिसे मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था! मैं उस इंसान से बस एक बार मिली, उसके घर गयी, इज्जत पायी और यही कि, सारे मर्द एक से हॊते हैं! शायद मैं गलत थी, और आज भी मैं उस इन्सान को याद करती हूँ, जिसने अन्जान होकर भी इस बेरहम ज़ालिम दुनिया में मुझ जैसी एक अभागन औरत को इज्जत दी!

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