घरेलू चुदाई समारोह 20

तुम्हारे हाथ मेरी चूचियों antarvasna पर हैं। मैं खुद kamukta को तुम्हें सौंप रही हूँ। कुछ घंटों के लिये सब नियम भूल जाओ। मेरे पति और सजल बहुत समय तक वापिस आने वाले नहीं हैं। हम दोनों घर में अकेले हैं। थोड़ी ज़िंदगी जियो कर्नल… मज़ा करो…”

“ये हुई न बात…” कोमल धीरे से कराही जब आखिर में कर्नल की मज़बूत अँगुलियों ने उसकी चूचियों को भींचा। कोमल उस आदमी को रिझाने में इतनी मशगूल हो गयी थी कि उसे अपनी गर्मी का पूरा एहसास ही नहीं था। कर्नल के स्पर्श से उसकी चूचियां कठोर हो गयी थीं और उसकी चूत से भी रस चूने लगा था।

“मुझे इसमें से आज़ाद होना है…” कोमल फुसफुसायी और फटाफट अपना हाउस-कोट उतार फेंका। सिर्फ काले रंग के ऊँची एंड़ी के सैंडल पहने कोमल अब बिल्कुल नंगी खड़ी थी।

“क्यों कर्नल…” कोमल मुश्कुरायी जब कर्नल उसकी नंगी चिकनी चूत को आँखें फाड़े देखने लगा। फिर बोली- “ठीक से देख लो कर्नल कि तुम्हें क्या मिल रहा है… ज़रा सोचो कैसा लगेगा जब मेरी गीली चूत तुम्हारे विशाल लौड़े को निचोड़ेगी… तुम्हारा लौड़ा बड़ा है।… है ना कर्नल…”

“मैं नहीं जानता कि आपके विचार में बड़ा क्या है… कोमल जी…” कर्नल ने अपना थूक निगलते हुए कहा। उसके हाथ कोमल के मम्मों पर और भी जकड़ गये और उसकी आँखें अभी भी कोमल की चिकनी चूत पर टिकी थीं।

“देखने दो मुझे… फिर बताती हूँ कि मेरे विचार में बड़ा क्या है…” कोमल मुश्कुराती हुई बोली। कर्नल के हाथ कोमल की गर्म चूचियों को भींच रहे थे और कोमल को अपने ऊपर काबू रखना कठिन हो रहा था। हाय रे… कोमल ने लंबी आह भरी जब उसके हाथों ने कर्नल के विशाल लण्ड को नंगा किया। वो उसके लण्ड को पूरा बाहर नहीं निकाल पायी थी क्योंकी उसके लिये कोमल को कर्नल की पैंट नीचे खिसकानी पड़ती, लेकिन जितना भी उसे दिख रहा था उससे कोमल को विश्वास हो गया था कि कर्नल का लण्ड किसी घोड़े के लण्ड से कम नहीं
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