चाचा से चूत मरवाई और कॉलेज

हाय फ्रेंड्स, मेरा नाम सुजाता है, Antarvasna और मेरी उम्र 20 साल की है. और मैं इन्दौर की रहने वाली हूँ. दोस्तों आज मैं आप सभी को मेरी पहली चुदाई की कहानी बताने जा रही हूँ. जो कि मेरे चाचा के साथ हुई थी।

हाँ तो दोस्तों अब मैं आप सभी को सीधा अपनी कहानी की तरफ लेकर चलती हूँ, जो कि कुछ इस तरह से है। आप यह कहानी कामलीला डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।

दोस्तों मेरे एक चाचा है और उनका नाम सुधीर है, और वह हमारे दूर के रिश्तेदार है. और उनकी उम्र करीब 34 साल के आस-पास है, और वह अकेले ही रहते है. दोस्तों वह अक्सर ही हमारे घर पर आते-जाते रहते है. मेरे पापा काफी साल पहले एक दुर्घटना में गुजर गये थे, और हमारे घर की सारी ज़िम्मेदारी बस मेरी मम्मी पर ही थी. लेकिन वह चाचा भी कभी–कभी हमारी मदद कर दिया करते थे. दोस्तों मुझको पढ़ने का बहुत शौक था और मैं अपनी क्लास में हमेशा ही अव्वल आती थी।

हाँ तो दोस्तों यह बात उस समय की है जब मेरा 12 वीं का रिज़ल्ट आया था. और मैं उसमें बहुत अच्छे नम्बर से पास हुई थी. और फिर मुझे आगे पढ़ने के लिये कॉलेज जाना था, लेकिन हमारे पास कॉलेज की फीस देने के लिये पैसे नहीं थे. और मैं उदास सी रहने लगी थी. मुझे आगे भी पढ़ना था, और कहीं से भी पैसों का इंतज़ाम नहीं हो पा रहा था। और ऐसे ही मैं एकदिन घर पर चुपचाप बैठी थी तभी मेरे सुधीर चाचा हमारे घर पर आए और उन्होंने मुझसे पूछा कि..

चाचा :- तुम्हारी मम्मी कहाँ है?

और फिर मैंने उनसे कहा कि…

मैं :- घर से कहीं बाहर गयी है।

और फिर मेरा उदास चेहरा देखकर उन्होनें मुझसे पूछा?

चाचा :- क्या बात है, तुम ऐसे उदास होकर क्यों बैठी हो?

और फिर मैंने उनको सारी बात बताई, तो उन्होनें मुझसे कहा कि, तो इसमें परेशानी की कौनसी बात है? मैं हूँ ना, मैं तुम्हारी कॉलेज की फीस दे दूँगा।

और फिर मुझको यकीन नहीं हो रहा था कि, मेरा वह सपना पूरा होने जा रहा था. और मैं खुशी से झूमने लग गई थी। और फिर मैंने झट से उनको अपने गले से लगा लिया था. और फिर वह मुझसे बोले कि-

चाचा :- बदले में तुमको भी मेरे लिए कुछ करना होगा।

मैं :- चाचा इसके लिये तो मैं कुछ भी करने के लिए तैयार हूँ।

चाचा :- तुमको बदले में मुझसे अपनी चुदाई करवानी होगी।

और फिर मैं झट से उनसे अलग हो गई थी, और मुझको अपने कानों पर बिलकुल भी विश्वास नहीं हो रहा था।

और फिर मैंने उनसे कहा कि…

मैं :- चाचा आपको मुझसे ऐसी बात करते हुए शरम नहीं आती क्या? और मैंने तो आपको क्या माना और समझा था।

तो फिर वह भी मुझसे बोले कि…

चाचा :- देखो, ज्यादा नाटक तो करने की ज़रूरत नहीं है, और मैं कोई दानदाता भी नहीं हूँ. अगर तुमको पैसे चाहिए तो, तुमको मुझसे अपनी चुदाई करवानी ही पड़ेगी।

और फिर मुझको बहुत गुस्सा आने लगा था, और मैंने उनसे कहा कि-

मैं :- निकल जाइए आप यहाँ से।

तो फिर वह वहाँ से चले गए थे और मैं फिर से उदास हो गई थी. और फिर मुझे अभी भी यकीन नहीं हो रहा था कि, मेरा यह चाचा ऐसा इंसान निकलेगा, और फिर मुझे यह बात अपनी मम्मी को बताने तक की हिम्मत नहीं हुई थी. और फिर मैंने सोचा कि, कहीं से तो मेरी कॉलेज की फीस का इंतजाम हो जाएगा।

और फिर ऐसे ही दिन बीतते गए, लेकिन कहीं से भी कॉलेज की फीस के पैसों का इंतजाम नहीं हो पा रहा था. और फिर मुझको बार-बार ही चाचा की बात याद आ रही थी। और फिर मैंने सोचा कि एक बार ही तो अपनी चुदाई करवानी है. और कभी ना कभी तो किसी ना किसी से चुदवाना तो है ही, तो क्यों ना अपने चाचा के साथ ही अपनी चुदाई करवा लूँ. लेकिन मेरा दिल फिर भी ‘ना’ ही कह रहा था, और फीस भरने का दिन भी करीब आ रहा था. और अब सिर्फ़ 2-3 दिन ही बाकी बचे थे. और फिर आख़िरकार मैंने अपने दिल को समझाया, और फिर मैंने चाचा से अपनी चुदाई करवाने के लिए खुद को तैयार किया।

और फिर मैं अगले दिन सुबह से ही घर से निकल गई थी, और मैंने अपनी मम्मी को बोल दिया था कि, मैं अपनी एक सहेली के घर पर जा रही हूँ. और फिर वहाँ से सीधे ही चाचा के घर चली जाऊँगी। और फिर मैंने चाचा के घर का दरवाज़ा खटखटाया तो चाचा ने ही दरवाजा खोला, और वह मुझको वहाँ देखकर एकदम से चौंक गये थे. और फिर वह मुझसे बोले कि…

चाचा :- तुम यहाँ कैसे ?.

मैं :- मुझे आपसे कुछ बात करनी है।

चाचा :- ठीक है अन्दर आ जाओ।

और फिर मैं उनके पीछे-पीछे अन्दर चल दी, और उन्होंने मुझको अन्दर ले जाकर बैठाया।

चाचा :- हाँ तो, अब बताओ क्या बात है?

मैं :- मैं आपसे अपनी चुदाई करवाने के लिये तैयार हूँ, हाँ अगर आप मेरी कॉलेज की फीस देंगे तो।

और फिर वह हँसने लगे और बोले कि…

चाचा :- मुझको तो पहले ही पता था कि, आज नहीं तो कल तुमको मेरे पास आना ही पड़ेगा।

और मैं एकदम चुप रही।

तो फिर वह मुझसे बोले कि पैसे तो मैं दे दूँगा लेकिन बदले में मैं तुमसे जो भी कहूँगा वह तुमको करना पड़ेगा।

तो फिर मैंने भी उनसे कहा कि, ठीक है. और इसके अलावा मेरे पास कोई चारा भी तो नहीं था।

चाचा :- अब तुम अपने कपड़े उतार दो।

और फिर मैंने अपनी टी-शर्ट को और जीन्स को भी उतार दिया था. और फिर मैं उनके सामने अब सिर्फ़ ब्रा और पैन्टी में ही थी. और मुझको चाचा के सामने ऐसे बहुत शरम आ रही थी। और फिर वह मेरे पास आए और उन्होंने धीरे से मेरी ब्रा में अपना हाथ डाला और मेरे बब्स को सहलाने लगे. और मैंने शरम के मारे अपनी आँखें ही बन्द कर ली थी. और फिर उन्होनें मेरे पीछे से हाथ डालकर मेरी ब्रा के हुक खोल दिए थे. और मेरी ब्रा में से मेरे बब्स को आजाद कर दिया था। और फिर मेरे बड़े-बड़े बब्स अब उनके सामने नंगे हो गये थे. जिनको देखकर वह भी पागल हो गये थे. और फिर वह मेरे बब्स को अपने मुहँ में लेकर चूसने लग गए थे. और फिर उन्होनें अपना एक हाथ मेरी पैन्टी में डाल दिया था. और फिर वह मेरी कुँवारी चूत को सहलाने ल़ग गए थे।

और फिर जैसे ही उनकी ऊँगली मेरी चूत के छेद पर लगी तो, मेरे जिस्म के अन्दर जैसे कोई बिजली सी दौड़ गई थी। आप यह कहानी कामलीला डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।

और फिर चाचा ने मेरी पैन्टी को भी उतार दिया था. और फिर मैं अब उनके सामने पूरी तरह से नंगी हो गई थी. और मुझको अब बहुत शरम आ रही थी और फिर वह भी अपने कपड़े उतारने लगे. और फिर जैसै ही उन्होनें अपनी अंडरवियर उतारी तो उनके लंड को देखकर मैं तो डर ही गई थी. दोस्तों उनका लंड करीब 7” जितना लम्बा और 3” जितना मोटा था. और फिर मेरी समझ में यह नहीं आ रहा था कि, यह मेरी चूत में जाएगा कैसे?

और फिर वह मुझको अपनी गोद में उठाकर अपने बेडरूम में ले गये थे. और फिर मुझको उन्होनें बेड पर पटक दिया था. और फिर वह अपना लंड हिलाते हुए मुझसे बोले कि, चल अब इसको अपने मुहँ में लेकर चूस. दोस्तों मैंने उससे पहले कभी किसी का लंड नहीं चूसा था, इसलिए मैं बहुत डर रही थी. लेकिन मुझको वह सब करना तो पड़ेगा ही, इसलिए फिर मैंने उनका लंड डरते हुए अपने मुहँ में ले लिया था और उसको चूसने लग गई थी. और फिर मैं उनके लंड को अपने मुहँ में लेकर अन्दर-बाहर कर रही थी और वह भी मेरा सिर पकड़कर अपने मुहँ से आह… आह… कर रहे थे। और फिर मुझको भी अब मज़ा आने लगा था. और मैं भी मज़े से उनका लंड चूस रही थी. दोस्तों उनके लंड का स्वाद भी मुझे बड़ा ही मस्त लग रहा था।

चाचा :- चल मेरी रानी अब थोड़ा और ज़ोर-ज़ोर से चूस इसको आह…

और फिर मैं भी अब पूरी तरह से बेशरम हो गई थी और एक रंडी की तरह उनके लंड को चूसने लग गई थी।

चाचा – चल, अब बस कर और घोड़ी बन जा, अब तेरी चूत फाड़नी है।

और फिर मैं घोड़ी बन गई थी. और मेरी चूत भी अब उनके सामने उभरकर आ गई थी. और फिर उन्होनें बहुत सारा थूँक लिया और मेरी चूत के छेद पर लगा दिया और थोड़ा सा थूँक अपने लंड पर भी लगा लिया था. और फिर उन्होनें अपने लंड का टोपा मेरी चूत के छेद के ऊपर रखा. और फिर एक ज़ोर का धक्का मारा और जिससे मैं बहुत ज़ोर से चिल्लाई. क्योंकि उनका लंड मेरी चूत को फाड़ता हुआ मेरी चूत में अन्दर तक घुस गया था. जिससे मेरी आँखों में से पानी निकलने लग गया था. और मेरी चूत से खून… और मैंने भी अपनी चूत की हालत को देखा तो मुझे तो लगा कि जैसे मैं तो बेहोश ही हो चुकी हूँ. और मुझसे अपनी चूत का दर्द बिलकुल भी सहन नहीं हो पा रहा था।

और फिर वह रुक गये थे. और वह मेरे कूल्हों को धीरे-धीरे करके सहला रहे थे. और फिर वह थोड़ा सा रुके और मैं फिर से चिल्ला उठी थी क्योंकि मैंने जब पीछे मुड़कर देखा तो उनका पूरा लंड ही मेरी चूत में घुस गया था. और दर्द के मारे मेरी हालत पूरी तरह से खराब हो चुकी थी. लेकिन इस बार वह नहीं रुके थे और धक्के पे धक्के मारने लगे थे, उनके हर धक्के पर मैं कराह उठती थी. और कुछ धक्कों तक तो मुझको बहुत दर्द हुआ लेकिन फिर धीरे-धीरे मेरा दर्द कम होता गया और मुझको मज़ा आने लगा था. और अब तो उनका हर धक्का मुझको जन्नत में ले जा रहा था और उनके हर धक्के के साथ मेरे मुहँ से एक आहहह… सी निकलती जा रही थी. और मुझे खुद को भी पता नहीं था कि मैं क्या बडबडाती जा रही थी, आहहह… चोदो मुझको और फाड़ दो मेरी चूत को और ज़ोर से करो. और मैं भी अब अपनी गांड को हिला-हिलाकर उनका साथ दे रही थी, और उस पूरे कमरे में मेरी चुदाई से फ़च..फ़च… की आवाजें आ रही थी।

और फिर उन्होनें अपना लंड मेरी चूत में से बाहर निकाला और वह नीचे लेट गये और मुझको अपने ऊपर बैठा लिया. और फिर मैंने उनका लंड पकड़कर अपनी चूत में घुसा दिया और नीचे से चाचा ने धीरे से धक्का मार दिया और धक्का मारते उनका लंड मेरी चूत में चला गया था। और फिर मैं अपनी गांड से उनके लंड पर उछल-उछलकर चुद रही थी. और वह भी नीचे से मेरा साथ दे रहे थे. और मैं तो उस समय जैसे किसी दूसरी ही दुनिया में पहुँच गयी थी. और वह अपने दोनों हाठों से मेरे बब्स को दबा रहे थे।

और फिर वह उठे और उन्होनें अपना लंड मेरी चूत में से बाहर निकालकर फिर से मेरे मुहँ में डाल दिया था. और फिर वह मेरे सिर को पकड़कर मेरे मुहँ को चोदने लग गए थे. और फिर कुछ ही देर के बाद चाचा मेरे मुहँ में ज़ोर-ज़ोर से धक्का मारते हुए मेरे मुहँ में ही झड़ गये थे, और मैं उनके लंड का सारा रस पी गयी थी और उनके लंड को भी चाट-चाटकर साफ़ करने लग गई थी।

और मेरी उस पहली चुदाई से मेरी चूत के ऊपर भी बहुत सारा खून लगा हुआ था, तो मैं उसको साफ करने के लिए बाथरूम में जाने लगी. और जैसे ही मैं बाथरूम में पहुँची तो चाचा भी मेरे पीछे से बाथरूम में आ गये थे और उन्होनें मुझको लपककर पीछे से पकड़ लिया था, और मुझको दीवार से सटा दिया और मेरे एक पैर को उठा लिया था. जिससे मेरी चूत पूरी खुल गयी थी. और फिर उन्होनें अपना लंड पीछे से मेरी चूत में फिर से डाल दिया था और वह फिर से मुझको चोदने लग गए थे. और फिर करीब 30 मिनट तक वह मुझको उसी तरह से चोदते रहे और मेरी चूत में ही झड़ गए थे।

और फिर मेरी चुदाई पूरी होने के बाद मैंने खुद को साफ़ किया और फिर लंगडाते हुए मैंने अपने कपड़े पहने, और वहाँ से जाते समय चाचा ने मुझको मेरी कॉलेज की फीस के पैसे दिए जिससे मैंने अपने कॉलेज की फीस भर दी थी।

हाँ तो दोस्तों उस दिन के बाद तो जब भी मुझको पैसों की ज़रूरत होती थी तो मैं उनसे अपनी चुदाई करवा लेती थी. और अब तो मुझको उनसे चुदने की आदत सी हो गयी है।

धन्यवाद कामलीला के प्यारे पाठकों !!