जमाई जी की माँ चुद गई

हाय फ्रेंड्स, वैसे तो antarvasna मेरी इस कहानी के शीर्षक से आप सभी को पता लग ही गया होगा कि, मेरी यह कहानी किस विषय पर है. लेकिन यह एक सच्ची घटना पर आधारित है, जो आज से 3 साल पहले मेरे साथ घटित हुई थी. दोस्तों मैं आपके मनोरंजन के लिए इस मेरी कहानी में थोड़ा सा मसाला डालकर आप सभी के सामने पेश करने जा रहा हूँ. हाँ तो दोस्तों आप अपनी-अपनी अंडरवियर में हाथ डालकर तैयार रहो और इस लाजवाब कहानी को पढ़ने के मज़े लो।

दोस्तों मेरा नाम रणजीत है और मैं नोएडा का रहने वाला हूँ. और इस घटना के समय मेरी उम्र 49 साल की थी और मेरी पत्नी की उम्र 46 साल की थी, और मेरी बेटी की उम्र 25 साल की थी और उसकी शादी भी आज से 3 साल पहले ही हुई थी. दोस्तों मेरी बेटी की शादी में मुझको सुषमा बहुत ही भा गई थी. वह करीब 45 साल एक बहुत ही गोरी चिट्टी और खूब भरे हुए बदन की मालकिन है. सच कहता हूँ दोस्तों, उसको पहली बार देखकर तो मेरे दिल में ख़याल आया था कि, अगर यह एकबार मुझको चोदने को मिल जाए तो, मज़ा ही आ जाए. और फिर मैंने भी गौर किया कि, वह भी मुझे बड़े ही ध्यान से देख रही थी और वह मेरी सारी बातों में दिलचस्पी भी दिखा रही थी।

दोस्तों उसका नाम सुषमा है और वह एक स्कूल में उपप्रधानाचार्य है. वह काफी पढ़ी लिखी थी और उसने खुद को बहुत ही अच्छी तरह से संभालकर रखा हुआ है. खैर मैं तो बेटी वाला था तो मैंने अपने दिल को काबू में रखा. और फिर शादी तो ठीक-ठाक हो गई, लेकिन उसके बाद, जब भी हमारी मुलाकात होती तो वह हर बार मेरे कुछ ज़्यादा ही नज़दीक आने की कोशिश करती रहती थी. और फिर ऐसे ही हम धीरे–धीरे एक दूसरे के काफ़ी करीब आते चले गये. और मन ही मन में मैं भी उसको चाहने लगा था. मगर हम लोगों का रिश्ता ऐसा था कि, हम छुपकर कुछ भी करके ऐसा कोई संबंध नही बना सकते थे. क्योंकि अगर किसी को इस बात की भनक भी लग जाती, तो इसका सीधा असर मेरी बेटी के जीवन पर होता और उसका शादी-शुदा जीवन भी प्रभावित होता. और फिर एकबार वह हमारे घर पर आई, और उस समय वह अकेली ही आई थी. संयोग से उस दिन मेरी बीवी भी किसी काम से अपने मायके गई हुई थी. तो हम घर में बिल्कुल अकेले ही थे. उसके इस तरह से आने से मैं बड़ा ही अचंभित हुआ था, पर मन ही मन खुश भी बहुत था. और फिर मैंने उसको अन्दर बुलाकर बैठाया, पीले रंग की शिफान की साड़ी में वह बहुत ही मस्त लग रही थी. और फिर वह जब सोफे पर बैठी तो बड़ी बेतकलूफ़ी के साथ बैठी जैसे कि, वह अधलेटी सी हो. और फिर उसके ऐसे बैठने से उसकी साड़ी का आँचल नीचे गिर गया था और उसके विशाल गोरे बब्स उसका ब्लाउज फाड़कर बाहर आने को बेताब हो रहे थे. और फिर करीब 2 से 3” की उनके बीच की गहराई भी दिख रही थी।

और फिर दो गिलासों में मैं शरबत ले आया और फिर एक गिलास उसको पकड़ा कर मैं भी उसके सामने ही बैठ गया था. और फिर हम इधर–उधर की बातें करने लग गए थे. मगर मेरा सारा ध्यान तो बार–बार उसके उठे हुए बब्स पर जा रहा था. और वह भी इस बात को बड़ी अच्छी तरह से जान रही थी. और वह भी जैसे मेरी इस बात का मज़ा ले रही थी कि, मैं उसके हुस्न की मन ही मन प्रशंसा कर रहा था. और फिर बातें करते–करते वह मुझसे बोली कि, क्या आपके घर में आने वालों को सिर्फ़ शरबत ही मिलता है?

मैं :– आप हुक्म तो करो कि, आप क्या लेना पसंद करेंगी? घर में सब कुछ मौजूद है।

सुषमा :- अच्छा, घर में क्या वोडका या कोई फिर और कोई ड्रिंक है?

मैं :– हाँ जी, बिल्कुल है।

और फिर यह कहकर मैं उठा और घर के बार से वोडका की बॉटल और दो गिलास और खाने का कुछ सामान ले आया. और फिर वोडका पहला पेग तो उसने ऐसे पिया कि, जैसे कि वह बहुत ही प्यासी हो और फिर 2–3 पेग पीकर मुझसे बोली कि, आप इतनी दूर क्यों बैठे हो, इधर आओ, और मेरे पास बैठो. और फिर मैं थोड़ा सा सकपका गया था। और फिर मैंने थोड़ा डरते हुए उससे बोला कि, नहीं मैं यहीं पर ठीक हूँ।

सुषमा :- पर मैं ठीक नहीं हूँ।

और फिर यह कहकर वह सीधी होकर बैठ गई थी. और फिर जैसे कि वह अपने साइड में मेरे बैठने के लिए जगह बना रही हो. और उसके हिलने से उसका रुमाल नीचे गिर गया था. और फिर जब वह उसको उठाने के लिए नीचे झुकी तो पहले तो मेरी आँखें तो उसके चेहरे पर ही गड़ी हुई थी. लेकिन फिर जब वह झुकी, तो उसके बब्स का एक बहुत ही खुला हुआ नज़ारा मेरी आँखों के सामने आ गया था. जिसे मैंने अपनी आँखों के रास्ते से अपने मन में समा लिया था।

सुषमा :- ऐसे क्या देख रहो हो, रणजीत जी?

तो फिर मैंने अपनी आँखें वहाँ से हटा ली और फिर मैं उससे बोला कि जी, कुछ भी तो नहीं।

सुषमा :– आप तो शरमाते बहुत है, अगर आपको कुछ देखना है तो आराम से मेरे पास आकर बैठो और देखे लो मुझे बिलकुल भी बुरा नहीं लगेगा।

उसके इस बयान से मेरे अन्दर तो उथल–पुथल मच गई थी, और फिर मैं सोचने लगा था कि, आज यह क्या करने आई है, क्या यह मुझसे चुदवाना चाहती है?

और फिर मेरी तरफ से कुछ ख़ास प्रतिक्रिया होती ना देखकर वह उठी और फिर वह बिल्कुल मेरे बगल में आकर बैठ गई थी और फिर वह मुझसे बोली कि, देखो समधी जी मैं एकदम सच कहती हूँ कि, जिस दिन से मैंने आपको देखा है तब से ही मैं तो आपके ऊपर मर मिटी हूँ, और आज जाकर वह मौका मिला है जहाँ मैं अपने दिल की हसरत पूरी करना चाहती हूँ. और मैं यह भी जानती हूँ कि, आप भी मुझे बहुत पसन्द करते हो. और क्या आज आप मेरा साथ दोगे? दोस्तों मेरे तो जैसे हलक में ज़ुबान ही नहीं रह गई हो, बड़ी मुश्किल से मैंने उसको कहा कि जी, मैं आपके साथ ऐसा कैसे कर सकता हूँ, हम तो लड़की वाले है। तो फिर वह तपाक से बोली कि, अरे भाड में जाए लड़की वालों की माँ की चूत यहाँ मैं आपसे क्या बात कर रही हूँ और आप पता नहीं क्या कह रहे है? दोस्तों मुझको बड़ी हैरानी हुई उनके मुहँ से गाली सुनकर।

सुषमा :– देखो अगर दिल है तो बोलो, नहीं तो रहने दो और मैं यहाँ से चुप-चाप चली जाती हूँ।

अब दिल तो मेरा भी कर रहा था, और फिर मैंने उसको कहा कि देखिए, आप यहाँ से जाओ मत, मगर मेरे लिए यह बड़ा अजीब है।

सुषमा :- अरे! मुझे औरत होकर अजीब नहीं लग रहा और आप मर्द होकर शरमा रहे हो. सच बताओ कि, अगर मैं आपको खुली चूत दूँ तो आप मेरे साथ क्या करोगे? मान जाओगे या इनकार कर दोगे?

मैं :- देखो सुषमा, तुम जैसी हसीन औरत के न्योते को तो कोई बेवकूफ़ ही ठुकराएगा, मगर मुझे अपनी बच्ची की भी चिंता है. नहीं तो मैं तो कब से तुमको दिल ही दिल में चाहता हूँ।

सुषमा :- तो फिर क्यों ना आज दो चाहने वालों के मन की मुराद पूरी हो जाए? और फिर यह कहकर उसने अपने ब्लाउज के बटन खोलने शुरू कर दिए थे. और फिर उसने झट से अपना ब्लाउज उतारकर फैंक दिया था और फिर खड़ी होकर उसने अपनी साड़ी और पेटीकोट भी उतार दिया था. और फिर अब वह मेरे सामने सिर्फ़ अपनी ब्रा और पैन्टी में ही रह गयी थी। दोस्तों, अब तो मेरे लिए और भी मुश्किल हो रहा था. और फिर भी मैं खड़ा हुआ और उठकर उसको अपनी बाहों में भर लिया था। उसके मेरी बाहों में आते ही उसने मेरा सिर नीचे को किया और मेरे होठों पर अपने होंठ रख दिए थे। और फिर तो मैं भी उस पर टूट पड़ा था और मैंने बिना किसी हिचकिचाहट के उसके होठों को चूसना शुरू कर दिया था. और फिर उसने भी मेरी पेन्ट के ऊपर से ही मेरा लंड पकड़कर सहलाना शुरू कर दिया था. और फिर जब मेरा लंड थोड़ा सा तन गया था, तो वह मुझसे बोली कि, अब आप अपना लंड बाहर निकालो मुझे उसको चूसना है।

मैं :– अरे! यार तुम तो बहुत खुला बोलती हो, अगर बोलने में इतनी तेज हो. तो थोड़ी तेज़ी अपने तेवर में भी दिखा दो, और खुद ही निकालकर चूस लो।

और फिर वह झट से नीचे बैठी और मेरी बेल्ट खोली, और फिर उसने मेरी पेन्ट को खोलकर उसके साथ मेरी अंडरवियर को भी नीचे उतार दिया था और फिर वह मेरे लंड को अपने हाथ में पकड़कर बोली कि, आप पर तो उम्र ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया था. वरना अब तक मैंने जीतने लौड़ो की पेन्ट को उतारा है, वह मुझको खड़े ही मिले है, और वह भी एकदम तने हुए। उसकी बात को सुनकर मुझको थोड़ी सी शरम सी महसूस हुई. मगर फिर भी मैंने खुद को संभालकर उससे कहा कि अरे, यह तो रूठा पड़ा है और यह कहता है कि, आंटी मुझको अपने प्यारे होठों में लेकर चूसे और मुझे प्यार करे, तभी मैं खड़ा होऊँगा। और फिर वह मेरी बात पर हँसी और फिर मेरे लंड को अपने मुहँ में लेकर चूसने लगी. और फिर तब तक मैंने अपने बाकी कपड़े भी उतार दिए थे और मैं पूरी तरह से नंगा होकर सोफे पर बैठ गया था. और वह मेरे पैरों में नीचे फर्श पर बैठकर मेरे लंड को चूसने लगी. और फिर मैंने उसकी ब्रा और पैन्टी को भी उतार दिया था. साली के बदन पर कहीं भी एक बाल भी नहीं था. उसने अपने सारे बदन को बहुत अच्छी तरह से वेक्स करवाया हुआ था. एकदम गोरा और चिकना बदन था उसका, जैसे किसी 16 साल की कमसिन लड़की का हो. उसके चूसने से मेरा लंड भी अब तनकर लोहा हो गया था। जब वह मेरा लंड को चूस चुकी थी, तो मैंने उसको पूछा कि, क्या तुम मुझसे अपनी चूत को चटवाना पसन्द करोगी?

सुषमा :- हाँ क्यों नहीं, मुझको तो चूत चटवाना बहुत ही ज्यादा पसन्द है. लेकिन अभी तो मैं चुदवाने के मूड में हूँ. पहले तुम मुझको अच्छे से चोद दो. चूत चटवाने का प्रोग्राम दूसरी पारी में देखेंगे।

मैं :- मतलब कि, तुम मुझसे दो बार अपनी चुदाई करवाओगी? मैंने थोड़ा सा हैरानी जाहिर करते हुए उससे पूछा।

सुषमा :- क्यों, एक औरत को दो बार चोदने का दम नहीं है क्या तुम्हारे अन्दर?

अब तो बात मर्दानगी पर आ गयी थी तो मैंने उससे कहा कि नहीं, दम तो बहुत है. तुम जितनी बार कहोगी, मैं तुमको उतनी बार ही चोदूंगा. तुम तो मुझको यह बताओ कि, तुमने यह चुदने का प्रोग्राम कैसे बनाया?

सुषमा :– पहले लंड तो डालो, क्या सारी बातें पहले ही करनी है?

और फिर मैंने झट से अपने लंड को उसकी चूत पर रखा और अन्दर डाल दिया और धीरे–धीरे फिर मैं उसको चोदने लगा. उसने अपनी बाहों और टाँगों के घेरे में मुझको जकड़ लिया था।

सुषमा :- आपको पता है कि, मेरी बचपन से यह आदत रही है कि, जिस चीज़ को भी मैं पसन्द करती हूँ, उसको मैं हर हाल में हासिल करके रहती हूँ।

मैं :– अच्छा तुम मुझको यह बताओ कि, मुझ पर तुम्हारा दिल कब और कैसे आया?

सुषमा :- जिस दिन से हम रिश्ता लेकर आपके घर आए थे. मैंने तुमको देखकर तभी सोच लिया था कि, रिश्ता हो या ना हो मगर मैं एकबार तुम्हारा लंड ज़रूर लूँगी।

और फिर उसने मेरे होठों को चूमकर कहा. मुझे उसकी बात को सुनकर हँसी आ गई थी और उसने मुझसे पूछा कि, तुम हँसे क्यों?

मैं :– बस ऐसे ही मन में एक विचार आ गया था।

सुषमा :- बताओ ना, क्या?

मैं :- बुरा तो नहीं मनोगी ना?

सुषमा :- बिल्कुल नहीं।

मैंने :- मेरे मन में ऐसे ही ख़याल आया कि, अगर तुम्हारे बेटे ने मेरी बेटी को चोदा तो मैंने भी उसकी माँ चोद दी।

और फिर तो यह बात सुनकर वह भी खिलखिलाकर हँस दी और बोली कि, यह बात तुमने मेरे मतलब की करी है. जानते हो मुझको मर्दों की तरह गालियाँ देने में और मर्दों की तरह खुल्ला बोलने में और मर्दो के साथ खुल्लम–खुल्ला होने में बड़ा मज़ा आता है. और फिर तो मैंने भी उससे कह दिया कि, तो फिर यहाँ कौन सा तेरी गांड में लौड़ा घुसा हुआ है. तुझको जो भी तेरी माँ चुदवानी है यहाँ पर चुदवा ले. और फिर मेरी बात को सुनकर वह भी बहुत खुश हो गई थी और फिर वह मुझसे कहने लगी कि, ले पहले मेरी जीभ को चूस साले कुत्ते, और फिर मैं तुझको बताती हूँ कि, मुझको कैसे चुदवाना पसन्द है. और फिर मैंने उसकी जीभ को अपने मुहँ में लेकर चूसा और फिर मैं उसके होठों पर लगी सारी लिपस्टिक को भी चाट गया. दोस्तों नीचे से चुदाई भी चल रही थी, और ऊपर से चुसाई भी मगर फिर मैंने नीचे से अपनी चुदाई की स्पीड बड़ा दी थी तो वह भी मेरा पूरा साथ नीचे से अपनी कमर उठा-उठाकर दे रही थी, और वह यह कहती भी जा रही थी कि, चोद रे… चोद दे… हरामी….

हाँ नितेश से मेरा बदला लेना तो बनता ही है, उसने मेरी फूल सी बच्ची को बड़ी ही बेदर्दी से रौंदा होगा।

सुषमा :- जानते हो, उनकी सुहागरात पर मैंने तुम्हारी बेटी की हल्की–हल्की सी चीखें अपने कमरे तक सुनी थी।

मैं :- अच्छा तो उसकी माँ की चीखें भी मैं उनके कमरे तक पहुँचा देता हूँ. और फिर यह कहकर मैंने उसको बड़ी ही बेदर्दी से चोदना शुरू कर दिया था।

मगर वह भी बड़ी ढीट थी, मेरी पूरी ताक़त से हो रहे हर वार को वह बड़ी ही खुशी से सह रही थी. मगर वह ज़्यादा देर इन सब को ना सह सकी और वह मुझसे और भी ज़्यादा कस गई थी. और फिर हम दोनों के बदन पर आया पसीना एक दूसरे में घुल मिल गया था. और फिर उसने अपनी लम्बी सी जीभ बाहर निकाली जिसको मैंने अपने मुहँ में ले लिया था और चूसने लग गया था और फिर उसके साथ ही मैं भी उसकी चूत में ही झड़ गया था. और फिर उसने अपनी बाहों और टाँगों के घेरे खोल दिए थे और फिर वह भी बिल्कुल चित होकर लेट गई थी. और फिर मैं भी उसके ऊपर से उतरा और उसकी साइड में ही नीचे गिर गया था. और फिर करीब 5–7 मिनट तक हम वैसे ही लेटे रहे और फिर हम दोनों उठकर बाथरूम में गये और वहाँ पर हमने अपने आप को साफ किया।

सुषमा :- अरे! समधी डार्लिंग एक-एक पेग और हो जाए।

मैं :- हाँ क्यों नहीं समधन डार्लिंग ज़रूर, और फिर तुमको इस पेग के बाद एक कुत्तिया की तरह चुदना भी तो है।

और फिर उसने मेरे लंड को पकड़कर एक झटका दिया और बोली कि, मुझे भी आज तक सिर्फ़ मर्दों ने चोदा है, आज मैं भी किसी कुत्ते आदमी से चुदवाना चाहती हूँ। और फिर वह यह कहकर मुझसे चिपक गई थी, और उस दिन हम दोनों ने खूब जमकर चुदाई करी थी. और उसके बाद तो हम दोनों ही थककर नंगे ही एकदूसरे से चिपककर सो गए थे, और पता नहीं हमको कब नींद आ गई थी. और फिर हमारी नींद शाम के 7 बजे खुली तो वह झट से खुद को साफ़ करके अपने घर चली गई थी।

दोस्तों उस दिन के बाद तो हम दोनों को जब भी चुदाई का मौका मिलता था तो हम उसको नहीं छोड़ते थे और खूब जमकर चुदाई करते थे।

धन्यवाद कामलीला के प्यारे पाठकों !!