पड़ोसी को पटाया और चूत को चुदवाया

हाय फ्रेंड्स, मेरा Antarvasna नाम शिखा है और मेरी उम्र 24 साल की है और मेरा फिगर 34-28-36 का है. और कामलीला डॉट कॉम पर मैं भी बहुत सारी चुदाई की कहानियाँ पढ़ती हूँ. और उनको पढकर मेरा भी मन करता था कि, मैं भी किसी मोटे लंड से अपनी चूत को शान्त करूँ. दोस्तों मैं दिन में लगभग दो बार अपनी चूत में ऊँगली करती थी लेकिन फिर भी मेरी चूत शान्त नहीं होती थी और मेरी चूत की प्यास इतनी बढ़ गई थी कि, अब मुझसे बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा था. और अब तो मैंने ठान लिया था कि, मैं किसी ना किसी को ज़रूर पटाऊँगी और उससे ही अपनी चूत को चुदवाऊँगी, और अपनी चूत की प्यास भी बुझवाऊँगी।

हाँ दोस्तों जब मैंने कामलीला डॉट कॉम की वेबसाइट को खोला तो उसकी एक कहानी में एक लड़का था जो कि अभी कुंवारा था उसको एक लड़की मिल जाती है. लड़की के पहले भी बहुत सारे बॉयफ्रेंड रह चुके है और वह उनसे बहुत बार चुदवा भी चुकी है. उस लड़के ने उससे अपने प्यार का इज़हार भी कर दिया था. और उस लड़की ने भी तुरंत हाँ भर दी थी. और फिर कुछ दिनों के बाद वह दोनों रोज ही चुदाई करने लगे थे. दोस्तों कहानी में तो यह सब ठीक है पर वास्तविक जीवन में यह सब होना थोड़ा सा मुश्किल है. अगर आप भी मेरी इस बात से सहमत होंगे और वह भी अगर लड़की से किसी लड़के को अपने प्यार का इज़हार करना हो तो, यह काम तो असंभव ही समझ लो।

दोस्तों लड़कियों का स्वाभाव ही शर्मीला होता है और मेरा भी कुछ वैसा है. मेरे घर के पास ही में एक लड़का रहता था जिसका नाम अमित था. और मैंने भी सोचा कि, क्यों ना उसको पटाया जाए. पर वह मुझसे थोडा बड़ा था शायद. और इसलिये उससे मैंने बहुत कम ही बातें करी थी. पर मैंने बहुत बार देखा था कि, वह अपने फ़ोन पर घंटो तक बातें करता था. और फिर मैं समझ गई थी कि, वह किसी लड़की से ही बातें कर रहा होगा. लेकिन फिर अचानक से एक दिन मैंने देखा कि, वह अपने फोन पर किसी से गुस्से में बात कर रहा था. और फिर उसने अचानक से अपने फोन को नीचे ज़मीन पर पटकने वाला था कि, उसने मुझे देख लिया और फिर उसने अपना फोन नहीं पटका. और फिर जब वह मेरे थोड़ा करीब आया तो मैंने उससे ऐसे ही पूछ लिया।

मैं :- आप क्यों इस बेचारे फोन की जान लेने वाले थे?

अमित :- कुछ नहीं बस ऐसे ही।

मैं :- बिना बात के तो कोई फोन नहीं तोड़ेगा।

अमित :- किसी से झगड़ा हो गया था इसलिए गुस्सा आ गया।

मैं :- किससे?

और फिर वह कुछ नहीं बोला था.

मैं :- ठीक है अगर आप नहीं बताना चाहते हैं तो कोई बात नहीं।

अमित : – दीपा से।

मैं :- यह दीपा कौन है।

अमित :- वही जो तुम्हारी क्लास में पढ़ती है।

मैं :- क्या? वह तो कहती थी कि, उसका कोई बॉयफ्रेंड नहीं है।

अमित :- झूठ बोलती है साली, उसके दो और बॉयफ्रेंड है. अभी एक घंटे पहले ही मैंने उसे उसके साथ सिनेमा हॉल में किस करते हुए पकड़ा था. साली सब लड़कियाँ कमीनी होती है।

मैं :- नहीं जी सब कमीनी नहीं होती है. कोई अच्छी भी होती है. पर आप तो बहुत स्मार्ट हो आपको तो दूसरी और कोई भी मिल जाएगी।

अमित :- अब मुझे इनके चक्कर में पड़ना ही नहीं है।

और फिर हमारी बातें ऐसे ही कुछ देर तक चली. और फिर उसने मुझसे पूछा, तुम्हारा कोई बॉयफ्रेंड है? तो मैंने कहाँ कि, जी नहीं जी।

अमित :- सच में, कहीं तुम झूठ तो नहीं बोल रही हो?

मैं :- नहीं, मैं झूठ नहीं बोलती हूँ।

अमित :- तुम तो कमाल की दिखती हो यार, तुम पर तो बहुत सारे लड़के लाइन मारते होंगे।

मैं :- हाँ पर मुझे रोड पर छेड़ने वाले लड़के पसंद नहीं है और पीछा करने वाले भी. मैं तो चाहती हूँ कि कोई अच्छा सा लड़का मेरा बॉयफ्रेंड हो. पर आप तो जानते ही हो की आज कल के जमाने में एक अच्छा लड़का मिलना कितना मुश्किल है।

अमित :- नहीं यार, बस ढूंढने की देर है. देखो कहीं आस पास ही कोई अच्छा सा लड़का मिल जाए तुमको।

और फिर अब मैं समझ गई थी कि, वह अपनी ही बात कर रहा है. मतलब अब मेरा काम हो गया था. और फिर मैंने मन ही मन दीपा को थैंक यू. बोला।

फिर ऐसे ही हम लोग बातें करने लग गए थे. और अब तो हमको जब भी मौका मिलता था तो हम लोग बातें करने बैठ जाते थे. और फिर एक दिन उसने मेरा मोबाइल नम्बर माँगा, तो मैंने उसको इनकार नहीं किया और अपना नम्बर उसे दे दिया. उस दिन रात में करीब 10 बजे जब सब लोग सो गये थे तो फिर उस समय मैं अपने कमरे में अकेली सेक्स की कहानियाँ पढ़ रही थी कि, तभी उसका फ़ोन आया. मैं पहली ही आवाज़ में पहचान गई थी कि, यह तो वही है. और फिर हम लोग घंटो तक फोन पर बातें करने लग गए थे. और फिर उसने सेक्स की बातें भी करनी शुरु कर दी. और मैंने भी उसे मना नहीं किया था. और फिर उसने मुझसे पूछा कि, तुमने कभी सेक्स किया है?

मैं :- नहीं तो.

अमित :- मेरे साथ करोगी?

मैं :- हाँ.

अमित :- ठीक है तो कल रात को 9 बजे अपने घर के पीछे मिलना।

और फिर मैंने उसको हाँ में जवाब दिया और फ़ोन काट दिया। और फिर अगली रात को ठीक 9 बजे मैं अपने घर के पीछे गई. वहाँ पर जगह भी थोड़ी सी ही थी और वहाँ पर कोई आता-जाता भी नहीं था. अमित पहले से ही वहाँ पर था पर अंधेरे की वजह से वह साफ दिखाई नहीं दे रहा था. और फिर मैंने एक गाना गाया ताकि वह जान सके कि, मैं ही हूँ. तो फिर उसने मेरा नाम पुकारा. तो फिर मैंने हाँ कहाँ. और फिर उसने झट से मुझे अपनी बाहों में जकड़ लिया और फिर उसने मेरे होठों पर अपने होठं रख दिए थे. दोस्तों पहली बार किसी के होठों का स्पर्श पाकर मेरे तो रोंगटे ही खड़े हो गये थे, और मेरा पूरा बदन भी काँप उठा था. पर मुझे मज़ा भी आ रहा था. और फिर कुछ देर तक वह वैसे ही मेरे होठों को अपने होठों में दबाकर के चूसता रहा और फिर मैं भी उसका साथ देने लग गई थी. और फिर उसने मुझे पलट दिया और मुझे ज़ोर से दबोच लिया था. और उसका लंड खड़ा हो गया था और वह अब मेरी गांड पर लग रहा था. और फिर वह मेरी गर्दन पर किस कर रहा था और फिर वह अपने हाथों से मेरे बब्स को भी दबा रहा था. क्या बताऊँ दोस्तों उस समय मेरा तो बुरा हाल था. मेरा मन तो कर रहा था वह जल्दी से मेरी चूत में अपना लंड डाल दे और फिर मुझको तब तक छोड़े नहीं जब तक कि, मैं शान्त ना हो जाऊँ. दोस्तों और फिर मैं सोचने लगी कि, कब तक मैं कहानियाँ पढ़कर ही अपनी ऊँगली से चूत को चोदती रहूंगी।

और हम लोगों को किसी का डर भी नहीं था क्योंकि वहाँ पर हम लोगों के अलावा और कोई भी नहीं आने वाला था. मैं उस समय लाल कलर की चेक शर्ट पहने हुई थी. और उसने मेरी शर्ट के सारे बटन खोल दिए थे. और उसने मेरी ब्रा को भी नीचे सरका दिया था. अब वह मेरे मस्त नंगे बब्स को अपने हाँथो से दबाने लगा था. और फिर उसने एक बब्स को अपने मुहँ में भर लिया और चूसने लगा और एक को अपने हाँथो से दबा रहा था. और फिर उसने दूसरे बब्स को चूसना शुरु किया. मैं इतनी ज़्यादा गरम हो गई थी कि, अगर उस समय कोई मेरी चूत में एक साथ 2-3 लंड भी डाल दे तो भी मैं उससे चुदवा लूँ. और फिर पाँच मिनट तक ऐसे ही मेरे बब्स को चूसने के बाद उसने अपनी पेन्ट में से अपना लंड निकाला और फिर मेरे हाथों में पकड़ा दिया था. दोस्तों मैंने पहली बार किसी का लंड अपने हाथों में लिया था. और फिर मैं भी धीरे-धीरे आगे पीछे करके उसके लंड को सहलाने लगी. और वह फिर से मुझे किस करने लगा और मैं अब उसके लंड को जोर-जोर से आगे पीछे करने लगी. और फिर कुछ देर के बाद उसने मुझे फिर से पलट दिया और ज़ोर से दबोच लिया. इसबार तो उसका लंड मेरी गांड में पहले से ज़्यादा घुस रहा था. और फिर तुरन्त ही उसने अपना एक हाथ मेरी पैन्टी में डाल दिया और फिर उसने मेरी चूत को रग़ड दिया था. उसके किस करने से और बब्स चूसने से मेरी चूत पहले से ही गीली हो चुकी थी. और पकोडे की तरह फूल भी गई थी. और फिर उसके रगड़ने से तो मेरी आह… निकल गई थी. और फिर वह कुछ देर तक मेरी चूत से खेलता रहा और फिर उसने मेरी जीन्स का बटन खोलकर मेरी पैन्टी और जीन्स दोनों को एक साथ निकाल दिया था. मैं अब नीचे से बिल्कुल नंगी थी. और फिर उसने मुझे ज़मीन पर लेटाया. वहाँ की ज़मीन साफ नहीं थी पर मैं भी पूरे मूड में थी. उसने मुझे लेटाकर के मेरी टाँगे फैला दी थी. और फिर वह अपना लंड मेरी चूत पर रखकर के ऊपर से नीचे तक रगड़ने लगा था. जिससे मेरे मुहँ से मदहोशी भरी आहें निकलनी शुरु हो गई थी. दोस्तों ये मेरी इंतेहा की आख़िरी हद थी. और अब मुझसे बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं हो रहा था. और मैं भी अपनी गांड को उठाकर उसका लंड अपनी चूत में लेने की कोशिश करने लगी थी।

दोस्तों यह कहानी आप कामलीला डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।

वह अब बात को समझ गया था और फिर एक ही झटके में उसने अपना आधा लंड मेरी चूत में घुसा दिया था. जिससे मेरी जोर की चीख निकल गई थी. और उसने मेरे मुहँ पर अपना हाथ रख दिया और फिर से एक और झटका मारा. और अब उसका पूरा लंड मेरी चूत में घुस गया था. और मैं दर्द से तड़पने लगी थी। मुझको तो ऐसा लग रहा था कि, आज तो मैं मर ही जाऊँगी, मेरी चूत दर्द से फटी जा रही थी. दोस्तों मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि, पहली बार चुदवाने पर इतना दर्द होता है. अगर पहले मालूम होता तो कभी नहीं चुदवाती. और उधर वह जालिम अपने लंड से मेरी चूत में झटके मारे जा रहा था। और मैं भी बहुत हिम्मत करके उस दर्द को सहन कर रही थी. और फिर लगभग 5-7 मिनट के बाद वह दर्द कम हो गया और पहलीबार मुझको अपनी चूत की चुदाई का आनन्द आया. दोस्तों वह आनन्द अपने हाथों से चूत में ऊँगली करने के आनन्द से लाखों गुना ज़्यादा मजेदार था. और फिर मुझे बहुत मज़ा आने लगा था और मैं भी अपनी गांड को उठा-उठाकर के उससे चुदवाने लगी थी और वह भी अपनी पूरी ताकत से झटके लगा रहा था और मैं भी किसी लंड की भूखी रंडी की तरह अपनी चूत उठा-उठाकर के उसका लंड अपनी चूत के अन्दर ले रही थी. और फिर कुछ देर तक ऐसे ही चोदने के बाद उसने मुझे खड़ा किया।

और खड़ा होते ही फिर से मुझे थोड़ा दर्द का अनुभव हुआ पर उस जालिम को क्या पता था और फिर उसने मुझे घोड़ी के जैसे झुका दिया था और फिर उसने पीछे से अपना मोटा लंड मेरी चूत में डाल दिया था. और एक बार फिर से जमकर के वह मेरी चुदाई करने लगा था. और मैं भी अपनी गांड को हिला-हिलाकर के उसका लंड अपनी चूत में लेने लगी थी. और फिर जल्द ही एक तेज झुरझुरी के साथ मेरा पानी निकल गया था. और फिर जब थोड़ी देर के बाद उसका भी पानी निकलने वाला था तो उसने अपना लंड मेरी चूत से बाहर निकाला और मेरे हाँथों में पकड़ा दिया था। और फिर मैं उसके लंड को आगे-पीछे करके हिलाने लगी थी और फिर कुछ ही देर के बाद उसका भी पानी निकल गया था. और मेरे पैर उस समय लड़खड़ा रहे थे. और फिर हम एकदूसरे से चिपककर लेट गए थे और फिर 30 मिनट के बाद उसने मेरे कपड़े पहनने में मेरी मदद करी और मुझे एक गोली का पत्ता देते हुए कहा कि, इसको खा लेना इससे तुमको दर्द में आराम मिल जाएगा. दोस्तों शायद वह पूरी तैयारी के साथ आया था. और फिर वह अपने घर चला गया और मैं भी अपने घर आ गई थी और घर आकर मैंने वह दवाई खा ली थी. और फिर कुछ ही देर के बाद उसका फ़ोन आया।

अमित :- जानेमन.. मज़ा आया ना ?.

शिखा :- मैं तो मर ही गई थी।

वह :- हाँ थोड़ा दर्द तो होता ही है मुझको पता है, पर मज़ा तो आया ना।

प्रिया :- हाँ.. सच में बहुत मज़ा आया।

वह : – तो फिर कल तैयार रहना कल मैं तुम्हारी गांड भी मारूँगा।

उसकी बात सुनकर मैं हँसने लगी और वह भी हँसने लगा। तो दोस्तों फिर यह चुदाई का सिलसिला चल पड़ा था अब हमें जब भी मौका मिलता तो मैं तो खूब जमकर के उसका लंड अपनी चूत में लेती थी। और वह भी मेरी चूत में रात को पिचकारी छोड़ता रहता था।

हाँ तो मेरे प्यारे पाठकों.. हाँ मैं आपसे ही बात कर रही हूँ आपका लंड तो खड़ा ही हो गया होगा इस कहानी को पढ़कर. पर मुझे तो आपका नाम भी नहीं पता।

धन्यवाद कामलीला के जोशीले पाठकों !!