बुआ की जवानी ने मेरा शोला भड़काया

हाय फ्रेंड्स, मेरा नाम Antarvasna विक्रम है और मेरी उम्र अभी 24 साल की है, मैं जमशेदपुर का रहने वाला हूँ. दोस्तों आज मैं आप सभी को मेरी चुदाई की कहानी बताने जा रहा हूँ जिसमें मैंने अपनी बुआ के साथ जबरदस्त चुदाई करी थी. और यह मेरी बुआ की चुदाई की बिल्कुल सच्ची कहानी है, और यह तब की कहानी है जब मैं कॉलेज के पहले साल में पढ़ता था, और तब मेरी उम्र 22 साल की थी. दोस्तों यह तो हो गया मेरा परिचय अब मैं आप सभी को मेरी बुआ के बारे में बता दूँ।

दोस्तों वह मेरे पापा की चचेरी बहन है मतलब मेरे पापा के दूर के रिश्ते के चाचा की बेटी और मेरी भी चचेरी बुआ है. उसकी लम्बाई 5.6 फुट की है, उनके चेहरे का रंग गेहुँवा सा है और उनके बब्स भरे हुए है और गांड भी उभरी हुई है. कुल मिलाकर उनको देखकर कोई भी मूठ मार सकता है. उनका घर और हमारा घर पास-पास में ही था, मेरी उस बुआ की उम्र करीब 28 साल की थी, उन बुआ का एक छोटा भाई और उनके मम्मी–पापा उनके साथ में ही रहते थे, और मेरा भी उन बुआ के घर पर बहुत आना-जाना था।

दोस्तों अब मैं अपनी कहानी पर आता हूँ जो कुछ इस तरह से है।

मैं अपने स्कूल से आकर बहुत बार उन बुआ के घर चला जाता था और खाना भी वहीं ख़ाता था, मेरी बुआ के घर में चूल्हा था खाना बनाने के लिए, गैस भी था पर वह ज्यादातर चूल्हे पर ही काम करते थे. चूल्‍हे में आग लगाने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है और बुआ का रोज का यही काम था, वह बहुत परेशान रहती थी आग जलाने के लिए, बुआ रोज ही सूखी लकड़ी लेकर आती थी और फिर बैठकर लकड़ी के छोटे-छोटे टुकड़े करती और फिर चूल्‍हे में रखकर उसमें आग लगाने की कोशिश करती थी. और उनके इन सब कामों में मैं अपनी बुआ की मदद करने पहुँच जाता था, और ऐसा मैं इसलिये भी करता था क्योंकि चूल्हा जलाते समय बुआ अपनी चुन्नी उतार देती थी और चूल्‍हे की आग जलाने के लिए नीचे झुककर काफ़ी देर तक चूल्‍हे में फूँक मारनी पड़ती थी, और फिर मुझे वहाँ जो नज़ारा देखने को मिलता था वह तो आप समझ सकते है, बुआ जैसे ही नीचे झुकती थी तो बुआ के बड़े-बड़े बब्स उनके कपड़े फाड़कर बाहर आने को तैयार रहते थे और मेरा मन तो करता था कि, अभी जाकर उनके दोनों बब्स को दबा और अपने मुहँ में लेकर के आम की तरह चूस-चूसकर उनका सारा रस पी जाऊँ।

मगर मेरी ऐसी किस्मत कहाँ थी. मैं तो बस अपने मन ही मन में उस जन्नत के नज़ारे को लिए हुए बुआ के बाथरूम में तुरन्त ही जाकर मूठ मार लेता था. दोस्तों ऐसे ही एक दिन की बात है जब बुआ की भी एम.ए. की परीक्षा थी और मैं उनके घर पर पहुँचा वही नजारा देखने के लिए तो मुझको पता चला कि, बुआ अगले 15 दिन तक खाना नहीं बनाएगी, तो मेरा तो लंड ऐसे हो गया जैसे कि, उसको किसी ने लट्ठ मार दिया हो ऐसा लगा मुझको. और फिर मैंने तुरन्त ही बाहर का रास्ता पकड़ा और बाहर जाने लगा तो पीछे से आवाज़ आई कि, “आज देखना नहीं है क्या? तो फिर मुझको तो वह आवाज़ सुनकर जैसे कोई करंट सा लग गया हो, और फिर मैं पीछे पलटा तो वहाँ पर मेरी बुआ खड़ी-खड़ी हँस रही थी. और फिर मुझे देखकर उसने मुझे बड़े प्यार से अपनी तरफ बुला लिया. और फिर मैं भी तुरन्त ही किसी भंवरे की तरह उनकी तरफ चल दिया था. और मैं मन ही मन सोच भी रहा था कि, आज तो मेरी लॉटरी लग गई शायद. मगर जैसे ही मैं बुआ के पास गया उसने मेरे साथ ऐसा बर्ताव किया कि, जैसे उसने कुछ कहा ही नहीं हो. और फिर उसने मुझे अपने गले से लगा लिए, और अब मेरा चेहरा बिल्कुल बुआ के बड़े-बड़े बब्स के बीच में ज़ोर से दबा हुआ था और मैं उसी में खुश था और मैं उस जन्नत का पूरा मजा ले रहा था. और फिर मैंने अपना चेहरा पूरी तरह से बुआ के बब्स में गाड़ दिया था. और मैंने कसकर बुआ को उनकी कमर से पकड़ रखा था. और बुआ बस मेरे बालों को सहला रही थी, और धीरे-धीरे मेरे चेहरे को अपने बब्स पर दबा रही थी, मगर वह यह सब ऐसे कर रही थी कि, जैसे उसको कुछ पता ही ना हो कि, यह सब क्या हो रहा है. और फिर मुझको मेरे चेहरे पर बुआ की ब्रा का एहसास हो रहा था, और बुआ के निप्पल कभी मेरी आँख में तो कभी मेरे गालों पर चुभ रहे थे, और मैं तो उस जन्नत की सैर कर रहा था. और मुझको तो ऐसा लग रहा था कि, बस अभी बुआ को उठा लूँ और उनका कुर्ता फाड़कर उनके दोनों बब्स को अपने मुहँ में डालकर खा जाऊँ. मगर यह नहीं हो सका. और यह सब करीब 10-15 मिनट तक चलता रहा और फिर थोड़ी देर में बुआ के भाई की आवाज़ आने पर हम दोनों अलग हुए और मैं अपने घर चला आया और अपने घर आकर सीधे बाथरूम में जाकर मैंने बुआ के नाम की मूठ मारी. और फिर दूसरे दिन मैं फिर से बुआ के घर पहुँचा और दरवाजा खटखटाया तो किसी ने भी दरवाजा नहीं खोला. और फिर बुआ की आवाज़ आई “कौन है?” तो मैंने जवाब दिया और फिर बुआ ने आकर दरवाजा खोल दिया था. बुआ उस समय अपने बब्स के ऊपर केवल टावल लपेटकर बाथरूम से बाहर आई थी. और फिर मैं अन्दर गया और फिर मैंने अन्दर से दरवाजा बन्द कर लिया था. और फिर बुआ फिर से नहाने चली गई थी. और मैं बैठकर टीवी देखने लग गया था. और फिर थोड़ी देर में मेरा मन किया कि, शायद बाथरूम में झाँकने को मिल जाए, तो फिर मैंने एक कोशिश करी और फिर मुझको अन्दर देखने के लिये बाथरूम के गेट में काफ़ी सारे छेद मिल गये थे. और फिर मैं वहीँ पर खड़े होकर बुआ के गोरे और नंगे बदन को निहारने लगा, दोस्तों क्या चीज़ थी वह कसम से उसके तने हुए चूसने लायक बब्स, मखमली बदन, उभरी हुई गांड और बड़े-बड़े झांट के बाल, और ऊपर से पानी में भीगी हुई. वह नज़ारा मेरे तो लंड में आग लगा रहा था. और फिर मैं वहीं पर बाथरूम के बाहर खड़े-खड़े बुआ को नहाते हुए देखते हुए मूठ मारने लग गया था और फिर 5 मिनट के बाद खड़े-खड़े दर्द होने लगा तो मैं थोड़े आराम के लिए दरवाजे का सहारा लेकर बैठ गया था, और फिर मैं बैठकर ज़ोर-ज़ोर से मूठ मारने लग गया था, और फिर मेरी किस्मत देखिए जो 1 मिनट के बाद ही मेरे दबाव से बाथरूम का दरवाजा अन्दर की तरफ खुल गया और मैं नंगी बुआ के सामने लंड पकड़े हुए नीचे लेटा हुआ था. और फिर मैं तो शरम के मारे बुआ से अपनी आँख भी नहीं मिला पा रहा था. और फिर मैंने वहाँ से तुरन्त ही भागने की कोशिश करी तो बुआ ने मेरा पकड़ लिया था. और फिर मुझको तो लगा कि, आज तो मैं गया काम से. लेकिन फिर जो मुझको सुनाई दिया उस पर मुझको विश्वास ही नहीं हुआ, मुझको चोदेगा?

और फिर तो मैंने बिना कुछ बोले ही बुआ के बब्स को पकड़ लिया और फिर मैं वहीं पर बाथरूम के अंदर बुआ के रसीले बब्स का रस चूसने लग गया था. और अपने एक हाथ से दूसरे बब्स को ज़ोर-ज़ोर से मसल रहा था. और मेरे इस काम में बुआ भी मेरा पूरा-पूरा साथ दे रही थी और सिसकारियाँ भी भर रही थी उउम्म्म… आहहह…, और मुझको ज़ोर से अपनी तरफ दबा भी रही थी. मैं तो पागल सा हो गया था और किसी भूखे की तरह उनके बब्स को चूस रहा था. और फिर मैंने एकदम से बुआ की चूत में अपनी ऊँगली डाल दी थी. और फिर बुआ के मुहँ से एक आवाज़ आई कि, “अब चोद भी दो मुझे प्लीज़ आहहह… उई माआआ….

और अब मुझसे भी रहा नहीं जा रहा था. और फिर मैंने बुआ को तुरन्त ही बाथरूम की ज़मीन पर लिटा दिया था और फिर उनके पैर फैला दिए थे. और अब मैं उनके बब्स को चूसते-चूसते हुए नीचे की तरफ आया और बब्स के नीचे वाले हिस्से को चूसने लग गया था. और उधर बुआ भी लगातार सिसकारियाँ भर रही थी, और उनकी साँसें और भी तेज हो गई थी. और फिर मैं उनके पेट की तरफ आया और फिर उनके पूरे पेट पर अपनी जीभ को घुमाने लग गया था. और फिर जब मैंने उनकी नाभि के चारों तरफ जीभ घुमाई तो बुआ की साँसे और तेज हो गई थी. और फिर मैं उनके पेट के साइड में चूसने लग गया था. और तब तक बुआ बहुत गरम हो चुकी थी. और फिर मैंने उनकी झांट के बालों को पकड़कर ज़ोर से अपनी मुट्ठी में भर लिया था और खींच लिया था जिससे बुआ भी चिल्ला पड़ी थी, छोड़ो प्लीज़ छोड़ो. और फिर मैंने तुरन्त ही अपनी जीभ बुआ की चूत में डाली और फिर मैं बुआ की चूत को कुत्तों की तरह चाटने लग़ गया था. दोस्तों कसम से क्या मज़ा आ रहा था, और फिर मैं उनकी पूरी चूत को ही अपने मुहँ में लेकर चूसने लग गया था. और मेरी इस हरकत से बुआ की तो जान ही निकल रही थी. और फिर उसने अपनी टाँगे मेरी गर्दन में डाल दी थी और फिर वह मुझको ज़ोर-जोर से अपनी चूत की तरफ दबाने लगी थी. और वह लगातार ही अपनी कमर को उठा-उठाकर मुझको सिग्नल भी दे रही थी. और साथ ही वह अपनी चूत से रस भी निकाल रही थी और यह भी कहती जा रही थी कि, प्लीज… अब डाल भी दो. सच में दोस्तों अब मुझसे भी नहीं रहा गया और फिर मैंने भी अपनी पेन्ट उतार दी थी. और फिर मैं उनके सामने अपनी अंडरवियर में आ गया था. और फिर बुआ ने तुरन्त ही मेरी अंडरवियर भी उतार दी थी, और फिर वह मेरे लंड को झट से अपने मुहँ में लेकर चूसने लग गई थी. दोस्तों उस समय तो मैं किसी दूसरी ही दुनिया में था और मैं तो बस अपनी आँखों को बन्द करके बुआ के मुहँ को चोदने में लगा हुआ था. और फिर लगातार 5-7 मिनट तक चूसने के बाद में मैं उनके मुहँ में ही झड़ गया था, और बुआ ने मेरा पूरा माल पी लिया था, और तब भी बुआ ने मेरे लंड को चूसना नहीं छोड़ा था. और फिर 5 मिनट के बाद ही मेरा लंड फिर से तैयार हो गया था।

और फिर मैं अपनी प्यारी बुआ डार्लिंग को अपनी गोद में उठाकर बेडरूम में आ गया था और फिर मैंने बुआ को बिस्तर पर लिटा दिया था. और फिर मैं भी उनके दोनों पैरों को फैलाकर उनके बीच में आकर उनकी चूत में अपने लंड को डालने की कोशिश करने लगा तो थोड़ी सी दिक्कत के बाद मेरा लंड उनकी चूत के अन्दर चला था गया. और फिर थोड़ी देर रुककर उनके बब्स को चूसते हुए एक और जानदार झटका दिया और इसबार मेरा पूरा लंड उनकी चूत के अन्दर चला गया था और बुआ अपनी आँखें बन्द करके “आहहह… उहहह… उफ्फ्फ…” किये जा रही थी. और फिर मैंने अपनी चोदने की स्पीड और बढ़ाई और मैं उनको ज़ोर-ज़ोर से चोदने लगा, थप-थप और पच-पच की आवाज़ ज़ोर-ज़ोर से उस कमरे में गूँज रही थी. और बुआ भी अपनी कमर को उठा-उठाकर उस चुदाई के पूरे मजे ले रही थी ले रही थी, और लगातार आहें भी भर रही थी, आहहह… अमम्म… प्लीज़ और ज़ोर से चोदो विक्की, और ज़ोर से चोदो, आज फाड़ डालो मेरी इस चूत को, फाड़ डालो आहहह… इस्सस… और फिर 15-20 मिनट तक उस जबरदस्त चुदाई का दौर चला और फिर बुआ जोर से चीखते हुए झड़ गई थी. और फिर उसके 5 मिनट के बाद मैंने भी अपना पूरा माल बुआ की रसीली चूत में ही छोड़ दिया था।

हाँ तो दोस्तों यह थी मेरी बुआ के साथ मेरी कामलीला।

धन्यवाद कामलीला के प्यारे पाठकों !!