बॉयफ्रेंड के लंड ने तोड़ी मेरी चूत की सील

हाय फ्रेंड्स, मेरा नाम सोनाक्षी है. और मैं पटना की रहने वाली हूँ. मेरी उम्र 22 की साल है. यह मजेदार सेक्स कहानी मेरी और मेरे बॉयफ्रेंड की है. और मैं अभी कॉलेज की पढ़ाई कर रही हूँ। मेरी हाइट 5.6 मेरे फिगर का साइज़ 34-28-32 है और मैं दिखने में बहुत ही कमाल की लगती हूँ, मानो की कोई ब्लू फिल्म की हिरोइन हो. मैं जब कॉलेज जाती हूँ तो सब लड़के मुझे देखकर मेरे जिस्म के बारे में ना जाने क्या-क्या कहते है।

मेरे पापा एक कारखाने में काम करते है और मेरी माँ एक हाउस वाइफ है. मैंने मेरी कुंवारी वर्जिन चूत की सील तुडवाई मस्त और जमकर चुदाई से. मेरा एक छोटा भाई भी है. उसका नाम सुमित है. वो अभी अपनी 12वीं की पढ़ाई कर रहा है. और अभी तक मेरा कोई भी बॉयफ्रेंड नहीं था. लेकिन इस घटना के बाद वो भी मुझे मिल ही गया. उसने पहली बार में ही मुझे अपने लंड का स्वाद चखा दिया. दोस्तों इस घटना के बाद मेरा जीवन भी बिल्कुल बदल सा गया और अब ज़्यादा समय बर्बाद ना करते हुए मैं अपनी सच्ची सेक्स कहानी पर आती हूँ।

दोस्तों मैं जब कॉलेज में थी और अपने घर से दूर रहकर अपनी पढ़ाई पूरी कर रही थी, तब मेरे साथ मेरी बस में एक लड़का आता था, उसका नाम हरीश था और वो मुझसे दो साल बड़ा था. दोस्तों वैसे तो मैं अभी भी किसी से बात नहीं करती थी, लेकिन मैं उसे जानती थी क्योंकि रोज हम दोनों साथ में एक ही बस में सफ़र करते थे। एक दिन ऐसा हुआ की मैं अपना पर्स अपने घर पर भूल गयी और फिर जब बस में मैंने टिकट लेने के लिए अपने बैग में देखा तो मुझे पता चला की मैं पैसे साथ में नहीं लाई हूँ, हरीश यह सब देख रहा था और उसने उस दिन मेरे भी टिकट के पैसे दे दिए और फिर उस दिन से हम एक दूसरे से बातें करने लगे और जब मैं अपने कॉलेज के दोस्त के साथ कही बाहर घूमने जाती थी तो उसके बाद से हमने अपना-अपना मोबाइल नंबर भी एक दूसरे को दे दिया था. और फिर तो फोन पर देर रात तक बातें होने लगी. हम दोनों बहुत सारी प्यार की बातें करते थे और कई बार वो मुझे सेक्स की बातों में घंटो उल्जाए रखता था। एक बार हम साथ में फिल्म देखने के लिए चले गये और मेरी पास वाली सीट पर हरीश बैठा हुआ था और दूसरी वाली सीट पर मैं और उसके पास वाली सीट पर मेरी दोस्त प्रिया और उसका बॉयफ्रेंड बैठे हुए थे. फिर जब फिल्म शुरू हुई तो वो दोनों तो अपने में व्यस्त थे, आधे घंटे के बाद हरीश ने अचानक से मेरे हाथ पर अपना हाथ रख दिया. तो जैसे मानो मेरे शरीर में करंट सा दोड़ गया हो, लेकिन मुझे भी फिर अच्छा लगने लगा।

फिर उसके बाद वो मेरे हाथ पर अपना हाथ फेरने लगा. लेकिन पता नहीं क्यों मैं उसे मना नहीं कर सकी? और फिर उसने मुझे अपनी और खींचा और मेरे होठों पर किस किया. दोस्तों मेरा वो पहला लीप किस था. मुझे भी अब बहुत अच्छा लगने लगा और मैं भी उसका पूरा-पूरा साथ देने लगी. फिर क्या था? यह सिलसिला कुछ देर तक चलता रहा और हम ऐसे ही एक दूसरे के बहुत नज़दीक आ गये. तब उसने मुझसे शरारती मुस्कुराहट के साथ कहा कि आज मुझे तुम्हारे साथ सेक्स करना है. दोस्तों वैसे मुझे भी यही सब चाहिए था क्यूंकि मैं उसकी बातों को सुन-सुनकर उसकी तरफ पूरी तरह से आकर्षित हो चुकी थी और अब मेरी चूत भी उसके लंड के लिए तड़पने लगी थी, फिर मैंने थोड़ी देर तक सोचकर पहले उसे मना कर दिया, जिससे उसे ऐसा लगे कि मैं मना कर रही हूँ और उसके थोड़ा बहुत मनाने पर जल्दी ही मान भी गई और फिर मैंने उसे हाँ कह दिया तो उसने मुझे वही पर अपने गले से लगा लिया, फिर उसने मुझे चूमा और मेरे बब्स को कपड़ो के ऊपर से हाथ लगाकर महूसस किया और फिर कुछ देर के बाद हम वहां से निकल पड़े। उसके बाद में हमारा हर रोज का घूमना फिरना और फिर किस करना लगातार हो गया. फिर एक दिन उसने मुझे एक दोस्त की जन्मदिन की पार्टी में बुलाया और मैंने भी उसे वहाँ पर आने के लिए हाँ कह दिया, तो वो मुझे उसके एक दोस्त के फ्लेट पर ले गया। मुझे लगा की यहीं पर जन्मदिन की पार्टी होगी इसलिए हरीश मुझे यहाँ पर लाया है, लेकिन जब हरीश ने अपनी जेब से फ्लेट की चाबी निकालकर फ्लेट का ताला खोला तो मैंने देखा की अन्दर कोई नहीं था, तो मैं झट से समझ गयी की हरीश ने मुझसे झूठ बोला था की उसके किसी दोस्त की जन्मदिन की पार्टी है और फिर मैने तुरंत ही हरीश से इस बारे मैं पूछा तो उसने कहा की यहाँ पर कोई नहीं है इसलिए मैं तुम्हे यहाँ पर लाया हूँ ताकि हम यहाँ पर शांति से बैठकर बात कर सकते है. फिर मैंने भी उससे मुस्कुराते हुए कहा की चलो ठीक है और अब हम कमरे के अन्दर बैठे हुए थे और हरीश ने मेरा एक हाथ पकड़ा हुआ था। फिर हरीश ने कहा की कितनी गर्मी है और यह बात कहकर उसने मेरा दुपट्टा खींच लिया. वैसे मैंने तो जीन्स और टी-शर्ट पहनी थी, लेकिन बाहर से यहाँ आने तक आते समय चेहरे को छुपाने के लिए वो दुपट्टा मैं साथ में लाई थी. तभी उसने एकदम से अपना एक हाथ मेरे बब्स पर रख दिया और धीरे-धीरे दबा, और सहला रहा था और अब मैं कुछ बोलू उससे पहले उसने अपने होठं मेरे होठों पर रख दिए और मैं तो उसके होठों पर किस करने में वयस्त हो गई थी और वो मेरे बब्स की निप्पल को ज़ोर देकर दबा रहा था और अब उसने मेरी टी-शर्ट को भी उतार दिया, मैंने अन्दर हरे रंग की ब्रा पहनी हुई थी और अब मुझे बहुत शरम आ रही थी, क्योंकि आज पहली बार मैं किसी लड़के के सामने ऐसे बैठी हुई थी और जब वो मेरी ब्रा को भी उतारने वाला था तो मैंने उससे कहा की हरीश प्लीज़ ऐसा मत करो, हमको यह सब नहीं करना चाहिए।

फिर हरीश ने कहा की मैं तुम्हें बहुत प्यार करता हूँ, मैंने कहा की हाँ जान मैं भी तुम्हें बहुत पसंद करती हूँ, लेकिन यह सब बिल्कुल ग़लत है, हमें यह सब अभी नहीं करना चाहिए, लेकिन वो तो अभी भी मेरे बब्स को ज़ोर-ज़ोर से दबाए जा रहा था और मैं उससे अब कुछ भी बोल ना सकी और मैंने उसको वो सब करने दिया जो वो मेरे साथ करना चाहता था और अब उसने मेरी ब्रा और जीन्स दोनों को उतार दिया और अब उसने जल्दी से अपने कपड़े भी उतार दिए. अब वो मेरे सामने अंडरवियर और मैं उसके सामने अपनी पेंटी में थी. मेरी पेंटी अब अन्दर से बिल्कुल गीली हो गयी थी। फिर हरीश ने मुझे बेड पर लेटा दिया और वो मुझे लगातार किस कर रहा था और फिर उसने अपना एक हाथ मेरी पेंटी में डाल दिया. मुझे बहुत अच्छा महसूस हुआ, क्योंकि यह सब मेरा पहली बार था और अब वो मेरी चूत पर अपना हाथ फेर रहा था. जिससे मुझे अपनी चूत में खुजली होने लगी। दोस्तों मेरी चूत पर हल्के-हल्के से बाल थे और वो उस पर हाथ रगड़ रहा था और मैं उस अनुभव से चटपटा रही थी. फिर उसने मेरे एक हाथ को लेकर अपनी अंडरवियर में डाल दिया, जिसकी वजह से उसका टंकार खड़ा हुआ लंड मेरे हाथ में आ गया, लेकिन मुझे बिल्कुल भी पता नहीं था की इसके आगे मुझे क्या करना चाहिए?

फिर उसने मुझसे कहा की तुम उसे ऊपर-नीचे करो, तो मैं जैसा वो कहता वो सब करने लगी और अब उसने मेरी चूत मैं अपनी एक ऊँगली को डाल दिया, जिसकी वजह से मुझे बहुत दर्द हो रहा था क्यूंकि मेरी चूत अभी तक कुंवारी थी लेकिन मज़ा भी बहुत आ रहा था, क्योंकि वो अपनी ऊँगली को मेरी चूत में पूरी तरह से अन्दर घुसाता और फिर एकदम से पूरा बाहर की तरफ खीचता, उसके ज़ोर-ज़ोर से अन्दर बाहर करने से मेरी छोटी सी चूत अब धीरे-धीरे फेलने लगी थी. फिर मैं भी पूरे जोश से उसके लंड को ज़ोर-ज़ोर से हिलाने लगी और थोड़ी देर के बाद मेरी चूत से पानी निकल गया, लेकिन उसका अभी भी बाकी था। फिर उसने मुझसे कहा की तोड़ा और ज़्यादा स्पीड से करो तो मैंने उसकी अंडरवियर को उतार दिया और मैं अब और भी स्पीड से उसके लंड को हिलाने लगी. उसका लंड शायद 7 इंच का था और अब कुछ ही देर बाद उसका भी पानी निकल गया और तोड़ा सा मेरे हाथ पर गिरा तो मैंने देखा की वो बहुत बदबूदार था. फिर मैंने अपनी जीन्स से उसको साफ कर दिया और अब हम दोनों बेड पर ऐसे ही पड़े रहे, थोड़ी देर बाद वापस हरीश मुझे छुने लगा, लेकिन मुझे भी अच्छा लग रहा था. मैं भी फिर से उसके लंड पर हाथ फेरने लगी और फिर हरीश मेरे ऊपर आ गया और अब उसने मेरी पेंटी को निकाल दिया। मैं उसके सामने बेड पर बिल्कुल नंगी पड़ी हुई थी. अब हरीश मेरे पूरे जिस्म पर हाथ फेरने लगा।

और मेरी चूत में ऊँगली डालने लगा. सबसे पहले उसने अपनी एक ऊँगली डाली और बाद में दो और उसके बाद में तीन, मुझे बहुत दर्द हो रहा था. फिर मैंने भी उसका हाथ पकड़कर रोक दिया, वो मेरे ऊपर आ गया और अपने लंड को मेरी चूत में डालने की कोशिश करने लगा। तो मैंने देखा कि उसका मस्त गोरा और लम्बा लंड था और मैं उसके लंड को देखकर एकदम डर भी गई थी, क्यूंकि यह मेरी पहले चुदाई थी और मुझे आज पहली बार चुदाई में ऐसा लंड मिला जिसके बारे में मैंने कभी सपने में भी नहीं सोच सकती थी, क्यूंकि मेरी चूत का मुहँ बहुत छोटा था और वो बहुत टाइट थी, लेकिन फिर मैंने भगवान पर भरोसा किया और जो कुछ मेरे साथ होने वाला था सब कुछ उस पर छोड़ दिया। दोस्तों ये कहानी आप कामलीला डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।

मेरी यह चूत चुदाई पहली बार थी और शायद उसकी भी, इसलिए उसका लंड आसानी से अन्दर जा नहीं रहा था. बहुत मेहनत के बाद उसका तोड़ा सा लंड मेरी कोमल सी चूत में चला गया, लेकिन मेरी तो एकदम से बहुत ज़ोर से चीख निकल गयी और मैं दर्द से जोर-जोर से चिल्लाने लगी और मुझे लग रहा था की मेरी चूत से खून भी बहुत निकलेगा और अब मैं बहुत कोशिश कर रही थी की हरीश अपना लंड मेरी चूत से बाहर निकाल ले, लेकिन वो तो वैसे ही मेरे ऊपर लेटा रहा और धीरे-धीरे धक्के लगाने लगा। फिर कुछ देर बाद मुझे तोड़ा सा दर्द कम हुआ और अब तक उसका लंड आधा अन्दर चला गया था. मुझे बहुत मज़ा आ रहा था और मैं भी उसका पूरा-पूरा साथ दे रही थी अपनी गांड को उछाल-उछालकर और करीब 10 मिनट में ही मेरी चूत से पानी निकल गया और अब मैं कोई भी रिस्क नहीं लेना चाहती थी. तो फिर मैंने हरीश को बोला की प्लीज़ तुम अब अपना लंड बाहर निकालो, लेकिन वो मना कर रहा था की मेरा अभी निकला ही नहीं है. फिर मैंने उसे समझाया की हम यह सब बिना सेफ्टी के नहीं कर सकते, इस तरह करने से समस्या बहुत ज़्यादा होती है. मैं तुम्हारा अपने हाथ से हिलाकर निकाल दूँगी।

फिर वो मेरी बात को मान गया और फिर उसने अपना लंड मेरी चूत से बाहर निकाल दिया, तब मैंने देखा की उसका लंड बहुत ही मोटा था और आगे से तोड़ा सा खून से भी गीला था जो कि मेरी चूत का था और फिर हम बाथरूम में गये और मैं हरीश के लंड को अपने हाथ से पकड़कर के हिलाने लगी और वो मुझे किस कर रहा था और अपने एक हाथ से मेरे बब्स को दबा रहा था. फिर थोड़ी ही देर मैं हरीश का वीर्य निकल गया और वो एकदम शांत हो गया. फिर हम दोनों ने हाथ पैर धोए और फ्रेश होकर अपने-अपने कपड़े पहन लिए. हरीश ने मुझे एक गिफ्ट भी दिया जिसमे एक नयी टी-शर्ट थी. और एक लम्बी सी किस दी और उसके बाद हम वहाँ से निकल गये और वो मुझे मेरे घर तक छोड़ गया था।

फिर सुबह जब मैं उठी तो हरीश का फ़ोन आया और उसने मुझसे पूछा कि मेरी तबियत कैसी है, क्या दर्द हो रहा है?

तो मैंने कहाँ कि नहीं कुछ खास नहीं है तो उसने कहा कि ठीक है और बोला कि कल तुमने मुझे बहुत खुश करने वाला गिफ्ट दिया है और मैं तुमसे बहुत खुश हूँ, मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ जान. फिर मैंने भी कहा कि हाँ मैं भी तुमसे बहुत प्यार करती हूँ जान. और फिर कुछ देर बातें करने के बाद मैंने फ़ोन रख दिया, लेकिन उसके बाद भी मेरी चूत की चुदाई लगातार जारी रही जिससे मेरी चूत फैलकर भोसड़ा बन गई है और उसने कई बार मुझे चोदकर संतुष्ट किया और मैं भी मज़े करती रही और अपनी चुदाई करवाती रही। तो दोस्तों यह थी मेरी पहली चुदाई अपने बॉयफ्रेंड के साथ।

धन्यवाद कामलीला के प्यारे पाठकों !!