भाभी ने करी मेरे लंड की घुड़सवारी

हाय फ्रेंड्स, मेरा नाम Antarvasna विवेक है, मेरी उम्र 24 साल की है, मेरी लम्बाई 5.6 फुट की है. और मैं उदयपुर का रहने वाला हूँ. मेरे लंड का साइज़ 6.5” का है. मैं एक बहुत ही सेक्सी लड़का हूँ. और मैं जब भी किसी लड़की को देखता हूँ तो सबसे पहले उसके फिगर, और उसके बाद उसकी गांड के उभार को देखता हूँ और फिर उसकी चुदाई करने के बारे में सोचता रहता हूँ।

दोस्तों अब मैं अपनी कहानी आप सभी को बताना चाहता हूँ। जो कुछ इस तरह से है।

दोस्तों हमारे मोहल्ले की एक भाभी है, जो दिखने में बहुत ही खूबसूरत है, और मुझको वह बहुत ही सेक्सी भी लगती है. मैं उसको चोदना चाहता था. दोस्तों उस भाभी का पति काम के सिलसिले में गुजरात गया हुआ था तो घर पर उसके सास-ससुर ही रहते थे, और उस भाभी के दो बच्चे भी है. एक बार उस भाभी ने मुझको अपने किसी रिश्तेदार के घर पर उनके साथ जाने के लिए कहा तो मैं उनको अपनी बाइक पर बैठाकर ले गया था. और रास्ते में उनसे ऐसे ही बातें होती रही. और फिर वहाँ से वापसी में अचानक रास्ते में मेरी बाइक के सामने सांप आ गया था तो मैंने एकदम से ज़ोर से ब्रेक लगा दिया था तो उन भाभी के बब्स सीधे मेरी पीठ में गड़ गये थे. और फिर हम वहाँ से आगे जाने लगे थे तो उन्होनें मुझसे पूछा कि, क्या तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है?

मैं :- नहीं है भाभी।

भाभी :- होगी, लेकिन तुम बताना नहीं चाहते हो?

तो फिर मैंने उनको हाँ कह दिया था.

भाभी :- उसको भी क्या तू ऐसे ही घुमाने ले जाता है या नहीं?

और फिर मैं उनसे क्या बोलता, सोचा कि, कुछ ना बोलू, लेकिन फिर मैंने सोचा कि, बातों का सिलसिला यहीं खत्म हो जाएगा इसलिए मैंने उनको हाँ कह दिया था। इस पर भाभी बोली कि, कहाँ-कहाँ लेकर गया था?

मैं :- फिल्म दिखाने के लिए और गार्डन में.

भाभी :- तुमने उसके साथ कुछ किया है, या फिर ऐसे ही हो?

और फिर वह मुझसे थोड़ा और चिपककर बैठ गई थी, जिससे मुझको अब उनके बब्स अपनी पीठ पर बड़ी ही अच्छी तरह से महसूस हो रहे थे. और उस अहसास से मेरा लंड भी खड़ा हो गया था. और फिर मैं भी अपने आप को रोक नहीं पा रहा था. और तभी अचानक से वह भाभी मेरे लंड को अपने हाथ से पकड़ने लगी, और फिर वह मेरे लंड को धीरे-धीरे सहलाने भी लगी थी. और उस समय मुझको बड़ा मज़ा आ रहा था. और फिर तभी रास्ते में एक खेत आया तो भाभी ने मुझको वहाँ पर बाइक रोकने को बोला।

मैं -: क्या हुआ भाभी?

भाभी -: कुछ नहीं, तुम यहाँ पर रुको मैं अभी आती हूँ।

और फिर वह एक झाड़ी के पीछे चली गई थी. और फिर मैंने मन ही मन सोचा कि, आज तो मज़ा आ जाएगा. और फिर मैं भी अपनी बाइक खड़ी करके भाभी के पीछे-पीछे चला गया था. और फिर मैंने वहाँ जाकर देखा तो वह झाड़ी के पीछे बैठकर मूत रही थी. और फिर वह मुझको वहाँ पर देखकर बोली कि, बदमाश, तुम यहाँ पर क्यों आए? मैं तो अभी वापस आने वाली थी ना।

मैं :- बस ऐसे ही देखने चला आया कि, आप यहाँ पर क्या कर रही हो, मैं तो बस यही देखने आया था।

भाभी :- अब तो देख लिया ना कि, मैं यहाँ पर पैशाब कर रही हूँ।

और फिर जब वह पैशाब करके उठी तो मुझको उनकी नंगी चिकनी जाँघों और उनके कूल्हों के दर्शन हो गये थे. और उनको देखकर मेरा तो लंड ही खड़ा हो गया था. और फिर मुझसे रहा नहीं गया तो मैंने उनको अपनी बाहों में जकड़ लिया था और फिर मैं उनको किस करने लग गया था. और फिर तो भाभी भी मेरा कोई विरोध ना करते हुए मुझको ज़ोर-ज़ोर से किस कर रही थी. और फिर मैं किस के साथ-साथ उनके बब्स को भी दबाने लग गया था. और फिर उन भाभी की तरफ से कोई विरोध ना होता हुआ देखकर मैं उनके ब्लाउज को भी उतारने लग गया था। और तभी अचानक भाभी ने मुझको रोक दिया था और फिर उन्होंने मुझसे कहा कि, अभी नहीं, बाद में घर चलकर करेंगे, यहाँ पर लेटने की जगह नहीं है।

और फिर मैं भाभी की बात को मान गया और फिर हम लोग घर आए तो देखा कि, वहाँ पर तो भाभी के सास-ससुर दोनों ही घर पर थे तो भाभी ने मुझको उस समय तो वहाँ से जाने के लिए कहा. तो फिर मैं भी वहाँ से चला आया था, और मैं मन ही मन बहुत दुखी भी था क्योंकि आज तो हाथ से आया हुआ मौका भी निकल गया था. और इसी तरह से दिन निकलते रहे और फिर एक महीने के बाद मुझे फिर उन भाभी का फोन आया और फिर वह बोली कि, तुमसे कुछ काम है, क्या तुम मेरे घर आ सकते हो?

मैं -: मन ही मन बहुत खुश होते हुए, हाँ, क्यों नहीं भाभी, मैं अभी आता हूँ।

और फिर मैं झट से उन भाभी के घर पर पहुँचा तो, उनके घर पर कोई भी नहीं था और भाभी रसोई में काम कर रही थी, और मैंने चुप-चाप दबे पाँव उनके पीछे जाकर खड़ा हो गया और उनकी आँखों पर अपने हाथ रख दिए और बस ऐसे ही चुप-चाप खड़ा रहा. तो फिर वह अचानक से घबरा गई, और फिर उन्होनें मेरे हाथों को अपनी आँखों से दूर किया, और फिर देखा कि, कौन है। और फिर जब उनको पता लगा कि, यह तो मैं ही हूँ तो वह मुझसे एकदम से लिपट गई और बोली कि, अभी तो डरा ही दिया था तूने तो। और फिर वह फिर से अपने काम में लग गई थी. और फिर उन्होंने मुझको उनके ऊपर वाले कमरे से चारपाई नीचे लाने के लिए कहा. और तभी मेरा फोन आया तो मैं बात करते-करते बाहर निकल गया था. और फिर बात खत्म होते ही जब मैं वापस आया तो मैं एकदम से भाभी के पीछे जाकर चिपक गया तो भाभी मुझसे बोली कि, अभी नहीं। लेकिन मैं अब थोड़े ही मानने वाला था, और फिर मैंने उनके बब्स को दबा दिया था और फिर उनके गाऊन के नीचे से उनकी पैन्टी में भी हाथ डाल दिया था. और अब मेरे उस अचानक से हुए हमले से वह भी उतेज़ित हो गई थी. और फिर हम दोनों एकदूसरे को किस करते हुए उनके कमरे में चले गये थे. और फिर उनके कमरे में पहुँचते ही मैंने उनका गाऊन उतार दिया था. और अब वह मेरे सामने केवल अपनी ब्रा और पैन्टी में ही थी. और फिर मैं उनके ऊपर टूट पड़ा था और फिर मैं उनको ज़ोर-ज़ोर से चूमने लगा और उनके बब्स को भी चूसने लग गया था।

और फिर तो भाभी ने भी मेरे सारे कपड़े उतार दिए थे और फिर वह भी मेरे लंड को सहलाने लगी थी. और उसके बाद उसने मेरे लंड को अपने मुहँ में ले लिया था. और फिर वह उसको चूसने लग गई थी. दोस्तों उस समय मैं तो मानो जैसे किसी जन्नत में था. भाभी के मेरे लंड को चूसने की वजह से 10 मिनट में ही मेरा पानी निकल गया था. और तभी भाभी मुझसे बोली कि, बस इतने में ही निकल गया? तुम तो बड़े कच्चे खिलाड़ी हो।

मैं :- अभी खेल कहाँ हुआ भाभी, अभी तो खेल शुरू ही हुआ है।

और फिर मैंने उनकी पैन्टी भी उतारी और फिर मैं उनकी चूत को चाटने लगा. और फिर थोड़ी ही देर में मेरा लंड दुबारा से खड़ा हो गया था. और फिर मैंने उन भाभी को अपने ऊपर ले लिया था. और फिर भाभी की नरम-नरम गांड के उभार को दबाते हुए मैंने भाभी की चूत पर अपने लंड को रखा और फिर मैं अपने खड़े लंड को भाभी की चूत की चिकनाई की वजह बड़ी ही आसानी से उनकी चूत के अन्दर डालकर झटके देने लगा. दोस्तों मुझको तो उस समय बहुत मज़ा आ रहा था. और फिर तो भाभी भी बड़े ही मज़े के साथ मुझसे चुदवा रही थी. और फिर वह मेरे ऊपर बैठकर मेरे लंड की घुड़सवारी करने लग गई थी. और फिर वह मुझसे चिपककर मुझको बड़े ही प्यार से चोदने लग गई थी. और फिर 10 मिनट तक ऐसे ही करने के बाद वह ज़ोर-ज़ोर से झटके लगाने लग गई थी, और साथ ही वह अपने मुहँ से बड़ी ही मादक सी आवाजें निकाल रही थी. और फिर भाभी ने मुझको बोला कि, तुम अपना पानी मेरी चूत में ही छोड़ देना।

मैं :- भाभी अगर कुछ लफड़ा हो गया तो?

भाभी :- अरे! पागल, मैंने बच्चा ना होने का ऑपरेशन करवा रखा है।

और फिर मुझसे पहले तो भाभी के झटके धीरे-धीरे कम हुए और फिर वह हल्के-हलके झटकों के साथ मुझको बड़ी ही तेजी से जकड़ते हुए झड़ गई थी. और फिर उसके 5-7 मिनट के बाद मैं भी शुरू हो गया था. और फिर तो मैंने भाभी को घोड़ी बनाकर उनके पीछे आकर उनकी चूत में अपना लंड डालकर 10 मिनट तक ताबड़तोड़ चुदाई करी और फिर अपना सारा पानी उनकी पहले से ही रसीली चूत में छोड़ दिया था. और फिर हम दोनों वैसे ही नंगे ही एक दूसरे से लिपटे पड़े रहे थे।

और फिर 15-20 मिनट के बाद भाभी नंगी ही जाकर नीचे से चाय बनाकर ले आई और फिर हम दोनों ने एक ही प्लेट में चाय साथ में पी थी। और फिर मैं अपने कपड़े पहनकर वहाँ से आने लगा तो तभी भाभी मुझसे बोली कि, नालयक, मेरे कपड़े तूने उतारे है, तो अब पहनाने में क्या शर्म आ रही है? तो फिर मैंने ‘नहीं’ कहते हुए भाभी की ब्रा उठाई और फिर मैं उनको पहनाने लगा तो भाभी फिर से मुझसे चिपक गई थी. और फिर उन्होंने मेरे कान में बड़े ही प्यार से कहा कि, अब मैं जब भी तुझे बुलाऊँगी तुम आओगे ना? तो फिर मैंने भी उनसे कहा कि, हाँ मेरी भाभी जान और फिर मैंने उनकी पैन्टी को उठाया और पहना दिया. और फिर मैं उनको एक लम्बा सा किस देकर वहाँ से चला आया था।

और फिर तो जब भी भाभी को मेरी याद आती थी तो वह मुझको बुला थी और फिर हम दोनों मिलकर खूब कामलीला रचाते थे. हाँ तो दोस्तों यह थी मेरी और भाभी की चुदाई की सच्ची कहानी।

धन्यवाद कामलीला के प्यारे पाठकों !!