मेरी पहली चुदाई में दोनों की सील टूटी

हाय फ्रेंड्स, मेरा नाम Antarvasna अंकित है, मेरी उम्र 27 साल की है. और मैं बंगाल का रहने वाला हूँ. आज मैं आप सभी को अपनी ज़िंदगी की एक बहुत ही सेक्सी और प्यारी सी कहानी बताने जा रहा हूँ. दोस्तों मुझको हिन्दी लिखना बहुत अच्छे ढंग से तो नहीं आता है फिर भी मैं लिखने की कोशिश कर रहा हूँ। हाँ तो दोस्तों अब मैं सीधा अपनी कहानी पर आता हूँ जो कुछ इस प्रकार से है।

मैं एक खिलाड़ी होने की वजह से मैं शारीरिक रूप से थोड़ा पतला हूँ. पर मैं दिखने में काफी आकर्षक हूँ. मेरा रंग गोरा है, और मेरा कद 5.9 फुट का है. मेरे लंड की लम्बाई भी 6.5” की है और वह काफ़ी मोटा भी है। दोस्तों यह बात तब की है जब मैं स्कूल में पढ़ता था, और मुझे उस समय सेक्स के बारे में थोड़ा बहुत पता था. मैं अपने स्कूल की गर्मी की छुट्टियों में अपने मामा के घर गया हुआ था. मेरे मामा की लड़की प्रीत मुझसे 3 साल बड़ी है।

दोस्तों उसकी मेरे साथ बहुत बनती थी. और यह मुझे बाद में पता चला कि, वह तो मुझपर फिदा थी. वह हमेशा मेरे आस-पास ही रहती थी. चाहे वह खेलने का समय हो या खाने का. वह मुझको हर वक़्त ही पकड़-पकड़कर अपने सीने से लगाती रहती थी. और किसी ना किसी बहाने से हर वक़्त मुझे मेरे गाल पर किस करती रहती थी. कभी-कभी तो वह मुझे काट भी लेती थी. और मुझे इन सब चीजों से थोड़ी तक़लीफ़ होती थी, लेकिन बड़ी बहन का प्यार समझकर मैं सब कुछ भूल जाता था. लेकिन उसके मन में तो कुछ और ही चल रहा था. आख़िर मैं उससे कब तक बचता? गर्मियों की वजह से मामा के सभी परिवार वाले बाहर ही सोते थे. लेकिन एक शाम को बारिश होने की वजह से हम सबको अन्दर ही सोना पड़ा था. तब प्रीत दीदी और मैं उनके कमरे में सो गये थे. लेकिन मुझको यह नहीं पता था कि, आज रात को मेरी शिकारी दीदी, मेरा ही शिकार करने वाली है. मैं थका हुआ होने की वजह से जल्दी ही सो गया था. और फिर मुझको नींद आने के एक घंटे बाद मेरी आँख खुली तो बिजली भी जा चुकी थी. और उस पूरे कमरे में घुप अंधेरा हो गया था। और फिर दीदी को लगा कि, मैं सो रहा हूँ, तो दीदी ने मुझे किस करना शुरू कर दिया था।

लेकिन मैं बस चुपचाप ही लेटा रहा. और फिर मैंने मन ही मन में सोचा कि, अगर मैं हिला तो दीदी मुझे हर बार की तरह काट ना ले. और मुझको फिर से दर्द सहना पड़ेगा. और फिर जब दीदी की उत्तेजना बढ़ने लगी तो फिर वह मेरे गालों को छोड़कर हल्के-हल्के से मेरे होठों को चूमने लग गई थी. और फिर उनको लगा कि, मैं अभी तक भी नींद में ही हूँ. तो फिर वह थोड़ी और बढ़ने लगी. और फिर उन्होनें आहिस्ते से अपना हाथ मेरी पेन्ट में डाल दिया था. और फिर मेरी नुन्नी को पकडकर हिलाने लगी थी. और उस समय तो दोस्तों मुझको भी एक अजीब सा मज़ा आने लगा था. और फिर धीरे-धीरे तनकर मेरी नुन्नी एक बड़ा लंड बन गई थी. दोस्तों वैसे तो मैंने अपने लौड़े की मूठ पहले भी मारी थी लेकिन उससे आगे मुझको कुछ पता नहीं था। और फिर करीब 10 मिनट के बाद मैं झड़ने पर आ गया और तब भी दीदी को लग रहा था कि, मैं फिर भी सो रहा हूँ. लेकिन झड़ते समय मैं अपने आप पर काबू ना रख सका और झड़ते समय मैंने दीदी को कसकर पकड़ लिया था, और फिर आहहह…. इस्सस… की आवाज़ के साथ मैं झड़ने लगा था. और फिर मेरी आवाज से दीदी एकदम से डर गई थी. और फिर उन्होनें जल्दी से अपना हाथ मेरी पेन्ट से बाहर निकाल लिया था. पर तब तक मेरा ढेर सारा माल उनके हाथ पर लग गया था। और फिर उन्होनें जल्दी से अपना हाथ साफ़ किया और फिर वह मुझसे माफी माँगने लगी और कहने लगी कि, सब कुछ नींद में हो गया. और मैं नींद में भी खेल रही थी। लेकिन मुझको तो सब कुछ समझ में आ गया था, लेकिन मज़ा लेने के चक्कर में मैंने उनसे कहा कि, कोई बात नहीं दीदी. और फिर हम चुप होकर लेट गये थे. और फिर 10 मिनट के बाद मैंने दीदी से कहा कि, आप जल्दी सो जाओ ना। तो फिर वह मुझसे बोली कि, क्यो?

मैं :- हम फिर से नींद में खेलेंगे, मुझको भी इस खेल में बड़ा मज़ा आया था।

दीदी :- अगर तुमको मज़ा लेना है तो, ऐसे ही बिना सोए ही खेले लेते है. लेकिन तुम एक वादा करो कि, हमारे इस खेल के बारे में किसी को कुछ भी नहीं बताओगे।

मैं :– ठीक है दीदी मैं पक्का वादा करता हूँ।

दीदी :- इस खेल में अभी तो और भी मज़ा है, तुम खेलोगे क्या?

मैं :- हाँ दीदी मैं जरूर खेलूँगा।

दीदी :- आज मैं खेलती हूँ, और तुम बस मजे उठाओ. और फिर जब तुम भी सीख जाओगे तो फिर तुम भी खेलना।

और फिर उन्होनें मेरे कपड़े उतार दिए और फिर वह मेरे ऊपर चढ़कर उल्टा होकर लेट गई थी. और वह मेरा लंड को चूसने लगी थी और मेरे होठों के सामने उसकी फुददी थी. और फिर मैं भी उसकी प्यारी सी और चिकनी फुददी को अपनी जीभ से चाटने लगा था. और फिर उनकी चूत से पानी बहने लगा था. और फिर 10-15 मिनट वैसे ही करते रहने के बाद वह उठी और अँधेरे में धीरे-धीरे जाकर तेल लाई और वह फिर से मेरे ऊपर आ गई थी. और फिर तो मेरा लंड एकदम सख़्त होकर बिल्कुल लोहे की रोड बन गया था. और फिर दीदी ने फिर से मेरा लंड पकड़ा और वह उस पर तेल लगाने लगी. और फिर वह अपनी चूत पर मेरे लौड़े को सेट करके और अपने एक हाथ को मेरे मुहँ पर रखकर ऊपर से धक्का मारने की तैयार में हो गई थी. और मुझे तो कुछ समझ में ही नहीं आ रहा था कि, अब क्या होने वाला है। दोस्तों ये मजेदार कहानी आप कामलीला डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।

बस मुझको तो मज़ा आ रहा था. और फिर दीदी ने अपने और मेरे दोनों के मुहँ को ज़ोर से दबाया और फिर वह फ़चक के झटके के साथ मेरे खड़े लंड पर बैठ गई थी. और इसी के साथ मेरे लौड़े का धागा टूट गया था और मेरी तो जान ही निकल गई थी. और मेरी चीख उनके हाथ के कारण दब गई थी. और फिर मैंने देखा कि, दीदी के भी आँसू निकल आए थे. क्योंकि हम दोनों की सील एक साथ ही टूट गई थी।

और फिर हम दोनों 10 मिनट तक रुके रहे और हम एक-दूसरे के होठों को चूसते रहे. और फिर दीदी धीरे-धीरे मेरे लौड़े पर ऊपर नीचे होने लगी थी. और मैंने भी दीदी के 32” के मेरी आँखों के सामने लटकते बब्स को अपने मुहँ में भरकर चूसता भी जा रहा था. इससे मुझे भी बहुत मज़ा आने लगा था. और फिर करीब 10-15 मिनट की चुदाई के बाद मुझको नीचे कुछ अजीब सा लगने लगा था उसकी चूत मुझको ऐसी लग रही थी कि, वह मेरे लंड को जकड़ रही हो. और फिर कुछ ही देर में दीदी बहुत तेजी से अकड़कर ढीली पड़ गई थी. और उनकी चूत से ढेर सारा रस निकला जो कि, मेरे लंड की जड़ तक और मेरे पेट पर फ़ैल गया था और मुझको मेरे पेट पर गीलापन मसूस हो रहा था।

और फिर 5 मिनट रुकने के बाद दीदी घोड़ी बन गई थी. और फिर वह मुझसे कहने लगी कि, तुम मेरे पीछे आकर अपने लंड को मेरी चूत में डालो. और फिर मैं दीदी के कहे अनुसार उनके पीछे गया और फिर मैंने अपना लंड दीदी की चूत में घुसा दिया था. और फिर दीदी आगे-पीछे होने लग गई थी तो मैं भी उनको देखकर आगे-पीछे होने लगा था. और फिर 10-15 मिनट तक की जबरदस्त धक्का-पेली के बाद दीदी का बदन एकबार फिर से अकड़ने लगा और वह मेरे लंड को अपनी चूत की जड़ तक जोर लगाकर दबाने लगी थी. और उसके बाद दीदी वहीँ रुक गई थी और फिर उनकी चूत हल्के-हल्के झटकों के साथ झड़ रही थी. और फिर जब दीदी की चूत ने झड़ना बन्द किया तो मैंने फिर से उनकी चूत में धक्के लगाने शुरू कर दिये थे. और फिर 5 मिनट के बाद ही मेरे लंड ने भी दीदी की चूत में ही अपना सारा रस बरसा दिया था, और उससे दीदी की बच्चेदानी भी मेरे गरम माल से भर गई थी. और फिर हम नंगे ही एक-दूसरे से लिपटे हुए पड़े रहे थे. और हमारे अंग खून से लथपथ हो गये थे।

और फिर हम दोनों ने बाथरूम में जाकर खुद को अच्छे से साफ किया. और फिर वहाँ से वापस आकर कपड़े पहनकर हम कुछ देर तक वैसे ही चुप होकर लेट गये थे. और फिर हमको सेक्स की थकान की वजह से नींद भी आ गई थी. और फिर अगली सुबह हम दोनों ही दर्द के मारे चल नहीं पा रहे थे।

हाँ तो दोस्तों यह था जवानी की पहली चुदाई का विस्मरणीय सच्चा किस्सा, जो अक्सर सभी के साथ किसी ना किसी रूप में होता ही रहता है।

धन्यवाद कामलीला के प्यारे पाठकों !!