मोनिका की चूत का चस्का

हाय फ्रेंड्स, मेरा नाम साहिल है, मेरी उम्र 23 साल की है और मैं बरेली में अपने मामाजी के यहाँ पर रहता हूँ. मैं दिखने में बहुत स्मार्ट हूँ और जिम जाने की वजह से मेरी बॉडी भी अच्छी है. मैं यहाँ पर रहकर अपनी पढ़ाई भी कर रहा हूँ और मैं अपने मामाजी के काम में उनकी मदद भी करता हूँ.

दोस्तों मेरे मामाजी के परिवार में मेरे अलावा मामी और उनकी 2 लड़कियाँ है उनमें से एक बड़ी वाली है जिसका नाम प्रिया है और उसकी उम्र 26 साल की है और छोटी वाली का नाम मोनिका है जो कि बहुत ही खूबसूरत है और उसकी उम्र 24 साल की है. रिश्ते में वह मेरी बहनें होने की वजह से मैंने कभी भी उनके बारे में कुछ ग़लत नहीं सोचा था. हाँ तो दोस्तों अब मैं सीधा अपनी आज की कहानी पर आता हूँ।

दोस्तों यह बात आज से 2 साल पहले नवम्बर के महीने की है, जब प्रिया दीदी की शादी लखनऊ में तय हो गई थी. और लड़के वालों ने यह माँग रख दी थी कि, हमको शादी लखनऊ आकर ही करनी होगी. और जिसके कारण मेरे मामाजी-मामीजी और प्रिया दीदी शादी से 2 सप्ताह पहले ही लखनऊ के लिए रवाना हो गये थे, ताकि शादी की सारी तैयारी अच्छे से हो सके। दोस्तों मुझको मामाजी का काम भी संभालना था जिसके कारण मैं बरेली से शादी के 2 दिन पहले लखनऊ पहुँचने वाला था. और घर पर मेरे खाने पीने की कोई दिक्कत ना हो इसलिए मोनिका दीदी मेरे साथ ही रुक गई थी. और फिर दोस्तों दिन ऐसे ही बीत रहे थे मैं रोज सुबह मामाजी की दुकान पर चला जाता और देर रात तक वापस घर पर आता था. और फिर मैं और मोनिका दीदी साथ में ही बैठकर खाना खाकर थोड़ी देर आपस में बातें करते हुए टी.वी. देखकर अपने-अपने कमरे में जाकर सो जाते थे. और फिर अगले दिन रविवार होने की वजह से मैं देरी से जागा तो मैंने देखा कि, मोनिका दीदी वॉशिंग मशीन में कपड़े धो रही थी और उनका टॉप और लैगी पानी से सराबोर हो रही थी. दोस्तों हाय! वह क्या नज़ारा था, गीला होने की वजह से उनके टॉप में से उनके बब्स के निप्पल गजब के दिख रहे थे. और वह मुझको मानो चिढ़ा रहे हो कि, हिम्मत है तो आकर हमको दबा डालो, और चूस-चूसकर हमारा रस पी जाओ, और यह क्या उनकी लैगी में से से उनके कूल्हों का उभार भी साफ़ नजर आ रहा था और उनकी मटकती हुई चाल मुझको ललचा रही थी. और मैं ब्रश करते हुए एकटक उनको निहार ही रहा था कि, तभी मेरे कानों में एक आवाज़ पड़ी कि, साहिल… साहिल… अभी भी सपने में ही हो क्या? दोस्तों यह प्यारी सी आवाज़ मोनिका दीदी की थी।

मोनिका दीदी :- जल्दी से तैयार हो जाओ और तब तक मैं यह कपड़े छत पर सुखाकर आती हूँ, और फिर मैं तुम्हारे लिये नाश्ता बना दूँगी।

और फिर मैं नहाने के लिये बाथरूम में चला गया था. और फिर यही कोई 10 मिनट के बाद दीदी के चिल्लाने की आवाज़ आई साहिल… साहिल… और फिर दौड़कर उनके पास गया तो मैंने देखा कि, दीदी सीढ़ी पर से फिसल गई थी और उनके घुटनों में चोट लगी थी और जिसमें से खून भी आ रहा था. और फिर मैं उनको अपने कन्धे का सहारा देते हुए बेडरूम में ले आया था. चोट लगने की वजह से और खून देखकर दीदी हल्की सी बेहोश सी हो गई थी. और फिर मैंने उनको हिलाकर उठाने की कोशिश करी तो वह बस हूँ… हूँ… की आवाज़ निकालकर फिर से बेहोश हो गई थी. और फिर मेरी भी समझ में नहीं आ रहा था कि, अब मैं क्या करूँ? और फिर मैंने फर्स्ट-एड बॉक्स से रुई लेकर उनके घुटने की चोट को साफ़ करना चाहा लेकिन दीदी के लैगी पहने होने की वजह से मुझको दिक्कत हो रही थी. और फिर मैंने हिम्मत करके दीदी की कमर को हल्का सा उठाते हुए उनकी लैगी को खीँचकर उनके बदन से अलग किया और फिर उनके घुटनों को अच्छी तरह से डेटोल से साफ़ करके एंटीसेप्टिक क्रीम लगाकर पट्टी कर दी थी।

दोस्तों और फिर जब मैं उनकी पट्टी करके फर्स्ट-एड बॉक्स को रखकर वापस उनके पास आया तो दीदी अभी भी बेहोशी की हालत में पड़ी हुई थी. और फिर मेरे ना चाहते हुए भी मेरी नज़रें उनकी गोरे रंग की चमकती हुए जाँघों पर जा रही थी. और फिर मैं अपनी आँखों से उनके पूरे बदन का जायजा ले रहा था, दोस्तों मेरी दीदी बहुत ही खूबसूरत दिखती है और उनके मुस्कुराने पर उनके गालों पर गड्डे के निशान आते है, गुलाब की तरह कोमल उनके होंठ, सुराही सी गर्दन और उनके टॉप मे क़ैद पहाड़ों की तरह तनकर खड़े उनके बब्स जिनके निप्पल के उभार का अनुभव साफ़ हो रहा था. दोस्तों शायद दीदी ने कपड़े धोते समय अपनी ब्रा निकाल दी थी. उनका सपाट सा पेट, मनमोहक कूल्हे हाय… और दोनों मशाल जैसी जाँघों के बीच में उनकी काले रंग की तंग पैन्टी तो अपनी एक अलग ही खूबसूरती बिखेर रही थी जिसके धागे उनकी कमर के दोनों तरफ बँधे हुए थे. और फिर अब यह सब देखकर मेरा लंड भी मुझसे बग़ावत कर रहा था, और मेरे लिए यह बर्दाशत कर पाना बहुत ही मुश्किल हो रहा था. और फिर मैं थोड़ा डरते हुए बेड पर दीदी के पैरों के नज़दीक बैठा और फिर मैंने धीरे-धीरे दीदी की तरफ अपनी नज़र उठाकर देखा तो वह गहरी-गहरी साँसें लेते हुए नींद में थी।

और फिर दोस्तों पता नहीं मुझमें कहाँ से इतनी हिम्मत आ गई थी और मैंने उनकी कमर पर बँधी हुई डोर को खीँच दिया था जिससे उनकी तंग पैन्टी खुल गई थी. और फिर तो मेरी आँखों के सामने कसम से क्या नजारा था, हाए… क्या सच में यही वह चूत है जिसके लिए दुनिया पागल हो जाती है? दोस्तों इतनी खूबसूरत चीज़ दुनिया में दूसरी और कोई भी नहीं है, डबल पाव रोटी की तरह फूली हुई गोरी चिट्टी चूत जिसपर हल्के-हल्के भूरे रंग के बाल क्या गजब ढा रहे थे, उनको देखकर मुझको तो ऐसा लग रहा था जैसे यह फसल 2-4 दिन पहले ही साफ़ करी गई हो. उनकी चूत के दोनों गुलाबी होंठ आपस में सटे हुए थे और उनके बीच में चने के दाने की तरह एक गुलाबी रंग की घन्टी उन दोनों गुलाब की पंखुड़ियों के बीच में बॉर्डर लाइन का काम कर रही थी. और फिर मैं हल्का सा झुककर मोनिका दीदी की चूत की खुशबू लेने लगा और फिर मैंने एक लम्बी सी सांस खींची, तो मुझको तो ऐसा लगा कि, जैसे मेरा तो दिमाग़ ही सुन्न हो गया हो. दोस्तों ऐसी नशीली खुशबू मैंने मेरी ज़िंदगी में उस दिन से पहले कभी भी नहीं सूँघी थी. और फिर मैं उस खुशबू के कारण किसी और ही दुनिया में खो गया था, और मुझको पता ही नहीं चला कि, कब मेरी नाक की जगह मेरी जीभ ने ले ली थी और मैं दीदी की चूत के बीच की दरार को अपनी जीभ की नोक से खोलने लग गया था. और देखते ही देखते मैं एक कुत्ते की तरह दीदी की उस प्यारी सी मखमली चूत को पूरी तरह से चाटने में मशगूल हो गया था। दोस्तों ये कहानी आप कामलीला डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।

और फिर मैं उनकी चूत के छेद तक अपनी जीभ को घुमाने लग गया था, और मैं नीचे से ऊपर तक अपनी जीभ से उनकी पूरी चूत को चाट रहा था. और फिर तभी मुझको दीदी की चूत में कुछ गीलापन सा महसूस हुआ और फिर मैं उनकी चूत को और भी ज़ोर-ज़ोर से चाटने लगा तो मुझको कुछ नमकीन सा स्वाद भी आने लगा था, उसका स्वाद थोड़ा कसैला भी था लेकिन वह उससे कहीं ज्यादा नशीला लगा. उसको चखने के बाद तो मुझको ऐसा लगा कि, मानो मुझपर पूरी बॉटल शराब का नशा चढ़ गया हो. और फिर मेरा नशा तब टूटा जब मोनिका दीदी ने आहहह… की आवाज़ करी और तब मेरी तो गांड ही फट गई थी. और फिर मैं जल्दी से उठकर दीदी के बेडरूम से बाहर आ गया था, और अभी भी मेरे मुँह पर दीदी की चूत का रस लगा हुआ था जो हल्का सा चिपचिपा भी था और जिसको मैं अपनी जीभ से अपने होंठों से चाट रहा था।

लेकिन तभी मुझको याद आया कि, मैंने दीदी की पैन्टी को तो उनको पहनाया ही नहीं, और फिर मैं सोचने लगा कि, ऐसे में तो दीदी को पक्का-पक्का पता चल जाएगा कि, मैं उनके साथ क्या कारनामा कर रहा था. और अब मुझको काटो तो खून नहीं था. और मेरा जो हलक अभी दीदी की चूत के रस से तरबतर हो रहा था, अब वही उनके डर के मारे सूख गया था, और मेरी वापस उनके बेडरूम में अन्दर जाने की हिम्मत नहीं हो रही थी. और फिर तभी लगभग 10 मिनट के बाद दीदी की आवाज़ आई साहिल… साहिल…

मैं :- जी दीदी.

मोनिका दीदी :- यह सब क्या है।

मैं :- दीदी वो आपके घुटनों में चोट लगी थी इसलिये दवा लगाने के लिए मुझको मजबूरन आपकी लैगी को उतारना पड़ा था।

मोनिका दीदी :- वह सब तो ठीक है, लेकिन चोट तो मेरे घुटनों पर लगी थी ना कि, यहाँ पर, (और फिर उन्होनें अपनी चूत की तरफ इशारा करते हुए मुझसे कहा) तुमको ज़रा सी भी शरम नहीं आई अपनी बड़ी बहन के साथ ऐसा करते हुए? छी… तुम कैसे गंदे लड़के हो जो इस गन्दी सी जगह को चटखारे लेकर चाट और चूस रहे थे. मुझको तो तुमसे घिन आ रही है, चलो लखनऊ तुम्हारी सारी कारस्तानी पापा को बताऊँगी और फिर बेईज़्ज़त होकर तुम यहाँ से दफा हो जाओगे।

दोस्तों मोनिका दीदी ने यह सारी बातें बड़े गुस्से के साथ और एक ही सांस में कह दी थी. और उनकी बात को सुनकर मुझको तो रोना ही आ गया था. और फिर मैं दीदी को सॉरी बोलने लगा और रोने लग गया था। दोस्तों दीदी अभी तक भी नीचे से नंगी ही थी, और जैसे मैं उनकी पैन्टी को खोलकर गया था वह अभी तक भी वैसे ही खुली हुई थी, और वह अपनी पूरी नंगी कमर से सहारा लगाए हुए बेड पर अधलेटी सी सो रही थी।

मोनिका दीदी :- तुम्हारे इन मगरमच्छ के आँसुओं का मुझपर कोई असर नहीं हो पाएगा, साला, कुत्ता हरामी गंदी नाली का कीड़ा अपनी ही बहन पर गन्दी नज़र रखता है, बहुत शौक है ना तुझको इसको चाटने का (और फिर अपनी ऊँगली से अपनी चूत की तरफ इशारा करते हुए) चाट ले हरामी, आ मैं भी तो देखूँ कि, कितनी देर तक चाटता है. और फिर दीदी ने मुझको खींचकर बेड पर पटक दिया था, और फिर वह मेरे मुँह को अपनी दोनों जाँघों के बीच में लाकर मेरे सिर के बालों को खींचते हुए मुझको घसीटकर अपनी चूत पर मेरे मुहँ को रगड़ने लग गई थी. उसके मेरे बाल खींचने से मुझको बहुत तकलीफ हो रही थी, और फिर दीदी ने मुझसे कहा कि, अब तो तू लगातार मेरी चूत को तब तक चाटेगा जब तक मेरा मन ना भर जाए।

और फिर तो दोस्तों मैंने मोनिका दीदी की चूत को पूरे 20 मिनट तक बुरी तरह से चाट-चाटकर एकदम लाल कर दिया था और फिर उनकी चूत से उनके चूत रस और मूत रस दोनों की मिली-जुली एक बहुत ही तेज धार निकली जो सीधे ही मेरे मुहँ में आकर गिरी थी और फिर मोनिका दीदी ने मेरे सिर को अपनी दोनों जाँघों के बीच में बुरी तरह से जकड़ लिया था और फिर उनकी चूत से लगभग 10 मिनट तक हल्के-हल्के झटके मेरे मुहँ पर लगते रहे और फिर उनकी जाँघों की पकड़ मेरे सिर पर से ढीली हो गई थी और फिर वह एक तरफ करवट लेकर अपनी दोनों टाँगों को भींचकर सो गई थी, और उन्होंने मुझको अपने साथ सेक्स करने नहीं दिया था. और मुझको इतने में ही सन्तुष्ट होना पड़ा।

और फिर मैंने बाथरूम में जाकर दुबारा से उनको याद करते हुए उनके नाम से मूठ मारी और अपने आप को शान्त कर लिया था और फिर मैं भी दीदी के पास आकर उनके बगल में ही बेड पर सो गया था।

धन्यवाद कामलीला के प्यारे पाठकों !!