ससुर जी के साथ खेला सेक्स मैच

हाय फ्रेंड्स, मेरा नाम दिव्या है और मैं कामलीला डॉट कॉम की एक नियमित पाठक हूँ, और मैं कमलीला डॉट कॉम की बहुत बड़ी प्रशंसक भी हूँ और मैंने इस वेबसाईट पर बहुत अच्छी और मस्त सेक्स कहानियाँ पढ़ी है और कहानियाँ पढ़-पढ़कर के कितनी ही बार मैंने अपनी चूत को ऊँगली करके शान्त भी किया है और दोस्तों यही नहीं मेरी सभी सहेलियाँ भी इस वेबसाइट की नियमित पाठक है, और इस वेबसाइट के बारे में भी उन्होंने ही मुझको बताया था और तब से ही मैं रोज़ ही इस वेबसाइट की सेक्स कहानियों को पढ़ने लगी हूँ।

इसलिए आज मैंने भी सोचा है कि, मैं भी आप लोगों को अपनी एक निजी सेक्स घटना के बारे में बताऊँ। दोस्तों यह मेरी जिन्दगी का सबसे पहला सेक्स था और यह मेरे और मेरे ससुर जी के बीच की एक सच्ची सेक्स सेक्स कहानी है जो कि, मैं आपके सामने आज पहली बार कामलीला डॉट-कॉम के माध्यम से बताने जा रही हूँ।

दोस्तों मैं सूरत की रहने वाली हूँ और मेरी उम्र 27 साल की है और मेरी शादी को हुए अभी 2 साल ही हुए है। मेरी शादी काफ़ी अच्छे घर से हुई है और मेरे पति एक प्राइवेट कंपनी में काम करते है, और वह अक्सर अपने काम के लिए बाहर ही रहते है मेरा घर काफ़ी बड़ा है जिसमे हम 3 लोग ही रहते है मैं मेरे ससुर और मेरे पति पहले मैं आप सभी को अपने बारे में बता दूँ कि, मैं एकदम गोरी और बहुत ही खूबसूरत हूँ. और मेरा फिगर 34-28-36 का है. दोस्तों मैंने शादी से पहले मैंने अपने मामा के लड़के के साथ मस्ती की थी पर सेक्स नहीं किया था। और फिर मेरी शादी होने के बाद मैं अपने ससुराल में चली आई थी. लेकीन मैं अपनी शादी से खुश नहीं थी. क्योंकि मेरे पति एक तो घर पर ज़्यादा नहीं रहते थे और दूसरा यह कि, वह मेरी जवानी की आग को भी नहीं बुझा पाते थे इसलिए मैं तड़पती रहती थी. हाँ तो दोस्तों अब मैं आपका ज्यादा समय ना लेते हुए अपनी कहानी को शुरू करती हूँ।

दोस्तों यह कहानी तब शुरू हुई थी जब मैं शादी करके नई-नई अपने ससुराल में आई थी और तब तो मेरी सास भी जिंदा थी. वह बहुत ही अच्छी औरत थी और वह मेरा बहुत ख्याल रखती थी और वह मेरे साथ अपनी हर बात शेयर करती थी. और फिर उन्होंने ही मुझे बताया था कि, मेरे ससुरजी बहुत ठरकी किस्म के आदमी है. पर वह मुझको अच्छे लगते थे. हमारे परिवार में सब कुछ अच्छा चल रहा था, सिवाए मेरे सेक्स के. दोस्तों मुझको अपने मामा के लड़के की बहुत याद आती थी जिसके साथ मैंने मस्ती तो करी थी पर सेक्स नहीं किया था. वह सेक्स करने के लिए मुझ पर बहुत ज़ोर देता था क्योंकि वही मेरी हवस को मिटा सकता था, और फिर कुछ महीने बीतने के बाद मेरी सास की दिल के दौरे से मौत हो गई थी. और अब परिवार में हम तीन लोग ही बचे थे. और फिर मेरे पति को 10-15 दिन के लिए अपने काम से बाहर जाना पड़ता था तो मैं और मेरे ससुर जी ही घर पर रह जाते थे. हमारे घर में एक नौकरानी थी जिसके साथ मैं दोपहर को गप्पे लड़ाती थी मेरी सास के मरने के कुछ महीनों के बाद मेरे ससुर मेरे साथ बहुत अलग ही बर्ताव करने लग गए थे. और फिर मेरी नौकरानी ने मुझको बताया कि, एक दिन मेरे ससुर जी ने उसे अकेले में पकड़ लिया था, और वह उनसे खुद को किसी तरह से छुड़ाकर भाग आई थी।

और फिर उसने मेरी शादी के पहले इस घर में क्या-क्या होता था वह सब बात भी बताई कि, मेरे ससुर मेरी सास को दिन में ही नंगा करके चोदने लगते थे और वह एक नम्बर के ठर्की है. और फिर एक दिन मेरी नौकरानी ने मुझको बताया कि, मेरे ससुर जब मैं चलती हूँ तो वह मेरी गांड को देखते है. तो फिर मैंने उस नौकरानी से कहा कि, चल जा झूँठी कहीं की वह तो मुझको अपनी बेटी की तरह मानते है. तो फिर नौकरानी ने कहा कि, वह ऐसा कई दीनों से देख रही है कि, वह मेरी गांड को देखते रहते है. तो फिर मैंने भी मन में सोचा कि, चलो घर में ही कोई गांडमार मिल गया है. दोस्तों और फिर मैंने भी इस बात पर गौर किया कि, मेरे ससुर जी अक्सर मेरे नहाने के बाद ही बाथरूम में नहाने जाते थे. और फिर एक दिन मैंने चुपके से देखा कि, वह बाथरूम में मेरी गीली पैन्टी को उठाकर के अपने मोटे लंड से रग़ड रहे थे और फिर वह उसको चाट भी रहे थे. दोस्तों उस नज़ारे को देखकर तो मैं भी उत्तेजित हो गई थी।

और फिर मैंने देखा कि, जिस टावल से मैंने अपने गीले बदन को साफ़ किया था उसको भी ससुर जी सूंघ रहे थे. और फिर वह उसको अपने लंड से रगड़ भी रहे थे. और फिर तभी मैंने भी अपने मन में पक्का सोच लिया कि, अब मैं इन्हीं को अपनी तरफ आकर्षित करूँगी. और फिर उस दिन के बाद से मैं मेरे पति के जाने के बाद सेक्सी कपड़ों में अपने ससुर जी के सामने जाने लगी और वह भी किसी ना किसी बहाने से मुझको छूते रहते थे. और फिर एक दिन मैंने सफ़ेद रंग का हल्के कपड़े का सूती सूट पहना हुआ था और उसके नीचे काले रंग की ब्रा जो अन्दर से साफ दिख रही थी. और फिर मैं गीले बालों में ही मेरे ससुर जी को उनके कमरे में चाय देने चली गई थी।

और फिर ससुर जी ने मुझको घूरकर देखा और फिर वह मुझसे बोले कि, तुम आज बहुत खूबसूरत लग रही हो बहू क्या बात है? तुमने तो आज मुझको अपनी सास की याद दिला दी है. और फिर मैं उनके पास उनके बगल मैं बैठ गई और उनके साथ सासू जी के बारे में बातें करने लगी और फिर बातों ही बातों में उन्होंने मेरे पेट पर हाथ फेर दिया था जिससे मेरे पूरे बदन में एक अजीब से सिरहन दौड़ गई थी, और मेरे हाथ से गरम चाय का कप मेरे ससुरजी की जाँघ पर गिर गया था. और उस कप की गरम चाय उनके लंड तक चली गई थी. और फिर मैं अपने दुपट्टे से उनकी जाँघों को साफ करने लग गई थी, और फिर उनकी जाँघ को साफ़ करते-करते मेरा हाथ उनके लंड तक पहुँच गया था. और फिर मैंने महसूस किया कि, उनका लंड खड़ा था. और फिर उन्होंने झट से मेरे हाथ को अपने लंड के पास से हटा दिया था. और फिर उन्होंने मुझको वहाँ से जाने के लिया बोला।

दोस्तों उस दिन तो दिन में ही उनकी नियत मेरे लिए गंदी हो ही गई थी अब तो वह रात में भी मेरे बेडरूम के चक्कर लगाने लग गए थे, और वह मेरे बेडरूम के दरवाजे पर कान लगाकर सुनते थे, और दरवाज़े के छेद में से अन्दर देखते रहते थे. और फिर एक बार मेरे पति को कुछ दिनों के लिए बाहर जाना था तो उस दिन रात के 10 बजे थे और अगले दिन मेरे पति की ट्रेन थी तो मैं तो जानती थी कि, मेरे ससुरजी तो मुझको दरवाज़े के छेद में से देख ही रहे है. और फिर मैंने अपने पति को किस करना शुरू कर दिया था, और फिर मैं अपने कपड़े उतारकर पूरी नंगी हो गई थी, और फिर मेरे पति ने भी अपने सारे कपड़े उतार दिए थे. और दोस्तों बेड पर ही मैं अपनी गांड को ससुर जी तरफ करते हुए हिलाने लगी थी जिससे उनको मेरी चूत के छेद बड़ी ही आसानी से दिख सके और फिर हम लोग सेक्स करने में लीन हो गये थे. और फिर हमने सेक्स किया और मेरे पति तो जल्दी ही झड़ गए थे।

और फिर वह अपने कपड़े पहनकर के लेट गए थे. तो फिर मैंने उनको गाली दी और कहा कि, तुझसे चुदवाने से तो अच्छा होता कि, मैं किसी कुत्ते से अपनी चुदाई करवा लेती, कम से कम मेरी प्यास तो बुझ जाती. और मैं उस समय नंगी ही लेटी रही. और यह बात मैंने जनबूझकर के कही थी ताकी मेरे ससुर उसको सुन सके. और फिर अगले दिन मेरा पति अपने काम से चला गया था. और फिर मैं नहाई और मैं अपने ससुर जी के सामने मेरे सफ़ेद सलवार सूट में चली गई थी. और उस समय मेरे ससुरजी मुझको घूर-घूरकर देख रहे थे, और फिर मैंने उनको नाश्ता दिया और फिर मैं भी आकर के उनके सामने बैठ गई थी. और फिर वह मुझसे बातें करने लगे. और फिर थोड़ी देर के बाद उन्होंने पूछा की तुम्हारा पति तो चला गया है, अब तुम्हे डर तो नहीं लगेगा ना अकेले में सोते हुए? तो फिर मैंने भी उनसे कहा कि, डर तो लगता है पापा, पर अकेले सोना तो पड़ेगा ही. तो फिर उन्होंने मुझसे कहा कि, मैं तुम्हारे साथ सो जाता हूँ. तो फिर मैंने उन्हें देखा और मना कर दिया. तो फिर उन्होंने मुझसे कहा कि, तुम मेरी बेटी हो डरो मत. तो फिर मैंने उनसे कहा कि, पापा डरने की बात नहीं है पर इसको लोग सही नहीं समझेंगे। तो फिर उन्होंने मुझसे कहा कि, यह तो सही बात है तुम्हारी, और फिर उन्होंने मुझसे कहा कि, तुम एक काम करो रात को सोते वक़्त अपने कमरे का दरवाजा खुला रखना ताकी अगर तुमको डर लगे तो आसानी से तुम मेरे पास आ जाओ. और फिर तो मैं जान गई थी कि, आज रात को तो मेरी ठुकाई पक्की होने वाली है. और फिर रात को हम सबको खाना खिलाने के बाद नौकरानी अपने घर चली गई थी और ससुर जी भी मुझको दरवाजा खुला रखने की बात को याद दिलाते हुए अपने कमरे में चले गए थे। और फिर मैं भी अपने कमरे में आ गई थी. और फिर मैंने 3 पीस का सेक्सी गुलाबी रंग का नाइट सूट निकाला और फिर मैं उसको पहनकर दरवाजा खोलकर बेफिकर होकर सो गई थी और मैं यह बात तो जानती ही थी कि, आज मेरी मनोकामना पूरी होने वाली है।

और फिर घड़ी में रात के करीब 1 बजे रह होंगे और मुझको अपने ऊपर कुछ आहट सी आने लगी और फिर मैं जाग गई थी. और फिर मैंने देखा तो मेरे कमरे की लाइट जल रही थी और मेरे ससुरजी पूरे नंगे होकर मेरे ऊपर चढ़ने की कोशिश कर रहे थे. और फिर मैं थोड़ा डरने का नाटक करके उठ गई थी और फिर मैंने उनसे कहा कि, यह सब क्या है? तो फिर उन्होंने ज़बरदस्ती मुझको वापस बेड पर लेटा दिया था. और फिर उन्होनें मेरे मुहँ पर अपना हाथ रखकर कहा कि, आज मैं तेरी प्यास बुझा रहा हूँ और तुझको ज़्यादा नाटक करने की कोई जरुरत नहीं है समझी. और फिर मैं समझ गई थी कि, वह मेरे साथ जबरदस्ती करने की कोशिश कर रहे है. और फिर उन्होंने मेरे नाइट सूट के गाऊन को तो उतारकर फेक दिया था. और मैं अब सिर्फ़ अपने गुलाबी रंग की ब्रा और पैन्टी में हो गई थी. और फिर वह मुझको बुरी तरह से किस करने लग गए थे. वह मेरे हाथ की बगलों को भी चाटने लग गए थे. उनकी इन हरकतों से अब मैं भी गरम तो हो गई थी पर अभी भी मैंने उनका साथ नहीं दिया था। दोस्तों ये कहानी आप कामलीला डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।

और फिर उन्होंने मेरी ब्रा को खींचकर उतार दिया था. और फिर वह मेरे बब्स को भी दबाने लग गए थे, और मैं अब और भी गरम हो गई थी. और फिर उन्होंने मेरी पैन्टी भी उतार दी थी. और फिर उन्होनें देखा तो मेरी चूत गीली हो गई है। तो वह उसको देखकर मुझसे बोले कि, साली रंडी मैं जानता था कि, मेरा बेटा तेरी प्यास नहीं बुझा पाता था अब मैं तुझको जी भरके चोदूंगा. और फिर उन्होंने और भी बुरी तरह से मुझको अपनी बाँहों में दबोच लिया था और फिर वह मेरे गालों पर किस करने लग गए थे. वह कभी मेरे होठों पर तो कभी मेरी गरदन पर तो कभी मेरी बगलों को चूम रहे थे. और फिर तो मैं भी उनका साथ देने लग गई थी, और फिर कुछ देर के बाद वह अपना मोटा बड़ा लंड मेरी चूत में घुसाने लगे तो मैंने उन्हें रोक दिया तो फिर उन्होनें मुझसे कहा कि, क्या हुआ रंडी बहुत बड़ा है क्या?

तो फिर मैंने उनसे कहा कि नहीं, और फिर मैं उनका लंड अपने हाथ में लेकर अपने मुहँ में डालकर चूसने लगी तो वह एकदम पागल से हो गए थे. और फिर मैं बिस्तर पर लेट गई थी. और फिर उन्होनें मुझसे कहा कि, तू तो सचमुच की रंडी है. और फिर मैंने उनके लंड को खूब चूसा और फिर मैंने उनके लंड से निकला हुआ माल भी पी लिया था. और फिर मैं उनका लंड अपनी चूत में घुसाने की कोशिस करने लगी तो फिर वह मुझसे बोले कि, अभी रुक जा और फिर वह मुझको बिस्तर पर लेटाकर मेरी दोनों जाँघों को फैलाकर के मेरी चूत पर अपना मुहँ लगाकर अपनी जीभ से मेरी चूत के दानें को रगड़ने लग गए थे. और फिर वह मेरी चूत को बड़े मज़े के साथ चाटने लग गए थे. और मैंने भी उनका सिर पकड़ लिया था और फिर मैं उसको अपनी चूत में दबाने लग गई थी।

दोस्तों इससे पहले मेरी चूत मेरे भाई ने चाटी थी पर मेरे ससुर उसे बहुत ही भूखे कुत्ते की तरह चाट रहे थे. और फिर मैं उनके मुहँ पर ही झड़ गई थी और उन्होनें मेरी चूत को चाट-चाटकर बहुत अच्छी तरह से साफ कर दिया था. और फिर वह मेरी चूत में अपना लंड डालने के लिए तैयार हो गए थे. और फिर जैसे ही उन्होंने अपना लंड मेरी चूत में डाला तो मेरी तो जोर से चीख निकल गई थी, और उनका लंड मेरी चूत में अभी आधा ही गया था और मैंने अपनी गांड ऊपर उठा ली थी. और फिर उन्होनें मेरी गांड के नीचे एक तकीया लगाया. और फिर वह धीरे-धीरे मेरी चूत में अपने लंड से धक्के लगाते हुए अपना पूरा लंड मेरी चूत में डाल दिया था. और इसबार भी मैं चीखकर शान्त हो गई थी. दोस्तों उनका लंड काफ़ी मोटा और बड़ा था। दोस्तों ये कहानी आप कामलीला डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।

पहली बार तो मुझको यह एहसास हुआ और फिर इसके बाद उन्होनें मुझको चोदना चालू कर दिया था. और मेरे मुहँ से लम्बी-लम्बी सिसकियाँ निकल रही थी. आहहह… और चोदो मुझे ससुर जी आपके काले लंड ने तो मेरी जान ही ले ली ऊईईई… मर गई… रे… मैं तो. और फिर कुछ देर तक चोदने के बाद वह मेरी चूत में ही झड़ गए थे. और फिर उनके निकले हुए लंड के वीर्य से मेरी चूत पूरी लबालब भर गई थी. और फिर मेरा और उनका मिला-जुला माल धीरे-धीरे मेरी चूत से बाहर आने लगा था. और फिर वह थककर मेरी बगल में ही लेट गए थे. और फिर थोड़ी ही देर के बाद उनका लंड फिर से कड़क हो गया था. और फिर उन्होंने मुझे घोड़ी बनाकर ज़ोर-ज़ोर से चोदना चालू कर दिया था. और इस तरह से उन्होंने मुझे 4 बार खूब जमकर चोदा था. और उस जबरदस्त चुदाई से मैं तो थककर चूर हो गई थी. और फिर हम दोनों एक साथ नंगे ही सो गए थे।

और फिर अगली सुबह मैं देर तक सोती रही और वह जागकर जा चुके थे. और फिर मैं उठी और फिर मैं अपने कपड़े पहनकर बाहर गई तो वह अखबार पढ़ रहे थे. और फिर उन्होनें मुझको गुड-मॉर्निंग कहा और फिर उन्होनें मेरी तबियत के बारे में पूछा तो मैंने उनसे कहा कि, मेरी चूत में दर्द हो रहा है. तो उन्होंने मुझसे कहा कि, आज रात मैं उसको भी ठीक कर दूँगा. और फिर उन्होनें मेरे बब्स को हल्के से दबा दिया था. और फिर इसके बाद मैं उनकी तरफ मुस्कुराई और फिर मैं नहाने के लिए चली गई थी।

और फिर तो दोस्तों जब तक मेरे पति वापस ना आ गए थे मेरे ससुर जी मुझको तब तक दिन और रात चोदने लग गए थे, और उन्होनें मेरी सास की पूरी भडास मुझपर ही निकाल ली थी। और उन्होनें मेरी चूत और मेरी गांड दोनों का छेद एक जैसा कर दिया था, और उनसे चुदकर मैं भी बहुत खुश हूँ दोस्तों वो चुदाई भी बहुत जमकर करते है और गांड तो पूछो ही मत, लेकिन मेरे पति के जैसे बहुत जल्दी उनका भी माल निकल जाता है। लेकिन उनके साथ दुबारा सेक्स करने में और भी ज्यादा मज़ा आता है।

धन्यवाद कामलीला के प्यारे पाठकों !!