बरसात के बहाने से मिली गर्लफ्रेंड

हाय फ्रेंड्स, Antarvasna मेरा नाम रौनक है और मेरी उम्र 24 साल की है. सबसे पहले तो मेरी तरफ से सभी चूतों और लौड़ों को मेरा प्यारभरा नमस्कार. आज मैं आप सभी लोगों के सामने अपनी एक सच्ची घटना को कामलीला डॉट कॉम के माध्यम से एक कहानी के रूप में पेश करने जा रहा हूँ, आशा करता हूँ कि, यह आप सबको जरूर पसन्द आएगी. कहानी लिखने से पहले मैं आपको अपना परिचय दे देता हूँ। मेरा नाम तो आपको पता चल ही गया है मैं राजस्थान के उदयपुर के पास एक छोटे से कस्बे में रहता हूँ, दिखने में मैं ठीक-ठाक सा नौजवान हूँ परंतु मैं एक नम्बर का चुदक्कड़ हूँ. मुझे शुरू से ही सेक्सी फिल्में देखने और देखकर मूठ मारने का शौक रहा है इसलिए मेरा लौड़ा काफ़ी बड़ा और मोटा है।

अब मैं आपका ज्यादा समय व्यर्थ ना करते हुए सीधा आपकी कहानी पर आता हूँ।

दोस्तों यह कहानी आज से 3 साल पहले की है और यह बात उन दिनों की है जब मैं 21 साल का था और बारहवीं कक्षा में पढ़ता था. मेरी क्लास में एक लड़की पढ़ती थी जिसका नाम शालू था. दिखने में वह बहुत सेक्सी लगती थी. उसके तीखे नैन-नक्श गोरा बदन, बड़े-बड़े बब्स और उभरी हुई गांड, हाय! वह तो एकदम क़यामत लगती थी उसका फिगर 32-28-34 के आस-पास का था मुझे शुरू से ही वह काफ़ी अच्छी लगती थी. मेरे घर के पास ही रहने के कारण हम दोनों में अच्छी दोस्ती भी थी. मैं कक्षा में काफ़ी होशियार था इसलिए वह कई बार मेरे घर पर मुझसे पढ़ने भी आ जाया करती थी. हम दोनों एक ही सर से गणित की क्लास लिया करते थे, और हम उनके पास में साथ ही पढ़ने भी जाया करते थे. सर का घर हमारे घर से तक़रीबन दो किलोमीटर की दूरी पर था तो वह भी मेरे साथ मेरी बाइक पर ही जाया करती थी. मैं उसे काफ़ी पसन्द करता था और उसे चोदने का मेरा काफ़ी मन भी करता था. परंतु वह हमारे पडौस में रहती थी इसलिए मैंने मेरे परिवार की बदनामी के डर से कभी कोशिश ही नहीं की थी. और मैं तो बस एक अच्छे से मौके की तलाश में था. और फिर उन्हीं दिनों हमने एक नया घर लिया था जो हमारे क्लास के रास्ते में ही था, उस घर में कोई नहीं रहता था और मैं वहाँ पर अकेला ही पढ़ा करता था। दोस्तों एकबार जब हम क्लास के लिए जा रहे थे, तो हम आधे रास्ते में ही पहुँचे थे कि, बहुत तेज बरसात होने लगी थी. और फिर हमने रुकना ही उचित समझा तो मैं उसे हमारे घर में ले आया और उसे कमरे में ले गया. मैंने वहाँ उसे बैठाया और तौलिया दिया. बरसात में उसके और मेरे कपड़े भीग चुके थे. भीगी सलवार कमीज़ में उसके बब्स साफ झलक रहे थे. और उनपर से मेरी नज़र ही नहीं हट रही थी. और उनको देखकर मेरा लंड भी खड़ा हो चुका था, और वह शायद उसने भी देख लिया था और उसे यह भी पता लग गया था कि, मैं उसके बब्स को निहार रहा हूँ. और फिर वह उन्हें छुपाने की नाकाम कोशिश करने लगी, और वह मुझसे अपनी नज़रें भी चुराने लगी थी और वह इधर-उधर रखी किताबें देखने लग गई थी।

और तभी अचानक से ज़ोर से बिजली कड़की और वह उठकर डर के मारे मुझसे आकर लिपट गई थी. और फिर मैंने भी उसे अपनी बाँहों में भर लिया था. मुझको उस समय बहुत ही अच्छा लगा था. उसके बब्स के निप्पल बारिश में भीगने की वजह से कड़क हो चुके थे और वह मेरे सीने में गड़ने लगे थे और मेरा लौड़ा भी उसकी चूत में ठोकर मारने लगा था. और फिर तो दोस्तों वासना मुझ पर हावी होने लगी थी, और मेरा तो मन कर रहा था कि, बस वह ऐसे ही मेरी बाँहों में समाई रहे. लेकिन फिर थोड़ी देर के बाद उसे होश आया और वह मुझसे दूर हटने लगी लेकिन मैंने अपने हाथ से उसकी कमर को पकड़कर अपने से सटा लिया था. और फिर वह मुझसे छूटने की नाकाम कोशिश करने लगी थी. और मैं तो बस उसके चेहरे को ही निहारे जा रहा था. और फिर मैं उसके चेहरे पर आए हुए उसके गीले बालों को पीछे करने लगा और फिर मैंने उसके माथे को चूम लिया था. और फिर शायद उसको भी मेरा ऐसा करना अच्छा लगा था और फिर उसने अपनी आँखें बन्द कर ली थी. और फिर मैं उसके गाल से टपकती हुई पानी की बूंदों को पीने लगा था। और फिर जैसे ही मैंने अपने होंठ उसके होठों पर रखे तो उसे जैसे कोई करंट सा लग गया था. और फिर वह मुझसे दूर होकर शरमाकर बेड पर बैठ गई थी. और फिर मैं भी उसके पास जाकर फिर से उसे चूमने लगा तो वह मुझसे कहने लगी कि, यह सब ग़लत है. लेकिन मैंने उसे समझाया कि, ऐसा तो ज़वानी में सब करते हैं. और तभी मैंने उससे अपने प्यार का इज़हार कर दिया था. और फिर मैंने उसे अपनी बाँहों में भर लिया था. दोस्तों वह भी मुझे पसन्द करती थी तो उसने मेरा कोई विरोध नहीं किया था. और फिर मैं उसके गालों को चूमने लगा और फिर मैं उसके होठों को भी किस करने लग गया था. और फिर तो वह भी मेरा पूरा-पूरा साथ देने लग गई थी. और फिर इसी बीच मेरे हाथ अनायास ही उसके बब्स पर चले गए थे, और फिर मैं धीरे-धीरे उसके बब्स को दबाने लगा तो वह भी मस्त होने लगी थी. मैं ऊपर से ही उसके बब्स को मसलने लगा था।

दोस्तों हम दोनों अभी भी एक-दूसरे को प्यासों की तरह चूमे जा रहे थे. और फिर मैंने अपना हाथ उसके कुरते के अन्दर डाल दिया था और फिर मैंने जैसे ही उसके बब्स को स्पर्श किया तो वह और भी गरम होने लग गई थी. और फिर मैंने उसका कुरता भी उतार दिया था और उसने भी मेरी टी-शर्ट उतार दी थी. मैं अब उसे बड़ी ही बेसब्री से चूमे जा रहा था, कभी उसके होठों पर तो कभी उसकी गर्दन पर. और फिर मैं उसके बब्स को भी चूमने लगा था. और फिर मेरे ऐसा करने से उस पर भी मदहोशी छाने लगी थी. मैं उसके एक बब्स को अपने मुँह में लेकर चूस रहा था और दूसरे को अपने हाथ से दबा रहा था। और फिर मैं थोड़ा और नीचे गया और उसकी नाभि को चूमने लगा तो वह और भी उत्तेजित होने लग गई थी और वह अपने मुहँ से आहहह… इस्सस… उफ्फ्फ… की आवाज़ें निकालने लग गई थी. और फिर जैसे ही मैंने उसकी सलवार का नाडा खोलने की कोशिश करी तो उसने मुझे रोक दिया और कहा कि, मैं अपनी शादी से पहले किसी के साथ भी सेक्स नहीं करूँगी. तो फिर मैंने उससे कहा कि, मैं तो सिर्फ़ तुम्हारी चूत को प्यार से चूमूंगा और जब तक तुम्हारी इजाज़त नहीं होगी तब तक कभी भी ऐसा वैसा कुछ भी नहीं करूँगा।

तो फिर वह मान गई थी. दोस्तों मुझे तो उसके साथ सेक्स करना था और मुझे पता था कि, एकबार यदि मेरी जीभ का स्वाद इसकी चूत को लग गया तो यह चाहकर भी मुझे खुद को चोदने से रोक नहीं पाएगी. और फिर मैंने उसकी सलवार नीचे कर दी थी. और फिर मैंने उसकी पैंटी भी निकाल दी थी. और फिर उसकी चूत की झलक को देखकर मैं भी पागल सा होने लग गया था. दोस्तों मैं उस समय पहली बार किसी की चूत को देख रहा था. उसकी चूत से आने वाली महक मुझे पागल करने लगी थी. और फिर मैंने यह सोचा कि, यदि मैंने सीधे ही अपनी जीभ को इसकी चूत में डाल दी तो यह जल्दी ही शान्त हो जाएगी. और फिर मैं उसे और भी तड़पाने लगा था. और फिर मैंने उसकी चिकनी जाँघों पर किस लिया और फिर मैं उनको चूमते-चूमते धीरे-धीरे उसकी चूत पर पहुँचने लगा. वह बहुत गरम हो गई थी. और फिर दोस्तों जैसा की मैंने सेक्सी फिल्मों में देखा था, मैंने उसकी चूत के दाने पर हल्की सी अपनी जीभ लगाई तो उसके मुँह से एक आह-सी निकल पड़ी थी. और फिर मैं उसकी चूत के इर्द-गिर्द चूमने लगा तो वह और भी पागल सी होने लगी थी. और फिर उसने मेरा मुँह पकड़कर अपनी चूत पर रख दिया था. और फिर मैं भी समझ गया था कि, अब यह पूरी तरह से गरम हो चुकी है. और फिर मैंने अपना मुँह वहाँ से हटा लिया तो वह और भी पागल होने लगी थी। और फिर मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिए थे और फिर मैं अपना लौड़ा उसकी चूत पर रगड़ने लग गया था. और इसबार उसने मेरा कोई विरोध भी नहीं किया था. और फिर वह मुझसे कहने लगी कि, अब सब्र नहीं होता मेरी जान प्लीज़ अब डाल भी दो. और फिर वह आहहह… आहह्ह… की आवाजें निकालने लग गई थी. और फिर मेरे पास निरोध था तो मैंने उसे अपने लंड पर चढ़ाया और फिर मैं उसकी चूत पर थूँककर उसमें अपनी ऊँगली डालने लगा जिससे मेरे लौड़े को उसकी चूत के अन्दर जाने में ज़्यादा परेशानी न हो. मुझको पता था कि, यह पहली बार चुदवाने जा रही है तो मुझको थोड़ी सावधानी बरतने की ज़रूरत थी। और फिर मैं उसके ऊपर चढ़कर धीरे-धीरे अपने लंड को उसकी चूत पर रगड़ने लग गया था और साथ-साथ मैं उसको चूमे भी जा रहा था. और फिर मैंने धीरे से अपना लौड़ा उसकी चूत में पेल दिया था. मेरा लंड आधा उसकी चूत के अन्दर जा चुका था और उसके मुँह से एक चीख निकल पड़ी थी और उसकी आँखों में आँसूं भी तैर आए थे.। और फिर मैं उसके होठों को चूमता रहा और मैंने अपने लंड से कोइ हरकत नहीं करी थी ताकि उसका दर्द थोड़ा कम हो जाए नहीं तो मेरा सारा किया कराया काम खराब हो जाता, और वह फिर दुबारा मुझसे कभी नहीं चुदवाती. और फिर धीरे-धीरे उसका दर्द कम होने लगा और फिर तो वह भी अपनी कमर को उठाकर मेरे लंड को अपनी चूत के अन्दर लेने लग गई थी. और फिर मैं भी अब निश्चिंत होकर उसे पेलने लग गया था। दोस्तों ये कहानी आप कामलीला डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।

दोस्तों मैंने निरोध पहन रखा था इसलिए मुझको कोई डर नहीं था. और फिर तक़रीबन 15-20 मिनट की चुदाई के बाद जब मेरा निकलने को हुआ तो मैंने अपना लौड़ा उसकी चूत में रखते हुए ही अपना माल निकाल दिया था. और उसने भी मेरे साथ ही अपना भी पानी छोड़ दिया था. और फिर हम दोनों ही नंगे ही बेड पर एक साथ लेट गए थे. वह काफ़ी खुश और सन्तुष्ट दिख रही थी. और फिर मैंने उसके गाल पर एक प्यारा सा किस ले लिया था. दोस्तों वह उसका पहलीबार था तो मैंने एकबार करना ही उचित समझा. और फिर थोड़ी देर में बरसात भी बन्द हो गई थी. और फिर हम दोनों ने बाथरूम में जाकर एक-दूसरे को साफ़ किया और फिर हम कमरे को ठीक करके वापस अपने घर की तरफ चल दिए थे।

धन्यवाद कामलीला के प्यारे पाठकों !!