आहह रे जवानी – 4

अंकित-नहीं Antarvasna अभी मुझसे कंट्रोल नहीं हो रहा,वो मुझे गरम करके जो चली गयी है,अब मुझे इसको ऐसे ही ठंडा करना पड़ेगा,आप जाऊं यहाँ से.

श्वेता ने सोचा की ये तो ठीक नहीं है,तब वो बोली-क्या मैं तुम्हारी कुछ मदद कर सकती हूँ.

ये सुन कर अंकित एकदम से शॉक मैं आ गया,आज तक उसने अपनी आंटी के बारे मैं ऐसा कुछ भी नहीं सोचा था,जबकि वो अभी 40 की उमर मैं भी बहुत जवान और सेक्सी लगती थी,बल्कि अब जब अंकित ने अपनी आंटी पर इस तरह से नज़र डाली तो वो तो,टिया से भी ज्यादा गदर माल था,इस बात का अहसास आज ही उसको हुआ था,पर फिर भी वो समझ नहीं पा रहा था की अपनी आंटी की बात को कैसे रिएक्ट करे,इसलिए वो चुप रहा.

अब श्वेता भी उस टाइम तो बोल गयी,पर बाद मैं उसको भी अपनी गलती का अहसास हुआ की उसकी बात का क्या मतलब है,तो उसने कहा-मेरा कहने का मतलब था की क्या मैं तुम्हारा पानी निकालने मैं तुम्हारी कुछ मदद करूँ.

अब अंकित को जब अपनी आंटी की बात का मतलब पता चला तो उसने सोचा की आज जब आंटी ही उसके साथ ऐसे बातों मैं नहीं शर्मा रही तो वो ही क्यों शरमाये,और फिर उसकी आंटी तो माल ही इतना जानदार है की अगर उसको मिल जाए तो वो कहीं बाहर मुंह ही नहीं मरेगा.

तो अंकित थोड़ा बोल्ड हो कर अपने लंड की तरफ इशारा करके बोलता है-देखो ना आंटी कब से मूठ मर रहा हूँ इसका पानी ही नहीं निकलता,अब तो मेरे हाथों मैं भी दर्द होने लगा है.

श्वेता-बेटा मैं तुमको कह रही हूँ ना ये गलत होता है,पर अब जब तुमसे नहीं रहा जा रहा तो,ऐसा करती हूँ की मैं इस काम मैं तुम्हारी मदद कर देती हूँ.

ये कह कर श्वेता अपनी जगह से आगे बढ़ी और जा कर अंकित के सामने खड़ी हो गयी.
अब अंकित ने सोच लिया था की जब आंटी हिटाइयार है तो उसको भी कोई एतराज़ नहीं है,अब उसने अपनी आंटी पर एक भरपूर नज़र डाली,आज उसकी आंटी ने लोंग स्कर्ट और साथ मैं एक टाइट टॉप पहन रखा था,वो अभी-2 बाहर से आई थी तो उसने चेंज नहीं किया था,वो उन्हीं कापड़ूँ मैं थी,इसलिए वो और ज्यादा मस्त और सेक्सी लग रही थी,अब अपनी आंटी के बारे मैं सोच कर ही अंकित का लंड और ज्यादा टन गया था.आज उसके लंड को अपनी आंटी के गरमा -गरम और नरम नज़ूक हाथों मैं खेलने का मौका मिलने वाला था,तो वो अपनी पूरी औकात मैं आ गया था.

श्वेता ने कहा-बेटा ये सब आज जो मैं तुम्हारे साथ करने वाली हूँ इस बात का पता किसी को भी नहीं चलना कहिए ,नहीं तो हमारी बहुत ज्यादा बदनामी हो जाएगी,और हम समाज मैं किसी को मुंह दिखाने के लायक नहीं रही जाएँगे.

अंकित-मम्मी आप सही कह रही हो,मैं ये बात किसी को भी नहीं बताऊंगा.

श्वेता-तो फिर तुम लेट जाओ,मैं तुम्हारे लंड को मिठीया देती हूँ.

अब अंकित अपने बिस्तर पर सीधा लेट गया,पर उसने अपनी चड्डी को नीचे नहीं किया,वो कहता तो ये कर सकता था,पर आज उसने सोच लिया था की उसको अपनी आंटी से मजे लेने हैं,तो वो अगर उसकी चड्डी को उतरेगी तो वो नज़ारा भी बहुत सेक्सी होगा.

श्वेता-ये क्या तुम लेट गये अपनी चड्डी को तो नीचे करना था.

अंकित-मम्मी तुम ही क्यों नहीं कर देती.

श्वेता समझ गयी की आज उसका बेटा भी नॉटी मूंड़ मैं आ गया है,तो उसने आगे तरफ कर उसकी फ्रांसी को नीचे कर दिया,जब वो अंकित की चड्डी उतार रही थी तो उसने भी अपनी कमर को ऊपर कर दिया.

जैसे ही उसकी चड्डी उतरी उसका ईशल और मोटा ताना हुआ लंड एकदम से श्वेता की आँखों के सामने आ गया,अभी तक तो श्वेता ने उसको दूर से ही देखा था,पर अब अंकित का लूदा बिलकुल उसकी आँखों के नज़दीक था,वो उसके जिस्म की खुशबू से और ज्यादा टन गया था,और उसकी नसाइन उबर कर सामने नज़र आ रही थी.

अंकित के लंड का सूपड़ा भी गरम और लाल-लाल नज़र आ रहा था,एक बार को तो उसको ऐसे देख कर श्वेता के मुंह मैं पानी आ गया और उसका दिल कहा की वो भूल जाए की अंकित उसका बेटा हईयोर वो उसकी आंटी ,और वो इस गरम विकराल लंड को अपनी चुत मैं ले ले,पर फिर एक आंटी की मर्यादा को ध्यान मैं रख कर उसने ऐसा नहीं किया.

अब श्वेता ने अपना हाथ अंकित के लूदे पर रख दिया,अजिसे ही उसने अपने हाथ से अंकित के लंड को पकड़ा वैसे ही उस्मन और ज्यादा कदकपाना आ गया,अब श्वेता ने उस लंड को अपनी मुट्ठी मैं भर लिया और अपना हाथ धीरे-2 आगे-पीछे करना शुरू कर दिया.

जैसे ही उसने ये किया अंकित ने अपनी आँखें बंद कर ली और वो आहें भरने लगा,अब धीरे-2 श्वेता ने अपने हाथ को उसके लंड पर तेजी से चलना शुरू कर दिया,क्योंकि वो कह रही थी की अंकित का लंड जल्दी से जल्दी पानी छोड़ दे कहीं ऐसा ना हो की उसके सब्र का बाँध टॉट जाए और वो अपनी जिस्म की आग के हाथों मैं मजबूर हो कर कुछ कर ना बैठे.

पर अंकित ने सोच रखा था की कैसे भी करके आज इस बात को यहाँ पर नहीं रोकना है,और इसको और आगे तक ले जाना है,इसलिए वो अपने आप पर कंट्रोल कर रहा था की उसका पानी जल्दी से ना निकले.

जब श्वेता को उसके लंड को मुठियाते हुए 5-7 मिनट हो गये तब उसको भी लगा की इस लड़के मैं तो बहुत स्टॅमिना है,ये अगर किसी लड़की को छोड़ेगा तो उसकी तो चुत को फाड़ कर रख देगा,इन्हीं सब सोचों मैं उसकी चुत भी बहुत ज्यादा पानी छोड़ लगी,अब उसने अंकित के लंड को डोड़नो हाथों से मुठियाना शुरू कर दिया था,पर वो था की अपना पानी निकालने ही नहीं दे रहा था.

तब श्वेता ने कहा-बेटा ये तुम्हारा क्या है जो झाड़ ही नहीं रहा.

अभी श्वेता नहीं कह रही थी की वो अपने बेटे से लंड जैसे शब्द का इस्तेमाल करे.

अंकित-क्या कह रही हो मम्मी.

श्वेता-बेटा ये तुम्हारा जो ये है ना.