आहह रे जवानी

अंकित-क्या है ना.

श्वेता Antarvasna समझ गयी की ये अब मुझसे गंदी बातें भी करना कह रहा है तो बोली-ये तुम्हारा लंड झाड़ क्यों नहीं रहा.

अंकित-मैं क्या बता सकता हूँ.

श्वेता-मेरा हाथ दर्द करने लगा है.

अंकित-तुम रहने दो आंटी क्योंकि मेरे लंड मैं भी सूखा-2 रहने से जलन सी हो रही है.

श्वेता-मैं ऐसा करती हूँ इसपेर थोड़ा सा आइल लगा देती हूँ ,उस-से ये नरम भी पड़ जाएगा और चिकना भी हो जाएगा.

अंकित ठीक है मम्मी,जैसे तुम ठीक समझो.

श्वेता अब बहुत गरम हो चुकी थी,पर वो कुछ कर नहीं पा रही थी,वो अंकित की द्रसिंग से आइल की बोतल ले कर आती है,तब अंकित को सूझता है की ये ही मौका है अपनी आंटी के कपड़े उतरवाने का,तो वो जैसे ही तेल अपने हाथ पर डालने लगती है,अंकित बोलता है-मम्मी आज तुम कहीं बाहर से आ रही हो क्या.

श्वेता-क्यों,क्या हुआ.

अंकित-नहीं आज तुमने फॉर्मल ड्रेस पहन रखी है ना.

ये सुन कर श्वेता को ध्यान आता है की वो जब बाहर से आई ही थी की कुछ ही देर मैं ,यहाँ आ गयी और उसने अपनी ड्रेस चेंज ही नहीं की,वो बोली-अब क्या करूँ,मैंने तो कपड़े ही नहीं चेंज किए,और ये कपड़े तो आइल से खराब हो जाएँगे.

अंकित-आप अपने कपड़े यतार क्यों नहीं देती.

श्वेता-नहीं ये ठीक नहीं रहेगा की मैं अपने कपड़े तुम्हारे सामने उतारूण.

अंकित-अच्छा मैं तो आपके सामने नंगा ही लेता हुआ हूँ,ये सही है क्या?और मैं कौन सा आपको अपने सारे कपड़े उत्तरने के लिए कह रहा हूँ,मैं तो ये सिर्फ़ ऊपर के कपड़े ही निकालने को कह रहा हूँ.

ये बात श्वेता को समझ आ जाती है,पर एक प्राब्लम और भी है,उसने इन कापड़ूँ के नीचे जो अंडरगार्मेंट्स पहने है,वो बहुत ही ट्रांसपेरेंट टाइप के हैं,पर अब उसने सोच लिया था की जब उसका बेटा ही उसको अधनंगी करने को तैयार है तो वो क्यों सोचे,और उसने अपने हाथ ऊपर करके अपना टॉप उतार दिया,फिर उसने नीचे से अपनी स्कर्ट भी एक ही झटके मैं उतार दी,अब वो अधनंगी अवस्था मैं अपने नंगे बेटे के साथ मैं उसके कमरे मैं थी.
श्वेता अधनंगी हो कर अपने बेटे के सामने आई तो अंकित का ताना हुआ लंड तो फटने को तैयार हो गया,पर आज उसने सोच रखा था कैसे भी करके अपनी आंटी को अब नंगी करके ही रहना है तो वो ज्यादा कुछ नहीं बोला,क्योंकि उस-से श्वेता बिदाक भी सकती थी और वो भी सब कुछ बारे आराम से और प्यार से करना कहता था.

और इस सब मैं बहुत कुछ श्वेता की भी मर्जी लग रही थी,तभी तो वो अपने बेटे के सामने नंगी होने को तैयार लग रही थी.पर वो अंकित से बोली के मुझे ऐसे तुम्हारे सामने शर्म आ रही है,तुम ना अपनी पीठ मेरी तरफ करके लेट जाओ मैं पीछे से तुम्हारे इस को मुठिया दूँगी.

अब श्वेता ने आगे हो कर एक बार फिर से आइल की शीशी उठा ली और उस्मन से तेल ले लिया अब उसने उस तेल को अपने बेटे के लंड पर लगाना शुरू किया तो अंकित का लंड तेल लगने से चमक गया,अब वो धीरे-2 अपने बेटे के लूदे को आगे-पीछे करने लगी.

अंकित ने कहा-मम्मी मैं ना यहाँ कोई टावल बिछा लेता हूँ नहीं तो ये आइल से बेडशीट खराब हो जाएगी.

श्वेता-हाँ तुम सही कह रहे हो,मैं बेड शीट ले कर आती हूँ.

और श्वेता उठी और अपनी गांड मटकती हुई कबार्ड से एक बेड शीट निकल लाई,और वो उसने अंकित को दे दी.

अंकित ने वो बेड शीट अपने नीचे बिछा ली,अब श्वेता फिर से अंकित ले लूदे को मुठियाने लगी,और अंकित आहें भरने लगा,पर वो झड़ने को बिलकुल भी तैयार नहीं था.

श्वेता ने जब देखा की ये तो झाड़ ही नहीं रहा तो वो बोली-अंकित तेरा ये तो पानी छोड़ ही नहीं रहा.

अंकित-मम्मी एक तो तुम ये-2 मत बोलो इसको.और अब मैं क्या कर सकता हूँ जब मेरा लंड नहीं झाड़ रहा तो.

असल मैं अंकित पीठ तो श्वेता की तरफ करके लेता था,पर वो सामने के शीशे मैं अपनी आंटी की मोटी-2 गोल-2 तनी हुई चुचियों को शीशे मैं से निहार रहा था,और उसका मन उनको मसलने का कर रहा था,पर वो सीधे-2 ये नहीं बोल सकता था,तो वो बोला-मम्मी तुम मेरी एक बात मानोगे.

श्वेता-हाँ तुम बोलो ,क्इिनकी मैं जल्दी से जल्दी तुम्हारे लंड का पानी निकल कर अब यहाँ से जाना कहती हूँ.

अंकित-तो आंटी तुम एक काम करो तुम अपनी ये ब्रा उतार दो,और अपनी छोचियूं को मेरी नंगी गांड पर रगड़ते हुए मेरी मूठ मरो,इस-से मेरा पानी जल्दी निकल जाएगा.

श्वेता अपने बेटे के मुंह से ये सुन कर एकदम से शॉक हो गयी.वो बोली-नहीं मैं ये नहीं कर सकती.