भाभी हसीना और देवर कमीना

हाय फ्रेंड्स, Antarvasna मेरा नाम दिनेश है और आज मैं अपनी पहली चुदाई की सेक्स कहानी आप सभी को कामलीला डॉट कॉम के माध्यम से बताने जा रहा हूँ, और मुझको आप सभी से उम्मीद है कि, आपको मेरी यह पहली चुदाई की कहानी जरूर पसन्द आएगी. दोस्तों यह कहानी एकदम सच्ची घटना पर आधारित है, और यह घटना मेरे साथ ही घटी थी इसलिए मैं दावे के साथ कह सकता हूँ कि, यह कहानी बिल्कुल सच्ची है।

दोस्तों उस समय मेरी उम्र करीब 25 साल की थी, और मेरी शादी को अभी सालभर ही हुआ था, और मैं अपनी पत्नी से बिल्कुल भी खुश नहीं था. क्योंकि उसके अन्दर सेक्स करने की बिल्कुल भी इच्छा ही नहीं थी और सेक्स करने के लिये वह कभी गरम भी नहीं होती थी. दोस्तों मैं मेरी शादी से पहले चुदाई करने के लिये बहुत ज़्यादा तड़पता था, लेकिन मैंने शादी से पहले किसी की भी चूत नहीं मारी थी. मैंने तो सोचा था कि, एकबार शादी हो जाए तो फिर जी भरकर अपनी पत्नी के साथ ही चुदाई करूँगा। लेकिन दोस्तों मेरे साथ ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था. मेरी शादी तो हो गई पर सेक्स करने में मुझको रत्तीभर भी मज़ा नहीं आता था, क्योंकि मेरी पत्नी बिल्कुल भी गरम नहीं थी. और इसीलिए मैं बहुत परेशान रहने लग गया था. और फिर मैंने सोचा कि, अब तो मुझको किसी बाहर वाली लड़की के साथ ही अपना चक्कर चलाना पड़ेगा. लेकिन मुझको डर भी लग रहा था, क्योंकि अब मेरी शादी हो गई थी, और अगर इसके बारे में किसी को पता चल गया तो लोग क्या कहेंगे? मैं दिन रात ऊपर वाले को कोसता और उससे कहता रहता था कि, तुमने मेरी शादी तो करवा दी, कम से कम एक गरम चूत तो उसको दे देता, और मैं इसके बारे में कुछ भी नहीं जानता क्योंकि यह लंड भी तेरा ही दिया हुआ है और अब तुझको ही इसे शान्त भी करना है. मेरा लंड 6.5” का लम्बा और 2.5” का मोटा है और वह एक गरम चूत के लिए दिन रात तड़पता है।

दोस्तों मेरे लंड के ऊपर इतना तो मुझको विश्वास है कि, अगर कोई गरम लड़की या औरत एकबार मेरे लंड के नीचे आ गई ना, तो वह तो मेरे लंड की पूरी तरह से दीवानी ही हो जाएगी. क्योंकि मेरे अन्दर 25 साल की गरमी जो भरी हुई थी. दोस्तों मुझको उस समय एक दमदार और एकदम गरम चूत की बहुत ज़रूरत थी. और फिर आख़िर ऊपर वाले ने मेरी सुन भी ली थी. और मेरे पास मेरे एक बहुत ही अच्छे और पुराने दोस्त का फोन आया और उसने मुझे अपने घर देहरादून में बुलाया था, क्योंकि वह अपने बेटे के जन्मदिन की पार्टी दे रहा था. और फिर मैंने उसकी बात को सुनते ही तुरन्त ही उसके यहाँ पर आने के लिये हाँ कर दी थी और मैंने उससे यह भी कहा था कि, मैं पक्का जरूर आऊँगा। दोस्तों मैं तो पहले से ही अपने घर में बहुत परेशान रहता था. और फिर मैंने सोचा कि, चलो इसी बहाने से थोड़ा घूमना-फिरना भी हो जाएगा और मेरा मन भी थोड़ा बदल जाएगा। और फिर आख़िर में मैं अपने दोस्त सतीश के पास पहुँच ही गया था. दोस्तों उसकी पत्नी दिखने में बहुत ही सेक्सी और गोरी थी और उसकी पत्नी का नाम मन्जू था. मैं तो उसे एक झलक देखते ही उसका दीवाना हो गया था. दोस्तों कसम से क्या कमाल के गुलाबी-गुलाबी होंठ और मोटी-मोटी आँखें थी उसकी. और उसका फिगर भी तकरीबन 34-30-36 का एकदम गदराया हुआ था. और उसकी गांड तो बहुत ही कमाल की थी।

दोस्तों मैं मन ही मन सतीश से जल रहा था और कह रहा था कि, कहाँ इस साले लौड़ू लंगूर को इतना पटाखा अंगूर मिल गया है, और मुझे क्या मिला एक बुझा हुआ फुस्स पटाखा. चलो जो होना था सो तो हो गया, और फिर मैंने पार्टी का मजा लिया और पार्टी में खूब डान्स और मस्ती भी करी. और फिर पार्टी के बाद मैं सतीश और उसकी पत्नी मन्जू हम तीनों उसके बेडरूम में बैठकर बातें करने लग गये थे. दोस्तों ऐसे ही हम काफ़ी देर तक बातें करते रहे, और फिर हम वहीं पर बातें करते-करते उनके ही बेड पर लेट गये थे. और फिर मुझको पता नहीं कब नींद आई और फिर मैं गहरी नींद में सो चुका था. और फिर रात को करीब 2 बजे के आस-पास मेरी आँख खुली तो मैंने सुना कि, किसी लड़की की आहहह… आहहह… की मस्ती वाली आवाज़ें आ रही थी. और फिर मैंने जैसे ही अपनी बगल में देखा तो अँधेरे में मन्जू पूरी तरह से नंगी होकर सतीश के लंड के ऊपर बैठकर उसका लंड अपनी चूत में ले रही थी दोस्तों कसम से क्या मस्त वाला सीन चल रहा था साली मन्जू का गोरा बदन अँधेरे में भी ऐसे चमक रहा था कि, मानो​ अँधेरे में कोई जुगनू चमक रहा हो. और मन्जू अपनी पूरी मस्ती में अपने पति के लंड के ऊपर उछल रही थी. और तभी दोस्तों सतीश का लंड बीच में ही जवाब दे गया था और वह मन्जू की चूत में से निकल गया था. दोस्तों मन्जू अभी भी बहुत गरम थी और वह लंड के लिए तड़पते हुए सतीश से बोली कि, कभी तो तुम मेरी चूत को शान्त कर दिया करो, एक तो तुम्हारा 5” का लंड और ऊपर से वह 5 मिनट भी खड़ा नहीं रह सकता है अब तुम ही बताओ कि, मैं अब क्या करूँ तुम? और फिर यह कहते हुए वह अपने पति के ऊपर ही लेट गई थी. और दोस्तों मैं भी समझ गया था कि, सतीश अपनी पत्नी को सेक्स की खुशी नहीं दे पा रहा है, और मेरा लंड तो पहले से ही फटने को हो रहा था।

और फिर मैं हिम्मत करके उठकर उनके पास चला गया था. और फिर मैंने मन्जू का हाथ पकड़कर अपना लंड उसके हाथ में दे दिया था. और फिर जैसे ही मेरा लंड उसके हाथ में गया तो वह एकदम से चिल्लाकर बोली कि, आह्ह्ह… इतना बड़ा और मोटा. और फिर मन्जू की आवाज़ को सुनकर सतीश ने झट से कमरे की लाइट जला दी थी. और फिर अब उन दोनों की नज़रे मेरे नंगे लंड पर थी. और फिर मैंने उनसे बोला कि, क्या हुआ भाभी यह तो आपको खुश करने के लिए बाहर आया है। और फिर सतीश भी मेरे लंड को देखकर मन्जू से बोला कि, ले देख साली अब मेरे दोस्त का लंड तेरी चूत को फाड़ेगा. दोस्तों मैं तो सतीश की बात को सुनकर एकदम हैरान हो गया था कि, वह खुद अपनी पत्नी को कह रहा था कि, तू मेरे दोस्त से चुद. और फिर मैं कुछ भी नहीं बोला क्योंकि मुझको तो फोकट में ही बिना कुछ करे इतनी मस्त चूत मिल रही थी। और फिर मैंने मन्जू को खींचकर अपनी बाहों में ले लिया था. और फिर मैं उसके गुलाबी होठों को चूसने लग गया था, कसम से क्या मस्त और मुलायम होंठ थे साली के. और फिर मैंने उसके गोरे-गोरे और बड़े-बड़े बब्स चूसे और फिर आख़िर में मैं अपना मुहँ उसकी चूत के ऊपर रखकर उसकी चूत को बड़े ही प्यार से चूसने लग गया था. और सतीश बगल में पड़े सोफे पर बैठकर सब कुछ देख रहा था. और फिर तभी मैं 69 की पोजीशन में आ गया था और मैं अपने लंड से उसका मुहँ चोदने लग गया था. दोस्तों मेरा लंड आधा ही बड़ी मुश्किल से उसके मुहँ में जा रहा था और वह भी बड़ी मुश्किल से मेरा लंड चूस पा रही थी।

और अब बारी थी उसकी चूत मारने की तो फिर मैं बेड पर नीचे सीधा लेट गया और फिर मैंने मन्जू को कहा कि, आ जाओ भाभी आज अपने देवर के लंड की भी सवारी कर लो. और फिर मन्जू ने मेरे ऊपर आकर अपनी चूत को मेरे लंड के ऊपर सेट किया और फिर धीरे-धीरे वह मेरे लंड को अपनी चूत में लेने लग गई थी. और फिर उसने करीब 5-7 मिनट में धीरे-धीरे​ मेरा पूरा का पूरा ही लंड अपनी चूत में ले लिया था, और साथ ही वह मुझसे बोल रही थी कि, आहहह… आहहह… वाह क्या लंड है. काश आप मेरे पति होते इनसे, तो कुछ होता ही नहीं है. और फिर मैंने उसको जवाब दिया कि, भाभी जी अभी तो पिक्चर शुरू ही हुई है, आगे-आगे देखिए होता है क्या, और फिर यह कहते ही मैंने अपनी पूरी ताक़त से उसकी चूत में एक जोरदार धक्का मारा जिससे मन्जू की तो जान ही निकल गई थी और उसकी साँसें भी वहीं थम गई थी. और उसका मुहँ खुला का खुला ही रह गया था. क्योंकि शायद उसको बहुत दर्द हो रहा था. और फिर उसकी आँखों में से आँसू भी आने शुरू हो गये थे. और फिर उसने मुझसे कहा कि, जरा धीरे मारो ना आपका लंड तो सीधा मेरी बच्चेदानी पर जाकर लग रहा है। और फिर उसके मुहँ से यह सुनते ही अब तो मैं और भी ज़ोर-ज़ोर से उसको चोदने लग गया था. और फिर यह सब देखकर सतीश का लंड भी अब फिर से खड़ा हो गया था. और फिर उसने भी अब बेड पर आकर पीछे से मन्जू की गांड में अपना लंड डाल दिया था और अब मन्जू भाभी अपने पति और अपने देवर के बीच में बैठकर दोनों के लंड को अपनी चूत और गांड में लेकर मस्ती से चुद रही थी। और फिर सतीश ने करीब 4-5 मिनट ही अपनी पत्नी की गांड मारी थी और फिर उसने अपना लंड उसकी गांड में से बाहर निकाला और फिर उसने अपनी पत्नी के मुहँ में अपना लंड डालकर उसको अपने लंड का सारा पानी पीला दिया था. लेकिन इधर तो मैं लगातार ही उसको चोदने में लगा हुआ था. और फिर मैंने उसको करीब 40-45 मिनट तक ऐसे ही चोदा था।

और फिर मन्जू मेरे ऊपर मुझसे चिपक गई थी. और फिर उसने एकदम से अपनी चूत का ढेर सारा पानी मेरे लंड के ऊपर निकाल दिया था कि वह उसकी चूत में से वह पानी पेशाब की तरह बाहर आ रहा था। और फिर अब वह तो एकदम शान्त हो गई थी पर उसकी चूत के गरम पानी ने मेरे लंड को भी अपना पानी निकालने पर मजबूर कर दिया था और उसी समय मेरे लंड ने भी अपना पानी निकाल दिया था। और फिर मेरा और उसका पानी निकलते ही मन्जू मुझसे बोली कि, आहहह… आख़िर मेरे जन्मों की प्यास को आपने आज बुझा ही दिया. आई.लव. यू. देवर जी. और फिर यह कहते ही उसने मुझे मेरे होठों पर एक जबरदस्त किस किया. और सतीश भी साथ में बैठकर यह सब देख रहा था और फिर मैं पूरे 7 दिन तक वहाँ रुका था और मैंने मन्जू को जमकर चोदा था. हाँ तो दोस्तों यह थी मेरी जिन्दगी की एक खूबसूरत और सच्ची सेक्स कहानी।

धन्यवाद कामलीला के प्यारे पाठकों !!