कुँवारी चूत की जबरदस्त चुदाई

हाय फ्रेंड्स, Antarvasna सबसे पहले मैं आप सभी को अपने बारे में बता देता हूँ, मेरा नाम निशांत है, मेरी उम्र 26 साल की है और मैं दिलवालों के शहर दिल्ली का रहने वाला हूँ. हर जवान दिल की ख्वाहिश होती है कि, काश मुझको भी कोई कुँवारी चूत मिल जाए. और मेरी भी यही ख्वाहिश थी, लेकिन मैं हमेशा से ही थोड़ा शान्त सा रहता हूँ और किसी से कुछ ज्यादा बोलता भी नहीं हूँ।

लेकिन पिछले 2-3 सालों से मेरे जीवन में सब कुछ बदल सा गया है. दोस्तों आज से 3 साल पहले जब मैं छुट्टियों में घूमने के लिये मेरे मामा के यहाँ पर गया था. मेरे मामा मेरठ में रहते है. वहाँ पर उनके पडौस में 1 लड़की भी रहती है जिसका नाम संजना है और उसकी उम्र उस समय कम से कम 20 साल के आस-पास की तो रही ही होगी. और उसका फिगर भी 32-28-34 का रहा होगा. दोस्तों पहले भी मैं जब कभी भी मेरे मामा के घर जाता था तो मैं उस लड़की की जवानी को देखकर हमेशा ही सोच में पड़ जाता था कि, काश मुझको इसकी चूत एकबार मिल जाय बस. लेकिन अब मैं खुद को इस लायक समझने लग गया था कि, मैं अब उसको पटा सकता हूँ।

दोस्तों, और फिर एकदिन मैं मामा के घर के गेट पर खड़ा था तो संजना भी अपने घर के गेट पर खड़ी थी और वह मुझको देख-देखकर अपने मन में कुछ बोल रही थी, और वह बार-बार मुझको देखकर हँस भी रही थी. और फिर तो मैं अच्छी तरह से समझ गया था कि, वह मुझको लाइन दे रही है. और फिर मैंने भी तभी इशारे से उससे पूछा कि, क्या हुआ? तो फिर उसने मुझको भी इशारे में कहा कि कुछ भी नहीं. और फिर तो हम काफ़ी देर तक वहीं गेट पर ही एकदूसरे को काफी देर तक देखते रहे थे. और फिर अचानक उसने मुझको एक इशारा किया, जिसको देखकर मैं तो एकदम से हैरान हो गया था. क्योंकि उसने इशारे से मुझको ऊपर छत पर आने के लिए कहा था. और फिर मैंने भी मन ही मन सोचा और फिर खुद से ही कहा कि मुन्ना, आज तो तेरी जिन्दगी ही बन गई है. और फिर मैं जल्दी से ऊपर छत पर गया तो वह वो मुझसे भी पहले ऊपर छत पर पहुँच गई थी. पहले तो मैं छत पर भी उससे इशारों में ही बात कर रहा था मगर जब मुझको लगा कि, वहाँ पर आस-पास हमारे सिवा और कोई भी नहीं है तो फिर मैं छत से ही उसके घर की दीवार कूदकर उसके घर में चला गया था. और फिर वह भी उस समय कुछ घबरा रही थी, मगर मैं तो उतावला था और आज उसके घर में कोई भी नहीं था बस उसकी दादी ही थी जो भी कभी ऊपर नहीं आती थी वह तो हमेशा नीचे ही रहती थी. उस दिन संजना के घर में कोई नहीं था. ऊपर छत पर उनके 1 कमरा था जिसमें उसके भैया और भाभी रहते थे. उसके भैया उस समय ऑफिस गए हुए थे और उसकी भाभी अपनी मम्मी के यहाँ पर गई हुई थी. और फिर मैं उससे बात करता रहा और फिर हमको बात करते-करते शाम से रात हो गई थी, वह सब कुछ इतना जल्दी-जल्दी हो रहा था कि, मुझे भी कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि, मैं क्या करूँ और क्या ना करूँ, क्योंकि मुझको मौका ही ऐसा मिला था कि, मैं आज किसी कुँवारी चूत के मज़े ले सकता था. और मैं तो इतना बेचैन था कि, मुझको तो बस जल्द से जल्द चूत मिल जाए. और फिर पहले तो मैं उसके साथ शराफ़त से भरी बातें करने लगा और फिर मैंने उसको देखा तो भी बार-बार अपनी आँखों को इस तरह से बन्द कर रही थी कि, जैसे उसको भी किसी चीज़ की तड़प हो. शायद उसको भी मेरे लंड की तड़प थी. और फिर मैंने उससे कुछ अलग किस्म की बातें करी मतलब कि, मैं उससे अब सेक्स की बातें करने लग गया था और वह भी बार-बार मज़े से मेरी बातें सुनने लग गई थी. और अब मैं समझ गया था कि, आज तो मेरी ख्वाहिश पूरी होने वाली है. और फिर कुछ देर तक बातें करती-करती वह भी खामोश हो गई थी और फिर मैंने उससे पूछा कि, क्या हुआ? लेकिन वह फिर भी खामोश ही रही. और फिर मैं उसके करीब गया और मैंने उससे फिर से पूछा कि, क्या हुआ? तो वह फिर भी कुछ नहीं बोली तो मेरी हिम्मत और बढ़ गई थी. और फिर मैंने उसके चेहरे को अपने दोनों हाथों से पकड़ा और फिर मैं उसके होठों को चूमने लगा जैसे कि, मैंने कभी किसी फिल्म में देखा था, और फिर मैं वैसे ही उसको किस करने लगा. वह तो बस एकदम खामोश थी और कुछ भी नहीं कर रही थी, लेकिन मुझको तो उसकी खामोशी से ही पता चल गया था कि, उसकी भी हाँ है।

और फिर मैं थोड़ी और हिम्मत करके उसके बब्स को भी दबाने लग गया था जिससे उसके मुहँ से आहहह… सी निकल रही थी. और वह बार-बार मुझसे आराम से करो प्लीज़ कह रही थी, मगर मैं तो अब कहाँ रुकने वाला था. और फिर मैं उसको ऊपर छत पर ही बने उसके भाई के कमरे में ले गया. और फिर वहाँ पर जाकर मैंने सबसे पहले तो उसके कपड़े उतारने शुरू किए, और फिर उसके बब्स को देखकर तो मेरे तो होश ही गुम हो गए थे. वह बाहर से कुछ और अन्दर से कुछ थे. और फिर मैं तो बस उनको ही देखते ही पागल सा हो गया था. और फिर मैं ज़ोर-ज़ोर से उनको दबाने लगा तो वह भी जोर-जोर से सिसकियां भरती जा रही थी. और फिर मैंने अपने कपड़े भी उतारना शुरू किया तो उसने मुझसे कहा कि, नहीं प्लीज़ ऐसा कुछ भी मत करो और मुझको जाने दो. मगर मैं समझ गया था कि, अब यह नखरे कर रही है. लेकिन मैं भी नहीं रुका. और फिर जैसे ही वह बोलने लगती और वैसे ही मैं उसके होठों को चूमने लग जाता था. और फिर तो वह भी जोश में आ गई थी. और फिर मैंने भी अपना असली काम शुरू कर दिया था. और फिर मैंने अपने पूरे कपड़े उतार दिए थे. और अब वह और मैं बिल्कुल नंगे खड़े थे एकदूसरे के सामने. तो फिर उसने मेरा लंड देखा और फिर वह उसको देखकर सोच में पड़ गई थी, और फिर वह मुझसे कहने लगी कि, अरे! कितना बड़ा लंड है आपका मैं तो मर ही जाऊँगी. तो फिर मैंने भी उसको कहा कि, बस पहले-पहले थोड़ा दर्द होगा लेकिन फिर बाद में मज़ा भी आने लगेगा तुमको. मेरा लंड 7” इंच का है, और फिर मैं उसकी चूत मैं पहले तो ऊँगली करने लगा जिससे कि, वह और भी गरम हो जाए और वह खुद ही आगे होकर मेरा लंड माँगने लगे. और फिर अचानक से मैंने उसकी चूत में ऊँगली करने की रफ़्तार कुछ और बड़ा दी थी तो वह बिल्कुल बिन पानी की मछली की तरह तड़प रही थी. और फिर मैंने भी सोचा कि, मेरा इतना बड़ा लंड इसकी चूत में जायगा कैसे? तो फिर अचानक से मेरी नज़र पास ही में रखी नारियल के तेल की शीशी पर पड़ी. और फिर मैंने उस शीशी में से थोड़ा सा तेल लिया और पहले तो मैंने उसकी चूत पर लगाया और फिर अपने लंड पर भी लगाया. और फिर मैंने अपने लंड से उसकी चूत के छेद को मिलाकर पहले तो हल्का सा झटका मारा जिससे तो वह चिल्ला उठी थी उइईई माआ मरगई आह्ह्ह… ऊह्ह्ह… थोड़ा आराम से करो प्लीज़।

और फिर मैं रुक गया था और फिर मैं उसके होठों को चूमने लग गया था. और फिर कुछ देर तक रुककर फिर से उसकी चूत में एक और झटका दिया जिससे मेरा लंड उसकी चूत में कुछ इंच तो अंदर घुसा लेकिन उसे काफ़ी दर्द भी हो रहा था. और फिर तो मैं वहीं पर वैसे ही कुछ देर के लिये अपने लंड को उसकी चूत में ही रखकर रुक गया था. और फिर कुछ देर रुकने के बाद मैंने फिर से एक और झटका दिया तो करीब 5” मेरा लंड अब उसकी चूत में घुस गया था. और फिर अब मुझसे बिल्कुल भी नहीं रुका गया और मैंने एक और ज़ोर का धक्का दिया जिससे वह ज़ोर से चिल्लाई आहहह… मर गई माआअ ऊह्ह्ह… मार डाला आपने तो. दोस्तों ये कहानी आप कामलीला डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।

तो फिर मैंने उसको कहा कि, बस अभी कुछ ही देर में तुमको भी मज़ा आने लगेगा. और फिर कुछ देर के बाद उसको भी मज़ा आने लगा. लेकिन मेरा लंड कुछ ज्यादा ही बड़ा था तो अन्दर-बाहर और धक्के मारने से उसका दर्द और बढ़ जाता था. लेकिन अब मैं नहीं रुक सकता था और मुझे अब किसी की परवा भी नहीं थी. और फिर मैं ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारने लगा तो वह भी तेज-तेज चिल्ला रही थी और वह बार-बार बोलती भी जा रही थी कि, प्लीज़ थोड़ा रूको मुझे बहुत दर्द हो रहा है, प्लीज़ रूको. मगर मैं फिर भी नहीं रुका. और फिर वह भी खामोश हो गई थी और अब तो उसको भी मज़ा आने लग गया था, और वह भी अपनी कमर को उठा-उठाकर मेरा साथ देने लग गई थी. वह अब पूरी तरह से मेरा लंड अपनी चूत में ले रही थी और मैं भी अपनी पूरी ताक़त से धक्के मार रहा था और वह तो बस अपनी आँखें बन्द करके आहहह… उहहह… इईई… उफफ्फ़… करे जा रही थी और मैं बार-बार उसके होठों को चूमता जा रहा था. उसके होंठ दोस्तों कुछ ज्यादा ही नरम थे. और फिर मैंने उनको चूम-चूमकर एकदम सुर्ख लाल कर दिया था. और फिर मैंने सोचा कि, क्यों ना फिल्मी अंदाज़ में इसकी चूत मारी जाय, और फिर मैंने उसको घोड़ी बनाया और उसकी चूत में पीछे से अपना 7″ लम्बा लंड जब डाला तो बस उसकी हालत तो ऐसी हो गई थी कि, जैसे वह अभी मर जायगी, क्योंकि मेरे लंड का साइज़ कुछ ज्यादा ही बड़ा था और उसकी कुँवारी चूत थी इसलिए बर्दाश्त करना उसके लिये कुछ ज्यादा ही मुश्किल था. लेकिन वह भी ऐसी थी कि, वह अब कुछ भी नहीं बोल रही थी. मैंने उसकी कमर को पकड़कर धक्के देना शुरू किया और मैं ज़ोर-ज़ोर से धक्के देने लगा. उसकी कमर पर मेरी पकड़ एकदम मस्त थी इसलिए धक्के देने में मुझको कुछ ज्यादा ही मज़ा आ रहा था. और फिर मैंने सोचा कि, अब किसी और पोज़ में इसकी चूत मारी जाए तो फिर मैं बेड पर लेट गया और मैंने अपने लंड को सीधा किया और फिर मैंने उससे कहा कि, अब तुम मेरे लंड पर आकर बैठो. और फिर वह आराम से उठी और फिर जैसा मैंने उससे कहा था वैसा ही करने लगी. मुझे पता था कि, इस पोज़ में चूत मारने का मज़ा ही कुछ और होगा इस पोज़ में लड़की की जान निकल जाती है जब पूरा लंड उसकी चूत के अन्दर जाता है तो. पहले तो वह मेरे लंड पर आराम से बैठ गई थी और उसने मेरा पूरा लंड आराम से अन्दर ले लिया था और फिर वह कुछ देर के लिये रुकी रही और फिर अचानक से वह खुद ही धक्के देने लगी थी. और उस पल तो मुझे और भी मज़ा आने लगा था और मैं भी नीचे से धक्के देने लगा था और वह भी ऊपर से धक्के दे रही थी. और फिर मुझे लगा कि, मैं अब झड़ने वाला हूँ तो मैंने उसकी गीली चूत में और ज़ोर-ज़ोर से धक्के देना शुरू कर दिया था. और फिर जैसे ही मैं झड़ने वाला था तो मैंने उसको पकड़कर नीचे बेड पर लिटा दिया था।

और फिर मैं उसके ऊपर चढ़कर बैठ गया था और फिर मैं उसके दोनों बब्स के ऊपर ही झड़ गया था. और फिर मैं थककर उसके बराबर में लेट गया था. और फिर उसने अपने बब्स को कपड़े से साफ़ किया और फिर वह मेरे ही बराबर में लेट गई थी. और फिर हम 15-20 मिनट तक आराम से लेटे रहे. और फिर मैं उठा और फिर से उसके होठों को चूमने लगा और फिर काफ़ी देर तक उनको चूमने के बाद मैं हट गया था. और फिर मैंने कपड़े पहनने शुरू किए क्योंकि समय भी काफ़ी हो रहा था और उसके भाई भी ऑफीस से आने वाला था. इसलिए वह भी जल्दी से अपने कपड़े पहनने लग गई थी. और फिर वह मुझसे पूछने लगी कि, आप वापस कब जा रहे हो? तो मैंने उसको कहा कि, अब तो 2-4 बार और मज़े लेने के बाद ही जाऊँगा. तो फिर वह मुझसे कहने लगी कि, अब पता नहीं फिर ऐसा मौका कब मिले? तो फिर मैंने उसको कहा कि, कल फिर जब तुम्हारे भैया ऑफिस चले जाएगें तब… तो फिर वह मुझसे कहने लगी कि, ठीक है लेकिन दिन में 2-3 बजे ही आना वरना दादी को शक सा हो जायगा. तो फिर मैंने उसको कहा कि, तुम चिन्ता मत करो. और फिर मैंने उसको 3 दिन तक रोज़ ही चोदा था जिससे वह भी मुझसे खुशी-खुशी चुदवाती रही. अब तो मैं काफ़ी दिन से मामा के यहाँ पर नहीं गया हूँ लेकिन उसके फोन तो आते ही रहते है, और वह मुझको बुलाती रहती है।

धन्यवाद कामलीला के प्यारे पाठकों !!