आहह रे जवानी – 3

टिया-नहीं मैं ये नहीं कर सकती.

अंकित को ये सुन कर गुस्सा आ गया,उसने कहा की तुम जब चूस नहीं सकती तो चूसती क्यों हो.

टिया-मैंने Antarvasna तो नहीं कहा था की तुम मेरी चुत को चूसू,तुम खुद ही आते ही इसको चूसने लग गये,तो मैं क्यों मना करती और हाँ जो तुम कहते हो वो मैं नहीं कर सकती.

अंकित-जब नहीं कर सकती तो यहाँ क्या कर रही हो.

टिया-ठीक है तो मैं जा रही हूँ,आगे से कभी मेरे से बात नहीं करना और ना ही मिलने की कोशिश करना.

ये कह कर टिया ने अपने कपड़े पहने और वो अंकित के कमरे से निकल गयी,बाहर उसको श्वेता नज़र आई पर गुस्से मैं वो उसको भी नहीं बोली और घर से चली गयी.
टिया को ऐसे गुस्से मैं अंकित के कमरे से जाते हुए देख कर श्वेता हैरान हो गयी,पर उसको कुछ बोली नहीं.

अंदर अंकित को टिया के जाने के बाद बहुत ज्यादा गुस्सा आ रहा था,आज उसके साथ खड़े लंड पे धोखा हो गया था,और अब उसके लंड को चुत मिलने वाली थी वो जा चुकी थी.पर उसका लंड अभी भी कुछ ताना हुआ था,वो सोच रहा था की अब इसका क्या करे.

फिर जब अंकित को कुछ भी समझ नहीं आया तो वो अपने हाथ से ही अपने खड़े हुए लंड को सहलाने लगा,पर जैसे-2 वो अपने लंड पर हाथ को फिरा रहा था,वैसे-2 वो और ज्यादा कड़क होता जा रहा था,पर अब सबसे बड़ी बात ये थी की जो चुत वो मरने वाला था वो वहाँ से जा चुकी है,पर लंड है की मानता नहीं,उसको जितना भी समझते रहो वो और ज्यादा भड़कता जाता है.

अब अंकित से रहा नहीं गया तो वो वहीं पर तक़रीबान नंगा बेड पर लेट गया और मूठ मरने लगा.

बाहर श्वेता को लगा की जब टिया इतना गुस्से मैं यहाँ से गयी है तो अंकित भी पीछे-2 बाहर आएगा,पर जब काफी देर के बाद भी अंकित रूम मैं से नहीं निकला तो श्वेता को थोड़ी चिंता हुई,और वो अंकित के रूम की तरफ तरफ गयी.

जब श्वेता अंकित के रूम मैं पहुँची तो वहाँ का हाल देख कर हाकी-बाकी रही गयी,अंकित के कपड़े फर्श पर पड़े थे और वो खुद बिस्तर पर लेता हुआ औपे लंड को सहला रहा था,तब श्वेता के कदम वहीं पर रुक गये,पर उसकी आँखें अपने बेटे के लंड पर जूम गयी जो की उसके हाथ मैं फन-फ़ना रहा था.इतना मोटा तगड़ा लंड देख कर उसकी आँखें खुली की खुली रही गयी,क्योंकि इस उमर मैं ही उसका लंड इतना मोटा ताजा हो गया था.
अपने बेटे को ऐसे अपना लंड मसलते देख कर श्वेता को कुछ-2 समझ आ रहा था की उन दोनों के बिच मैं कुछ गड़बड़ हुई है,फिर श्वेता ने एक बार तो सोचा की क्या उसको ऐसे मैं अपने बेटे के पास जाना कहिए या नहीं?

कुछ देर तक सोचने के बाद श्वेता अपनी जगह से आगे बढ़ी और उसने अंकित को आवाज़ लगाई.अंकित अपनी आंटी की आवाज़ पर ध्यान नहीं देता क्योंकि वो तो किसी दूसरे ख़यलून मैं खोया हुआ था,तब श्वेता ने उसको दुबारा से बोला,अबकी बार अंकित को लगा की कोई उसको आवाज़ लगा रहा है,पर जब उसने अपनी गर्दन घुमा कर दरवाजा की तरफ देखा तो उसकी आंटी वहाँ खड़ी थी.

अंकित को एकदम से होश आया की वो किस हालत मैं पड़ा हुआ है उसने जल्दी से अपनी कमर को ऊपर करके अपनी फ्रेंसे को ऊपर चढ़ा लिया और अपने लंड को अंदर कर लिया,हालाँकि वो अभी भी ताना हुआ ही था,इसलिए वो उस चड्डी मैं भी उभरा हुआ नज़र आ रहा था.

अंकित को समझ नहीं आ रहा था की उसकी आंटी आज उसके कमरे मैं क्या कर रही है,और वो शर्मा भी रहा था की आज उसकी आंटी ने उसको इस हालत मैं देख लिया है.

श्वेता ही बोली-अंकित बेटा ये तुम क्या कर रहे थे.

अंकिटपनी आंटी के इस सवाल का क्या जवाब देता इसलिए वो कुछ भी नहीं बोला.तब श्वेता ने उस-से दुबारा से पूछा-बेटा क्या बात है अभी टिया भी गुस्से मैं यहाँ से गयी है और तुम भी कमरे मैं ऐसे हालत मैं हो,क्या सब ठीक तो है ना?तुम मुझे बता सकते हो,इसमें शरमाते की कोई बात नहीं है.

अंकित पहले तो काफी देर तक सोचता रहा की अपनी आंटी को आज के किससे के बारे मैं क्या बोले,पर जब उसको लगा की श्वेता उसके जवाब का ही इंतजार कर रही है,तब वो बोला-मम्मी ऐसे कोई खास बात नहीं है ,आप परेशान ना हूँ.

श्वेता-कैसे परेशान ना हूँ,वो पता नहीं किस मूंड़ मैं चली गयी और यहाँ तुम अपने आप जो कर रहे हो ये सब सेहत के लिए सही नहीं है.

अब अंकित गुस्से मैं तो था ही और अपनी आंटी की बात पर वो बोला-अब आप ही बताऊं मैं क्या करूँ,जब उसका टाइम था तो उसने तो मजे ले लिए ,पर जब मेरा टाइम आया तो बोलती है की मुझ से ये सब नहीं होता,अब वो तो चली गयी पर मेरा काम नहीं हुआ,इसलिए मैं ये सब कर रहा था.

श्वेता को अंकित की बताईं कुछ-2 समझ आ गयी पर फिर भी पूरी बात का पता नहीं चल पा रहा था और इस-से ज्यादा पूछना एक आंटी के लिए कहे वो कितनी ही अड्वान्स हो भारतीय समाज मैं थोड़ा सा मुश्किल ही था,इसलिए वो बोली-कोई बात नहीं बेटा पर तुम ये जो सब अपने हाथ से कर रहे हो ये सब अपने शरीर को ही नुकसान करता है.

अब अंकित बहुत फ्रस्टरेटेड हो गया था तो वो बोला-अब मैं क्या करूँ जब वो ही मेरी कलपद कर गयी,अब इसको शांत करने के लिए कुछ तो करना पड़ेगा ना.

श्वेता के समझ मैं नहीं आया की अब अपने बेटे की बात का क्या जवाब दे,पर वो ये भी नहीं कहती थी की ऐसे मूठ मर मर के वो अपनी जवानी के इस अमृत को ऐसे ही खराब करे.तो वो बोली-बेटा जब तुम्हारी टिया से बनती नहीं है तो तुम क्यों उसके पीछे टाइम खराब कर रहे हो तुम इतने हॅंडसम हो की तुम्हें तो अभी कोई भी मिल जाएगी.

अंकित-अरे आंटी वो तो ठीक है ना मैं कब उसका ही इंतजार कर रहा हूँ,मैं तो बस अभी अपने इसको आराम देने के लिए ऐसा कर रहा था,नहीं तो अब मैं कौन सा दुबारा उसके पीछे जाने वाला हूँ.

श्वेता-पर ये कभी-2 करते-2 आदत बन जाती है,इसलिए तुम ये कभी भी मत किया करो.

अंकित-ठीक है तो अब आप ही बताऊं की अभी मैं क्या करूँ.

अब श्वेता क्या करे,अंकित ने सवाल ही ऐसा पूछ लिया की उसकी जुबान ही बंद हो गयी,पर वो भी इतनी जल्दी हार मान-ने वाली नहीं थी,तो उसने कहा-अभी तुम ऐसे ही नहीं सो सकते क्या?