ट्रेन में सेक्सी लेक्चरर रानी ने लंड चूसा

सेक्स की कहानियां Antarvasna पढने वाले मेरे दोस्तों को वाहिद का सलाम. मैं अपनी पहचान में इतना ही कहूँगा की मैं एक आउट माइंडेड ओपन बन्दा हूँ. मैं लड़कियों के साथ फ्लर्ट करने की रूचि नहीं रखता हूँ. लेकिन अक्सर लकी रहता हूँ सेक्स के मामले में. ऐसी ही एक चुदाई स्टोरी!

ये स्टोरी में आप पढेंगे की कैसे मैं चलती हुई ट्रेन में अपनी कलिग के साथ ओरल सेक्स के मजे लिए थे. मैं एक कोलेज में लेक्चरर का काम करता हूँ और मेरी उम्र 23 साल हे. वो भी मेरे साथ काम करती हे लेकिन वो मेरे से पांच साल बड़ी हे. वो कंप्यूटर साइंस डिपार्टमेंट में काम करती हे. उसका नाम रानी हे.

तो बात हमारे कोलेज के एक इंडस्ट्रियल टूर की हे. मेरे पास ट्रेन में बूढ़े प्रोफेसर दयाल जी बैठे हुए थे जिनकी नाक में भी घने बाल हे. साला मैं बोर हो रहा था और मैंने कान में हेडफोन लगाए ताकि वो अपनी होम लोन की राम कथा चालू ना कर दे. मेरी आँखों के ऊपर मैंने अपनी जेकेट रख दी थी. तभी कोई लेडी आती दिखी. दयाल जी बोले, रानी रानी. वो हमारी कलिग ही थी.

वैसे कोलेज में रानी का और मेरा डिपार्टमेंट पूरा अलग था तो कम ही मिलते थे हम. और रेग्युलर साडी पहनने वाली रानी ने टी शर्ट और टाईट जींस पहना था इसलिए पहचानना भी मुश्किल हो रहा था.

मैं तो आज रानी मेडम के बूब्स से अपनी आँखे ही नहीं हटा पा रहा था. वो बड़ी सेक्सी लग रही थी. दयाल जी से बात की तब मेरे कान पर हेडफोन थे इसलिए मैंने कुछ सुना नहीं ज्यादा. फिर उसकी और मेरी नजरें मिली. वो सामने ही बैठ गई. उसके होंठ एकदम सेक्सी थे जिसे चूसने का मन हो गया था मेरा. कुछ लड़के अपने साथ बियर लाये थे वो मैंने भी लगाईं थी आधी ग्लास इसलिए खुमार में ही था मैं भी.

फिर मैंने हेडफोन निकाले. रानी ने कहा आप लोगों के पास तो कम मस्ती हो रही हे. मैंने कहा क्यूँ, वो बोली अरे मैं लड़कियों के साथ हूँ वो लोगो ने तो नाक में दम ही कर दिया हे मेरे. वो हंस हंस के बातें कर रही थी और मैं उसके चहरे को, होंठो को और बूब्स को देख के विचलित सा हुआ जा रहा था. उसने भी देखा की आज मैं कुछ अलग ही था. वो भी तो नजरें नहीं मिला पा रही थी मेरे से.

फिर वो उठ के जाने लगी तो मैंने कहा क्या हुआ?

वो बोली अब जाना पड़ेगा न वरना लड़कियां परेशान कर देगी साथ वाले यात्रियों को. मैंने कहा एक काम करो अपने मोबाइल नम्बर दे दो, मैं और दयाल जी सोये रहे तो स्टेशन आने से पहले उठा देना. उसने अपना नम्बर दे दिया, मैंने उस वक्त ही उसे मिस कॉल दे दी.

कुछ देर में ही दयाल सो गए और मैं भी अपनी मिडल बर्थ में लेट गया. लेकिन नींद ही नहीं आ रही थी आज तो. रानी के सेक्सी टी शर्ट और जींस वाले लुक की वजह से मेरे लंड के अन्दर के सब सेक्स नर्वस एकदम से उमड़ से गए थे. मैंने कुछ देर बात उसे व्हाटसएप्प किया. वो बोली, क्या हुआ नींद नहीं आ रही हे?

मैंने कहा नहीं!

वो बोली, क्या कर रहे हो?

मैंने कहा, सोने की कोशिश!

उसने कहा, और कुछ देर पहले क्या कर रहे थे?

मैंने कहा, कब?

उसका रिप्लाय आया जब मैं दयाल जी के पास में खड़ी थी तब!

मैंने कहा, अच्छा वो, कुछ तो नहीं किया था मैंने.

उसका आंसर आया, अब इतने भी शरीफ मत बनो मुझे पता हे की तुम मेरे बूब्स को घुर रहे थे. और पीछे उसने स्माइली का सिम्बोल डाला था मतलब की वो उसे आसानी और सहजता से ही कह रही थी.

अब मुझे पता ही नहीं चल रहा था की उसे क्या जवाब दूँ. मैंने सोचा की खोने को वैसे भी क्या हे इसलिए मैंने उसे कहा, अब इतने अच्छे हे टाईट और बड़े तो देख ही लिए! कसम से आँखे हटी ही नहीं मेरी.

उसका कुछ देर तक कोई जवाब नहीं आया तो मैं फिर से सोने की कोशिश में लग गया. करीब एक बजे मुझे लगा की किसी चीज का टच हुआ मेरे लेग को. मैंने उठ के देखा तो रानी ही थी वो जो मुझे धीरे से जगा रही थी. मैंने कहा, स्टेशन आ गया क्या?

उसने अपने मुहं पर ऊँगली रखी और मुझे धीरे से बोलने को कहा. फिर उसने कहा मुझे भी नींद नहीं आई आज तो.

मैंने बर्थ से निचे उतर आया. हमारा पूरा ग्रुप सोया हुआ था. और वैसे भी ठंडी का जोर ज्यादा ही था आज तो. मैंने कहा चलो दरवाजे वाली साइड वहां आराम से बाते करेंगे. उसने वहां जा के बेसिन में फेस धो लिया और फिर हम दोनों वही खड़े रहे. हम दोनों बहार की ठंडी हवा का मजा ले रहे थे. उसकी जुल्फे उड़ के वापस उसके बूब्स के ऊपर सेटल हो रही थी.

उसकी टी शर्ट थोडा ऊपर हो गई थी और उसकी नाभि दिख रही थी. मैं उसकी दूध सी चमड़ी को ही देख रहा था. उसने भी माइंड नहीं किया मेरे इस देखने को. मैं थोड़ी हिम्मत दिखाई और आगे बढ़ के अपने हाथ को उसकी कमर के ऊपर रख दिया. वो एक भी शब्द नहीं बोली!

मैंने धीरे से उसकी हिप को रब किया और उसकी टी शर्ट को थोडा और ऊपर कर दिया. हम दोनों जैसे एक पल के लिए भूल ही गए थे की हम ट्रेन में थे! उसने उतना रिस्पोंस नहीं दिया. मैंने उसकी कमर को पकड़ा दोनों हाथ से और उसे दबाया हलके से. उसने अपने चहरे को ऊपर को किया. मैंने मौका देख के एक किस दे दी उसको गले के ऊपर और उसकी नेक को चूम ली. वो अपने होंठो को मेरे होंठो के ऊपर ले आई और मिला दी. हम दोनों स्मूच करने लगे.

वो एकदम से पीछे हट गई और मेरी आँखों में देखने लगी. मैं समझ गया की वो यहाँ खुले में घबरा रही थी. मैंने उसका हाथ पकड़ा और उसे वाशरूम में ले गया. मैंने डोर को अंदर से लॉक कर दिया.

जैसे ही डोर लोक हुआ वो मेरे गले के ऊपर किस करने लगी. मेरे दोनों हाथ उसकी चुचियों पर थे जिन्हें मैं अपनी हथेली से मसलने लगा था. हम दोनों के लिप्स मिले हुए थे और मस्त किस दे रही थी वो मुझे. फिर मैंने मस्ती में ही उसकी होंठ को बाईट भी दे दी. मैंने अब उसकी टी शर्ट को ऊपर तक उठा दिया और उसके बूब्स मेरे सामने थे. मैं उसकी ब्रा के ऊपर से ही उन्हें चूसने लगा और बाईट भी करने लगा. उसने अपनी ब्रा को खोली और उसे साइड में कर दी ताकि मैं नंगे बूब्स का मजा ले सकूँ.

मेरे दिमाग में एकदम सुन्नता आ गई थी. कैसे मैंने अपनी कलिग को ट्रेन के टॉयलेट में अधनंगा कर रखा था! मैंने अब उसे दिवार पकड़ाई और निचे हो के मैं उसकी नाभि को चूमने लगा. और तब मेरे हाथ उसके बूब्स को और चिकने पेट को सहला भी रहे थे.

मैंने उसकी पेंट को ढीला किया लेकिन उसने मुझे वापस ऊपर खिंच लिया. उसने मुझे जोर से किस कर ली और वो अपने घुटनों के ऊपर चली गई. उसने मेरी पेंट की बकल को खोली और मेरे लंड को बहार निकाल दिया. वो मेरे लोडे की टिप को यानी की सुपाडे को किस कर रही थी. मैं तो सब से उपर के आसमान पर था.

और फिर वो मेरे लंड को लोलीपोप के जैसे चूसने लगी गिला कर कर के. उसने होंठो को लंड के सब तरफ लोक कर दिया था और किसी अनुभवी कोक सकर की पहचान थी वो. वो अपने बूब्स को जोर जोर से हिलाते हुए मेरे लंड को बड़े ही मजे से सक करने मे बीजी थी.

उसने मेरे शॉट्स को एकदम निचे कर दिया और मेरे बॉल्स को घिसने लगी लंड को चूसते हुए. वो लंड चूसने में बड़ी माहिर खिलाड़ी लग रही थी. मैंने भी उसे रोका नहीं. उसके होंठ मेरे लंड के ऊपर घूम रहे थे और अपनी जादूगरी दिखा रहे थे. मैं मोअन कर रहा था प्लीजर कि वजह से. मैंने उसे कहा की मेरा पानी निकलेगा लेकिन रानी को उसकी कोई परवाह हो वैसा लगा नहीं मुझे.

मैं उसके मुहं में ही झड़ भी गया और वो एक एक बूंद को अमृत समझ के पी भी गई. फिर वो एक मस्त स्माइल देते हुए खड़ी हुई और अपने कपडे सही करने लगी. वो बोली, आप का लंड तो एकदम मस्त हे, चूसने का मजा आ गया.

मैंने उसे अपनी बाहों में भर लिया और उसकी चूत को टच करना चाहा. लेकिन उसने मुझे रोका और बोली, इतनी जल्दी क्या हे हम एक ही तो कोलेज में हे, मौका और मजा दोनों आप को मिलेगा मेरी जान!

और वो मुझे आँख मार के अपने कपडे सही कर एक वहां से निकल गई. मैं अभी भी यकीन नहीं कर रहा था की ये हसीन हादसा मेरे साथ हो गया था. चलती ट्रेन में मुझे अपनी कलिग लेक्चरर से इतना मस्त ब्लोवजोब मिला था.