घरेलू चुदाई समारोह 14

“तुम मेरे मुँह में झड़ antarvasna सकते हो, मेरे राजा बेटे…” उसने kamukta अपनी जीभ को लण्ड के द्वार पर लगाए रखा।
“क्या तुम सच कह रही हो मम्मी…” सजल अब रुक नहीं पा रहा था। उसने पूरा दम लगाकर अपनी मम्मी के विशाल मम्मों को खींचा।
“मुझे इस समय दुनिया में और कुछ नहीं चाहिये…”
“तो फ़िर लो… यह मेरा पहली बार है किसी औरत के मुँह में झड़ने की…”
“आ जाओ बेटे, तुम्हारी मम्मी का मुँह तुम्हारे रस को पीने के लिये बेचैन और प्यासा है…”
सजल यही सुनना चाहता था। उसने कोमल के मम्मों को और जोर से भींच डाला। कोमल की चीख निकल गयी। पर अगले ही पल उसको अपनी जीभ पर अमृत की पहली बूंद का स्वाद महसूस हुआ।
“पियो मम्मी…” कहते हुये सजल ने जो पिचकारी मारनी शुरू की तो कोमल का पूरा मुँह वीर्य से भर गया।
यह सोचकर कि कोई बूंद बाहर न गिर जाये कोमल ने वापस अपना मुँह सजल के तने लण्ड पर कस दिया। इस प्रक्रिया में कोमल को लगा कि कुछ हो रहा है जो उसकी समझ के बाहर है… पर क्या… फ़िर उसने जाना कि वो भी तेज़ी के साथ झड़ रही थी, बिना चुदे, बिना अपनी चूत को छुए… और ऐसे बह रही थी कि बस…
“चोद मेरे मुँह को, मेरे लाल… मैं भी झड़ रही हूँ…” जब वासना का ज्वर समाप्त हुआ तो कोमल ने अपने बेटे को अपनी बाहों में भर लिया और सिसकने लगी।
“मम्मी, क्या तुम ठीक हो…”
मम्मी ने अपने बेटे का एक प्रगाढ़ चुम्बन लिया- “मैं इससे ज्यादा संतुष्ट कभी नहीं हुई, मेरे लाल…”
सजल ने उसकी एक चूची को कचोट कर पूछा- “मम्मी क्या तुम समझती हो कि जो हुआ वो सही था…”
“अब वापस जाने के लिये बहुत देर हो चुकी है… और मैं सोचती हूँ कि जो हुआ अच्छा हुआ। तुम क्या सोचते हो…”
“मुझे इस बारे में कुछ अजीब सा लग रहा है… पर था बहुत अच्छा… बहुत… पर मैं अब पापा से मिलने में थोड़ा परेशान होऊँगा…”
कोमल की मुश्कुराहट गायब हो गई- “हाँ ये दिक्कत रहेगी… पर हम उन्हें बता नहीं सकते। हमें ध्यान देना होगा कि हमारे आचरण से उन्हें कोई शक न हो…”
जब सजल ने हामी भरी तो कोमल बोली- “हमारे पास पूरी रात पड़ी है, प्यारे… और अभी तक मैनें तुम्हारा यह मूसल जैसा लौड़ा अपनी चूत में महसूस नहीं किया है…”
“यहाँ… टब में…” सजल ने पूछा।
“नहीं पागल, मैं चाहती हूँ कि जब तुम मुझे चोदो तो खूब जगह हो जिससे कि मैं जितना घूमना चाहूं, घूम सकूं। मैं जानती हूँ कि जब तुम्हारा यह बल्लम मेरी चूत में घुसेगा तो मैं पागल हो जाऊँगी और तड़प-तड़पकर घूम-घूमकर चुदवाऊँगी… चलो बिस्तर पर चलो…”
उस चुदासी नंगी माँ ने अपने नंगे जवान बेटे का हाथ पकड़ा और सीधे बिस्तर की ओर बढ़ चली। उसने अपने शरीर को सुखाने के बारे में सोचा तक नहीं। बिस्तर पर जाकर पीठ के बल जा लेटी और अपनी टांगें चौड़ी करके बाहें फैलाकर बोली- “आ मेरे बच्चे, अब मुझे चोद…”
“तुमने मुझे चूसा था मम्मी, क्या मैं भी…” सजल ने कोमल की झाँटों में से झलकती, गुलाबी चूत को देखते हुए पूछा। उसने कभी चूत नहीं चाटी थी और वो भी अपनी मम्मी को अपने प्यार की गहराई दिखाना चाहता था।
“हाँ, मेरे प्यारे… तेरा लाख-लाख शुक्र यह सोचने के लिये…” कोमल हाँफ़ती हुई बोली और अपनी चूत की पंखुड़ियों को फ़ैलाने लगी। अंदर का हसीन नज़ारा दिखाते हुए बोली- “अपनी जीभ को यहाँ डाल मेरे लाड़ले…”
जब सजल ने अपना मुँह उसके नज़दीक किया तो चूत की तीखी गंध उसके नथुनों में आ समाई। कोमल ने अपनी चूत की मांस-पेशियों की फैलाया-सिकोड़ा जिससे कि गंध और बढ़ी। पर सजल रुका नहीं। उसने अपने यार-दोस्तों से सुना था कि चूत चाटना बेहद ही वाहियात काम है। पर उसके मन में अपनी मम्मी की फुदकती हुई चूत के लिये ऐसी कोई भावना नहीं थी। जब सजल की जीभ ने चूत की पंखुड़ियों को छुआ तो कोमल की तो जान ही निकल गई। उसने अपना सिर उठाया जिससे कि वह अपनी चुसाई देख सके।
“मेरे प्यारे बच्चे…” वो कुलबुलाई- “अपनी जीभ मेरी चूत में जहाँ तक डाल सकते हो डाल दो… हाँ तुम बहुत अच्छा कर रहे हो…” अगर वो इस रास्ते पर चल ही पड़े थे तो पूरा ही आनंद लिया जाये, उसने सोचा। उस भूखे लड़के को चूत की महक से नशा सा हो चला था। उसे आश्चर्य था कि वह चूत उसकी जीभ पर इतनी तंग क्यों लग रही थी। उसने अपने लण्ड को एक हाथ से पकड़कर रगड़ना शुरू कर दिया।
“चूसो जोर से…” जब सजल ने कोमल की चूत की क्लिट को चबाया तो वह बिल्कुल बेकाबू हो उठी।