घरेलू चुदाई समारोह 15

सजल को अनुभव antarvasna तो कम था पर kamukta इच्छा तीव्र थी। इसलिये वो एक बेहतरीन काम को अंजाम दे रहा था। उसने तो बस यूं ही चबाया था, क्या पता था कि उसकी मम्मी को इतना अच्छा लगेगा।
कोमल को अपनी चूत से हल्का सा बहाव महसूस हुआ। पर कुछ ही क्षण में वो एक ज्वालामुखी की तरह फ़ट पड़ी। ऐसा पानी छूटा कि बस- “अरे बेटा, मैं झड़ी… झड़ी रे माँआँ मेरी… चूस ले मुझे पी जा मेरा पानी… मेरे लाल… मेरे हरामी बेटे… आआआहह्हह्हह… हाआआआ… आआआआ…”
सजल का चेहरा तो जैसे ज्वालामुखी में समाया हुआ था। कोमल ने अपनी जांघों में उसे ऐसे कसा हुआ था कि उसकी सांस रुकी जा रही थी। पर वो कुछ नहीं कर सकता था। हाँ वो उस स्वादिष्ट पेय को जी भरकर पी सकता था, सो वही कर रहा था।
“तेरे मुँह में तो स्वर्ग है बेटा…” जब कोमल झड़कर निपटी तो बोली।
सजल ने भी चैन की सांस ली जब कोमल की जांघों ने अपनी पकड ढीली की। कोमल कुछ देर के लिये तो संतुष्ट हो गई थी पर कितनी देर के लिये…
“पेल दे अब यह लौड़ा मेरे अंदर, मेरे लाल…” कोमल फुसफुसाकर सजल से बोली।
सजल को तो कुछ करना ही नहीं पड़ा क्योंकी कोमल ने उसे अपने ऊपर खींचा और अपने हाथ से उसका लण्ड अपनी चूत के अंदर डालना शुरू कर दिया।
“मम्मी, यह अंदर जा रहा है…” सजल ने अपने मोटे लण्ड के सुपाड़े को कोमल की गीली चूत में विलीन होते देखकर कहा।
“क्या मेरी चूत तंग है…” कोमल ने पूछा- “क्या तुम्हारे लौड़े के लिये मेरी चूत टाइट है…”
“इतनी टाइट कि दर्द हो रहा है…” सजल ने अपनी मम्मी की चूत में अपने लण्ड को और गहराई तक उतारते हुए कहा। उसका लण्ड चूत में जा रहा था या किसी भट्ठी में…
“शायद इसलिये कि तुम्हारा लण्ड ही इतना बड़ा है। मेरी तो चूत जैसे फ़टी जा रही है…”
“क्या मैं रुक जाऊँ…” सजल ने चिंता से पूछा।
“ऐसा कभी न करना। चोदते समय मेरे साथ कभी सद्व्यव्हार मत करना। मुझे यह मोटा लौड़ा अपनी चूत की पूरी गहराई में चाहिये… पूरा जड़ तक… तुझे मैं सिखाऊँगी कि मुझे कैसी चुदाई पसंद है… मुझे जोरदार और निर्मम चुदाई पसंद है… कोई दया नहीं… वहशी चुदाई… अब रुको मत और एक ही बार में बाकी का लण्ड घुसेड़ दो मेरी चूत में…”
यह सुनकर सजल ने एक जोरदार शाट मारा और पूरा का पूरा मूसल अपनी मम्मी की चूत में पेलम-पेलकर दिया। पर कोमल के लिये यह भी पूरा न पड़ा।
“और अंदर…” वो चीखी।