रिच आंटी जवान लंड की भूखी

कामिनी को मैं Antarvasna कुछ सालों पहले मुंबई की एक पोश क्लोथिंग शॉप में ही मिला था. तब मैं जवानी के दिनों में था, 20 साल की बांकी उम्र थी मेरी. और बॉडी काफी सुडोल थी मेरी. वो वहां पर शोपिंग के लिए आती थी और मुझे देख के उसकी आँखे चौंधिया सी गई थी.

उसके नखरे, और अदाओं को देख के मैं समझ चूका था की वो उन औरतों में से ही हे जिन्हें अपने पति पसंद नहीं होते हे. या फिर पति उनको बिस्तर में औरत का अहसास नहीं करवा पाते हे इसलिए वो बहार मर्दों की खोज में रहती हे.

उसकी पैसो को चकाचौंध ने उसके अमिर होने के सिग्नल तो दे ही दिए थे. उसकी कपडे की परख कमजोर थी और हमारे सेल्समेन उसे 10 पैसे का माल एक रूपये में बेचते थे. उसका फिगर भारी था लेकिन लगती तो मस्त ही थी वो. हालांकि उसके बूब्स ऐसे लगते थे जैसे उनसे बहुत काम लिया गया था. पर फिर भी प्यारे थे.

एक दिन उसने अपना विजिटिंग कार्ड मुझे दिया और अपने होंठो को जबान से गिला कीया एकदम सेक्सी ढंग से. और फिर मुझे हलकी सी आँख भी मार दी उसने. मैं समझ गया की ये बड़े घर की औरत को जवान लंड से अपनी भूख मिटानी थी.

मैं भी बहुत दिनों से किसी की चूत को नहीं चोदा था. इसलिए मैंने भी एक बार उसे अपनी सेवा का मौका देने के लिए सोचा. मैंने शाम को उसे उसके मोबाइल पर कॉल किया. वो मुझे तुरंत पहचान भी गई. उसने अपना पता बताया जो अँधेरी की एक पोश कोलोनी थी जिसमे करोड़ों के बंगले थे. उसने कहा की अभी आ जाओ मैं घर पर ही हूँ. मैं उसके घर टेक्सी ले के पहुंचा. उसने ही डोर खोला और वो मेरे सामने वासना से भरे हुए बदन को ले के खड़ी हुई थी. उसने मुझे अंदर लिया. वो मेरे लिए समोसे और कोफ़ी ले के आई. लेकिन मैं उस से ज्यादा उसके अंदर ही इंटरेस्टेड था.

उसने मेरे पास बैठ के मेरी जांघ के ऊपर हाथ रख के कहा, मैं कब से तुमसे मिलना चाहती थी.

और वो ये कहते हुए मेरी टी शर्ट के अन्दर मेरी मसल को देख रही थी. उसने कहा, कितनी उम्र हे तुम्हारी?

मैंने कहा, मैं 23 साल का हूँ मेडम.

उसने मुझे एकदम लस्टी निगाहों से ऊपर से निचे तक देखा.

तुम्हे पता हे की मैंने तुम्हे यहाँ अपना कार्ड दे के क्यूँ बुलाया हे? उसने धीरे धीरे राज को खोलना चालू कर दिया.

मैं कुछ बोल नहीं सका. उसका हाथ मेरे गले के ऊपर प्यार से घूम जो रहा था. फिर वो हाथ को मेरी छाती के ऊपर तक ले गई और टी शर्ट के ऊपर से ही वहां सहलाने लगी.

उसने आगे कहा: मुझे तुम्हारे जैसे जवान लड़के अच्छे लगते हे! मुझे तुम जैसे जवान लड़की से अपनी चूत और बूब्स को चटाने में खूब मजा आता हे. मुझे अच्छा लगता हे जब कोई जवान लंड मेरी चूत में घुसता हे और मुझे किसी रंडी के जैसे चोदता हे.

फिर उसने कहा, जब भी तुम मेरी सेवा के लिए आओगे तो मैं तुम्हे अच्छे पैसे दूंगी इसके लिए. बस तुम मुझे खुश रखो और मैं तुम्हे खुश रखूंगी. और जरुरी हे की ये बात सिर्फ और सिर्फ हम दोनों के बिच में ही रहे. तुम किसी को कुछ मत कहना, ठीक हे ना?

मैं कुछ देर के लिए सोचने की एक्टिंग की और फिर धीरे से अपनी मुंडी को हाँ में हिला दी उसके सामने.

उसने हंस के कहा, ये हुई ना बात!

और फिर उसने अपने शर्ट के बटन को खोलना चालू किया. मैं उसे अपनी सांस को रोक के उसे देख रहा था. वो कुछ देर में ही अपने बूब्स दिखाते हुए बैठ गई. उसके चुचें बड़े थे और उसके ऊपर की निपल्स लाल लाल थी और नुकीली भी. उसने अपनी पेंटी खोलने में भी देरी नहीं की. उसके घर पहुँचने के कुछ ही मिनिट में तो वो मेरे सामने एकदम नंगी बैठी हुई थी.

उसने अपनी टांगो को खोलते हुए मुझे आँख मारी और कहा, मैं नहीं कहूँगी तुम्हे की क्या करना हे!

मैं खड़ा हुआ और अपने कपडे निकाल फेंके. उसने जब मेरे कडक लंड को देखा तो उसने एक लम्बी सांस ले ली. मैं घुटनों के ऊपर बैठ के उसकी खुली हुई टांगो में घुसा. और मेरी गरम साँसे उसके बदन को छूने लगी थी.

उसके बूब्स एकदम फर्म थे लेकिन उसका शेप नियमित नहीं था. उसकी चुचियों के ऊपर कुछ नसे एकदम फूली हुई थी और वहां की चमड़ी चमकीली सी थी. उसकी मस्त नीपल को देख के मेरा लंड धक धक होने लगा था. मैंने धीरे से अपने मुहं को उसके निपल्स के ऊपर लगा दिया.

उसके मुहं से जो हलकी और डीप मोअन निकली उस से मेरा लंड एकदम से कडक हो गया. मेरा मुहं उसके हॉट बूब्स के ऊपर चलने लगा था और मैं दोनों बूब्स को एक एक कर के मस्ती से चूसने लगा था. एक हाथ से मैं उसकी जांघ को सहला रहा था और उसके बूब्स को दबा भी रहा था. वो भी एकदम मस्ती में थी. उसने मेरे बाल पकडे और जोर जोर से मोअन करने लगी. उसने अपने हाथ से मेरे लंड को खोज लिया और उसे पकड़ के दबाने लगी.

उसने कहा. वाऊ ये तो काफी बड़ा हो गया एकदम से!

मेरा लंड उसके हाथ में मुश्किल से फिट हो रहा था. वो लंड को पकड़ के हिला रही थी और मैं उसके बूब्स चूस रहा था. हमारी नंगी जांघे एक दुसरे को घिस रही थी.

अब उसने एकदम से जैसे आजिज स्वर में कहा, चलो अब मेरी चूत को भी प्यार दे दो!

उसकी चमकीली जांघो के बिच में उसकी गुलाबी चूत थी जिसे देख के मेरे लंड में नयी उर्जा आ गई थी. मेरे हाथ उसकी कमर के ऊपर रुक गए और मैंने अपने मुहं को उसकी चूत में घुसा दिया. उसकी मोअनिंग एकदम से बढ़ चुकी थी क्यूंकि मैंने अपने होंठो से उसकी नर्म नाजुक चूत को खंगोलना चालू जो कर दिया था. उसकी चूत से कुछ बुँदे ज्यूस की भी निकली जिसे मैंने गटक ली. और फिर अपनी जबान से मैं उसकी चूत को ऐसे चाटने लगा की मिसिस कामिनी के होशोहवास ही उड़ गए!

उसके बदन में झटके लगने लगे थे! वो बोली, वाऊ इट इस सो हॉट!

मैं उसकी मस्की चूत को स्मेल करते हुए उसे चूसता गया. अब मेरे लिप्स जोर जोर से चूत को घिस रहे थे. उसके चूत की फांको को मैं और भी जोर जोर से घिसने लगा था. वो एकदम सेक्सी हो चुकी थी और अपने दोनों हाथो से वो बूब्स को पकड के दबा रही थी और अपने खुद की निपल को चूसने का ट्राय भी कर रही थी!

उसने कहा, तुमने तो बदन में आग लगा दी यार मेरे!

उसने मेरे चूसने की तारीफ़ की. मैंने अब अपने दांतों को धीरे से उसके क्लाइटोरिस के ऊपर दबा दिया. उसके मुहं से एक स्क्रिम निकल पड़ी और उसका पानी छुट गया. मैंने अपनी जबान से उसके क्लाइटोरिस को दबा के सब पानी पी लिया. जब मैं ऊपर हुआ अपना मुहं निकाल के तो वो बोली, चलो अब अपना लंड डाल ही दो मेरे अंदर!

और उसने मुझे धक्का दे दिया. मैं निचे था और वो प्यासी औरत मेरे ऊपर चढ़ आई. मेरा लंड तो पहले से ही खड़ा था. मिसीस कामिनी ने उसे अपने हाथ में पकड़ा और अपनी चूत के अन्दर फिट कर दिया. उसकी चूत एकदम चिप चिप थी. वो लंड को सीधे अन्दर कर के मेरे ऊपर बैठ गई. उसने मेरे दोनों हाथो को पकड़ के अपने बूब्स के ऊपर रखवा दिया. मैं उसके बूब्स को दबाने लगा था और निपल्स को पिंच करने लगा था. वो मेरे लंड के ऊपर धीरे धीरे ऊपर निचे हो के उसे अंदर बहार करने लगी थी.

उसने कहा, मुझे जवान लंड की सवारी करना बहुत अच्छा लगता हे. और ये कह के उसने मुझे आँख मार दी.

मैने कहा, मुझे भी मजा आता हे उछलती हुई चुन्चियो को देख के चूत में लंड देना!

वो अपनी चूत को दबा के अपनी कमर को मस्त हिला रही थी. वो इस बात का पूरा ध्यान रखे हुए थी की उसकी चूत में से लंड जरा भी बहार ना आये. पूरा लंड अन्दर ले के वो झटके से खड़ी होती थी तो सिर्फ सुपाड़ा अन्दर रहता था. फिर वो लंड को एकदम से अपनी चूत में ले लेती थी उसके ऊपर बैठ के. उसके बाल भी खुल चुके थे और वो जोर जोर से अपने बूब्स हिला के चुदने लगी थी.

मेरी सांस भी तेज हो चुकी थी और पम्प करने की स्पीड एकदम बढ़ चुकी थी. मेरे लंड को अपनी सब से अच्छी दावत मिली थी आज चुदाई की जैसे! उसकी चुन्चियों को उछलते हुए देख के चोदने का अपना अलग ही मजा था. मेरे हाथ अब उसकी कमर के ऊपर थे जैसे मैं उसकी मोशन को कंट्रोल कर रहा था.

कामिनी जोर जोर से आह्ह्ह अह्ह्ह अह्ह्ह ओह ओह फक मी कहते हुए अपनी बूब्स हिला हिला के चुदती गई. अब वो अपनी गांड को पीछे की और कर के बैठी थी और उसकी स्पीड एकदम बढ़ी हुई थी. मैंने उसके दोनों कंधो को पकड़ा और अब मैं भी निचे से धक्के देने लगा था. चूत के अंदर घिसते हुए लंड ने हम दोनों को जैसे मदहोश सा बना दिया था.

मैं तो चाहता था की मैं अडग रहूँ और घंटो तक ऐसे ही उसकी चूत को चोदता रहूँ! पर मेरी भी सीमा तो थी जो आ गई. मेरे लंड से फव्वारा निकल ही गया. कामिनी ने अपनी चूत को एकदम से कस लिया और सब का सब वीर्य उसने अपनी चूत में निकलवा लिया.

फिर उसने मेरी छाती के ऊपर एक चुम्मा दिया और बोली, बहुत दिनों के बाद मैं दो बार झड़ी एक सेश्सं के अन्दर.

फिर वो खड़ी हुई और मैं भी खड़े हो के कपडे पहनने लगा. उसने अपने बटवे से मुझे 2 हजार की 3 नोट दी और बोली, मैं तुम्हारी शॉप पर आती रहूंगी. मेरा कुछ भी काम हो तो कॉल नहीं मिस कॉल ही करना.

मेरी तो लोटरी सी लग गई थी उस दिन के बाद. कामिनी को चोदने के बदले मुझे इतने पैसे मिलते थे की मैं बाइक, महंगा मोबाइल ले के आ गया था. और मेरी सेलरी तो ऐसे ही सेविंग हो जाती थी. कामिनी आंटी मुझे महंगे खाने और कपड़ो के सौख भी पुरे करवाती थी.

कुछ दिनों तक उसने मुझे ऐसे ही खूब भोगा. और फिर उसे कोई और यंग लड़का मिल गया होगा तो मुझे दूध में से मख्खी को निकाल के फेंकते हे वैसे फेंक भी दिया.