सरपंच की बीवी

बड़ा हो रहा Antarvasna था, और अब उसको सिर्फ़ अपने लंड हिलने से चैन नहीं मिलती थी, एक दिन अपने चाचा को खेत मैं एक औरत की चुदाई करते देख, उस से रहा नहीं गया, वो चाचा के पास जा कर बोला, “क्यों चाचा पूरे मजे ले रहे हो, अकेले-अकेले”. चाचा तो एकदम घबरा गया, वो औरत भी गाँव की सरपंच की बीवी थी, ठरकी के अचानक उन दोनों को पकड़ने पर चाचा और वो औरत दोनों घबराए हुए थे, चाचा ने ठरकी को बोला, ठरकी अपनी जुबान बंद रखना, किसी को खबर नहीं होनी चाहिए, ठरकी भी मजे लेकर बोला, “तय, तू तो शर्म करती, सरपंच को पता लग गया तेरी तो वो आंटी चोद देगा”. “नहीं ठरकी, ऐसा मत बोल, किसी को बताना मत, घर मैं पुरानी साइकिल पड़ी है, चाहे तो तू लेले, पर सरपंच को मत बताना, मेरी बदनामी बड़ी होगी”, अपने नंगे बदन को कपड़े से ढक कर सरपंच की बीवी बोली. “अकेले साइकिल से नहीं चलेगा, तय, तुम्हें तो मेरा पता है, मैं भी जवान हो गया हूँ, मेरी भी कई ख्वाहिशे है”, ठरकी अपने लंड को पाजामे के ऊपर मसलते हुए बोला. चाचा बदनामी के मारे झट से मान गया, और सरपंच की बीवी को पता था सरपंच से अपनी आंटी चुदवाने से अच्छा है, ठरकी से चुद जाए. ठरकी के लिए ये पहला मौका था की किसी औरत की चुत मिली हो मारने को, चाचा नज़दीक टबवेल के पास पड़ी चारपाई पर बैठ के परेशानी से बीड़ी फूँकने लगा, वहाँ ठरकी अपनी जिंदगी की पहली चुदाई के लिए तैयार था. सरपंच की बीवी बोली, ठरकी तेरे लिए नहीं चीज़ है, धीरे से करना, नहीं तो रात को तेरे को दिक्कत होगी, दर्द सहा नहीं जाएगा. ठरकी तो बस अब सरपंच की बीवी पे चढ़ गया, और सारे कपड़े छीन कर, उसे नंगा कर दिया. तय, तू टेन्शन मत ले, तू भी याद करेगी, एक जवान लंड से चुदने का फर्क, चाचा का ढीला लंड तेरे को शांत नहीं कर सकता. बस फिर क्या था, ठरकी के लंड ने जब सरपंच की बीवी की चुत का स्वाद चखा, वो नहीं रुका, ठरकी ने ऐसा छोडा, सरपंच की बीवी को, की चाचा भी बार-2 आ कर देख रहा था की इतना टाइम क्यों लग रहा है इन दोनों को. कभी घोड़ी बना कर, कभी टाँग उठा कर, कभी अपने लंड के ऊपर बिता कर, सभी तरीके से छोडा ठरकी ने सरपंच की बीवी को. पूरे एक घंटे बाद जब ठरकी ने चुदाई बंद की, तो वो 3 बार अपना माल छुड़ा चुका था. सरपंच की बीवी की बुरी हालत थी, और उसका चेहरा, ठरकी के माल से बीघा पड़ा था.

ठरकी ने कपड़े डाले, और वहाँ से ये कहते चला गया, “तय, मैं आ रहा हूँ शाम को साइकिल लेने, पूरा चमका के राखी”, सरपंच की बीवी की साँस फूली हुई थी, ठरकी के चाचा भी मन ही मन मैं ठरकी को गाली निकाल रहा था.