सरिता को उसके भाई ने बनाया रखैल

सरिता जवान हो गई थी लेकिन उसके बाप की बेहाली और जुआरी होने के चलते उसके रिश्ते Hindi Sex Stories Antarvasna Kamukta Sex Kahani Indian Sex Chudai antarvasna1 में अडचने आती थी. 18 साल की हुई तब से सरिता कभी से लंड के सपने देखने लगी थी लेकिन उसका यह सपना बस सपना ही बन के रह गया था. चोदना तो वह कब से चाहती थी लेकिन उसके नसीब की चुदाई शायद रूठी हुई सी थी. दिन, महीने, साल ना जाने कितना लम्बा इन्तेजार था. आखिरकार सरिता तंग आ गई, कोलेज मैं तो उसे बॉयफ्रेंड वगेरह से चुदाई का डोज़ मिल जाता था साल में 5-6 बार लेकिन पिछले साल उसकी पढाई भी खत्म सी हो गई थी. सरिता चुदाई के लिए बेताब थी, उसे एक लंड चाहियें था जो उसकी चूत के अंदर की दीवारों को ठोके, वो होंठ चाहियें थे जो उसके चुंचे के उपर चुम्मी ले और वो हाथ चाहियें थे जो उसकी गांड को दबाये. सरिता की बेचेनी बढती गई और उसकी चूत चोदने को तरसती रही.

सरिता एक दिन अपने छोटे भाई बबलू के कमरे की सफाई कर रही थी, दिवाली आने वाली थी और उसे पुरे घर की सफाई करनी थी. बबलू कोलेज गया था. सरिता बबलू के बिस्तर को झटकने लगी और जैसे ही उसने गद्दे को हटाया उसकी आँखे खुली की खुली रह गई, गद्दे के निचे XXX मैगज़ीन थी जिसमे पहले पृष्ठ से ही चोदना चालू हो गया था. पूरी मैगज़ीन में चोदना ही चित्रण किया गया था और इसमें एक से एक गोरी चूत विभिन्न लौड़े लेते हुए दिखाई गई थी. सरिता की चूत का पानी निकलने लगा और उसे यह भी पता चल गया की बबलू का लंड भी अब 18 के उपर का हैं और फनफना रहा हैं. सरिता ने किताब वापस वहीँ रख दी. उस दीन सरिता ने बाथरूम में ही अपनी ऊँगली से चूत को शांत किया और उसने अब मनोमन बबलू से ही चुदवाने का फैसला कर लिया था.

सरिता अब बबलू की हिलचाल पर नजर रखने लगी और वो जब भी बबलू रूम में होता तो चुपके से झाँक लेती थी. आखिर एक सन्डे की दोपहर और गर्मी के दिनों में उसने बबलू को चुपके से इस किताब के पन्ने फेरते देख ही लिया. उसने फट से दरवाजा खोला और अंदर आ गई. उसके आते बबलू का सब नशा उतर गया और उसने किताब को जल्दी गद्दे के निचे रख दी. सरिता ने आते ही कहा “ क्या कर रहा हैं तू बबलू “ “निकाल तो गद्दे के निचे तूने क्या रखा, बता मुझे”

“कुछ नहीं दीदी, मैंने आप आये इसलिए गद्दा सही कर रहा था”

“अच्छा” सरिता ने अपना हाथ गद्दे के निचे डाला और किताब निकाल दी. बबलू के मस्तक से पसीना छूटने लगा. सरिता ने जैसे की जिन्दगी में कभी लंड और चोदना देखा ही ना हो वैसे उसने मुहं के आगे आश्चर्य के भाव से हाथ रख दिया. “अबे बबलू, तू यह सब क्या देखता हैं, आई को बोल दूँ. तेरी टाँगे तोड़ देगी वो आज ही”

बबलू सहम गया था वोह कुछ नहीं बोल पा रहा था. सरिता ने बोलना चालू रखा, “बोल ना क्या देखता हैं तू इसमें और कहाँ से ले के आया.”

“दीदी में 18 का हो गया इसलिए मेरे दोस्तों ने दी हैं मुझे. वह कहेते हैं की मैं चोदना सिख जाऊं.”

“अच्छा तू चोदना सिख रहा था. चल बता मुझे क्या सिखा तूने.”

“दीदी आज तो ले के आया था मैं, अतुल और विकास ने दी हैं. आप किसी को कुछ मत बताना मैं उन्हें आज ही लौटा दूंगा.” बबलू जूठ बोल रहा हैं यह सरीता को पता था लेकिन वह भी तो नाटक ही कर रही थी. उसने बबलू का कान पकड़ा और बोली,

“तुझे चोदना सीखना हैं ना मैं सिखाती हूँ तुझे आज. जा पहले दरवाजा बंध कर के आ. आई उठ गई तो वोह मार डालेगी तुझे.” बबलू ने फट से दरवाजा बंध किया और वो दीदी सरिता के पास आ खड़ा हुआ. उसे लगा की सरिता उसे डांटेंगी लेकिन सरिता ने कुछ और ही कहा.सरिता ने बबलू के आते ही उसे कहा “बबलू कपडे उतार अपने मैं तुझे सिखाती हूँ चोदना, तेरी दीदी के होते हुए तुझे यह गंदी आदते पालने की जरूरत नहीं हैं.” बबलू के पास कोई चारा भी तो नहीं था बेचारे के पास इसलिए उसने अपनी पेंट और शर्ट उतार दी, सरिता उसके पास आई और बोली, ”देख बबलू मैं तेरे लंड को अभी टच करुँगी और उसे अपने मुहं में लेके चुसुंगी. तेरी उत्तेजना जब एकदम बढ़ जाए मुझे बोल देना मैं तुझे आगे का चोदना बताउंगी” सरिता सच में बबलू की चड्डी उतार के उसका 7 इन्चा लंबा लंड अपने हाथ में ले के सहलाने लगी. बबलू का लंड धीमे धीमे बढ़ रहा था और थोड़ी देर में तो उसकी लम्बाई 8 इंच से भी ज्यादा बढ़ चुकी थी. बबलू का लंड अब सरिता ने सीधे अपने मुहं में ले लिया. वोह बबलू से आँखे मिलाए हुए ही उसका देसी लंड चूस रही थी. सरिता अपने हाथ अपने भाई के गोलों पर घुमा रही थी और उसका छोटा भाई दीदी का यह स्वरूप देख खुश और आश्चर्यचकित दोनों हो गया था. लंड को एकदम कस के चूसा गया इसलिए बबलू की उत्तेजना ठांसठांस के लंड को खड़ा कर चुकी थी. तभी बबलू को लगा की उसके लंड की चुसाई की सीमा आ गई हैं और अभी चोदना पड़ेंगा. उसने सरिता के कंधे पकडे और सरिता ने लंड को मुहं से निकाला. लंड को निकालने के बाद भी सरिता ने जैसे की जाते हुए का आखरी सलाम लेता जा वैसा कुछ करना हो, उसने लंड को एकबार और हाथ में ले के उसका अग्रभाग को पप्पी दे दी.

सरिता ने अपनी लंबी नाईटी को कमर से उपर ली और गर्दन के ऊपर से निकाल दी. उसने अंदर कोई ब्रा नहीं पहनी थी. निचे उसने काली केप्री डाली थी जिसे उसने तुरंत उतार दी, उसे भी बहुत अरसे के बाद चोदना नसीब हुआ था और वह आज जी भर के चुदवाना चाहती थी बस. उसने बबलू का लंड हाथ में लिया और खुद बबलू के गद्दे के उपर लेट गई. उसने अपने हाथ पे थूंक लिया और अपनी चूत के होंठो से होते हुए अंदर के भाग को थोडा गिला किया, वैसे उसकी चूत तो कबसे रस निकाल रही थी जिससे अच्छी खासी चिकनाहट पहेले से हो चुकी थी. बबलू के सामने देखते हुए सरिता बोली, “बबलू देख डंडा यहाँ देते हैं, वैसे तू फोटो में देख चूका हैं लेकिन यह चूत वैसी नहीं हैं. फोटो वाली गोरियां पैसे के लिए काम करती हैं इसलिए हर हफ्ते निचे के बाल निकालती हैं. मेरी चूत थोड़ी झांटो वाली हैं. यहाँ दो छेद होते हैं, ऊपर और निचे..निचे वाला छेद चोदने के लिए होता हैं और उपर वाला पिशाब के लिए. तेरा लंड मैं इस छेद में डालूंगी और तू मुझे चोदना चालू कर देना. बस अपनी कमर हिलाना और मेरी चूत के अंदर अपना लंड आगे पीछे करते रहना.”

बबलू जैसे की पहली कक्षा का बच्चा हो वैसे मुंडी हिला रहा था, उसकी बहन को क्या पता वोह कितनी पोर्न फिल्म अपने दोस्तों के साथ देख चूका हैं.बबलू भी पागल यानी की एडा बनके पेंडा खा रहा था. सरिता ने बबलू के लंड को हाथ में पकड़े हुए उसे अपने चूत के गर्म गर्म छेद पर रखा. बबलू ने इधर से हल्का झटका दिया और लंड को अंदर किया, उसने अब कमर हिलाके चोदना चालू कर दिया और सरिता की सिसकियाँ चालू हो गई. सरिता ने दोनों पाँव मोड़ दिए थे ताकि उसकी चूत के अंदर तक भाई का लंड आ सके. भाई बहन बड़े प्यार से चुदाई कर रहे थे. बबलू ने कुछ पांच मिनिट तक सरिता को इस तरह ही चोदा. सरिता भी उसे उकसा उकसा के उससे चुदवाती रही, बिच बिच में वो बबलू को ऐसे कर, तेज कर, धीरे कर ऐसे इंस्ट्रक्शन देती रही.

बबलू की झडप बढती रही और उसका लंड बहन की चूत को खोदता रहा, दो मिनिट के अंदर ही बबलू का लंड गाढ़ा पानी बहन की चूत में ही छोड़ने लगा. सरिता ने तुरंत कपडे पहने और वोह वीर्य को चूत से धोने के लिए नहाने चली गई, बबलू अब चोदना सिख गया हैं और सरिता उससे अक्सर चुदवाती रहती हैं………!!!

मित्रो आपको बहन और भाई का चोदना कैसा लगा हमें जरुर से लिख भेंजे…यह कहानी आर पाटिल की फेसबुक मेसेज के ऊपर आई हुई रिक्वेस्ट के मद्देनजर लिखी गई हैं. हम उनका और फेसबुक और ट्विटर एवं साईट पर हमें कमेन्ट कर के हमारा होंशला बढ़ाते सभी दर्शको का धन्यवाद करते हैं.