हॉस्पिटल मे मनाया चूत चुदाई का जश्न

स वक्त, मैंने बस अपनी डिग्री कम्पलीट की थी और थैंकफुल्ली मुझे एक प्राइवेट हॉस्पिटल में अच्छी जॉब भी मिल गयी Hindi Sex Stories Antarvasna Kamukta Sex Kahani Indian Sex Chudai antarvasna1 मैं बहुत खुश था.. सब कुछ मिल गया था. बस इंतज़ार था तो बस एक प्यारी चूत का. आइ वाज मॉडल इन माय कॉलेज. और मेरी फिजिक बहुत अच्छी है, लेकिन इन सब बावजूद, मेरी जिन्दगी में एक चूत की कमी थी.

मेरे सब फ्रेंड मुझे ताने देने लगे थे, कि इतना सुंदर होने के क्या फायदा, अगर चूत का मज़ा ना लिया तो. बस मैंने ठान ली थी, कि अब कुछ दिनों में एक अच्छी सी चूत का मज़ा लेना है. जॉब अच्छी चल रही थी. सब काम ठीक था. मेरे स्टाफ में, मेरे अंडर दो लडकिया थी. सब आधी उम्र की. मज़ा ही नहीं आता था. बस उनमे एक चीज़ मस्त थी, उनके मम्मे पामेला अन्द्रेसन की तरह थे. बस सारा दिन, उनके मम्मो के दर्शन में बीत जाता था.

फिर, एक दिन बहुत ही मस्त बात हुई. मेरे स्टाफ की एक औरत को बाहर जाना पड़ा कुछ दिनों के लिए. वो अपनी जगह अपनी लड़की को काम के लिए छोड़ गयी. हाँ, क्या मस्त माल थी यार. शब्दों में उसकी खूबसूरती का बयां करना बहुत ही मुश्किल है. बिलकुल रानी मुखर्जी जैसी लगती थी साली. बस, फिर तो सोच लिया था, कि अगर चोदना है तो बस इसी को चोदना है. बट हॉस्पिटल में और वो भी किसी दूसरी लड़की के सामने ये होना बहुत ही मुश्किल था. बट उसे चोदना ही था, तो मैं तरकीब सोच रहा था. फिर उसको काम सिखाने के बहाने से मैं उसको ज्यादा से ज्यादा अपने साथ रखने लगा. जब पेशेंट नहीं होते थे, तो उससे बातचीत करने लगता था. बस फिर क्या था, धीरे-धीरे वो मुझसे खुलने लगी.

मुझे याद है, उस दिन फ्राइडे था. ओटी डे था, तो पेशेंट भी कम ही थे. और किस्मत से दूसरी लड़की भी छुट्टी पर थी. फिर क्या था. मैंने सोच लिया था, कि आज मौका है. जो करना है, आज ही करना है. रोज़ की बातचीत से वो खुल ही गयी थी. वो उस दिन सुबह देर से आई. मैंने पूछा – व्हाई आर यू लेट टुडे? उसने कहा – सर, आज पीठ में बहुत दर्द है. मैंने ऊपर वाले को थैंक्स बोला और कहा – दिखाओ, कहाँ है दर्द. उसने कहा – नीचे साइड में है. मैंने अपने दोनों हाथो से उसके चुतड को पकड़ा और उसको देखने लगा. फिर मैंने कहा, कि अब धीरे-धीरे आगे झुको. वो धीरे-धीरे आगे झुकी. अब उस वक्त उसके गोल चुतड और उसकी गांड मेरे मुह के बिलकुल सामने थे. मैंने पूछा – दर्द है?

वो बोली – हाँ सर, थोडा सा है. मैंने कहा – ऐसे पता नहीं चलेगा. अन्दर अस्सेस्मेंट रूम रूम में आ जाओ. वो अपनी गांड हिलाते हुए अन्दर आ गयी. मैंने उसको लेटने के लिए कहा. वो लेटी, तो मैंने उसके दोनों तरफ पीठ पर हाथ रखते हुए उसको दबाने लगा और एक्सेस करने लगा और पुछता रहा – यहाँ दर्द है? वो बोली – नहीं सर. मैं पूछते-पूछते बिलकुल उसके मम्मो के पास आ गया और फिर से पूछा – यहाँ दर्द है? वो बोली – हाँ सर. इसके आसपास ही है. मैंने फिर हिम्मत करके हाथ अन्दर डालते हुए, उसके मम्मो को सहलाना शुरू किया और पूछा – यहाँ दर्द तो नहीं है? वो बोली – हाँ सर, यही होता है दर्द. ये कहकर वो मेरी तरफ देखते हुए मुस्कुरा दी और कहने लगी – सर आप तो हर दर्द की दवा जानते है. तो मेरा भी इलाज कर दीजिये ना. मैंने बोला – कर देता हु, पर जो मैं बोलूँगा वो करना पड़ेगा. वो बोली – जी सर. बस फिर क्या था, उसको सीधा किया और उसके गाल पर किस करना शुरू कर दिया. किस करते हुए, कभी मेरा हाथ उसके मम्मो को सहला रहा था और कभी उसकी चूत को.

क्या घनी चूत थी साली की. फिर किस करते-करते मैंने उसको खड़ा किया. उस वक्त तक मेरा लंड एकदम तन चूका था और बाहर आने के लिए तड़प रहा था. ऐसा लग रहा था, कि बस अभी अंडरवियर को फाड़कर बाहर आ जाएगा. फिर उसका भी हाथ धीरे-धीरे मेरी पेंट की तरफ बढ़ने लगा. शायद वो समझ गयी थी, कि अब मेरा लंड उसको प्यार करने को बेताब था. उसने धीरे-धीरे मेरी पेंट को खोला और अंडरवियर को नीचे किया और मेरा लंड इस तरह बाहर आया, मानो स्प्रिंग को पकड़कर छोड़ा हो. उसको देखते ही, वो बोली – हाई धैया, इतना बड़ा तो मेरी चूत का कबाड़ा कर देगा. मैंने कहा – वो बाद में देखेंगे, पहले इसे प्यार तो करो. फिर उसने मेरे ८ इंच के लंड को मुह में लेकर चुसना शुरू कर दिया. ऊह्ह्ह्हह्ह .. क्या मस्त चुसाई करती थी साली. मेरे मुह से अहहहः ऊऊऊओ म्म्मम्म्म्मम्म ऊऊ एस ऊऊ एस एस ऊऊ एस करके आवाज़े निकल रही थी और वो ऐसे चुसे जा रही थी, जैसे कि किसी लोलीपोप को चूस रही हो.

तक़रीबन १५ मिनट की चुसाई के बाद, मैंने उसको कहा – कि मैं आने वाला हु, वो बोली – सर, मैं आपका रस पीना चाहती हु. फिर, मैंने कहा – ले फिर और सारा रस उसके मुह में डाल दिया और उसने भी एक भी बूंद को जाया नहीं होने दिया और सारा का सारा पी गयी. अब मैंने उसके सारे कपड़े उतारे और उसको बेड पर लिटाया और उसके गोल – गोल मम्मो को चूसने-चाटने लगा. वो भी अहहहः आआआआ म्मम्मम ऊहोहोहो की आवाज़े निकालने लगी. फिर मोम्मो की चुसाई करते हुए मैंने एक ऊँगली उसकी चूत में डाल दी और वो चीखे मारने लगी. डॉक्टर साहब नहीं … दर्द हो रहा है. अहहः अहहहः …नहीं नहीं … निकालो. साली का शायद पहली बार था. किसी को पता ना लगे, इसी डर से मैंने ऊँगली बाहर निकाल ली और उसको जमाके २ थप्पड़ मारे. बोला – साली अबकी आवाज़ आई, तो ये लंड तेरे मुह में पूरा का पूरा घुसा दूंगा. फिर, मैंने उसकी चूत को चाटना शुरू किया. वो सिसकिया भरने लगी – आआआअ आआआ डॉक्टर साहिब ..म्मम्मम्म. तकरीब १५ मिनट बाद, उसने कहा – मैं आने वाली हु आआआआआह.. ह्ह्ह्हह्ह. लो अहहः…आआअ … कहते हुए वो झड़ गयी.

इतने मैं मेरा लंड दोबारा तैयार हो चूका था. फिर मैं उसके पैरो के बीच आया और उसकी चूत के नीचे एक पिल्लो रख दिया और फिर एक जोर का झटका मारा. उसके चिल्लाने की आवाज़ ना आये, इसलिए मैंने अपने लिप्स को उसके लिप्स पर रख दिया और उसके लिप्स को अपने लिप्स के बीच में दबा दिया. ऊऊऊओ ऊऊऊ की आवाज़ आ रही थी. उसने मेरे बाल खिचे और अपने को छुड़ाने की कोशिश की; पर मैं भी कहाँ छोड़ने वाला था. मैंने एक बार और पुरे जोर के साथ धक्का मारा और अपने पुरे लंड को उसकी चूत में उतार दिया. उसको दर्द हो रहा था और वो छटपटा रही थी. मैंने अपनी स्पीड और भी तेज कर दी. ५ मिनट के बाद वो भी शांत हो गयी और मेरा सात्घ देने लगी. शायद उसका दर्द कम हो गया था. वो भी चुत्तड हिला-हिला कर मेरा साथ दे रही थी. तक़रीबन ३० मिनट की चुदाई के बाद मैं आने वाला था. वो कहीं प्रेग्नेंट ना हो जाए, इसलिए मैंने अपने अपने लंड को बाहर निकाल लिया और उसके मुह पर अपना माल छोड़ दिया. वो साली फिर से सारा माल पी गयी. उसके बाद, रूम क्लियर कर दिया और काम पर लग गये