मेरी संग की औरत और पति 1

अपने पति से धोखा खाने के बाद, अब मुझे किसी एक ऐसे इंसान की तलाश थी Hindi Sex Stories Antarvasna Kamukta Sex Kahani Indian Sex Chudai antarvasna1 जो मुझे समझे और मैं उसे! मुझे बस एक ही इंसान चाहिये था, जो मेरा हो, मेरी केयर करे! मैं भी उसकी केयर करना चाहती थी, और इसके लिए अब मैं एक ऐसे इंसान की तलाश में थी जिसकी उम्र 28 से 42 साल हो क्यूंकि मैं 35 साल की विवाहित नारी थी, और अभी तक मेरी कोई संतान भी नहीं थी!

मेरी कहानी मेरी ज़िन्दगी में बड़ी ही रोचक रही है, और हर तथ्य (घटना) किसी ना किसी बात से जुडी है! मेरा पति मेरे ही संग की औरतो के साथ फ़्लर्ट करता रहा, जिसका मुझे उन्होंने भी नहीं बताया, और मेरे संग की वो औरतो भी, किसी से कम नहीं थी, उन्हें भी उसके साथ रंग रलिया मनाने में मज़ा आ रहा था! जब मुझे ये बात पता चली तो मैंने, खुद ही अपने संग की औरतो पर नज़रे रखनी शुरू कर दी!

बात उस समय की है, जब मैं और मेरे पति के बीच बहुत प्यार हुआ करता था! हम दोनों की लव मैरिज थी और हम दोनों एक दुसरे से पूरे खुले थे, दिल में कुछ नहीं रखते थे और एक दुसरे को सब कुछ बता देते थे, शायद इसी कारण हम दोनों के बीच इतना प्यार था! हम दोनों एक दुसरे के दिल की आवाज़ सुन सकते थे! हम दोनों अलग अलग कंपनी में काम करते थे! एक अच्छी बात हम दोनों की थी कि, मेरे पति को खाना बनाना भी आता था! तो अगर किसी दिन मेरा खाना बनाने का मूड नहीं होता तो, उस दिन वो रसोई संभाल लेते!

मेरे घर में मेरी संग की औरतो का भी आना लगा रहता, मेरे पति भी उनसे बाते करते और बहुत मजाक किया करते! मुझे भी अच्छा लगता, लेकिन ना जाने कब मेरे पति ने, मेरी उन सहेलियो से आँख मिचोली खेलनी शुरू कर दी! और धीरे वो मुझसे कभी कभी बाते भी छुपाने लगे! मुझे कोई अंदेशा नहीं था! और अब उनका मेरी संग की औरतो के घर अकेले जाना भी शुरू हो गया, जिसका मुझे पता भी नहीं चला! और जब पता चला तो, मेरे गले से बात नहीं उतर पायी! लेकिन तब तक देर हो चुकी थी! मेरे पति और मेरे संग की कई औरतो के जिस्मानी रिश्ते बन चुके थे!

मुझे मेरे पति से घ्रणा हॊने लगी थी! मुझे उनकी कोई बात अच्छी नहीं लगती थी! पहले हम लोग एक दुसरे से दिल से बात करते थे, लेकिन अब दिल से निकली हर बात एक कटाक्ष की तरह चुभती थी! मैं अपने दिल में किसी के लिए कोई गलत बात या पाप नहीं रखती थी! लेकिन अब सिर्फ मेरे पति ही ऐसे थे, जिसके लिए कोई पाप तो नहीं, लेकिन दिल में घ्रणा रखना जरूरी हो गया था! हम दोनों अब कोई अच्छी बाते नहीं, बल्कि एक दुसरे पर कटाक्ष करते! पहले मुझे कोई भी गलत बात कहने में शर्म आती थी, लेकिन अब वो शर्म जा चुकी थी! क्यूंकि अब