आंटी बनी मेरी रण्डी माशूका

हैल्लो दोस्तों, Antarvasna मेरा नाम हरीश है और मेरी उम्र 28 की साल है मैं बहुत लंबे समय से सेक्सी कहानियाँ पढ़ता आ रहा हूँ और मैंने उनके बहुत मज़े लिए और अब तक मैं अनगिनत कहानियाँ को पढ़कर बहुत बार अपना लंड हिलाकर उसको शांत कर चुका हूँ। वैसे मुझे यह शौक बहुत पहले से है और आज मैं थोड़ी हिम्मत करके अपनी भी एक सच्ची कहानी की घटना आज आप सभी कामलीला डॉट कॉम के पढ़ने और इसको इतना चाहने वालों के लिए बहुत उम्मीद से लेकर आया हूँ और अब मैं सीधा अपनी आज की सच्ची कहानी पर आता हूँ। हाँ तो दोस्तों चलो अब मैं आप सभी को मेरे और मेरी दिल्ली वाली आंटी के साथ हुए सेक्स की कहानी बताता हूँ।

दोस्तों मैं दिल्ली में एक प्राइवेट कम्पनी में काम करता हूँ और मैं यहीं पर एक अपार्टमेंट में चौथे फ्लोर पर रहता हूँ. दोस्तों यह बात आज से करीब 1 साल पहले की है तब रिम ज़िम बारिश का महीना चल रहा था, मेरे बगल वाले फ्लेट में 1 विधवा आंटी और उसकी एक 7 साल की बेटी किराये पर रहने आई थी. वह आंटी दिखने में बहुत ही खूबसूरत थी और उस आंटी का नाम सविता था. दोस्तों उस आंटी की उम्र 35-36 साल के आस-पास की लगती थी और उस आंटी के फिगर का साइज़ भी 34-30-36 का था. सविता आंटी के साथ मेरी बहुत अच्छी दोस्ती हो चुकी थी. कभी ना कभी वह आंटी मेरे घर पर कुछ ना कुछ लेने आती ही रहती थी, और मैं भी जानबूझकर उन आंटी के घर पर कुछ ना कुछ लेने चला जाता था. उस आंटी की बेटी सुबह स्कूल में जाती थी और फिर दोपहर को करीब 2 बजे स्कूल से वापस घर पर आती थी. और फिर वह खाना खाने के बाद तुरन्त ही ट्यूशन पर जाती थी और फिर वहाँ से शाम को वापस आती थी।

दोस्तों यह बात उस दिन की है जब आंटी की बेटी 4-5 दिनों के लिए अपनी नानी के घर पर गई हुई थी, और तब घर पर आंटी अकेली ही थी. दोस्तों मैं भी अपने घर पर अकेला ही रहा करता हूँ. और उन दिनों मैं अपने ऑफिस से छुट्टी होने के कारण घर पर सफाई कर रहा था कि, तभी मैं गिर गया और मेरी दोनों टाँगों के बीच में मोच आ गई थी. और फिर मैं घर के 1 कौने में वैसे ही बैठा था कि, तभी आंटी ने मेरे घर में आकर मुझको आवाज़ लगाई और कहा कि, हरीश तुम कहाँ हो? तो फिर मैंने आंटी को बोला कि मैं किचन में हूँ. और फिर सविता आंटी किचन में आई और फिर वह मुझको इस हालत में देखकर बोली कि, तुमको क्या हुआ? तो फिर मैंने उनको कहा कि, आंटी सफाई करते समय मेरा पैर फिसल गया और मुझको मोच आ गई है. तो फिर सविता आंटी भागकर अपने घर गई और फिर वह मोच पर मालिश करने का तेल लेकर आई. और फिर वह मुझसे आकर बोली कि, हरीश चलो अब मैं तुम्हारी मालिश कर देती हूँ जिससे तुम को जल्दी ही आराम मिल जायगा. और फिर मैंने आंटी को कहा कि, मैं उठ नहीं सकता हूँ, इसलिए आपको ही मुझको सहारा देना होगा, तो फिर सविता आंटी ने कहा कि ठीक है।

और फिर वह मेरे पास आई और उन्होंने मुझको अपने कन्धे का सहारा देकर खड़ा किया. दोस्तों उस समय आंटी के मखमली स्पर्श से कुछ अजीब सा मेरे शरीर में हो रहा था. और फिर आंटी मुझको बेडरूम में ले गई थी और फिर उन्होंने मुझको बेड पर सुला दिया था. और फिर आंटी ने मुझको कहा कि, अब बताओ कि, तुमको कहाँ पर चोट लगी है? और फिर आंटी को मैंने कहा कि, आंटी जी मोच मेरे दोनों टाँगों के बीच में मेरे कूल्हों पर लगी है. तो फिर आंटी ने मुझको कहा कि, तो फिर चलो अब जल्दी से अपनी पेन्ट को उतार दो और फिर मैं थोड़ा सा तेल गरम करके तुम्हारे कूल्हों पर मालिश कर देती हूँ. तो फिर मैंने शर्म के मारे आंटी को कहा कि, नहीं आंटी मैं खुद ही कर लूँगा मुझको आपके सामने अपनी पेन्ट उतारने में शरम आती है. तो फिर आंटी ने कहा कि, सुन हरीश, तुम मुझको अपना दोस्त मानते हो ना? तो फिर मैंने उनको कहा कि, हाँ. तो फिर उन्होंने मुझको कहा कि, तो फिर दोस्त से क्या शरमाना चलो उतारो फटाफट और फिर आंटी ने मेरी पेन्ट का हुक खोल दिया और फिर उन्होंने मेरी पेन्ट उतार दी थी और मुझको शरम आ रही थी। और फिर आंटी ने मुझसे कहा कि, हरीश तुम तो 1 लड़की की तरह शरमा रहे हो. दोस्तों उस समय मैं सिर्फ़ अपनी अंडरवियर में था और फिर किचन में जाकर आंटी थोड़ा सा तेल गरम करके लाई और फिर उन्होंने मुझसे कहा कि, चलो अब उल्टे हो जाओ. और फिर मैं थोड़ा शरमाते हुए उल्टा हो गया था. और फिर आंटी धीरे-धीरे मेरे कूल्हों पर अपने हाथों से मसाज करने लग गई थी और उनके ऐसा करने से मुझको बड़ा मज़ा भी आ रहा था. और फिर आंटी ने मुझको छेड़ते हुए मुझसे पूछ लिया, क्यो हरीश मज़ा आ रहा है ना? तो फिर मैंने उनको कहा कि, बहुत मज़ा आ रहा है आंटी जी. और उस समय आंटी अपना दूसरा हाथ मेरे पूरे शरीर पर भी घुमा रही थी, और फिर मैं समझ गया था कि, आंटी को मालिश करने में बहुत मज़ा आ रहा है. और फिर उनके अहसास से मेरा लंड एकदम तनकर खड़ा हो चुका था और वह बेड में छेद कर रहा था. और उस समय तो मेरा मन कर रहा था कि, मैं उसी पल सविता आंटी को ज़ोर से पकड़कर उनके होठों पर एक जोरदार किस कर दूँ, पर क्या करूँ मैं इतनी हिम्मत जुटा ही नहीं पा रहा था. और फिर आंटी ने पूरे तेल से मेरे कूल्हों की अच्छी तरह से मालिश कर दी थी और फिर उन्होंने मुझको कहा कि, चल हरीश अब मैं जाती हूँ और तुम्हारे लिए शाम को खाना लेकर ही आ जाऊँगी, तुम परेशान मत होना और शाम को 1 बार और मालिश भी कर दूँगी. और फिर आंटी चली गई थी. और फिर शाम को करीब 8.00 बजे आंटी मेरे लिए खाना लेकर आ गई थी उस समय आंटी ने एक काले रंग की थोड़ी पारदर्शी साड़ी पहन रखी थी. और फिर उनको देखकर मैंने आंटी को कहा कि, आज तो आप बहुत अच्छी लग रही हो. तो फिर आंटी ने मुझसे कहा कि, चल हट बदमाश कहीं का. और फिर आंटी ने मेरे लिए टिफिन से खाना निकाला और खाना निकालते समय उनकी साड़ी का पल्लू दो बार नीचे गिर गया था. उनकी साड़ी के पल्लू के नीचे गिरते ही उनके बब्स की गोलाइयाँ मुझको साफ़ दिख गई थी. दोस्तों कसम से क्या नजारा था वह, उसको देखकर तो मेरा मन कर रहा था कि, इनको मैं झट से दबा दूँ. दोस्तों बीच-बीच में मैं जब भी उनकी गोलाइयों को देख रहा था तो आंटी ने मुझको उनको देखते हुए देख लिया था. और फिर आंटी ने मुझसे कहा कि, क्या कर रहे हो हरीश? तो फिर मैंने हडबडाते हुए उनसे कहा कि, कुछ नहीं आंटी जी. और फिर हमने साथ में बैठकर खाना खा लिया था और फिर आंटी ने मुझसे कहा कि, अब मैं जाती हूँ और सुबह आ जाऊँगी।

तो फिर मैंने आंटी को कहा कि, आप आज मत जाइए प्लीज़ और आप यहीं पर सो जाइए मुझको किसी चीज़ की ज़रूरत पड़ेगी तो. तो फिर आंटी ने कहा कि, ठीक है मैं यहीं पर सो जाती हूँ और फिर आंटी ने मुझसे कहा कि, लेकिन मैं कहाँ पर सोऊँगी? तो फिर मैंने उनसे कहा कि, मेरे बेडरूम में. और फिर आंटी ने कहा कि, तो फिर तुम कहाँ पर सोओगे? तो फिर मैंने कहा कि, वहीँ पर बेडरूम में ही. तो फिर आंटी ने कहा कि, वहाँ पर तो सिंगल बेड ही है ना? तो फिर मैंने उनको कहा कि, आंटी जी उसपर दो जने तो आराम से सो सकते है. तो फिर आंटी ने मुस्कराते हुए कहा कि, अच्छा हरीश तो फिर ठीक है. और फिर मुझको आंटी बेडरूम में ले गई. और फिर बेडरूम में जाते ही आंटी ने अपनी साड़ी उतार दी थी, और अब वह अपने ब्लाउज और पेटीकोट में मेरे बगल में आकर सो गई थी. और फिर आंटी की साँसों के ऊपर-नीचे होने से उनके बब्स तो जैसे उनके ब्लाउज से बाहर निकलने के लिए तड़प रहे थे. और फिर मैंने ऐसे ही सविता आंटी को पूछा कि, अंकल की मौत के बाद आपने दूसरी शादी क्यों नहीं करी? तो फिर आंटी ने मुझसे कहा कि, तुम्हारे जैसा प्यारा कोई मिला ही नहीं था. तो फिर मैंने आंटी को कहा कि, आंटी आप भी क्यों मज़ाक कर रही हो? तो फिर आंटी ने मुझसे कहा कि, नहीं मैं एकदम सच कह रही हूँ, और फिर आंटी ने मुझको कहा कि, तुम मुझको आंटी जी कहकर मत बुलाओ तुम तो बस मुझको सविता ही कहकर बुलाओ समझे. तो फिर मैंने भी उनको कहा कि, ठीक है सविता जी. तो फिर आंटी ने फिर से कहा कि, सिर्फ सविता ही कहो. तो फिर मैंने उनको कहा कि, ठीक है सविता।

और फिर सविता ने मुझसे कहा कि, चलो अब अपनी पेन्ट उतारो मैं तुम्हारी मालिश कर देती हूँ. तो फिर मैंने उनको कहा कि, ठीक है और फिर इतना कहते ही सविता आंटी ने मेरी पेन्ट उतार दी थी, और फिर उन्होंने मेरी मालिश करना चालु कर दिया था. दोस्तों उस समय सविता आंटी कुछ ज्यादा ही मूड में लग रही थी और वह बार-बार ही मेरे अंडरवियर में गहराई तक अपना हाथ डाल रही थी. और फिर मैंने उनसे पूछा कि, आंटी आप यह क्या कर रही हो? तो आंटी ने मुझको बोला कि, ऐसे मालिश करने से तुम्हारा सारा दर्द ठीक हो जाएगा। और फिर अब मैं समझ गया था कि, आंटी तो अब चुदाई के पूरे मूड में है. तो फिर मैं उनसे ऐसे ही मालिश करवाता रहा. और फिर आंटी ने मुझसे कहा कि, मैं तुम्हारी अंडरवियर को भी उतार देती हूँ, और फिर मैं तुम्हारी ठीक से बराबर मालिश कर देती हूँ. और फिर आंटी ने मेरी अंडरवियर भी उतार दी थी. और फिर आंटी मेरे पूरे कूल्हों से लेकर नीचे तक मालिश करने लग गई थी और फिर उनके हाथ नीचे से मेरी गोलियों को छू रहे थे. और उनके छूने से मेरा लंड खड़ा हो चुका था. और फिर अचानक से आंटी ने मुझे सीधा कर दिया था और फिर वह मुझसे बोली कि, अरे! यह क्या है? तो मैंने उनसे कहा कि, यह तो लंड है. तो फिर आंटी ने मुझसे कहा कि, वह तो मुझको भी पता है पर यह खड़ा कैसे हो गया है? तो फिर मैंने उनसे कहा कि, आप का हाथ लगते ही यह खड़ा हो गया है. और फिर आंटी ने मुझसे कहा कि, क्या बक रहे हो? तो फिर मैंने उनसे कहा कि, मैं सही कह रहा हूँ आंटी. तो फिर आंटी ने मुझसे कहा कि, ठीक है तो फिर अब मैं जाती हूँ, और फिर आंटी खड़ी होकर अपनी साड़ी पहनने लग गई थी. और फिर उनके साथ मैं भी खड़ा हो गया था और फिर मैं आंटी को पकड़कर उनको किस करने लग गया था तो आंटी ने मुझसे कहा कि, यह तुम क्या कर रहे हो हरीश? तो फिर मैंने उनसे कहा कि, मैं तो आपको प्यार कर रहा हूँ, और आज मैं आपको चोदे बिना छोडूंगा भी नहीं. और फिर आंटी ने बहुत कोशिश करी थी मुझे से छुटने की पर आंटी की मेरे सामने एक ना चली थी. और फिर मैंने आंटी को फिर से किस करना चालू कर दिया था. और अब तो आंटी ने भी अपने शरीर को मेरे हवाले कर दिया था और अब तो वह भी मेरा पूरा साथ देने लग गई थी. और फिर मैंने आंटी का ब्लाऊज और पेटीकोट भी निकाल दिया था. और अब आंटी मेरे सामने सिर्फ़ ब्रा और पैन्टी में ही थी. और फिर मैंने उनको बेड पर सुला दिया था, और उनकी ब्रा भी खोल दी थी. दोस्तों कसम से उनके क्या कमाल के बब्स थे मैं तो उनको देखकर ही दंग रह गया था. उनके बब्स इतने कड़क और सीधे थे कि, मुझे उनको चूसने में बड़ा मज़ा आ रहा था. मैं उनके बब्स को अपने होठों से चूस रहा था और आंटी के मुहँ से आहहह… इस्सस… की आवाजें निकल रही थी।

दोस्तों आंटी अब मेरे वश में थी, और आंटी को भी बहुत मज़ा आ रहा था. और फिर आंटी ने खुद ही अपनी पैन्टी निकाल दी थी और फिर उन्होंने मुझको कहा कि, हरीश मेरी जान अब तुम इसको चूसो. और फिर आंटी के कहते ही मैं उनकी चूत को चूसने लग गया था. दोस्तों उनकी चूत बहुत ही रसीली थी. मुझको उनकी चूत को चाटने में बहुत मज़ा आ रहा था. और फिर मैं करीब 10-15 मिनट तक उनकी चूत को चाटता रहा. और फिर मैंने उठकर मेरा लंड आंटी के मुहँ में दिया तो आंटी भी उसको बड़े ही मज़े से चाट रही थी. और फिर आंटी ने करीब 10 मिनट तक मेरे लंड को चूसा और लंड चूसने के बाद आंटी ने मुझसे कहा कि, अब देर ना कर हरीश चल जल्दी से अब तेरे इस लंड को मेरी चूत में डाल दे मेरी चूत में बहुत खुज़ली हो रही है जल्दी कर. दोस्तों ये कहानी आप कामलीला डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।

और फिर इतना सुनते ही मैंने अपना पूरा लंड आंटी की चूत के अन्दर घुसा दिया था. और फिर मैं ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारने लग गया था. दोस्तों उस समय हम दोनों को बहुत मज़ा आ रहा था. आंटी भी नीचे से उछल-उछलकर मज़े से मेरा पूरा-पूरा साथ दे रही थी. और फिर मैंने आंटी को कसके पकड़ा और फिर मैंने मेरे होंठ उनके होठों के बीच में दबा दिए थे. और फिर मैं उनकी जीभ को मेरे मुहँ में लेकर चूसने लगा, दोस्तों कसम से उस समय तो मुझको बहुत मज़ा आ रहा था एक आंटी को चोदने में. दोस्तों आंटी के मुहँ से भी आहहह… उफ्फ्फ… इस्सस… के जैसी सेक्सी आवाजें निकल रही थी. और फिर मैंने अपनी चुदाई की स्पीड को बढ़ाया और फिर मैं अपनी पूरी स्पीड से उनको चोदने लग गया था. और इस बीच आंटी मुझसे कह रही थी कि, और ज़ोर से हरीश मेरी जान मुझको चोदो आज अपनी आंटी की चूत का पूरा रस बाहर निकाल दो, करो आहहह… और ज़ोर से करो. दोस्तों मैं उनको अपनी पूरी ताक़त लगाकर चोद रहा था. और फिर आंटी ने मुझसे कहा कि, हरीश डार्लिंग और ज़ोर से अब मैं झड़ने वाली हूँ और फिर मैंने भी आंटी से कहा कि, मैं भी झड़ने वाला हूँ सविता डार्लिंग. और फिर हम दोनों एक साथ में झड़ गये थे।

और फिर मैं 15 मिनट तक आंटी पर ही लेटा रहा था और उनके होठों को चूस रहा था. दोस्तों उसके बाद हम 3-4 दिनों तक रोज़ ही जमकर चुदाई का खेल खेलते रहे. और अब तो मुझको कभी भी सविता आंटी को चोदने का मन करता है तो मैं उनके घर पर जाकर उनको चोद लेता हूँ और उससे आंटी की भूख भी शान्त हो जाती है।

धन्यवाद कामलीला के प्यारे पाठकों !!