विधवा समधन के साथ संभोग

हाई दोस्तों मेरा Antarvasna नाम पंकज हे और मैं दिल्ली से हूँ. आज आप के लिए मेरी तरफ से एक देसी कहानी पेश हो रही हे जो मेरी लाइफ से जुडी हुई सेक्स की बात हे. चलो मैं अब सीधे ही कहानी के ऊपर आता हु.

मेरी उम्र 48 साल हे और मेरी बीवी 5 साल पहले एक हादसे में भगवान को प्यारी हो गई. मेरी एक बेटी हे जिसका नाम रिया हे और वो बहुत ही सुंदर दिखती हे. मेरी बेटी रिया ने काफी स्टडी कर रखी हे और अभी दो साल पहले ही गुडगाँव में शादी हुई हे और मेरी बेटी इतनी किस्मतवाली हे की उसकी शादी बहुत ही बड़े घर के लड़के के साथ हुई हे. उसका रहने का एक बड़े बंगले में हे जिसमे वो और उसका पति रहते हे.

मेरा जमाई एक बिजनेशमेन हे और मेरी बेटी ने अपनी सास को भी अपने साथ ही रहने के लिए बुला लिया हे. मेरी समधन का नाम अंजू हे और वो 49 साल की विधवा औरत हे.

एक दिन की बात हे बेटी का मुझे फोन आया और वो मुझसे बातें करने लगी. वैसे तो हम डेली बाते करते हे पर उस दिन रात का समय थोडा लेट फोन आया था और मुझे उसकी आवाज से ही पता चला गया की मेरी बेटी आज बड़ी खुश हे. मैंने रिया से उसकी ख़ुशी की वजह पूछी तो वो बोली, डेडी आप के जमाई बाबा को बहुत बड़ा कॉन्ट्रैक्ट मिल रहा हे और हम लोग सिडनी जा रहे हे कुछ दिन के लिए!

मैं: बेटा मेरा आशीर्वाद तुम दोनों के साथ हमेशा हे, सदा खुश रहो और खूब मजे करो.

रिया: पापा हमारे दोनों के जाने के बाद इस बड़े बंगले में सिर्फ मम्मी जी रह जाती हे. हमने उनको कहा लेकिन वो नहीं आना चाहती हे साथ में. दिन में तो नोकर वगेरह होते हे लेकिन रात की टेंशन हे. समीर (मेरे जमाई का नाम) ने कहा की पापा को बोलो वो यहाँ रात को सोने के लिए आ जाए.

मैंने कहा नहीं रिया ऐसा अजीब लगता हे, मैं तुम्हारे घर में कैसे रह सकता हूँ. कोई क्या कहेगा!

वैसे मेरे मना करने की अपनी वजह थी क्यूंकि मैं अक्सर रोड की रंडियों को घर ला के चोदता था. और वहां सोने जाने से मेरे चुदाई के सब चक्कर बंद हो सकते थे.

लेकिन नहीं मानी और बोली, पापा आप प्लीज आ जाओ कोई कुछ नहीं , हमने मम्मी जी से भी पूछा वो भी खुश हो गई ये सुन के की अप रोज सोने के लिए आयेंगे रात को.

मैंने कहा: ठीक हे बेटा आप लोग खूब खुश रहना वहां पर. यहाँ की कोई भी चिंता मत करना मैं रात को सोने के लिए आ जाया करूँगा तुम्हारे घर पर.

रिया: थेंक्स पापा!

और अगले हफ्ते ही मेरी बेटी और जमाई समीर की सिडनी की फ्लाईट थी. उनके जाने के बाद मैं शाम को ठीक 8 बजे अपनी बेटी के ससुराल आ गया गेट पर ही मेरी समधन अंजू खड़ी थी. उन्हें नमस्कार किया उनके साथ मैं घर में चला गया.

अंजू जी को चुदे काफी साल हो गए थे. उनके बदन के अंदर लेकिन आज भी वो बात थी! पीछे गांड ढीली नहीं लेकिन एकदम कडक थी और बूब्स भी नाइटी में मस्त चिपके हुए से थे. मैंने व्हिस्की पी रखी थी और उन्हें देख के आज गंदे गंदे विचार आ रहे थे दिमाग के अंदर.

हम दोनों ने कुछ देर बहार हॉल में बैठ के बाते की और मेरी नजर आज बार बार उनकी बूब्स की गली में जा रही थी. उसने भी ये नोटिस किया और एक दो बार अपनी नाईट गाउन की नेक को ठीक भी किया. उसके निपल्स का आकार बन रहा था सिल्की कपडे के ऊपर और मेरे लंड में हलचल हो रही थी उसे देख के.

मैंने कहा: अंजू जी भाई साहब को गुजरे कितना वक्त हो गया?

वो बोली: 10 साल हो जायेंगे अगले महीने.

मैं: बाप रे इतना लम्बा समय अकेले रहना बड़ा कठिन हे.

वो बोली: हाँ आप तो समझते ही हे.

मैंने कहा: एक बात कहूँ अगर आप माइंड ना करे.

वो बोली: हां बोलिए ना.

मैं: आप ने री-मेरेज क्यूँ नहीं किया.

वो हंसी और बोली: समीर के लिए! मैं नहीं चाहती थी की मेरा ध्यान और फॉक्स समीर से जरा भी हटे. तब वो कोलेज में था.

मैं: और मैंने रिया के लिए. मेरी भी सेम प्रॉब्लम थी जी.

वो कुछ नहीं बोली और कुछ सोच में डूब गई.

मैंने खड़े हो के उनके पीछे गया सोफे के पास. और अपने हाथ उन्के कंधे के ऊपर दबा दियाइ . वो झबक सी गई और मुझे देखने लगी. मैंने कहा: इट्स ओके, वी आर ओन सेम बोट!

और फिर उसने जो किया उसका मुझे अंदाजा नहीं था. वो खड़ी हुई और मेरे से लिपट गई. उसके कडक बूब्स मेरी छाती से लगे और मैंने उनके गाल पर किस दे दिया. वो सिहर उठी इतने में ही. मैंने उनकी गांड को हाथ से दबाया और वो मेरे होंठो से अपने होंठो को लगा के चूसने लगी. मैंने अपने हाथ से समधन जी के बूब्स दबाये और वो सिसकियाँ उठी! लगता था की बहुत दिनों के बाद किसी दुसरे के हाथ से उन चुचों को टच किया गया था. समधन ने अपने हाथ को मेरे लंड पर रख दिया तो उसके अन्दर भी आज सालों के बाद नयी ऊर्जा आ गई. मेरा लंड एकदम कडक और वार्म हो चूका था.

मैंने अपने हाथों को समधन की नाइटी में डाल दिए और दोनों हाथ से उसके बूब्स को दबाने लगा था. समधन जी भी एकदम चुदासी साउंड निकाल रही थी अपने मुहं से. हम दोनों ने रिश्ते की मर्यादा और शर्म को अपने कपड़ो के जैसे ही उतार के फेंका. कपडे तो हमने सोफे की साइड में फेंके लेकिन शर्म कहा फेंकी वो पता नहीं. मेरे खड़े लंड को देख के समधन उसे चूसने के ख्याल को दिमाग से हटा नहीं सकी. उन्होंने मुझे धक्का सा दे के सोफे के ऊपर ही बिठा दिया.

फिर सीधे मेरे लंड के ऊपर वो भूखी शेरनी के जैसे टूट पड़ी. लंड को अपने हाथ से हिलाते हुए वो उसे चुस्से लगा रही थी. कसम से मैंने बहुत रंडियों और दुसरी सीधी सादी औरतों के साथ सेक्स किया हे. लेकिन ऐसा ब्लोवजोब मेरी लाइफ में किसी ने भी मुझे नहीं दिया था. अंजू पुरे लंड को मुहं में भर लेती थी. और फिर अपने हाथ उसके ऊपर दबा के ऐसे चुस्ती थी की बस मैं खो सा गया था. व्हिस्की का नशा जो कुछ देर पहले नस नस में था अब वो हवा के जैसे उड़ चुका था.

समधन अंजू ने पांच मिनिट और मेरे लंड को चूसा. और फिर मैंने कहा, अब निकाल लो नहीं तो निकल जाएगा.

वो ऊपर उठी और मेरी तरफ देखा उसने. उसके बाल खुले हुए थे और वो बहुत ही सेक्सी लग रही थी. उसने कहा, आज आप के लंड से मुझे जाम पी लेने दीजिये.

मैंने उसके माथे को अपने लंड पर वापस दबा दिया और मन ही मन कहा, पी लो फिर.

समधन ने मुहं को वापस काम पर लगा दिया. और वो अब लंड को हाथ से हिला रही भी रही थी उसका पानी निकालने के लिए.

एक मिनिट और लंड चूसा होगा उसने और मेरे लंड से पिचकारी निकल के उसके मुहं में समा गई. मैंने एक के ऊपर एक कर के 4-5 पिचकारियाँ मारी. और सब का सब वीर्य अंजू जी के मुहं में ही छोड़ा. मैंने आश्चर्य से देखा की मेरी समधन ने सब वीर्य खा लिया और फिर उसने मेरे लंड को छोड़ा. लंड किसी बड़ी सेना के सामने हारे हुए सिपाही के जैसे सिकुड़ रहा था.

मैंने अंजू को अब सोफे में बिठा दिया. उसने अपनी दोनों टांगो को खोला. मैंने उसके भोसड़े में अपना मुहं डाला. और चाटने लगा. उसकी चूत के ऊपर बरसात के बाद जैसे घास उग निकलती हे एकदम घाटी सी वैसे बाल के गुच्छ थे. और उसकी चूत से मस्की स्मेल आ रही थी. मैंने चूत के दाने को दो दांतों के बिच रख के दबाया तो समधन जी की उई उई सुनाई पड़ी. उसने मेरे माथे को पकड के अपनी चूत पर दबा दिया. और वो बोली: अह्ह्ह आज सालों के बाद किसी ने यहाँ होंठो से टच किया हे, मजा आ गया समधी जी!

मैंने अपने हाथ ऊपर को उठा के समधन के मुहं में एक ऊँगली डाली. वो जैसे लंड चूस रही हो वैसे मेरी ऊँगली को सक करने लगी. फिर मैंने एक की जगह पर दो ऊँगली उसके मुहं में डाली और वो एकदम रोमांटिक ढंग से ऊँगली को चूसने लगी. मैंने अपनी जबान को उसकी ढलती हुई चूत में घुसेड दी और कस के चाटने लगा. मैं चूत के खड़े लिप्स के ऊपर जबान को घिसने लगा जैसे वो कोई चमत्कारी पथ्थर हो जिसे चाटने से अमृत बहार आने को हो!

अमृत बहार आ भी गया, समधन ने सालों से जिसे अपनी चूत की गुफा में बंद कर रखा था वैसा गाढ़ा पानी उसकी चूत से बहने लगा. अंजू जी के पाँव थरथरा उठे और बदन के अन्दर एक झटका ऐसे लगा की जैसे उसे किसी ने जीवंत करंट का वायर पकडवा दिया हो. वो आह्ह्ह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह ऊऊऊओ औऊऊउ करते हुए अपने पानी की धार मार बैठी. मैंने पानी चाटा जो सवाद में एकदम बेसवादा सा था और उसके अन्दर दही के जैसे लम्प्स भी बने हुए थे.

मुझे लगा की चूत का पानी निकलने से समधन की चूत की आग शांत हुई होगी. लेकिन मैं गलत था! ऊपर से उसकी आग तो और भी भडक गई थी. उसने मेरे लंड को पकड़ा, जो वापस अपने सर को उठा चूका था. उसे हिला हिला के उसने फिर से एकदम कडक कर दिया. फिर मुझे सोफे के ऊपर बिठा दिया उसने. मेरा लंड छत की तरफ ताक रहा था. समधन ने अपने हाथ से मेरे लंड को पकड़ा. और फिर वो अपनी चूत को पसार के मेरे लंड के ऊपर आ बैठी. उसने बैठने से पहले हाथ से ही मेरे लंड को अपनी चूत पर घिस के सुपाडे के ऊपर गिला पानी लगा दिया था. इसलिए लंड बिना किसी परेशानी के फच के साउंड के साथ समधन की विधवा चूत में घुस गया. वो एक दो बार एकदम धीरे से ऊपर निचे हुई और लंड को क्रमश: अन्दर डलवा लिया!

फिर वो उसके ऊपर बैठ गई पूरा लंड उसकी प्यासी चूत में था! मैंने समधन जी के कंधे पकड लिए और उन्हें अपने बदन से चिपका दिया. हम दोनों के गरम न्यूड बदन एक दुसरे से मिले तो उत्तेजना की एक और लहर सी दौड़ गई दोनों के बदन में. समधन ने अब धीरे धीरे ऊपर निचे होना चालू कर दिया. मैंने भी लेग्स के ऊपर उनका वजन उठा लिया. और निचे से अपने बल पर उन्हें धक्के लगाने लगा. वो ऊपर से वार कर रही थी और मैं निचे से उसके ऊपर प्रतिकार सा कर रहा था. हम दोनों के बदन का फ़ोर्स चूत और लंड के मिलन पॉइंट के ऊपर स्थिर हुआ था. और दोनों को ही बड़ा मजा आ रहा था इस अनोखी चुदाई से.

अब मैंने अंजू जी के दोनों बूब्स को एक एक कर के चुसना चालु कर दिया. वो बड़ी चुदासी हो गई थी. उसकी साँसे एकदम तेज हो गई थी और झटके की स्पीड उसने एकदम लास्ट गियर पर कर दी थी. मैंने भी निचे से अपना पूरा जोर लगा दिया था उनकी चूत के ऊपर.

कमरे के अन्दर पच पच और समधन की सिसकियों का समा सा बंधा हुआ था. मैंने उसके बूब्स को कभी चाट रहा था तो कभी चूस रहा था. फिर उन्होंने मेरे होंठो के ऊपर किस कर लिया. और फिर अपने होंठो से वो मेरे कानो को. गालो को, नेक को और शोल्डर के ऊपर किस देने लगी. उसके गरम गरम होंठो से मुझे और भी मजा आ रहा था. मैं जान गया था की वो बस सावन भादों की कगार पर ही थी.

और इसलिए मैंने उन्हें एकदम कस के जकड़ लिया अपनी बाहों में और पुरे बदन का जोर लगा दिया चुदाई के अन्दर. समधन जी भी आह अह्ह्ह ओह करने लगी थी और इस सेक्स के असीम आनंद को लूट रही थी.

अगले ही पल उसने अपनी चूत को मेरे लंड के ऊपर कस लिया. और मेरे लंड के ऊपर ही उसके गरम स्क्वर्ट यानी की चूत के पानी का अहसास हुआ मुझे. मैंने कस के पेला उसे उस वक्त और मैं भी अल्मोस्ट साथ में ही झड़ गया. हम दोनों ने एक दुसरे को जकड़ के रखा हुआ था. वो मुझे चूम रही थी और मैंने अपनी छाती के ऊपर उसके बूब्स के अहसास को लुट रहा था!

फिर मैंने धीरे से उन्हें उठाया और वो सोफे के ऊपर ही लम्बी हो गई. मैं भी उन्के पास में ही लेट गया और उनकी गांड से ले के कंधे तक अपने हाथ से सहलाने लगा.

अंजू: आज आप ने सालों की प्यास को बुझा दी समधी जी.

मैं: मुझे भी आप के साथ बड़ा मज़ा आ गया अंजू जी!

उसने मुझे एक किस दिया और वो नहाने के लिए चली गई.

मुझे कसम से बड़ा मजा आया था अपनी समधन को ऐसे चोदने में. अब मैंने सोच लिया था की जब तक समीर और रिया सिडनी में है तब तक मुझे किसी रंडी को चोदने की जरूरत नहीं हे. बल्कि मैं तो ये सोच रहा था की जब समधन जैसा माल हे फिर भला बहार पैसे देने और बीमारी की तलवार भी हमेशा सर पर लटकाना. दोस्तों अगले दिन मैंने अपनी इस समधन के साथ सुहागरात का प्लान बना लिया. और हम दोनों की वो चुदाई भी एकदम बढ़िया थी. आप के लिए वो सेक्स कहानी भी मैं लिख के भेजूंगा