घरेलू चुदाई समारोह 21

तुम कहते हो कि मैं antarvasna ये मान लूँ कि तुम्हें अँदाज़ा kamukta नहीं है कि तुम्हारा लण्ड इतना विशाल और भारी है… कर्नल…” कोमल ललचायी नज़रों से उस आदमी के लण्ड के फूले हुए सुपाड़े को घूरने लगी। वो मोटा सुपाड़ा अग्रिम वीर्य-श्राव से चमक रहा था। इसमें कोई संदेह नहीं था कि कर्नल उत्तेजित था। एक बार कोमल ने सड़क के किनारे एक घोड़े की टाँगों के बीच उसका उत्तेजित लण्ड देखा था।

इस समय कोमल के जहन में वही भीमकाय भूरा-लाल लौड़ा घूम रहा था। कोमल ने कई बार अपनी चूत में उस घोड़े के लण्ड की कल्पना की थी। कोमल का मुँह अचानक सूखने लगा और कर्नल के लण्ड के चिपचिपे सुपाड़े को अपने होठों में लेने की इच्छा तीव्र हो गयी।

मेरी मदद करो कर्नल कोमल उत्तेजना में फुसफुसायी और उसने कर्नल को थोड़ा सा उठने के मजबूर किया तकि वो कर्नल कि पैंट उसकी टाँगों तक नीचे खींच सके। फिर बोली “मैं अब तुम्हारा पूरा लण्ड देखे बगैर नहीं रह सकती। तुम्हारे टट्टे भी ज़रूर विशाल होंगे…”

“गाँडू… साले…” अचंभे में कोमल के मुँह से गाली निकली जब उसने कर्नल का संपूर्ण भीमकाय लण्ड और उसके बालदर विशाल टट्टे देखे तो बोली- “किस हक से तुम इसे दुनिया की औरतों से अब तक छुपाते आये हो… तुम्हारे जैसे सौभग्यशाली मर्द का तो फर्ज़ बनता है कि जितनी हो सके उतनी औरतों को इसका आनंद प्रदान करो। क्या तुम्हें खबर है कि तुम्हारा लण्ड कितना निराला है…”

कर्नल ने अपने लण्ड पर नज़र डाली पर कुछ बोला नहीं। वो कोमल की भारी चूचियों को अपने हाथों में थामे कोमल की अगली हरकत का इंतज़ार कर रहा था। उसने स्वयं को कोमल के हवाले कर दिया था ताकि कोमल जैसे भी जो चाहे उसके साथ कर सके।

कोमल ने प्यार से उसके विशाल लण्ड के निचले हिस्से को स्पर्श किया।

“ओहहहह कोमल जी…” कर्नल सिसका जब कोमल की पतली अँगुलियों ने उसके लण्ड के साथ छेड़छाड़ की। उसके हाथ कोमल की चूचियों पर जोर से जकड़ गये।

“हाँ… ऐसे ही जोर से भींचो मेरे मम्मे… डर्लिंग…” कोमल ने फुफकार भरी जब कर्नल की मज़बूत अँगुलियों ने उसकी चूचियों को बेरहमी से मसला। फिर बोली- “मैं तुम्हारे लण्ड को चूसना चाहती हूँ कर्नल… लेकिन पहले मैं इसे निहारना चाहती हूँ। देखो मेरे हाथ में कैसे फड़क रहा है… रगों से भरपूर है ये… मैंने कभी किसी आदमी का इतना बड़ा सुपाड़ा नहीं देखा… पता नहीं मैं इसे अपने मुँह में कैसे ले पाऊँगी…