घरेलू चुदाई समारोह 3

“ओह…” कोमल की antarvasna चूत में एक गर्मी सी फ़ैल गई। उसने लण्ड चूसने से मना कर दिया। वो सुनील से और जोर की चाह रखती थी।

“हरामज़ादी, मैंने कहा मेरा लण्ड चूस…” सुनील चिल्लाया और वो कोमल के मुँह में अपना लण्ड भरने की कोशिश करने लगा।

कोमल के दिमाग में एक बात आई। इस समय उसका पति वासना से पागल था, उसने सुनील से उसका लण्ड चूसने से पहले एक वादा लेने की ठानी।

“ठीक है, पर अगर तुम वादा करो कि सजल को अगले साल यहीं रखकर पढ़ाओगे…”

“क्या… इस समय इस बात का क्या मतलब है…”

“क्योंकी तुम सिर्फ़ इसी समय मेरी सुनते हो। मुझे उसका वह कालेज बिलकुल पसंद नहीं है। उसे हमारे साथ यहीं रहना चाहिए…”

“हम यह सब बातें पहले भी कर चुके हैं। उस कालेज में उसकी ज़िन्दगी बन जायेगी…” सुनील गुस्से और उन्माद से बोला- “उसे वहीं पढ़ने दो…”

“नहीं, उसे यहीं रखो…” कोमल ने सुनील के दमदार लण्ड के सुपाड़े का एक चुम्मा लेते हुए कहा।

“ठीक है…”

“उंह, ठीक है। आह…” सुनील के मुँह से चीख सी निकली जब कोमल ने उसका मोटा लण्ड एक ही बार में अपने गर्म मुँह में ले लिया।

अब जब बहस की कोई गुंजाइश नहीं रही, कोमल अपने मनपसंद काम ‘लण्ड चुसाई’ में तन मन से व्यस्त हो गई।

“अपनी जीभ भी चलाओ, जान…”
“मेरे मुँह को चोदो सुनील…” उसे लौड़े का अंदर-बाहर का घर्षण बहुत प्रिय था। उसके मनपसंद आसन में सुनील उसके मुँह को चोदता था जब वह उसके आगे झुकी रहती थी।

“वाह मेरी लौड़ाचूस, और जोर से चूस…” सुनील अपने मोटे लण्ड को अपनी बीवी के सुंदर मुँह में भरा हुआ देखकर ज्यादा देर तक ठहरने वाला नहीं था। वह उसके हसीन मुँह में ही झड़ना चाहता था।
कोमल ने अपना मुँह सुनील के लण्ड से हटा लिया।

“तुमने ऐसा क्यों किया…” सुनील कंपकंपाते हुए बोला। उसने कोमल का सर फ़िर से अपने लण्ड पर लगाना चाहा।

“अभी मत झड़ना सुनील। तुम बहुत जल्दी झड़ जाते हो। मैं प्यासी ही रह जाती हूँ। इस बार तुम मुझे झड़ाए बिना नहीं झड़ोगे…” कोमल बोली- “तुम मेरी चूत चूसो, मैं तुम्हारा लण्ड चूसती हूँ…”

सुनील ने कोमल के चूतड़ अपनी ओर खींचे, और जोरदार तरीके से कोमल की चुसाई करने लगा। जब उसने अपने दांतों से चूत के दाने को काटा तो कोमल आनंद से चिहुंक पड़ी।

“तुम हर बार ऐसा क्यों नहीं करते… जब तुम काटते हो तो कितना मज़ा आता है। हाँ मेरी चूत को ऐसे ही चूसो…”

“तुम मेरा लण्ड अच्छे से चूसो और मैं वही करूंगा जो तुम चाहोगी…” सुनील के चेहरे पर कोमल की चूत का रस चिपका हुआ था। उसे जबरन थोड़ा रस पीना पड़ा। उसे इस रस का स्वाद अच्छा भी लगा।

“हाँ, मेरी जान। आज हम रात भर एक दूसरे का रस पियेंगे…” कोमल खुशी से चीखी। उसने अपने पति के टट्टों पर अपनी ज़ुबान फ़ेरी। उसने पक्का किया हुआ था कि सुनील से चूत चुसवाकर ही रहेगी। उसके बाद वो उसे चोदने देगी जब तक कि दोनों थक न जाएं। पर कोमल ने चूसना शुरू नहीं किया।

वो सोच रही थी की सजल का लण्ड कैसा दिखता होगा। क्या उसका लण्ड भी सुनील जितना बड़ा होगा… सुनील का लण्ड नौ इंच लम्बा था और बहुत मोटा। उसने अपने हाथ में मौजूद हथियार को देखा और सोचा काश… यह सजल का होता।

जब सुनील ने उसकी चूत को जोर से चूसना शुरू किया तो उसे महसूस हुआ जैसे वो फ़ट जायेगी। अपने बेटे के ख्याल ने यह निश्चित कर दिया कि इस बार वो लम्बी झड़ेगी- “ओह सुनील, मैं झड़ रही हूँ, मुझे खूब चोदा करो, मुझे इसकी सख्त ज़रूरत रहती है। मुझे तुम्हारे मुँह और लण्ड की हमेशा प्यास रहती है। इतनी जितना तुम मुझे नहीं देते…”

सुनील जानता था कि कोमल उसे तब तक नहीं चूसेगी जब तक वो उसकी इच्छा पूरी नहीं कर देता। उसकी उंगलियों ने कोमल की गाण्ड को फ़ैलाया और उंगली हल्के से उस बादामी छेद पर छुआई।

“एक बार और…” कोमल ने मिन्नत की। उसने सुनील का लण्ड इतनी जोर से दबाया कि उसकी चीख निकल गई। वो तो उसी समय उस स्वादिष्ट माँसपिंड को खा जाती अगर उसे उसकी ज़रूरत अपने किसी दूसरे छेद में नहीं होती। वो शानदार उंचाई पर पहुंच कर झड़ गई।

“अब तुम्हें मुझे इंतज़ार कराने का फ़ल भुगतना होगा…” सुनील बोला जब वो शान्त हुई। उसने कोमल को उठाकर चौपाया बनाया और अपना पूरा लण्ड एक ही बार में उसकी लपलपाती हुई चूत में पेल दिया।

“हाय…” कोमल के मुँह से आनंद भरी सीत्कार निकल गई और वो उस धक्के से आगे जा गिरी।

“हे भगवान तुम बहुत गर्म हो…” सुनील हाँफ़ते हुए बोला। कोमल की भट्ठी उसके लण्ड को एक धौंकनी की तरह भस्म किये दे रही थी- “ले मेरा लौड़ा और बता कैसा लगता है, चुदासी औरत…”
“मुझे पूरा चाहिये, पूरा…” कोमल ने ज़वाब दिया।