घरेलू चुदाई समारोह 12

कोमल की चूत antarvasna गर्मा गई। पर उसने kamukta अपना ध्यान दूसरी ओर कर लिया। पिक्चर बड़ी मज़ाकिया थी। वो अपने बेटे के साथ खूब हँसी। रात के भोजन में कोमल ने अपनी वाइन सजल के साथ बांटी। हालांकि रेस्त्रां के मालिक ने इस पर एतराज़ किया था पर यह जानकर कि वो मम्मी-बेटे हैं मान गया था। जब वो होटल पहुंचे तो कोमल के दिल की धड़कन बढ़ने लगी। अगर आज रात को कुछ होगा तो शयद उससे कुछ भला ही होगा।
“मैं अपने तैरने के वस्त्र बाथरूम से बदल कर आता हूँ… लेकिन आज मैं आपको डाइव करना नहीं सिखाऊँगा क्योंकी आपने काफी ड्रिंक की हुई है…” सजल ने कहा।
“मैं तुम्हारी मम्मी हूँ, तुम मेरे सामने भी बदल सकते हो… चलो यहीं बदलो… देखो मैं भी तुम्हारे सामने ही बदल रही हूँ…” और बिना सजल के जवाब का इंतजार किये कोमल ने अपने कपड़े और सैंडल उतारने शुरू कर दिये। उसने अपनी ब्रा और चड्ढी उतारने में हल्की सी देर लगाई जिससे कि सजल को कुछ उत्सुकता हो।
“देखो कितना आसान है… मैं तुम्हारी मम्मी हूँ और तुम मेरे बेटे, हमें एक दूसरे को नंगा देखने में शर्म कैसी…”
“कुछ भी नहीं…” सजल के मुँह से मुश्किल से आवाज़ निकली। पर अगर यह इतना आसान था तो उसका लण्ड खड़ा क्यों हो रहा था…
“जल्दी करो सजल, तरणताल थोड़ी ही देर में बंद हो जायेगा…” कोमल अपनी बिकिनी निकालने में मशगूल हो गई। उसकी पीठ सजल की ओर थी, पर वह सजल के नंगे जिश्म को देखने के लिये मुड़ने को तत्क्षण तैयार थी। कोमल ने अपनी बिकिनी पहनी ही थी कि सजल ने अपनी चड्ढी उतार दी। वह तेज़ी के साथ अपनी तैरने की चड्ढी पहनने के लिये झपटा। पर वो कोमल के सामने थोड़ा धीमा पड़ गया। कोमल तब तक पलट चुकी थी और उसने सजल का मोटा बड़ा लण्ड भी देख लिया था।

“तुम काफ़ी बड़े हो गये हो, प्रिय…” उस खुशनसीब माँ ने अपने बेटे के हथियार पर एक भरपूर नज़र डाली। उसने जो देखा उससे उसका मन अति आनंदित हो गया। सजल का लण्ड सुनील से बड़ा और मोटा था, रहा होगा कोई दस इंच लम्बा और अच्छा खासा मोटा। सजल के टट्टे भी भारी थे और घनी झाँटों में छुपे हुए थे। कोमल के मुँह में पानी आ गया।
पर उसने संयम बरता और कहा- “बेहतर होगा कि तुम अपनी चड्ढी पहनकर तैरने चलो…” यह कहकर उसने दूसरी ऊँची एंड़ी की चप्पलों में पैर डाले और दरवाज़े की ओर बढ़ गई। सजल को नंगा देखकर कोमल की दबी हुई भावनाएं दोबारा करवटें लेने लगी थीं। उसे शक था कि आज की रात वो अनचुदी नहीं रहेगी।
सजल भी अपने आपको संतुलित करने की कोशिश कर रहा था। पर उसके मन में भी एक सागर उमड़ रहा था।
थोड़ी देर तैरने के बाद कोमल बोली- “अब बहुत ठंडक हो गई है, चलो अंदर चलते हैं…”
कमरे में पहुंचकर दोनों काफ़ी तनाव में थे। सजल ने पहले कमरे में बिछे दोनों बिस्तरों की ओर देखा, और फ़िर अपनी मम्मी की ओर। कोमल समझ गई कि वो क्या सोच रहा था। अब सच्चाई को छुपाया नहीं जा सकता था। पर उसे एक ही डर था कि अगर सजल उससे नफ़रत करने लगा तो वो क्या करेगी… कहीं वो खुद ही अपने आपसे नफ़रत न करने लगे।
इन सारे शकों के बावज़ूद अपने बेटे को चोदने का ख्याल हावी था। कोमल ने अपनी बिकिनी की डोर खोलते हुए कहा- “हमें सोने के पहले नहा लेना चाहिये…” और इसी के साथ उसकी बिकिनी की ब्रा ज़मीन पर जा गिरी। सजल अपनी पैंट उतारने में अभी भी हिचकिचा रहा था।
“तुम यह कच्छा पहनकर तो ठीक से नहा नहीं सकते…” कोमल ने अपनी चड्ढी उतारते हुए कहा।
वो लड़का अपनी मम्मी के शानदार जिश्म को देखकर ठगा सा रह गया। उसकी मम्मी उसके सामने सिर्फ ऊँची एंड़ी की चप्पलें पहने बिल्कुल नंगी खड़ी थी। सजल ने कहा- “तुम जाकर पहले नहा लो मम्मी, मैं तुम्हारे बाद नहा लूंगा…”
“नहीं, हम दोनों साथ ही नहाएंगे…” यह कहते हुए कोमल अपने विशाल मम्मे झुलाती हुई सजल की ओर बढ़ी। वो काफ़ी उत्तेजित थी।
“मम्मी क्या तुम समझती हो कि ये ठीक होगा…”
“अवश्य, अब तुम अपनी पैंट उतारो, या मैं उतारूं…”
“नहीं, मैं उतार लूंगा…”