जंगल में हुआ चुदाई का दंगल

हाय फ्रेंड्स, मेरा नाम वीरेन्द्र है Antarvasna मेरी उम्र 26 साल की है, और मैं उदयपुर शहर का रहने वाला हूँ. और मैं यहाँ पर एक फाइनेंस कम्पनी में रिकवरी एजेन्ट का काम करता हूँ. और इसके साथ ही मैं अपने खाली समय में कामलीला डॉट कॉम वेबसाइट पर सेक्सी कहानियाँ भी पढ़ता आ रहा हूँ. दोस्तों मेरे साथ आज से 2 साल पहले एक घटना हुई थी जिसको मैं आज आप सभी के सामने कामलीला डॉट कॉम के माध्यम से रखने जा रहा हूँ. दोस्तों उस समय मेरे एक दोस्त का जन्मदिन था और उसने अपने जन्मदिन की पार्टी में बहुत सारे लोगों को बुलाया था और उनमें से एक लड़की भी थी जिसका नाम शिल्पी था।

दोस्तों वह गेहुँवे रंग की एक साधारण सी दिखने वाली लड़की थी, लेकिन वह शारीरिक रूप से काफ़ी आकर्षक थी. और मैंने जब से उसको देखा था तब से ही मेरी रूचि उसमें बढ़ने लग गई थी. और फिर इसके लिये मैंने अपने दोस्त से शिल्पी के साथ मेरी जान-पहचान करवाने को कहा. और फिर मेरे दोस्त ने हम दोनों की मुलाकात करवाई, तो फिर मैंने उसको अपने बारे में बताया और उसने भी मुझको उसके बारे में बताया. दोस्तों मुझको हँसी-मज़ाक करना बहुत पसन्द है और मैं किसी के भी साथ बहुत ही जल्दी घुल-मिल जाता हूँ, तो मुझको शिल्पी के साथ भी जान-पहचान करने में कोई दिक्कत नहीं हुई थी. और फिर एकबार मैंने शिल्पी को फ़ेसबुक पर फ्रेंड-रिक्वेस्ट भेज दी थी. और फिर उसके दूसरे दिन ही उसने मेरी फ्रेंड-रिक्वेस्ट को एक्सेप्ट कर लिया था. मैंने उससे फेसबुक पर बातें करी तो उसने भी मेरी बातों का जवाब दिया था. और फिर मैंने उससे उसका फोन नम्बर फ़ेसबुक पर बात करने के दौरान माँगा तो उसने मुझको अपना फोन नम्बर दे भी दिया था. और फिर अब हमारी रोज ही फेसबुक और वाट्स-एप पर रात को 11-12 बजे तक बातें होने लगी थी, और अब हम एक-दूसरे से हर तरह की बातें करने लग गए थे, इसका मतलब अब हम सेक्सी बातें भी करने लग गए थे. और एक-बार बातों ही बातों में उसने मुझको बताया कि उसको घूमने का काफ़ी शौक है. और फिर मैंने उससे पूछा कि, आज तक तुमने कौन-कौनसी जगह देखी है? और फिर उसने उन जगहों के नाम बताने शुरू कर दिए थे. और फिर मैंने मज़ाक करते हुए उससे पूछा कि, तुमने कभी जंगल देखा है?

शिल्पी :- नहीं, कभी नहीं देखा।

मैं :- तो फिर क्या तुम देखना चाहती हो?

शिल्पी :- क्यों नहीं?

और फिर हम दोनों रविवार को आपस में मिले. और फिर वह मेरे पीछे बाइक पर बैठ गई थी और हम दोनों चल दिए थे. और फिर करीब 30-40 किलो-मीटर की दूरी तय करने के बाद मुझको एक शरारत सूझी, और मैंने उससे पूछा कि, तुमने कभी बाइक चलाई है?

शिल्पी :- नहीं चलाई है।

मैं :– ले तो फिर, आज चला ले।

लेकिन उसने मुझको मना कर दिया था. लेकिन मुझको भी अपनी बात मनवानी आती है, और फिर उसने आख़िर में मेरी ज़िद को मान लिया था. और फिर मैंने उसको अपनी बाइक की अगली सीट पर बैठा दिया था, और मैं खुद उसके पीछे वाली सीट पर बैठ गया था. और अब मैं पीछे से अपने हाथ आगे करके अपनी बाइक के हैन्डल को संभाल रहा था और इसके लिये मुझको उससे चिपकना पढ़ रहा था. दोस्तों उस समय मुझको बहुत ही गजब का अहसास हो रहा था, और काश मैं आप सभी को उस अनुभव के बारे में शब्दों में बता सकता, लेकिन उस अहसास को बताने के लिए मेरे पास कोई शब्द ही नहीं है. दोस्तों किसी भी लड़के की ऐसी परिस्थिति में क्या हालत हो सकती है आप ही अनुमान लगा सकते हो, उसकी गांड और पीठ से चिपकने से मेरा लंड भी खड़ा हो गया था. और फिर अचानक से उसने मुझसे कहा कि…

शिल्पी :- अब मुझको कोई बाइक-वाइक नहीं चलानी है।

और फिर मैं भी डर गया था, और मुझको लगा कि, शायद उसको बुरा लग गया है, तो मैंने उसको बिना कुछ कहे ही उसको पीछे बैठा दिया था. और फिर हम दोनों वहाँ से आगे बढ़ गये थे. और फिर थोड़ा सा आगे जाने के बाद उसने मुझसे कहा कि, ज़रा रूको और वह देखो सामने पेड़ के पास एक कुँआ है, और मुझको वो देखना है। और फिर मैंने उससे कहा कि, ठीक है, चलते है। और फिर हम दोनों वहाँ पर पहुँचे।

मैं :– इस कुँए में देखने जैसा क्या है?

शिल्पी :- तुम चुप रहो, तुमको कुछ भी पता नहीं है।

और फिर मैं उससे क्या कहता, और मैं एकदम चुप हो गया था. और फिर वह उस कुँए के पास में घूमने लग गई थी, जैसे कि वह उस कुँवे को चारों तरफ से देख लेना चाहती हो. और फिर अचानक से उसकी एक चीख सुनाई दी. और फिर जब मैंने उसकी तरफ देखा तो वह अपना एक पैर पकड़कर ज़मीन पर बैठकर रो रही थी. और फिर मैं भागकर उसके पास गया. और फिर मैंने देखा कि, उसके पैर में एक काँटा चुभ गया था. और जिससे उसकी हालत बहुत खराब होती जा रही थी. और फिर मैंने जल्दी से उसका पैर पकड़ा और अपनी पूरी ताक़त से एक ही झटके में वह काँटा उसके पाँव से बाहर खीँच निकाला था. और इसके साथ ही उसके मुहँ से एक बहुत ही तेज चीख निकल गई थी. लेकिन काँटे को पैर से बाहर देखकर उसका रोना जल्दी ही कम भी हो गया था. और फिर मैंने उससे कहा कि, चलो हमको अब घर चलना चाहिए. तो फिर उसने मुझसे कहा कि, अभी हम कैसे जाएगें? मेरी हालत तो अभी बहुत खराब है. और फिर मैंने उसको धीरे से अपनी गोद में उठाया और फिर मैं उस कुँए के पास वाले पेड़ के पास उसको अपनी गोद में लेकर बैठ गया था, और फिर मैं उसके चेहरे को और उसके आँसुओं को देखने लग गया था. तो फिर उसने मुझसे पूछा कि, तुम मेरी तरफ ऐसे क्या देख रहे हो? तो फिर मैंने उससे कहा कि, सॉरी गलती मेरी ही है. मुझे तुमको यहाँ पर लाना ही नही चाहिए था. और फिर वह मुझको ऐसे ही कुछ देर तक देखती रही और फिर उसने अपने होठों को मेरे होठों से मिला दिया था. दोस्तों उस समय कुछ पल के लिए तो मैं एकदम स्तब्ध रह गया था और फिर मैंने उससे कहा कि, यह सब क्या हो रहा है. और फिर जब हमारे होंठ एकदूसरे से अलग हुए तो शिल्पी ने मुझसे कहा कि, इसमें तुम्हारी कोई ग़लती नहीं है, आई.लव.यू. और उसके मुहँ से यह शब्द सुनकर मैं एकबार फिर से स्तब्ध रह गया था. और फिर मैं यह सोचने लग गया था कि, क्या यह सब मेरे साथ सच में हो रहा है? और फिर मैं भी शिल्पी को अपनी बाहों में जकड़ने लग गया था, और मैं उसके होठों को फिर से चूमने लग गया था।

दोस्तों शिल्पी का रोना भी अब बिलकुल ही बन्द हो गया था, और मेरा लंड भी अब खड़ा हो चुका था. और मेरा लंड अब चुदाई के मैदान में कूदने के लिये पूरी तरह से तैयार हो चुका था. और उस सुनसान इलाक़े में अब हमारे चुम्बनों की आवाजें गूँज रही थी. और फिर मेरी हथेलियाँ कब उसकी कमर पर से उसके बब्स के ऊपर आ गई थी, मुझको तो पता ही नहीं चला था. और अब चुम्बनों के साथ-साथ उसकी हल्की-हल्की सिसकियाँ भी मेरे कानों में आ रही थी. और मेरे हाथ उसके अंग-अंग को महसूस कर रहे थे. और फिर मैं भी शिल्पी की हथेलियों को मेरी पीठ के हिस्से पर महसूस कर रहा था. और फिर कुछ देर के लगातार चुंबन के बाद हम दोनों अलग हो गए थे, और हम दोनों उस समय बहुत खुश भी थे. और फिर शिल्पी ने मुझसे कहा कि, आज से पहले कभी तुम इस रास्ते पर चले हो? तो मैंने भी मुस्कुराते हुए उससे कहा कि, नहीं लेकिन अगर तुम जैसा साथी मेरे साथ में होगा तो मैं किसी भी रास्ते पर चलने को तैयार हूँ. और फिर वह भी मेरे जवाब को सुनकर थोड़ा मुस्कुरा दी थी. और हम दोनों एक-दूसरे को फिर से चूमने लग गए थे. और फिर करीब 5 मिनट के बाद हम दोनों एकदूसरे से अलग हुए थे. और फिर मैंने उसकी जीन्स की पेन्ट और पैन्टी दोनों को ही एक-साथ उतार दिया था. और फिर शिल्पी के साथ होने वाले मेरे मिलन का द्वार मेरे सामने था. और फिर मैं किसी पवित्र द्वार की चौखट की तरह उसकी चूत को चूमने लग गया था. और फिर उसकी चूत का चूमना कब चाटने में बदल गया था, मुझको तो बिलकुल भी पता ही नहीं चला था. और फिर 10 मिनट तक उसकी चूत को चाटने के बाद उसकी चूत ने अचानक से अपना ढेर सारा पानी छोड़ दिया था. लेकिन फिर भी मैंने उसकी चूत को चाटना जारी रखा था. और फिर थोड़ी देर के बाद वह मुझसे कहने लगी कि, अब बस भी करो मेरी जान, क्योंकि अब मुझसे और बर्दाश्त नहीं हो रहा है।

मैं :- अभी से ही कहाँ मेरी जानेमन, अभी तो तुम्हरी भी बारी है।

और फिर मैं भी अपने लंड को उसके होठों पर लगाने लगा था. लेकिन वह मुझको उसके लिये मना करने लग गई थी. दोस्तों जैसा कि, आप सभी को मैं पहले भी बता चुका हूँ कि, मुझको अपनी बात मनवाना बड़ी ही अच्छी तरह से आता है, और फिर उसने मेरे बहुत कहने पर आखिर मेरा लंड अपने मुहँ में ले ही लिया था, और फिर तो मुझको तो किसी जन्नत की सैर करने जैसा मजा आने लग गया था. और फिर कुछ ही देर के मुख मैथुन के बाद मैं भी झड़ने वाला था, लेकिन मैंने शिल्पी को यह नहीं बताया था और फिर मैंने उसके मुहँ में ही मेरा सारा माल निकाल दिया था. और फिर मैं वहीं उसके बगल में लेटकर सुसताने लग गया था. और इस बीच हम एक-दूसरे को चूमते जा रहे थे. और फिर करीब 30 मिनट के बाद मैं फिर से तैयार हो गया था. और इस बार मैंने उसका टॉप भी उसके बदन से अलग कर दिया था और मैंने उसकी चूत पर अपना लंड टिका दिया था।

और फिर मैंने 2-3 बार कोशिश करी थी, लेकिन उसकी चूत बहुत चिकनी और कसी हुई होने के कारण मेरा लंड तो बस इधर-उधर ही फिसल रहा था. और फिर अगली बार मैंने बड़े ही धीरे-धीरे और बड़े आराम से अपने लंड को उसकी चूत में घुसाने की कोशिश करी. और फिर जैसे ही मेरा लंड उसकी चूत के अन्दर जाने लगा तो, शिल्पी की सिसकियाँ आहहह… इस्सस…. उफ्फ्फ्फ़… करके निकल रही थी. और फिर उसकी आँखों से आँसूं भी निकलने लग गए थे, लेकिन मुझको यह पता था कि, यह आँसू बस थोड़ी ही देर के लिए है, और इसीलिए मैंने उसके उन आँसुओं को नज़र अंदाज कर दिया था. और इधर मेरा लंड भी अब उसकी चूत में एकदम अन्दर तक जा चुका था. और अब मैं उसकी चूत में धक्के लगाने के लिए एकदम तैयार बैठा था. और फिर मैंने शिल्पी की तरफ देखा और उससे पूछा कि, क्या तुम ठीक हो? तो फिर उसने मुझको बिना कुछ कहे ही हाँ का इशारा कर दिया था. और फिर उसी के साथ ही मैंने भी अपने लंड को उसकी चूत में आगे-पीछे करना शुरू कर दिया था. और फिर मैं अपनी चुदाई की गति को आगे बढ़ाता रहा, और फिर करीब 20-25 मिनट की चुदाई करने से हम दोनों ही स्खलित हो गये थे। हम दोनों ने बहुत सी अलग-अलग अवस्था में आकर के संभोग किया था. और हम सभी यह तो जानते ही हैं कि, संभोग की क्रिया क्या होती है. इसलिये मैं यहाँ पर आप सभी को उसका ज़्यादा विवरण तो नहीं दे रहा हूँ. दोस्तों उस दिन हम दोनों ने 3 घंटे में करीब 3 बार तो चुदाई कर ही ली थी. और फिर दिन ढलने वाला था तो, मैंने उससे कहा कि, अब हमको यहाँ से चलना चाहिए।

तो फिर उसने भी मेरी बात पर अपनी सहमति दे दी थी. और फिर हम दोनों ने अपने-अपने कपड़े ठीक किये और फिर हम दोनों घर के लिए वापस चल दिये थे. और वापसी में मैं उसको अपनी बाइक के शीशे से देख रहा था, वह मुझको मेरी कमर से पकडकर मेरे कन्धे पर अपनी गर्दन रखकर और अपनी आँखों को बन्द करके बैठी हुई थी. और वह हम दोनों की उस जबरदस्त चुदाई की वजह से थोड़ी थकी हुई दिख रही थी. लेकिन वह उसके चेहरे से बहुत खुश भी लग रही थी. दोस्तों आज भी जब मैं उसको जंगल शब्द कहता हूँ तो वह एकदम से शरमा जाती है. दोस्तों हमारे बीच हुई इस घटना के बारे में केवल दो ही व्यक्ति जानते हैं, यानी कि, केवल मैं और वह ही जानते है. और हमने हमारे बीच हुई इस घटना को आज तक किसी और को भी नहीं बताया है।

लेकिन दोस्तों, उस दिन के बाद हमको कभी जंगल में नहीं जाना पड़ा. उस दिन के बाद तो शायद ही कोई हफ़्ता ऐसा रहा होगा जिसमें हमने संभोग नहीं किया होगा, सिवाय तब जब शिल्पी का मासिक चल रहा होता है।

धन्यवाद कामलीला के प्यारे पाठकों !!