पति के सामने गैर मर्द से चुदाई करवाई

हाय फ्रेंड्स, Antarvasna मेरा नाम शोभा है और मैं एक शादीशुदा औरत हूँ, मेरी उम्र 32 साल की है. और मैं कानपुर की रहने वाली हूँ. दोस्तों मुझको सेक्स करना बहुत ही अच्छा लगता है, लेकिन मेरे पति मेरी सेक्स की इच्छा को पूरी नहीं कर पाते है. इसलिये मैं कामलीला डॉट कॉम पर सेक्सी कहानियाँ पढ़कर या मोबाइल पर सेक्सी वीडियो देखकर अपनी चूत में ऊँगली करके ही अपनी चूत को शान्त करती हूँ।

दोस्तों पिछले कुछ महीनों में मेरे साथ एक घटना हुई थी, जिसमें मैंने एक गैर मर्द के साथ मेरी सेक्स की इच्छा को तो पूरा किया था लेकिन उसके बारे में मेरे पति को भी पता चल गया था. हाँ तो दोस्तों अब मैं मेरे साथ घटी उस घटना को आप सभी को विस्तार से बताने जा रही हूँ, जो कि, कुछ इस तरह से है। दोस्तों आप ये कहानी कामलीला डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।

दोस्तों एक दिन मेरी नौकरानी रोती हुई मेरे पास आई, और फिर मैंने पूछा तो वह कहने लगी, कि, क्या बताऊँ बीबी जी, मेरा पति बहुत ज़ालिम है, मैं दिनभर इतना काम करके थक जाती हूँ, लेकिन मेरा पति रात को फिर भी मेरी चूत ज़रूर लेता है, उसको कितना भी मना करूँ, वह मानता ही नहीं है. बीबी जी वह इतना हट्टा-कट्टा है कि, मेरा बदन तो पूरा ही टूट जाता है, और मेरी इतनी हालत खराब हो जाती है कि, अगले दिन काम करने का मन ही नहीं करता है. दोस्तों उसकी बातों को सुनकर मेरा भी मन मचल उठा, और मैं मन ही मन सोचने लगी कि, एक तो मेरे पति को शुगर है, और ऊपर से वह मेरी काम-अग्नि को शान्त भी नहीं कर पाते है. और जब से मैंने इसके पति के बारे में सुना है तो मेरे तन-बदन में एक हलचल सी मच गई है, एक तो वह दिखने में भी हट्टा-कट्टा है और ऊपर से चोद-चोदकर सामने वाले की हालत भी खराब करने वाला है. दोस्तों मैं तो यही चाहती थी कि, कोई मेरी चूत को इस तरह ले कि, चोद-चोदकर मेरी हालत ही खराब कर दे. और फिर मेरे दिमाग में एक विचार आया, और मैंने मेरी नौकरानी से कहा कि, कल तुम अपने पति को मेरे पास भेज देना, मैं उसको समझाऊँगी, लेकिन उसको तुम सुबह 10.30 बजे के बाद ही भेजना और तुम भी कल काम पर मत आना, नहीं तो उसको लगेगा कि, तुमने मुझसे उसकी शिकायत करी है। दोस्तों 10 बजे के बाद मैं घर पर अकेली ही रहती हूँ, और मेरी शादी को लगभग 7-8 साल हो गये थे, और मेरा एक 5 साल का बेटा भी है, आपको मैं अब मेरे फिगर के बारे में भी बता देती हूँ कि, मेरी ब्रा का साइज़ 36” का है और मेरी पैन्टी का साइज़ 34” का है. और फिर मेरी नौकरानी ने मुझसे कहा कि, ठीक है बीबी जी. कल मैं उसको आपके पास भेज दूँगी, आप बहुत अच्छी हो. और फिर इतना कहकर और अपना सारा काम खत्म करके वह चली गई थी।

दोस्तों उस रात मुझे सारी रात नींद नहीं आई थी, और मैं उसके पति के ही सपने देखती रही थी. और फिर सुबह मेरा बेटा 7 बजे अपने स्कूल चला गया था, और 10 बजे के करीब मेरे पति भी ऑफिस चले गये थे, और फिर घर में मैं अकेली ही थी और 10.30 बजने का इंतज़ार कर रही थी. दोस्तों मैंने उस समय एक पारदर्शी नाइटी पहन रखी थी जिसके अन्दर से मेरी गुलाबी रंग की ब्रा साफ दिख रही थी. और फिर ठीक 10.45 बजे दरवाजे की घन्टी बजी, और फिर मैंने अन्दर से ही कहा कि, आ जाओ, दरवाजा खुला हुआ ही है. और फिर जैसे ही वह अन्दर आया तो मेरा दिल बड़ी ही ज़ोर से धड़क उठा था, क्योंकि वाकई में वह बहुत ही हट्टा-कट्टा था, और उसका सीना भी बहुत चौड़ा था. और फिर मैंने उससे कहा कि, दरवाजे को अन्दर से बन्द कर दो. और फिर उसने वैसा ही किया, और फिर वह अन्दर आ गया था. मैं अपने कमरे के बिस्तर पर लेटी हुई थी, और मैंने उससे कहा कि, कमरे में आ जाओ. मैंने उस समय अपनी नाइटी को अपनी टाँगों पर थोड़ा ऊपर तक उठाया हुआ था ताकि मेरी चिकनी टाँगे उसे दिख सके. और फिर उसने अन्दर आकर मुझसे पूछा कि, बीबी जी आपने मुझको बुलाया था?

मैं :- हाँ, तुम अपनी पत्नी को परेशान क्यों करते हो? वो बेचारी तो कितना काम करती है, उसको तुम रात में तो चैन से सोने दिया करो।

वह :- बीबी जी, तो फिर मैं कहा जाऊँ, मेरा भी तो मन करता है।

मैं :- तुम अपनी नज़र दौड़ाओ. तुमको कोई यहीं आस-पास मिल जाएगी, बिल्कुल तुम्हारे सामने।

और फिर तो मेरा इशारा वो भी समझ गया था, और फिर मेरी नंगी टाँगों को घूर-घूरकर देखने लगा और फिर वह मुझसे बोला कि, मेरे आस-पास और मेरे बिल्कुल सामने तो आप ही हो मेमसाब।

मैं :- तो फिर आओ ना मेरे राजा, जब तुम समझ ही गये हो, तो फिर देर किस बात की कर रहे हो।

और बस फिर तो क्या था, वो मेरे ऊपर कूद पड़ा था।

वह :- आह… मेमसाब मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि, इतना चिकना और मक्खन माल मुझको चोदने को मिलेगा।

और फिर उसने मेरी नाइटी को ऊपर सरका दिया था, और मैं अब उसके सामने सिर्फ़ अपनी ब्रा और पैन्टी में ही थी. और वह अपने हाथ को मेरे सारे बदन पर फेरता हुआ मेरी ब्रा तक ले आया था. पहले उसने मेरी ब्रा के ऊपर से ही मेरे बब्स को सहलाया और फिर उसने झटके से मेरी ब्रा को खोल दिया था, जिससे अब मेरे बब्स उसके सामने एकदम नंगे थे, जिनसे फिर वह खेलने लग गया था. और फिर उसने बारी-बारी से उनको चूस-चूसकर एकदम लाल कर दिया था. और इस वजह से मेरे उभारों के दाने अब पूरी तरह से तन चुके थे और मेरी चूत भी गीली हो गई थी. 15 मिनट तक वह मेरे बब्स के साथ खेलते हुए बीच-बीच में उनको काट भी रहा था, और मैं दर्द की वजह से उईईई… आहहह… कर रही थी. और अब मैं पूरी तरह से गरम भी हो गई थी और मैं अब झड़ने वाली थी. तभी उसने मेरे बब्स को छोड़ दिया था और फिर वह खुद भी नंगा होने लग गया था. और फिर उसका हथियार देखकर तो मैं एकदम से सहम गई थी. सच में वह बहुत मोटा और लम्बा था।

वह :- मेमसाब, इसको एकबार अपने मुहँ में लोगी क्या?

मैं :- नहीं, मेरे राजा आज नहीं फिर किसी और दिन. आज तो इसको उसमें ही डाल दो जो बहुत दिनों से इसके लिए तड़प रही है।

वह :- ठीक है मेमसाब।

और फिर जैसे ही उसने अपने मोटे लंड को मेरी चूत में डाला तो, मैं एक चीख के साथ ही शुरू में ही झड़ गई थी और आहहह… इसस्स… करके ज़ोर से उससे लिपट गई थी और फिर मैं उसको बेतहाशा चूमने लग गई थी. और उसके तगड़े-तगड़े झटके अभी भी मेरी जान लिये जा रहे थे, और उसका लंड ज़ोर-जोर से तेजी के साथ मेरी चूत के अन्दर-बाहर हो रहा था. और फिर कुछ ही देर के बाद मैं फिर से गरम होने लग गई थी. और फिर वह नीचे लेट गया और फिर उसने मुझको अपने ऊपर आने को कहा. और वैसे भी उसके हट्टे-कट्टे बदन ने मेरे बदन को तो तोड़ ही दिया था, लेकिन मुझको मज़ा भी बहुत आ रहा था. दोस्तों सच में उसने मेरी हालत बहुत खराब कर दी थी और वह नीचे से मेरी चूत को जमकर ले रहा था, और मैं दर्द के मारे आहहह… उहहह… आहहह… मेरे राजा बस करो, बोलती जा रही थी। और मैं दुबारा से झड़ गई थी पर वो मर्द तो थमने का नाम ही नहीं ले रहा था. और फिर उसने मुझको घोड़ी बनाकर मेरी जमकर चुदाई करी थी, और मैं अब तीसरी बार झड़ने वाली थी, तो मैंने उसको कहा कि, मेरे राजा तुम अपनी बीवी की जगह मेरी चुदाई कर लिया करो और रोज़ ही इस समय यहाँ पर आ जाया करो. और फिर उसने मुझे फिर से नीचे लिटा दिया था और फिर वह मुझसे बोला कि, बीबी जी, आप रात को मुझे अपनी चूत थोड़े ना दे सकती हो? और उसने यह कहकर फिर से अपना लंड मेरी चूत में घुसा दिया था. और वह फिर से ज़ोर-ज़ोर से मेरी चुदाई करने लगा था. और यह मेरा तीसरी बार था और मैं एकदम पागल सी हो चुकी थी. और फिर मैं उससे ज़ोर से लिपट गई थी. और मैं उससे कहने लगी कि, मेरे राजा, मुझको अपने साथ कहीं भगाकर ले चलो, और फिर दिन रात तुम मुझको चोदते रहना. और फिर इसी के साथ उसने भी सारा गरम-गरम माल मेरी चूत में खाली कर दिया था. और मेरी चूत ने उसके गरम-गरम माल का एहसास किया था. और फिर वह वहाँ से चला गया था।

और फिर कुछ दिनों तक वह ऐसे ही रोज़ 10.45 बजे आकर मुझको जमकर चोदता रहा. और इस दौरान उसने अपना लंड भी मुझको चुसवाया था. और फिर मैंने अपने पति से उसकी सिफारिश करके उसको रात को अपने यहाँ चौकीदार पर रखवा लिया था. और अब तो जब भी मेरे पति सो जाते थे, तो मैं उसके कमरे में चली जाती थी और उससे जी भरके अपनी चुदाई करवाती थी. लेकिन एक रात को दोस्तों मेरे पति जाग गये थे और वह मुझे ढूँढते हुए चौकीदार के कमरे में आ गये थे. और वहाँ पर चौकीदार ने मेरी टांगे फैलाई हुई थी और वह मुझे बेतहाशा चोद रहा था. और फिर जब मैंने अपने पति को देखा तो मैंने एकदम झटके से चौकीदार को अपने ऊपर से हटा दिया था और फिर मैं उनके सामने खुद को एक चादर में लपेटकर एक मुज़रिम की तरह खड़ी हो गई थी. और फिर इससे पहले कि मैं कुछ बोल पाती मेरे पति ने मुझसे कहा कि शोभा, कोई बात नहीं, तुम अपने को दोषी मत समझो. मैं तुम्हारी मज़बूरी को समझ सकता हूँ. और फिर वह यह भी बोले कि, इसको अपने घर में ही ले चलो, यहाँ पर ऐसे करना तुमको अच्छा लगता है क्या?

मैं :- मुझको माफ़ कर दो।

पति :- कोई बात नहीं।

और फिर वह उस चौकीदार से बोले कि, अन्दर आ जाओ, और जो कुछ भी करना हो वह तुम मेरे सामने ही करना. और फिर वह मुझको कपड़े पहनवाकर वहाँ से ले आए, और पीछे-पीछे वह चौकीदार भी आ गया था. और फिर कमरे में आकर वह हम दोनों से बोले कि, चलो अब तुम दोनों अपने-अपने कपड़े फिर से उतार लो।

मैं :- नही मनोज, मुझे माफ़ कर दो. आगे से ऐसा दुबारा नहीं होगा।

दोस्तों अपने पति के सामने कैसे मैं किसी और से अपनी चुदाई करवा सकती थी. और फिर मेरे पति उस चौकीदार से बोले कि, जाओ तुम इसके कपड़े उतार दो. उसको तो कहाँ किसकी शरम थी, और फिर वह झट से मेरे कपड़े उतारने लगा. मैंने उसको बहुत मना किया लेकिन फिर भी उसने मुझे उनके सामने पूरी ही नंगी कर दिया था. और फिर मेरे पति उस चौकीदार से बोले कि, चलो अब शुरू हो जाओ. और फिर उसने बिना झिझके ही मेरे बब्स दबाने शुरू कर दिए थे. और फिर उसने मुझको बेड पर लेटा दिया था. और फिर वह एक-एक करके मेरे बब्स को अपने मुहँ में लेकर चूसने लग गया था. और उधर मेरे पति यह सब नज़ारा देख रहे थे. पहले तो मैं बहुत शरम कर रही थी, और फिर जब मेरे निप्पल उत्तेजना में आकर एकदम तन गये थे तो, मैंने अपने पति से कहा कि, आप बच्चे के पास जाकर सो जाइए, नहीं तो वह जाग गया तो?

पति :- कोई बात नहीं, जाग जाएगा तब चला जाऊँगा।

दोस्तों मैं उनको वहाँ से हटाना चाहती थी ताकि मैं खुलकर अपनी चुदाई करवा सकूँ, लेकिन फिर जब वह वहाँ से नहीं जा रहे थे तो मैंने उनसे कहा कि, मुझे आपकी शरम आ रही है, आप जाकर सो जाइए ना।

पति :- तुम यह समझो कि, मैं यहाँ पर नहीं हूँ।

मैं :- आपको देखने से क्या मिलेगा? सुबह आपको ड्यूटी पर भी तो जाना है ना।

पति :- आज मैं भी तुम्हारी चुदाई करूँगा, लेकिन उससे पहले तुम इससे अपनी चुदाई करवा लो, तब तक तुमको देखकर मुझको भी जोश आ जाएगा। और फिर मैंने उस चौकीदार की तरफ देखा, तो फिर वह मेरे पति को धीरे से समझाने लगा और कहने लगा कि, बाबूजी आपके सामने इसको मज़ा नहीं आएगा, इसलिए आप बाहर से ही चुप-चाप छुपकर देख लीजिएगा। और फिर मेरे पति भी उसकी बात को मान गये थे. और फिर वह बाहर चले गये थे. तो फिर मैंने उस चौकीदार से पूछा की तुमने उनको ऐसा क्या कहा?

वह :- बस उनको जो समझाना था वह समझा दियाक्ष

और फिर उसने मुझे बेड पर लिटाकर मेरे एक बब्स को अपने मुहँ में भर लिया और दूसरे बब्स को अपने एक हाथ में पकड़ लिया था. मुझे नहीं पता था कि, बाहर से मेरे पति यह सब कुछ देख रहे है।

मैं :- यार आज तो हम पकड़े गये थे. पर वह कितने अच्छे है, और उन्होनें हमको कुछ भी नहीं कहा।

वह चौकीदार अब भी मेरे बब्स से मेरा दूध पिए जा रहा था, और फिर धीरे से वह उठा और उसने अपना लंड मेरे मुहँ की और बढ़ा दिया. तो फिर मैंने भी बिना किसी आना-कानी के उसका लंड अपने मुहँ में ले लिया था. और फिर मैंने उसको चूस-चूसकर उसको चुदाई के लिए तैयार कर लिया था. और फिर वह एकदम तन चुका था, जिसकी मैं दीवानी हो गयी थी. और फिर उसने भी मेरी चूत को चाट-चाटकर चुदाई के लिए एकदम तैयार कर लिया था. और फिर मैं अपने बैचारे पति के बारे में सोचने लग गई थी. और तभी उसने मेरे चूत में अपना लंड घुसा दिया था. और फिर एक घंटे तक लगातार वह मर्द मेरी ताबड़तोड़ चुदाई करता रहा, और इस बीच मैं भी 3 बार झड़ चुकी थी, लेकिन वह अब रुकने का नाम ही नहीं ले रहा था. मेरी तो हड्डी-पसली भी उसने एक कर दी थी. मैं तो उससे बस यही कहे जा रही थी कि, बस आहहह… बस करो, अब तो छोड़ दो. उफ़फ्फ़…

लेकिन वह कहाँ मानने वाला था, वह तो ज़ोर-ज़ोर से मेरी चुदाई किये जा रहा था. और फिर जब मैं एकबार और झड़ी तब जाकर उसने भी अपना माल मेरी चूत में ही निकाल दिया था. मैं तो उस जबरदस्त चुदाई से थककर टूट चुकी थी. और उसी समय मेरे पति भी कमरे के अन्दर आ गये थे, और फिर वह मुझसे बोले कि, वाह, आज तो मेरी जान को बहुत मज़ा आया है लगता है।

मैं :- आप कहाँ थे?

पति :- मैं तो यहीं बाहर से सब कुछ देख रहा था. मेरी जान अब मुझको भी जोश आ गया है, और अब मैं भी तुम्हारी चुदाई करूँगा।

मैं :- नहीं मेरी जान, आज नहीं, आज तो मैं बहुत थक चुकी हूँ।

और फिर वह बैचारे मुझसे कुछ भी नहीं बोले, लेकिन मैं क्या कर सकती थी. और फिर मैं बस उनकी बाहों में जाकर उनसे लिपटकर सो गई थी।

धन्यवाद कामलीला के प्यारे पाठकों !!