मैंने और मेरी सहेली ने पहली बार

हाय फ्रेंड्स, आप सभी को मेरी Antarvasna चूत का रसीला और मेरे बब्स का उछलता हुआ सलाम. दोस्तों मैं आप सभी के सामने आज अपने 34-30-36 के फिगर का एक नायाब धमाका एक सेक्सी कहानी के माध्यम से करने जा रही हूँ, जो आपकी पैन्टी और अंडरवियर को सचमुच गीला कर देगी. हाँ तो दोस्तों यह बात पिछली गर्मियों के मौसम की है जब मैं अपने आप को खीरे मूली से ही ठंडा करती थी. तब मेरा एक दोस्त भी था नरेश जो कि मेरे लिए अपने मन में सेक्स की भावना रखता था. मुझको यह बात पता थी क्योंकि वह हमेशा मुझे भूखी और गन्दी नज़रों से देखता रहता था।

वह दिखने में बहुत स्मार्ट था और हेंडसम भी था. और मुझको भी पता नहीं क्यों उसका मुझको ऐसी नज़रों से देखना बहुत अच्छा लगता था, मैं उसके सामने जितना दिखावा कर सकती थी उतना मैं करती थी पर वह मुझको छूता नहीं था और मेरी कोशिश बेकार हो जाती थी. और फिर मैंने एक प्लान बनाने की सोचा और मुझे पता था कि अगले हफ्ते मेरे घर वाले सब बाहर जा रहे है और मेरी परीक्षा की वजह से मुझको कोई नहीं ले जाएगा। तो मैंने नरेश को स्कूल में ही बोल दिया था कि अगले हफ्ते 2 दिन फ्री रहना. तुम और मैं मेरे घर पर ही पढ़ाई करेंगे. पर मुझको उसका जवाब सुनकर लगा कि वह नहीं आएगा. तो फिर मैंने अपनी सहेली शालू को ही बोल दिया तू पढ़ाई के बहाने मेरे घर आ जाना और हम दोनों खूब मज़े करेंगे और सेक्सी फिल्म भी देखेंगे। और फिर आख़िर वो दिन आ ही गया और घर से मम्मी पापा दीदी सब दो दिन के लिए नीमच चले गये, अब मैं घर पर अकेली ही थी. तो मैंने नरेश को फोन किया तो वह बोला कि ठीक है मैं अभी आ रहा हूँ. तो फिर मैं भी बहुत खुश हो गयी थी. और मैं पागल भी हो रही थी और फिर मैं जल्दी से नहाकर नंगी ही बैठ गई थी और मुझको चेन नहीं पड़ा तो मैं अपने पूरे घर में नंगी ही घूमने लगी. और फिर मैंने सोचा कि एक बार कुछ पहन लेती हूँ. और फिर मैंने अपने कमरे में जाकर पैन्टी और इनर पहन लिया, और उसके नीचे पापा का अंडरवियर पहन लिया था और ऊपर से एक टाइट टी-शर्ट पहन ली थी. और फिर कुछ देर के बाद घंटी बजी. तो मैं खुश हो गयी और फिर मैंने गेट खोला तो देखा कि बाहर शालू थी, और मैंने देखा कि उसके हाथ में एक नकली लंड और सेक्सी फिल्म की एक सीडी भी थी, और फिर वह मेरी तरफ देखकर मेरे बब्स पर हाथ फेरकर बोली कि, आज तो क्या बात है?

तो फिर मैंने उससे कहा कि, नरेश अभी आ रहा है. तो फिर वह मुझसे बोली कि, तुझको अकेले-अकेले मज़ा नहीं लेने दूँगी. मैं भी तेरे साथ में उससे अपनी चुदाई करवाऊँगी. तो फिर मैं उसको मना नहीं कर पाई. दोस्तों उसका 36-30-36 का फिगर तो मुझसे भी ज़्यादा अच्छा था, तो फिर मैंने उससे कहा कि ठीक है. उसने जीन्स ब्रा और एक आधी बाहँ का ढीला सा टॉप पहन रखा था. और फिर हम दोनों ने प्लेयर में सीडी लगाई और फिर सोफे पर एक दूसरे के ऊपर लेटकर हम बुरी तरह से एकदूसरे के साथ चूमा-चाटी करने लगे. और फिर इतने में घर के दरवाजे की घन्टी बजी तो मैं समझ गई थी कि, नरेश ही आया होगा. और फिर मैंने शालू को कहा कि प्लेयर को बन्द कर दे. पर सीडी मत निकालना और सीधे होकर सोफे पर बैठ जा, और फिर मैंने गेट खोला तो सामने नरेश खड़ा था, वो बहुत मस्त लग रहा था. लेकिन वह शालू को मेरे घर पर देखकर परेशान हो गया था. और फिर हम तीनों साथ में बैठकर पढ़ने लग गए थे. और फिर मैंने शालू को कहा कि, चलो थोड़ी देर टीवी देखते हैं।

और फिर हम तीनों सोफे पर बैठ गये और टीवी चालू कर दिया. और शालू ने प्लेयर भी चालू कर दिया था और फिर हम बैठे-बैठे बातें भी कर रहे थे. हम दोनों ने नरेश को बीच में ले लिया था इससे नरेश को भी मजा आने लगा था. इतने में शालू ने रिमोट से प्लेयर चालू कर दिया और सेक्सी फिल्म चालू हो गई थी. नरेश उसको देखकर एकदम से चौंक गया था. लेकिन वह कुछ नहीं बोला था, लेकिन वह थोड़ा शरमा गया था. उस फिल्म में 3 लड़के एक लड़की को बहुत बुरी तरह से चोद रहे थे. और फिर हम तीनों ही उस फिल्म को देखने लग गए थे. और अब यह सब देखकर नरेश भी पागल हो रहा था. और फिर मैं उठी और नरेश की गोद में बैठ गयी थी. मेरे पैर उसके पैर पर, मेरी गांड उसके लंड पर और मेरी कमर उसके सीने पर थी, उसका सर मेरे कंधो पर टीका था. वो कुछ नहीं बोला पर उसका लंड मेरी गांड के आगे चूत के एकदम पास खड़ा हो रहा था. अब उसने मुझे पीछे से चूमना चालू कर दिया और पागलो की तरह अपनी जीभ निकालकर मेरे गले, कंधे सब को चाटने लगा. शालू यह सब देखकर उठी और अपनी जीन्स और टॉप उतारकर अपने आप को मसलने लगी. फिर नरेश ने आगे से अपना हाथ मेरे टॉप के अन्दर डाला और मेरे बब्स को मसलने लगा. तब तक शालू ने अपनी ब्रा भी उतार दी मैंने देखा की वो साली तो बिना पेंटी के ही आई थी। अब शालू मेरे ऊपर चढ़ गयी और उसने अपने चुचे मेरे मुहँ में डाल दिया और अपने हाथ मेरी कमर से ले जाकर अंडरवियर के अन्दर मेरी चूत में ऊँगली करने लगी।

नरेश सोफे पर बैठा हुआ था और मैं भी उसपर लेटी हुई थी, शालू मेरे बब्स से चिपकी हुई बैठी थी, हम तीनों पागलो की तरह एक दूसरे को चाट और चूम रहे थे. फिर शालू ने अपने पैर नरेश की कमर पर कसकर लपेट लिए और मैं दोनों के बीच में फँस गयी, कमरे का पंखा चल रहा था. फिर भी हम तीनों पसीने से लतपथ हो चुके थे. पहले ही गर्मी का मौसम था और इस पर हम बहुत ज्यादा गर्म हो चुके थे. नरेश मुझे पीछे से चाट रहा था और मेरे बब्स को दबा रहा था. शालू मेरी चूत के बाल को सहला रही थी और मैं शालू के बब्स को चूस रही थी. तभी मैंने नरेश की पेंट पर अपना हाथ रखा और उसके लंड को पकड़कर के सहलाने लगी तो उसे भी मज़ा आने लगा. मैं और शालू जोर-जोर से आहें भर रहे थे, अब नरेश और भी जोश में आ गया और हम दोनों को उठाकर सोफे पर पटक दिया. फिर हम दोनों ने उसकी टी-शर्ट को उतारा और उसकी पेंट को खोलकर उसके अंडरवियर से ही उसके लंड को निकाल लिया. जब मैंने उसका अंडरवियर उतारा तो मैं दंग रह गयी, उसका लंड खीरे जैसा लम्बा और मोटा था, फिर हम दोनों खुशी से उसकी गोटियो को सहलाने लगे और चूसने लगे. फिर उसने अपना लंड शालू के मुहँ के अन्दर डाल दिया. और मुझे उठाकर सोफे पर पटककर बेरहमी से मेरे कपड़े खींचते हुए उतारने लगा. उसने मेरे अंडरवियर को खीचकर उतार दिया और मेरी पेंटी को अपने मुहँ से पकड़कर के उतारने लगा, मेरे टॉप को पूरी तरह से खीचकर के फाड़ दिया. उसका लंड शालू के मुहँ को भी बहुत ज़ोर-ज़ोर से चोद रहा था. और फिर कुछ ही पलों में उसके सामने मैं पूरी नंगी हो गयी थी. वो अब शालू के मुहँ में झड़ने वाला था, उसने शालू के सर को ज़ोर से अपने लंड पर दबा लिया और एक आअह्ह.. करते हुए झड़ गया. शालू के मुहँ में उसका पूरा माल आ गया और वो साली उस माल को निगल भी गयी।

फिर नरेश ने मुझे उठाया और मुझे लिटाकर अपना लंड मेरी चूत में डालने लगा. उसके मोटे लंड से मुझे बहुत दर्द हो रहा था. फिर उसने मेरी चूत में एक तेज धक्का मार दिया जिससे मैं चिल्ला उठी आहह.. ओउ… इयाय.. मेरी चूत से खून निकलने लगा जबकी उसका लंड अभी 2 इंच ही अन्दर घुसा था. उसने फिर से एक धक्का मारा और मैं ओउ… ऐइ… आऊओ… माँ… करके चिल्लाने लगी. अगले ही पल उसका पूरा लंड मेरी चूत में था. शायद उसको भी दर्द हुआ और वह मुझे लेकर मेरे ऊपर सोफे पर लेट गया, उसका लंड मेरी चूत के अन्दर ही था. शालू यह सब देखकर अपना नकली लंड अन्दर डालकर अह्ह्ह… ऊउईई… करके चिल्ला रही थी और नरेश के बाजू में लेटकर अपने बब्स को उसके कमर पर रगड़ने लगी. नरेश उठा और शालू को आगे खड़ाकर के उसकी चूत को चाटने लगा. जबकी शालू अपने मुहँ में नकली लंड को अन्दर बाहर कर रही थी, नरेश का लंड मेरी चूत में था और उसने ज़ोर से लंड को मेरी चूत में अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया था. मैं भी बहुत मज़े से चुदवा रही थी, इसी बीच दोस्तों मैं तो 2 बार अपना पानी निकाल चुकी थी, और नरेश मुझे धना-धन चोद रहा था, 120 की स्पीड से मेरी चूत में लंड अन्दर बाहर हो रहा था और मुझे भी बहुत मज़ा आ रहा था. काफ़ी देर तक चोदने के बाद वो मेरी चूत के अन्दर ही झड़ गया. फिर कुछ देर तक आराम करने के बाद नरेश उठा और शालू को चोदने लगा, उसने शालू को भी बहुत देर तक चोदा, जब शालू चुद रही थी तब मैं शालू के बब्स को चाट रही थी. फिर थोड़ी ही देर के बाद शालू भी झड़ चुकी थी और नरेश ने भी शालू की चूत के अन्दर ही अपना सारा माल झाड़ दिया. अब हम तीनों एक साथ बाथरूम में जाकर नहाने लगे. इधर नरेश हम दोनों के बब्स को बारी-बारी से चाट रहा था, और चूस भी रहा था. और हम दोनों उसके लंड से खेल रही थी. ठंडा पानी हमारा मज़ा और भी बढ़ा रहा था. और फिर हमने 3 घंटे तक खूब जमकर चुदाई की और साथ में ब्लू फिल्म भी देखने लगे. फिर वो दोनों अगले दिन आने की कहकर चले गये।

फिर अगले दिन शालू और मैं एक दूसरे के साथ एक घंटे तक नंगे ही खूब मज़े किए और फिर नरेश और उसके साथ उसके तीन दोस्त भी आए थे. उन चारो ने मिलकर हम दोनों को खूब चोदा, कभी मुहँ में लंड डालकर, कभी चूत में डालकर के खूब चुदाई करी, हम सभी ने बहुत मज़े किये और मेरा नरेश से चुदवाने का सपना भी पूरा हो गया।

धन्यवाद कामलीला के प्यारे पाठकों !!