चूत रिश्ता नहीं लंड ‌‍ढूंढती है

हाय कामलीला के प्यारे पाठकों, Antarvasna मैं रश्मि 20 साल की हूँ. मैं एकदम भरपूर हुस्न की मालकिन हूँ. और मेरा शरीर दिखने में एकदम कमाल का लगता है। दोस्तों आज मैं आप सभी कामलीला डॉट कॉम के चाहने वालों को मेरा एक अनोखा सेक्स अनुभव बताने जा रही हूँ जो मेरे साथ बहुत ही विचित्र तरीके से घटी एक सच्ची सेक्स घटना है। जिसमें मैंने अपने भाई से सेक्स किया था और वह सब हमारे बीच आज भी चल रहा है जिसको मैं कामलीला डॉट कॉम के माध्यम से आप सभी को बताने जा रही हूँ।

दोस्तों हमारे मोहल्ले के लड़के मुझे देखते ही अपने लंड पर हाथ मारने लगते है. मेरा फिगर 32-28-34 है. मैंने इस घटना से पहले अपने बॉयफ्रेंड के साथ सेक्स के खूब मज़े लिए थे लेकिन वो अपनी पढ़ाई के लिए बाहर चला गया है और अब मैं यहाँ पर अकेली रह गयी हूँ. मेरा रंग हल्का सा गेहुँवा है. खेर यह तो हुआ मेरा परिचय. हमारे घर में हम 4 लोग है. पापा मम्मी, बड़ा भाई रवि और मैं, यह कहानी मेरे और भाई के बीच हुए सेक्स की है।

मैं कॉलेज में पढ़ती हूँ और मेरा बड़ा भाई 23 साल का है, और वह भी कॉलेज में पढता है. वह देखने में एकदम सुन्दर है और मस्त है. उसकी अच्छी खासी बॉडी है और लम्बाई भी 5.7 फुट की है. हम दोनों का एक ही कमरा है और हम आपस में बहुत लड़ाई-झगड़ा भी करते रहते है और एक दूसरे को चिढाते भी रहते है. मम्मी भी हमें खूब डाटती रहती है. एक दिन मैं कॉलेज से घर आने में लेट हो गई थी और जब घर पर आई तो भाई मुझसे पूछने लगा के इतनी देर तक कहाँ गई थी तो मैंने उनसे कहा कि, अपने दोस्तों के साथ थी. तो फिर वह मुझसे लड़ने लगा. तो फिर मैं भी चिल्ला पड़ी तो उसने मुझपर हमला कर दिया और मुझे पकड़कर के नीचे गिरा दिया. मैंने भी उल्टा जवाब दिया और उसे गिरा के उसके पेट के ऊपर बैठ गई. उस समय शायद उसका लंड खड़ा हो गया था और वह मेरी गांड की दरार में चुभने लगा था. और फिर मैं समझ तो गई थी लेकिन उसके ऊपर हटने का तो मेरा भी मन ही नहीं कर रहा था. और फिर यह बात मेरा भाई भी समझ गया था शायद. और फिर उसने मुझे धक्का दिया तो मैं नीचे गिर गई और फिर वह मेरे ऊपर आ गया था. मेरे पैर खुले होने से उसके लंड का अहसास मुझे सीधा मेरी चूत पर महसूस होने लगा था. और फिर मैं झट से उसको एक तरफ धकेलकर वहां से जाने लगी. और फिर जब मैंने पीछे मुड़कर देखा तो मुझको मेरे भाई की पेन्ट में बहुत मोटा सा हिस्सा उभरा हुआ दिखा था. और फिर मैं उसको देखकर सोच में पड़ गई थी कि, भाई का लंड कितना बड़ा होगा. और फिर उस दिन मैंने बाथरूम में जाकर के अपनी पैन्टी हटाई तो उसमें से ढेर सारा पानी निकला था. और फिर मैं सोच में पड़ गई थी कि, अपने सगे भाई को छूते ही मुझको आज क्या हो गया था. मुझको खुद पर शर्म भी आ रही थी और उस पल को याद करके मज़ा भी बहुत आ रहा था. उस दिन मेरी चूत में बहुत खुजली हुई थी लेकिन मैंने अपनी चूत को ऊँगली से ही शान्त कर लिया था. और फिर मैंने यह भी सोच लिया था कि, मैं अपने भाई को पटाकर के ही रहूंगी. अगर हो गया तो घर की बात घर में रहेगी और खुजली भी मिटेगी. अब मैं भाई के सामने छोटे-छोटे कपड़े पहनकर आने लगी और उसको अपने 32” साइज़ के बब्स भी दिखाने लग गई थी. और वह भी मुझे गोर से देखता था लेकिन ऐसे रहता था जैसे कुछ ना देखा हो उसने. मैं उसके सामने अपनी मोटी गांड को भी मटकाती रहती थी और उसके सामने जानबुझ के ऐसे चलती थी।

दोस्तों एक दिन हमारे मम्मी-पापा एक हफ्ते के लिये किसी काम से घर से बाहर चले गए थे. और हम दोनों की परीक्षा होने की वजह से हम घर पर ही रह गये थे. दोस्तों यह मेरे लिये एक सुनहरा मौका था. और फिर मैंने इसके लिए एक प्लान बनाया और उसी के मुताबिक रात को छत से आते वक्त मैं सीढ़ियो से फिसल गयी और ज़ोर से चिल्ला के रोने लगी. तो रवि भागकर मेरे पास आया और फिर वह मुझे उठाकर मुझसे पूछने लगा कि, कही चोट तो नहीं लगी ना? तो मैंने उसको बताया कि, मेरे घुटने और कमर में मोच आ गई है तो वह डॉकटर के पास जाने के लिए मुझसे कहने लगा. लेकिन मुझसे उठा नहीं गया तो मैंने उससे कहा कि, रहने दो ऐसे ही ठीक हो जाएगा. और फिर उसने मुझे दर्द ठीक होने की गोली दी और मुझे सुला दिया लेकिन रात को 10 बजे मेरी आंख खुली तो मैंने भाई को बुलाया और उससे मालिश करने के लिए कहा. उसने हाँ कर दिया और फिर वह किचन में मालिश का तेल लेने चला गया था. और मैंने उस दिन सूट और ढीली वाली सलवार पहन रखी थी. और फिर मैंने उससे कहा कि, मेरे घुटने और कमर की मालिश कर दे तो फिर वह आकर मेरे पास बैठ गया. और फिर मैंने अपनी सलवार को घुटने के ऊपर तक उठा लिया था. और फिर मेरा भाई मेरी मालिश करने लगा तो मुझे बहुत मज़ा आने लगा. और फिर मैंने उससे कहा कि, भाई थोड़ा और ऊपर करो, तो वह अपना हाथ मेरी जाँघ तक लाकर के मेरी मालिश करने लगा. और फिर मैंने जब अपनी तिरछी नज़रों से उसको देखा तो वह मेरी गांड को घूर रहा था और उसके लोवर में बहुत मोटा सा तम्बू भी बना हुआ था. और इधर मेरी तो चूत तो अब झरने लग गई थी. और फिर मैं ऊपर कमर करके लेट गई थी और फिर मैंने उससे मेरी कमर की मसाज करने के लिए कहा. तो वह बोल पड़ा कि, उसके कपड़े गंदे हो जायेंगे. तो फिर मैंने उससे कहा कि, भाई अपने लोवर को उतार दो और फिर मसाज करो. तो फिर उसने सुनते ही तुरन्त ही अपना लोवर उतार दिया था. और फिर वह मेरे पास आ गया था. और फिर मैंने भी अपना सूट और ब्रा थोड़ा ऊपर तक कर लिया था, और फिर मैंने उसको इशारा किया. और वह तो जैसे इस पल के लिए तड़प ही रहा था. अपने हाथ में तेल लेकर के वह मेरी कमर पर मसलने लगा. और फिर एकदम से मेरे मुहँ से आह… निकल गई तो उसने मुझसे पूछा कि, क्या हुआ? तो मैंने उससे कहा कि, अब थोड़ा आराम मिल रहा है भाई ऐसे ही करते रहो. और फिर वह अपना हाथ मेरी ब्रा तक लाने लगा और कहने लगा कि, रश्मि तेरी यह बीच में अटक रही है।

मैं :- क्या भाई?

रवि :- ये बनियान।

मैं :- अरे! इसको बनियान नहीं कहते पागल।

रवि :- तो क्या कहते है?

मैं :- भाई इसे ब्रा कहते है।

रवि :- तो ये अटक रही है मालिश करने में।

और फिर मैंने उसे हटा दिया और उसे अब फिर से मसाज करने का इशारा किया. तो फिर उसके लंड का उभार मेरी गांड को छूने लग गया था और ऊपर वह मेरे बब्स के ऊपर से ही अपनी ऊँगलिया लगाने लगा था।

मैं :- भाई थोड़ा बीच कमर पर करो आराम मिल रहा है।

रवि :- ऐसे नहीं हो रहा मुझसे, उसके लिए तेरी कमर के दोनों तरफ पैर रखने पड़ेंगे।

मैं :- कुछ सोचते हुए, तो रख लो ना।

और फिर उसने अपने दोनों पैर मेरी कमर के दोनों तरफ रख लिए और फिर वह मसाज करने लगा. आहहह… बहुत आराम मिल रहा है भाई ऐसे ही करो. और फिर वह फिर मेरी गांड के ऊपर बैठ गया और उसका लंड मेरी मोटी गांड में अटकने लगा. मैं तो जैसे मर रही थी. मेरा मन तो कर रहा था कि, वो अभी अपना लंड मेरी चूत में सरका दे और वह मुझको बहुत ही बुरी तरह से खूब तबियत से चोद डाले, लेकिन ऐसा हो नहीं सकता था. वह अपना हाथ ऊपर से लेकर नीचे मेरी गांड तक ले आता था और जब ऊपर जाता तो उसका लंड मेरी सलवार में से अन्दर घुसा जा रहा था. उसने अपने लंड को शायद मेरी गांड के छेद पर सेट कर दिया था और हल्का-हल्का दबाने भी लग गया था. और फिर मैंने अपनी गांड को थोड़ा और ऊपर उठा लिया तो भाई का लंड मेरी सलवार के ऊपर से मुझे मेरी चूत पर महसूस होने लगा और आहहह… की एक आवाज के साथ मैं झड़ गई थी. और फिर मेरी चूत फड़कने लग गई थी. और अब रवि के लंड को भी मेरी चूत के गीलेपन का अहसास होने लग गया होगा शायद. मेरी आखे थोड़ी देर के लिए बंद हो गई थी और मैं सो गई थी. और मुझको सोती हुई देखकर मेरा भाई भी वहाँ से चला गया था। और फिर अगले दिन सुबह मेरा भाई मेरे लिए चाय बनाकर लेकर आया. और फिर वह मुझको देखकर के मुस्कुराने लग गया था. और फिर वह मुझको चाय देकर कॉलेज चला गया था, और फिर वह शाम को वापस घर आया तो वह अपने साथ होटल से खाना लाया था. और फिर उसने मुझे उठाकर के खाना खिलाया और पूछा कि, अब दर्द कैसा है तो मैंने कहा कि, कल की तुम्हारी जबरदस्त मालिश से बहुत आराम मिला है।

रवि :- ठीक है मैं आज और भी अच्छी तरीके से तुम्हारी मालिश कर दूँगा और फिर तुम्हारा सारा दर्द खत्म हो जायगा।

मैं भी उसके इशारे को अब समझ चुकी थी और फिर मैंने भी उसको बोला कि, ठीक है भाई।

और फिर रात हुई और मैंने जानबूझकर के आज घुटनो तक की स्कर्ट पहनी और ऊपर से टॉप. अन्दर मैंने ब्रा और पैन्टी नहीं पहने थे. और फिर वह रात को 9:30 बजे मेरे पास आया तो मैंने दर्द होने का झूँठा नाटक किया. और फिर मैंने उससे मालिश करने के लिए बोला. तो वह तुरंत ही एक कटोरी में तेल ले आया. आज उसने भी नीचे एक शॉर्ट और ऊपर से एक बनियान ही पहन रखी थी. उसका लंड आज एक अलग ही आकार में दिख रहा था. शायद उसने भी आज अन्दर अंडरविहर नहीं पहना था. और फिर वह मेरे घुटनों की मालिश करने लगा. मैं पेट के बल लेट गई थी और वह मेरी स्कर्ट को अब धीरे-धीरे ऊपर करने लग गया था और मेरी मालिश करने लग गया था. और मैं अब फिर से तड़पने लग गई थी. और अब उसको मेरी मोटी गांड का उभार दिखना शुरू हो गया था. मैंने जब उसकी तरफ देखा तो वह मेरी गांड को ललचाई हुई नज़रो से देख रहा था. और फिर मैंने अपनी आँखें बन्द कर ली थी और फिर मैं हल्के-हल्के से कहराने लगी थी. अब उसकी ऊँगलियाँ मेरी गांड की लाइन को छूने लगी थी. और उसको यह भी पता चल गया था कि, आज मैंने पैन्टी नहीं पहनी हुई है. अब मैंने उसको अपनी कमर की मालिश करने को कहा तो उसने मेरा टॉप ऊपर कर दिया और वह भी मेरी गर्दन तक. और अब टॉप सिर्फ़ मेरे बब्स में ही अटका हुआ था. भाई मेरी पूरी कमर पर हाथ फेरने लग गया था. और नीचे से मेरी स्कर्ट को भी नीचे सरका के मेरी गांड को भी छूने लग गया था. और फिर अचानक से लाइट भी चली गई थी और उस पूरे कमरे में अंधेरा छा गया था।

रवि :- मोमबत्ती जला दूँ क्या?

मैं :- नहीं रहने दो भाई वैसे भी मालिश ही तो करनी है. ऐसे ही कर दो।

अब वो मेरी कमर के दोनों तरफ पैर रखकर के बैठ गया और पूरी कमर को अपने हाथो से मसाज करने लगा. वो आज मेरी गांड के थोड़ा नीचे बैठ गया था. और फिर वह धीरे-धीरे ऊपर होने लगा था. उसका लंड अब मेरी स्कर्ट के ऊपर से सीधा मेरी चूत को खटखटाने लगा था. मैंने अपनी गांड को थोड़ा ऊपर की तरफ उछाल दिया था और फिर मैं भी उस पल का पूरा मजा लेने लग गई थी. भाई के बार-बार ऊपर नीचे होने से मेरी स्कर्ट ऊपर को होने लगी थी. और मेरी पूरी गांड अब नंगी हो गयी थी। अब तो मुझसे भी सहन नहीं हो रहा था और शायद भाई से भी. उसके मुहँ से भी एक हल्की सी आहह निकली. और फिर मैंने महसूस किया कि, अब वह सिर्फ़ एक ही हाथ से मेरी गांड और मेरे बब्स को छू रहा है. और मैं सोच में पड़ गई थी कि, इसका दूसरा हाथ कहाँ है ? दोस्तों ये कहानी आप कामलीला डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।

और फिर अचानक से मुझे कुछ गरम सा और मोटा सा अपनी गांड पर महसूस हुआ. दोस्तों उस समय मेरे तो तोते ही उड़ गये थे. और फिर मुझको समझने में देर नहीं लगी कि, रवि का दूसरा हाथ कहा था और मेरी गांड पर क्या लग रहा था. उसने अपना लंड शायद बाहर निकाल लिया था. जिससे अब मेरी तो कंपकंपी ही छूट गई थी. और बहुत ज्यादा मज़ा भी आ रहा था. अंधेरे में कुछ दिख तो नहीं रहा था लेकिन छूने से यह तो पता चल रहा था की उसका लंड बहुत ही ताकतवर और लम्बा मोटा है. खैर मैं फिर भी वैसे ही लेटी रही और उसका लंड अब मेरी गांड के छेद को छू रहा था. और मुझको तो ऐसा लग रहा था कि, जैसे अभी वह अन्दर घुसकर मेरी गांड को फाड़ ही देगा. और फिर मैंने अपनी गांड को थोड़ा ऊपर किया तो उसका लंड मेरी चूत के छेद पर लगने लगा और हम दोनों के शरीर आपस में मिल गये थे. आहह… क्या एहसास था वह. और फिर जैसे ही उसका लंड मेरी चूत पर लगा तो मुझको ऐसा लगा कि, जैसे उसने उसको वहीं पर सेट कर दिया हो और अब सिर्फ़ उसका ऊपर का हिस्सा ही हिल रहा था. और फिर मैंने कहा कि, भाई थोड़ा ऊपर कंधे तक मालिश करो. अब जब वह अपने हाथो को ऊपर तक लाया तो उसके लंड का प्रेशर मेरी चूत पर बढ़ने लगा और हल्का सा धक्का भी लगा. और फिर जैसे ही उसने दुबारा से ऊपर को हाथ किए तो उसका लंड फिर आगे को हुआ और तभी मैंने भी अपनी गांड को नीचे की तरफ धक्का दिया. आह्ह्ह…. उसका मोटा सुपाड़ा आधा मेरी चूत के अन्दर जा चुका था. और अब हम दोनों ही ऐसे बर्ताव कर रहे थे कि, जैसे किसी को कुछ पता ही नहीं हो. और फिर तीसरी बार फिर से ऐसा हुआ और मुझसे रुका नहीं गया और इस बार थोड़ा ज़ोर से गांड को उसके लंड पर पटक दिया. एकदम से उसका लंड चिकनाई की वजह से 2” अन्दर तक चला गया था. अब भी हम दोनों हल्की-हल्की सिसकियाँ ले रहे थे. और फिर ऐसे ही धीरे-धीरे उसका 7 इंच का पूरा लंड मेरी चूत में समा गया था. और मैंने भी अपनी गांड को हवा में उठा लिया था और वह अब धीरे-धीरे अपने लंड को मेरी चूत में अन्दर बाहर करने लग गया था। आहहह… ओहहह… मर गई, मेरे मुहँ से अब ऐसी आवाजें आने लगी तो भाई समझ गया के मुझे भी अब मज़ा आने लगा है। दोस्तों ये कहानी आप कामलीला डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।

अब उसने अपने धक्कों की स्पीड को और तेज़ कर दिया था और मेरी गांड पर ठप-ठप की आवाज़ आने लगी थी. और वह आवाज अंधेरे में कमरे में गूंजने लगी थी. मैं भी अब तेज़-तेज़ आहें भरने लगी थी आहहह… आहहह… आहहह… और फिर मैंने अपने हाथ पीछे ले जाकर के भाई के कूल्हे पर रख दिए और अपनी तरफ से दबाने लगी तो वह भी ताबड-तोड़ धक्के लगाने लगा और फिर ऐसी जबरदस्त चूत की चुदाई के बाद आहहह… ऊइईईइ… करके हम दोनों ने अपना-अपना पानी छोड़ दिया था. दोस्तों इतना मज़ा मुझे उस दिन से पहले कभी नहीं आया था. जितना मज़ा मुझे अपने भाई से चुदाई करवाकर आया था। और अब तो हम दोनों रोज़ ही सेक्स करते है। और अब तक हमने सेक्सी फिल्मों की सारी पोजीशन आजमाकर मेरी चूत और उसके लंड को एकदम लाल कर दिया था।

धन्यवाद कामलीला के प्यारे पाठकों !!