मेरा पहला प्यार बन गया अम्मी

हाय फ्रेंड्स, Antarvasna मेरा नाम शाइना है, मेरी उम्र 24 साल की है. और मैं फ़िरोजाबाद की रहने वाली हूँ. दोस्तों इस कहानी के शीर्षक को पढ़कर ही आप समझ गये होगें कि, आज मैं अपनी सच्ची सेक्स कहानी आप सभी लोगों को कामलीला डॉट कॉम के माध्यम से बताने जा रही हूँ।

दोस्तों मेरे घर में मेरे अलावा मेरी अम्मी रहती है, मेरे पापा नहीं है. और मैं अपनी अम्मी की इकलोती औलाद हूँ. इस घटना के समय मेरी उम्र 22 साल की थी और मेरी अम्मी रेहाना की उम्र 36 साल की थी. वह एक स्कूल में पढ़ाती है. पापा की मौत से पहले ही वह हमारे लिये सब कुछ कर गये थे और जो कुछ नहीं था वह अम्मी ने पापा के बीमे के पैसों से बसा लिया था. अम्मी की तनख्वाह और पापा के छोड़े हुए पैसों से हम एक बहुत ही अच्छी जिन्दगी जी रहे है। मेरी अम्मी काफ़ी नये ख्यालात की है और वह बहुत ही बन-ठन के घर से निकलती है. और एकबार मुझको किसी से पता चला कि, मेरी अम्मी का घर से बाहर कोई बॉयफ्रेंड भी है. मगर मैंने इस बात को ज्यादा तवज्जो नहीं दी थी, क्योंकि मेरा भी तो एक बॉयफ्रेंड है।

मेरी अम्मी 36 साल में भी एकदम जवान लगती थी. और मुझे भी लगता था कि, अम्मी का भी दिल करता होगा किसी का लंड लेने को. इसलिए ही उनका भी कोई बॉयफ्रेंड होगा, इसलिए मैंने उस बात को हवा नहीं दी थी. और फिर मेरा और अम्मी का ऐसे ही चलता रहा था. और फिर ऐसे ही एक दिन मेरे बॉयफ्रेंड रिजवान ने मुझसे कहा कि, मैं तुम्हारे घरवालों से मिलना चाहता हूँ. और मैं यह भी चाहता कि, जब हमारी पढ़ाई पूरी हो जाए तो हम दोनों शादी भी कर लें, और मेरे पापा का जमा जमाया बिज़नस है मैं तो वही संभाल लूँगा. अब बोलो कब मिलवा रही हो मुझको तुम अपने घरवालों से?

दोस्तों मेरे लिये तो वह दिन मेरी जिन्दगी का सब से खुशी का दिन था, क्योंकि मेरी शादी की बात जो शुरू हो गई थी. और फिर मैंने रिजवान के गले में अपनी बाहें डाल दी थी और उसके होठों को चूम लिया था. उसके बाद घर आकर मैंने इस विषय में मेरी अम्मी से बात करी और कहा तो, उन्होनें बड़े ही आराम से मेरी बात सुनी और फिर उन्होनें रिजवान को घर बुलाने के लिये कहा. और फिर एक दिन रिजवान हमारे घर आया, और मम्मी से मिला. बड़े ही प्यार से सब बातें हुई, बहुत देर तक वो हमारे बारे में और अपने बारे में बातें करता रहा. और जब वह हमारे घर से जाने लगा तो, वह मेरी अम्मी के पाँव छूकर गया तो, मैं मन ही मन बहुत खुश हुई थी. उसके बाद तो दोस्तों रिजवान अक्सर ही हमारे घर आने-जाने लगा था. हम दोनों भी अक्सर हमारे घर में ही मिलते थे. और हम दोनों मेरे कमरे में बैठकर बहुत बातें करते थे अपने भविष्य के बारे में. और फिर जब हम दोनों हमारे घर के बेडरूम में मिलने लगे तो हमारी मोहब्बत भी अपने रंग बदलने लगी थी. जो प्यार पहले गले मिलने तक का था वो अब ज़्यादा ही सेक्सी और मादक हो गया था।

और फिर कुछ ही दिनों में हमने एक-दूसरे को बिल्कुल नंगा भी देख लिया था. मगर मैंने रिजवान को फिर भी कभी सेक्स नहीं करने दिया था, हालाँकि वह बड़ी ज़िद्द कर रहा था चुदाई करने के लिये. लेकिन मैंने उसको बहुत समझाया कि, सुहागरात के दिन जो तुम चाहे जो कर लेना लेकिन अभी कुछ नहीं. हाँ मैंने उसके लंड को चूसा ज़रूर था, और उसने भी मेरे बब्स चूसे थे और मेरी चूत को भी सहलाया था. लेकिन वह सच्चा वाला सेक्स हमने अभी तक नहीं किया था। और फिर कुछ दिनों के बाद की बात है जब रिजवान हमारे घर एक शाम को आया था. हम दोनों बैठे थे और अम्मी हम सब के लिये चाय बनाकर ले आई थी. और फिर जब अम्मी चाय देने के लिए नीचे झुकी तो उसका दुपट्टा नीचे सरक गया था. और उनके 36” साइज के बड़े बब्स मेरे हीरो के सामने बेशर्म हो गये थे. और फिर मैंने देखा कि, रिजवान ने भी अपनी बड़ी ही प्यासी नज़रों से मेरी अम्मी के बब्स को देखा और आँखो ही आँखो में उनको सराहा भी। दोस्तों मेरे तो छोटे-छोटे 32” की साइज़ के बब्स है और मेरी अम्मी के तो मेरे से लगभग दुगने ही थे. और फिर अम्मी ने एकदम से चाय वाली ट्रे टेबल पर रख दी थी. और फिर उन्होनें अपने दुपट्टे को ठीक किया और फिर वह वहाँ से चली गई थी. और फिर मैं और रिजवान दोनों ही अचानक से हुए उस घटनाक्रम से एकदम हक्के-बक्के रह गये थे, और फिर हम दोनों चुपचाप चाय पीने लगे थे. और फिर थोड़ी देर के बाद उस माहौल की चुप्पी को तोड़ते हुए रिजवान बोला कि, कोई बात नहीं, यह सब तो हो जाता है, और यह सब अकस्मात तो हुआ है. तुम अपनी अम्मी को मेरी तरफ से सॉरी बोल देना प्लीज़।

और उसके बाद वो वहाँ से चला गया था. और उसके बाद मेरी और अम्मी की इस बारे में कोई बात नहीं हुई थी. और उस दिन के बाद रिजवान भी हमारे घर पर कम ही आने लगा था. और फिर कुछ दिन तो सब कुछ ठीक-ठीक ही चलता रहा. मगर बाद में मुझको ऐसा लगा कि, कुछ तो अजीब सा हो रहा था. लेकिन मुझको कुछ समझ में नहीं आ रहा था. मगर मुझको कुछ अजीब सा अहसास होने लगा था, मेरे मन में. लेकिन मैंने इस बात पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया था और ज़िंदगी बस ऐसे ही चलती रही थी। और फिर एक दिन पता नहीं क्यों कॉलेज में मेरा मन नहीं लग रहा था और उस दिन रिजवान भी अपने पापा के साथ कहीं बाहर गया हुआ था. तो फिर मैंने सोचा कि, घर पर ही चलती हूँ. और फिर लंच के बाद मैं कॉलेज से वापस अपने घर आ गई थी. और अम्मी भी अपने स्कूल में होती थी उस समय। तो फिर मैंने अपने पास की दूसरी चाबी से घर का दरवाजा खोला. हमारा एक छोटा सा फ्लैट था, जिसमें एक बड़ा सा हॉल और उसके सामने दो बेडरूम और एक साइड में किचन था. लेकिन जब मैं अपने घर में घुसी तो मुझको लगा कि, मेरी अम्मी के कमरे का टी.वी. चल रहा है. और फिर मैंने सोचा कि, अम्मी शायद जल्दीबाजी में टी.वी. चलता हुआ ही छोड़ गई थी. और फिर मैं टी.वी. को बन्द करने के लिये जैसे ही उनके कमरे की तरफ बढ़ी, और फिर जब मैंने उनके कमरे का दरवाजा खोलकर देखा तो मैं तो एकदम से चौंककर रह गई थी।

दोस्तों उस समय क्या देखा मैंने वह मैं आप लोग को भी कैसे बताऊँ। दोस्तों ये कहानी आप कामलीला डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।

उस समय उस पूरे कमरे में मेरी अम्मी और रिजवान के कपड़े बिखरे हुए पड़े थे वहाँ पर अम्मी की ब्रा थी और उसके साथ ही रिजवान की जीन्स, अम्मी की सलवार के साथ ही रिजवान की टी-शर्ट. और बेड के ऊपर मेरी अम्मी एकदम नंगी होकर लेटी हुई थी. और मेरा बॉयफ्रेंड रिजवान उनकी दोनों टाँगों को हवा में उठाकर अम्मी को चोद रहा था. दोस्तों उस समय मुझको कुछ भी समझ में नहीं आया कि, किससे कहूँ और क्या कहु, बस मेरे मुहँ से इतना ही निकला कि, रिजवान… अम्मी…

और फिर उन दोनों ने एकदम से चौंककर मेरी तरफ देखा तो उन दोनों के भी होश गुल हो गये थे. और फिर अम्मी ने अपनी टांग से रिजवान को पीछे किया. और उससे रिजवान का लंड मेरी अम्मी की चूत में से बाहर निकल गया था. और फिर अम्मी ने एकदम से उठकर अपने कुरते को उठाया और उससे खुद को ढक लिया था. और फिर रिजवान भी अपनी जीन्स को उठाने आया मगर मैंने आगे बढ़कर उसकी जीन्स पर अपना पाँव रख दिया था. और फिर मैंने उससे पूछा कि, कब से चल रहा है तुम दोनों के बीच यह सब? और फिर वह वैसे ही नंगा ही नीचे बैठ गया, और फिर वह मुझसे कहने लगा कि, मेरा तो ऐसा कोई इरादा नहीं था, इसके बारे में तुम अपनी अम्मी से ही पूछो। और फिर मैंने अपनी अम्मी की तरफ देखा, तब वह मेरी तरफ पीठ करके अपने कपड़े पहन रही थी. और फिर अम्मी के कन्धे को पकड़कर मैंने अपनी तरफ घुमाया. तो अम्मी ने झट से अपनी ब्रा उठाई और उसको अपने सीने से लगा दिया था. उस समय मुझको बहुत गुस्सा आ रहा था, और फिर मैंने अम्मी के हाथ से उनकी ब्रा को छीनकर फैंक दिया था. और फिर मैंने अम्मी से गुस्से में कहा कि, इसके साथ तो गुलछर्रे उड़ा रही थी और अपने बोबो को मुझसे छिपा रही हो।

लेकिन अम्मी मुझसे कुछ भी नहीं बोली और बस रोने लग गई थी. और फिर उनके साथ मैं भी रो पड़ी थी, और रोते-रोते यह भी कहने लगी थी कि, इस पूरी दुनिया में जिन दो इंसानों पर मुझको सब से ज़्यादा भरोसा था, और जिनको मैं सबसे ज़्यादा प्यार करती थी, उन्ही दो इंसानों ने मेरी पूरी दुनिया ही लूट ली आज, और मुझको एकदम अकेला कर दिया. और फिर मैं बहुत ज़ोर से रोने लग गई थी. और फिर मुझको रोते हुए देखकर अम्मी मेरे पास में आई और फिर वह मुझसे लिपट गई और फिर वह मुझसे बोली कि, बेटा मुझको माफ़ कर दे पता नहीं क्यों मैं बहक गई थी। और फिर रिजवान भी आकर मुझसे लिपट गया था, और फिर वह भी रोने लग गया था. और फिर हम तीनों ही साथ में मिलकर खूब रोए थे।

और फिर मैंने अम्मी से कहा कि, अम्मी क्या आपको पूरी दुनिया में मेरा ही बॉयफ्रेंड मिला था? तो फिर अम्मी मुझसे बोली कि, मुझको माफ़ कर दो बेटा, मगर यह सब कुछ इतना जल्दी में हो गया, और फिर सब कुछ अपने आप ही होता गया, और मैं कुछ समझ ही नहीं पाई थी. और फिर मैंने अम्मी को डांट दिया था और उनसे कहा कि, अरे रहने दो बाल-बच्चे वाली औरत होकर भी ऐसी बातें करती हो. जैसे कि, तुम कोई नासमझ लड़की हो और जिसको कुछ पता ही ना चला हो. और उस दिन तुमने जो इसके सामने अपना दुपट्टा गिराया था, वह सब कहीं तुम्हारा कोई सोचा समझा प्लान तो नहीं था। और फिर अम्मी और रिजवान ने मेरे साथ बात करते हुए अपने कपड़े पहन लिए थे. और फिर रिजवान तो बिना कुछ बोले ही वहाँ से खिसक भी लिया था. लेकिन अम्मी कहाँ जाती, और उसको कुछ भी नहीं सूझा तो वह बाथरूम में जाकर घुस गई थी. और फिर वह वहाँ पर जाकर रोने लगी थी. और फिर मैं भी बेड पर लेटकर खूब रोई थी।

और फिर मैंने सोचा कि, मुझे पता था कि, मेरी अम्मी का एक बॉयफ्रेंड है और अम्मी उसके साथ सेक्स भी करती ही होगी. और अगर उन्होनें मेरे बॉयफ्रेंड के साथ भी सेक्स कर लिया तो ऐसा क्या हो गया यह तो घर की ही बात है. और फिर थोड़ी देर के बाद अम्मी मेरे कमरे में आई और वह मुझसे माफी माँगने लगी तो मैंने अम्मी को साफ कह दिया कि, उस समय तो मुझको बहुत बुरा लगा था, लेकिन अब सब ठीक है. अब तो आप जब चाहो मेरे बॉयफ्रेंड रिजवान के साथ सेक्स कर सकती हो. वह अब केवल मेरा दोस्त रहेगा मैं अब उसके साथ शादी नहीं करूँगी। और फिर अम्मी ने मुझको समझाने की कोशिश तो बहुत करी लेकिन मैंने उनकी एक भी बात नहीं मानी। उसके बाद तो रिजवान भी बहुत दिन तक हमारे घर पर नहीं आया था और ना ही वह कहीं दूसरी जगह मुझसे मिला था।

और फिर करीब 1 महीने के बाद मैं और अम्मी साथ में बाज़ार जा रहे थे तो हमको सामने रिजवान मिल गया. मैंने उसके साथ बस ऐसे ही बात करी और उसको घर पर आने को भी कहा. उसके बाद भी कई बार मैंने उसको फोन करके भी घर पर आने को कहा. और फिर एक दिन वह घर पर आया तो उस समय अम्मी भी घर पर ही थी. और फिर अम्मी ने हमारे लिए चाय बनाई और फिर वह चाय रखकर जाने लगी तो, मैंने अम्मी को रोक लिया और उनसे मैंने कहा कि, अम्मी रूको मुझे आपसे कुछ बात करनी है. और फिर अम्मी हमारे पास बैठ गई थी. तो फिर मैंने उनसे कहा कि, देखो अम्मी जो हुआ सो हुआ और जो मैंने देखा उस पर मैंने बाद में बहुत सोचा भी, और अब आप दोनों से मेरी एक ही गुजारिश है. और फिर उन दोनों ने सवालों भरी नज़रों से मुझको देखा. और फिर मैंने उनसे कहा कि, मैं चाहती हूँ कि, जो कुछ आप दोनों छुपकर कर रहे थे, वह सब अब तुम दोनों मेरे सामने ही करो। मेरी बात को सुनकर उन दोनों के ही चेहरों के रंग उड़ गये थे. और फिर रिजवान ने मुझसे बोला कि, यह सब कैसे मुमकिन है?

तो फिर मैंने उससे कहा कि, क्यों अगर तुम दोनों मेरी पीठ के पीछे यह सब कर सकते हो तो सामने करने में क्या दिक्कत है? उस समय मेरी अम्मी तो चुप रही, और उनके चेहरे से मुझको तो ऐसा लगा कि, शायद वह तो इसके लिए तैयार थी. और फिर मैंने रिजवान से कहा कि, देखो अम्मी तो तैयार है, और बस तुम ही मना कर रहे हो. तो फिर अम्मी बोल पड़ी कि, मैंने ऐसा कब कहा? तो फिर मैंने उनसे कहा कि, हाँ नहीं कहा तो मना भी तो नहीं किया आपने?

और फिर कुछ देर तक उस कमरे में ख़ामोशी बनी रही और फिर रिजवान बोला कि, ठीक है मुझको तो कोई दिक्कत नहीं है अगर रेहाना भी अगर राज़ी हो तो. और फिर रिजवान ने मेरी अम्मी को रेहाना ऐसे बोला जैसे कि, वह मेरा बाप हो। लेकिन अम्मी फिर भी चुप ही रही. और फिर रिजवान उठा और अम्मी के पास जाकर बैठ गया था. और फिर मैं उन दोनों को देख रही थी. और फिर रिजवान ने अम्मी के चेहरे को अपनी तरफ घुमाया और फिर उसने अपने होठों को मेरी अम्मी के होठों पर रख दिए थे. और फिर तो उसके चुंबन का जवाब अम्मी भी दे रही थी। और फिर जब वह दोनों एक-दूसरे को कसके बाहों में भरे हुए थे और चुंबन करने में डूबे हुए थे तब मैं वहाँ से उठकर अपने कमरे में चली गई थी. और फिर उसके बाद कितनी ही देर तक मैं अपने कमरे में से अम्मी की सिसकियाँ सुनती रही, उनकी हाय… उफफफ… इस्सस… मेरे तन-बदन में आग लगा रही थी और मेरे दिल को भी जला रही थी. और फिर मैं उठी और वापस उनके पास आई तो मैंने देखा कि, रिजवान नीचे लेटा हुआ था और अम्मी उसके ऊपर बैठकर खुद अपनी चुदाई करवा रही थी. तो फिर मैंने रिजवान से पूछा कि, क्या तुम मेरी अम्मी से शादी करोगे? तो फिर मेरी बात को सुनकर अम्मी भी रुक गई थी. और फिर रिजवान बोला कि, नहीं मैंने शादी करने का तो सिर्फ़ तुमसे ही सोचा था, रेहाना से मैं शादी नहीं कर सकता हूँ, और हाँ अगर तुम चाहो तो मैं तुमसे शादी कर सकता हूँ।

और रही बात तुम्हारी अम्मी की तो, इसके साथ यह सब तो वैसे भी चलता ही रहेगा. तो फिर मैंने उससे कहा कि, क्या कहा तुमने? और फिर रिजवान ने बोला कि, हाँ देखो रेहाना भी अभी तो खूबसूरत है और जवान भी है, और इनकी भी कुछ ख्वाहिशें तो होगी ही, और क्या इसको ज़िंदगी अपने हिसाब से जीने का कोई हक़ नहीं है क्या?

और फिर मैंने उससे कुछ भी नहीं कहा और सोचती रही कि, रिजवान की बात तो सही थी कि, अम्मी को भी एक लंड की ज़रूरत तो थी ही।

और फिर अब मेरे दिमाग ने तो काम करना बन्द कर दिया है अब आप ही बताइए कि, क्या मुझको रिजवान के साथ शादी करनी चाहिए या नहीं?

धन्यवाद कामलीला के प्यारे पाठकों !!