रेल्वे प्लेटफार्म पर हुआ काण्ड, जिसमें मारी मैंने गांड

हाय फ्रेंड्स, मेरा नाम नकुल है Antarvasna मेरी उम्र अभी 27 साल की है. और मैं पश्चिम बंगाल का रहने वाला हूँ, और मैं पटना के पास ही एक कम्पनी के मोबाईल टावर पर ऑपरेटर का काम करता हूँ. मेरा रंग गेहुँवा है और मैं दिखने में भी ठीक-ठाक हूँ. मैं अभी कुँवारा ही हूँ और यहाँ पर मैं अकेला ही रहता हूँ, मैं अपने खाली समय में अपने मोबाईल पर सेक्सी फ़िल्में देखता रहता हूँ और कामलीला डॉट कॉम पर सेक्सी कहानियाँ भी पढ़ता रहता हूँ. दोस्तों मेरे साथ भी एकबार एक बहुत ही खूबसूरत सी घटना हुई थी जिसको मैं आज आप सभी के सामने कामलीला डॉट कॉम के माध्यम से एक कहानी के रूप में पिरोकर लाया हूँ।

हाँ तो दोस्तों मेरे साथ घटी वह घटना कुछ इस प्रकार से है।

दोस्तों यह बात पिछले साल दिसम्बर के महीने की है. जब मैं रेल्वे स्टेशन पर बैठा हुआ अपने गाँव जाने वाली ट्रेन का इन्तजार कर रहा था, और उस ट्रेन का समय रात के 12.45 बजे का था. इसलिए काफ़ी कम लोग इस ट्रेन से सफ़र करना पसन्द करते थे. बहुत कोशिश करने के बाद भी जब मुझको किसी दूसरी ट्रेन में रिज़र्वेशन नहीं मिला तो फिर मैंने उसी ट्रेन से सफ़र करने की ठानी. उन दिनों मौसम ठण्ड का था और ऊपर से दिसम्बर का महीना, और उत्तरी-भारत की ठण्ड को तो आप सभी लोग वैसे भी जानते ही हो. यहाँ पर ठण्ड बहुत ज्यादा ही पड़ती है।

उस समय रात के 11.50 का समय हो रहा था. चूँकि रात का समय था, और वह एक छोटा सा रेल्वे स्टेशन था, इसलिए प्लेटफार्म पर ज़्यादा भीड़ भी नहीं थी. मैं वहाँ पर एक पेड़ के नीचे शॉल ओढ़कर बैठा हुआ था. और दूर-दूर तक कोई और नज़र नहीं आ रहा था. और चारों तरफ बहुत ही कम रोशनी थी. और फिर थोड़ी ही देर में मैंने देखा कि, एक लड़का जिसकी उम्र करीब 25-26 साल की तो होगी वह मेरी तरफ ही चला आ रहा था, और उसके कन्धे पर एक बैग भी लटका हुआ था और उसने एक काले रंग का स्वेटर भी पहना हुआ था. वह दिखने में बहुत गोरा और स्मार्ट था. और फिर वह मेरे पास आकर मेरे बगल में बैठ गया था. और फिर उसने मेरी तरफ देखकर हल्की सी मुस्कान दी थी. और फिर मैंने जब उससे पूछा कि, तुमको कहाँ जाना है? तो फिर उसने मुझको बताया और वह भी वहीँ तक जा रहा था, जहाँ पर मुझको भी जाना था. और फिर मुझको लगा कि, चलो अच्छा ही हुआ जो सफर में कोई साथ मिल गया. और फिर हम दोनों ही ठण्ड में काँपते हुए बैठकर ट्रेन का इन्तजार करने लग गये थे. और अभी ट्रेन को आने में करीब 1 घंटा बाकी था और ठण्ड भी बहुत बढ़ती जा रही थी. और मेरे बगल में बैठा वह लड़का ठण्ड से काँप रहा था. तो फिर मैंने उसको मेरे साथ अपनी शॉल में आ जाने को कहा तो पहले तो वह थोड़ा हिचकिचाया और फिर वह मेरी शॉल के अन्दर आ गया था. और फिर उसने मुझसे थोड़ा हँसते हुए कहा कि, बाकी सब तो ढक गया है, लेकिन हाथों में अभी भी ठण्ड लग रही है. और फिर बातों ही बातों में मैंने उसका नाम जाना तो, उसने उसका नाम दीपक बताया था. वह हावड़ा का रहने वाला था और वह यहाँ अपने किसी रिश्तेदार के यहाँ पर आया हुआ था. थोड़ी देर के बाद दीपक ने मुझसे फिर से हँसते हुए कहा कि, हाथों में अभी भी ठण्ड लग रही है. और फिर मैं कुछ समझ नहीं पाया और तभी मैंने महसूस किया कि, उसका हाथ मेरी जीन्स की चैन को खोल रहा है. और फिर मैं कुछ कहता उससे पहले ही उसका हाथ मेरी अंडरवियर के अन्दर जा पहुँचा था. वैसे तो मैं ज़्यादातर अपने लंड के बाल हमेशा से ही साफ रखता हूँ, लेकिन पिछले कुछ दिनों से काम में कुछ ज्यादा ही व्यस्त होने की वजह से मैं इसबार अपने नीचे के बालों की सफाई नहीं कर पाया था. और उसका हाथ मेरे लंड की झांटों से गुज़रता हुआ मेरे लंड की जड़ तक जा रहा था. चूँकि मैं हमेशा से ही फ्रेंची अंडरवियर पहनता था इसलिए उसमें हाथ डालना आसन हो जाता है. उसके हाथ का स्पर्श पाते ही मेरा लंड खड़ा हो गया था. और वह मेरी अंडरवियर की एक साइड से बाहर आने की कोशिश करने लग गया था. शायद वह भी यही चाहता था. मेरे लंड पर उसका हाथ लगते ही उसके चेहरे पर एक मुस्कान आ गई थी।

और फिर मैं कुछ और समझ पाता उससे पहले ही उसने मेरी अंडरवियर में से मेरा लंड पूरा बाहर निकाल दिया था. और मेरे लंड को मेरी जीन्स से भी बाहर कर दिया था. और फिर उसने अपना मुहँ मेरी शॉल में डाल लिया था और फिर वह धीरे-धीरे मेरे लंड पर अपनी जीभ को फेरने लगा था. दोस्तों मेरे पूरे जीवन में मेरे साथ ऐसा कोई पहली बार कर रहा था पर मुझको एक अजीब सी खुशी भी हो रही थी. और मुझको डर भी लग रहा था कि, आसपास कोई है तो नहीं. पर शुक्र था कि, वहाँ पर दूर-दूर तक कोई नहीं था. और फिर मैं अपने आप को रोक नहीं पा रहा था. और फिर मैंने उसको अपनी शॉल से बाहर निकाला और स्टेशन के पीछे अंधेरे में चलने का इशारा किया तो वह भी एकदम से मान गया था. स्टेशन के पीछे बहुत शान्ति थी और थोड़ी बहुत झाड़ियाँ भी थी।

और फिर मुझको यकीन ही नहीं हो रहा था कि, मैं यह सब क्या कर रहा हूँ. और फिर इसी बीच में ट्रेन के आने की घोषणा भी हो गई थी तो मेरा पूरा दिमाग़ ही घूम चुका था. और फिर झाड़ियों के पीछे जाने के बाद मैंने उसको भी उसकी पेन्ट उतारने को कहा तो उसने भी एकदम से मेरी बात को मानकर अपनी पेन्ट खोल दी थी. और फिर उसने भी अपनी पेन्ट के अन्दर काले रंग की जॉकी की फ्रेंची पहनी हुई थी। और फिर मैंने उसकी पीठ अपनी तरफ़ करी और फिर उसकी अंडरवियर को नीचे करके सीधे ही अपना खड़ा लंड उसकी गांड में डाल दिया था. और फिर मैं धीरे-धीरे धक्के देने लग गया था. और फिर उसके मुहँ से आहहह… की आवाज़ आ रही थी. और फिर वह मुझसे मेरा लंड उसकी गांड में और अन्दर तक डालने के लिए कहने लगा था. और फिर मैंने अपना पूरा दम लगाकर अपना लंड उसकी गांड में घुसाया तो उसके मुहँ से एक ज़ोर की आवाज़ निकल गई थी. और मुझको भी अब बेतहाशा मज़ा आ रहा था और ना जाने क्यों मुझको इस बात का डर भी लग रहा था कि, अगर किसी ने हमको इस हालत में देख लिया तो क्या होगा? और फिर हम दोनों बहुत मज़े लेने लग गए थे. और उस समय हम दोनों को ठण्ड का भी बिल्कुल अहसास नहीं हो रहा था. और वह बार-बार और ज़ोर से चिल्ला रहा था. और फिर थोड़ी देर के बाद वह एकदम से पलटा और उसने मेरा लंड अपने हाथ में ले लिया था. और फिर वह मेरे लंड की चमड़ी को आगे-पीछे करने लग गया था. और जब वह मेरे लंड की चमड़ी को ज़्यादा पीछे करता तो मुझे हल्का और मीठा-मीठा सा होने लगता था. और फिर उसने थोड़ी देर तक यह हरकत करी और फिर उसने धीरे से मेरे लंड को अपने मुहँ में ले लिया था. और फिर वह मेरे लंड को पागलों की तरह चूसने लगा था. और मुझको इस बात का डर भी लग रहा था कि, उसके दाँत कहीं मेरे लंड पर ना लग जाए. लेकिन वह बड़ी ही सावधानी से मेरे लंड को चूस रहा था।

और मेरी गोलियों को भी बार-बार अपनी जीभ से बड़े ही प्यार से सहला रहा था. दोस्तों उस समय मुझको तो बहुत ज्यादा मजा आ रहा था और मेरा तो मन कर रहा था कि, पूरे जीवनभर यही सब चलता रहे. और फिर आख़िर में मैं और ज्यादा देर तक खुद को रोक नहीं पाया था और फिर मैंने अपना सारा माल उसके मुहँ के अन्दर ही झाड़ दिया था. और उसका मुहँ मेरे माल से पूरा ही भर गया था, और वह मुस्कुरा भी रहा था. और फिर उसने मेरा सारा माल अपने गले से नीचे उतार लिया था. और तभी मैंने ट्रेन के चलने की सीटी सुनी और फिर मेरे अन्दर एक बिजली सी कौंधी और फिर मैं यह सोचने लगा कि, यह सब मैं क्या कर रहा हूँ? और फिर मैंने फटाफट से अपनी जीन्स पहनी और फिर मैं प्लेटफार्म की तरफ भागा. ट्रेन स्टेशन पर खड़ी थी, और फिर मैं फटाफट से ट्रेन में चढ़ गया था और फिर मैं दीपक के भी आने की राह देखने लग गया था. लेकिन वह नहीं आ रहा था. और फिर मैंने सोचा कि, मैं नीचे उतर जाऊँ और उसको देखकर आऊँ. और फिर तब तक मुझको वह प्लेटफार्म पर ही बैठा हुआ दिखा. और वह मेरी तरफ मुस्कुरा के अपना हाथ हिला रहा था. लेकिन मैं कुछ समझ नहीं पाया कि, आख़िर वह ट्रेन में क्यों नहीं चढ़ रहा था।

और फिर इतने में ट्रेन आगे बढ़ने लगी थी. और फिर मैंने भी दीपक की तरफ मुस्कुराकर अपना हाथ हिला दिया था. और फिर एक अधूरे सवाल को अपने दिल में रखकर मैं अपनी मंजिल की तरफ बढ़ चला था।

धन्यवाद कामलीला के प्यारे पाठकों !!