कॉलेज के टॉयलेट में गर्लफ्रेंड की

हाय फ्रेंड्स, मेरा नाम दिनेश है, Antarvasna मेरी उम्र 28 साल की है, मैं बैंगलौर के पास एक छोटे से कस्बे का रहने वाला हूँ. मेरा रंग गोरा है और मेरी लम्बाई 5.9 फुट की है. मेरी बॉडी जिम जाने की वजह से एकदम फिट है, और मेरा लंड भी 7” लम्बा है और 3” मोटा है. दोस्तों मैं अपनी जवानी के पहले साल से लेकर आज तक काफ़ी सारी लड़कियों को चोद चुका हूँ. मैंने 18 साल से लेकर 35 साल तक की कुँवारी लड़कियों और भाभियों के साथ जमकर सेक्स किया है, जिनमें से कई भाभियाँ तो शादीशुदा थी जो अपने पति से खुश नहीं थी और कुछ को उनके पति की कमजोरी की वजह से बच्चे नहीं हो रहे थे. इसलिए मेरी चुदाई से उनको बच्चे हो गए थे।

हाँ तो दोस्तों अब ज्यादा फ़ालतू बात ना करते हुए सीधे-सीधे आज की कहानी पर आता हूँ जो कुछ इस तरह से है। दोस्तों ये कहानी आप कामलीला डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।

दोस्तों यह बात आज से 6 साल पहले की है जब मैं 22 साल का था. और तब मैंने कॉलेज में नया-नया दाखिला लिया था, और पहले दिन ही जैसे ही मैं अपनी क्लास में गया तो मुझको वहाँ पर एक लड़की पसन्द आ गई थी जिसका नाम दीपशिखा था, जो मुझको बाद में पता लगा था. उसके बगल वाली सीट खाली थी. तो मैं वहाँ पर जाकर के बैठ गया था. और फिर मैंने जैसे ही उसकी तरफ़ देखा तो हमारी नज़रें मिल गई थी तो उस समय मेरे मुहँ से अचानक हाय… निकला था तो फिर उसने भी मेरी तरफ मुस्कुराकर अपनी आँखें नीचे करते हुए अपना चेहरा क्लास में सामने की तरफ कर लिया था. और उस दिन हम क्लास शुरू होने से काफ़ी पहले ही आ गये थे और उस समय क्लास में 5-7 जने ही थे। एक तो वह बहुत ही खूबसूरत थी और ऊपर से वह बहुत ही मस्त और सेक्सी भी लग रही थी. वह एकदम दूध की तरह गोरी थी उसकी लम्बाई 5.6 फुट के आस-पास थी, उसके बाल उसकी कमर तक बिल्कुल सीधे और लम्बे थे. और उसने अपने बालों को फैशन के हिसाब से रंगा हुआ भी था. उसने उस समय एक गुलाबी रंग की आधी बाहँ की टी-शर्ट और घुटनों तक एक नीले रंग की जीन्स की स्कर्ट पहनी हुई थी. और उसकी टी-शर्ट में से उसकी काले रंग की ब्रा मुझको साफ़ नज़र आ रही थी. और उसके होठों पर भी हल्के गुलाबी रंग की लिपस्टिक लगी हुई थी. दोस्तों उस समय तो मेरा दिल कर रहा था कि, अभी जाकर उसके रसीले होठों को चूम लूँ. उसका फिगर भी कसम से 32-28-34 के आस-पास का बड़े ही गजब का लग रहा था. और फिर आपस में हमारा परिचय हुआ, और फिर उसने अपना नाम बताया और मैंने अपना नाम बताया. और फिर मैंने उसकी तारीफ़ करते हुए उससे कहा कि, तुम इन कपड़ों में बहुत ही ज्यादा खूबसूरत और सेक्सी लग रही हो, और अगर मैं सच कहूँ तो तुम्हारा जो बॉयफ्रेंड है वह तुमको पाकर तो बहुत ही ज्यादा ख़ुशनसीब होगा।

इतना कहते ही उसने मुझे थेंक्स कहा और फिर उसने मुझको बताया कि, उसका कोई बॉयफ्रेंड नहीं है. और फिर उसने मुझसे भी पूछा कि, क्या तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है? तो फिर मैंने उसको कहा कि, नहीं है क्योंकि, आपके जैसी आज तक कोई मिली ही नहीं कभी, अब जाकर मिली है देखते है कि, आगे क्या होता है. तो फिर उसने शरमाकर अपनी नज़रें नीचे झुका ली थी. और फिर लंच के समय मैंने उससे अगले दिन साथ में फिल्म देखने के लिए पूछा तो, उसने भी मुझको साथ चलने के लिये हाँ बोल दी थी. और फिर हमने अपने मोबाइल नम्बर आपस में एकदूसरे को दे दिये थे क्योंकि हम अगले दिन कॉलेज में नहीं आने वाले थे। और फिर अगले दिन मैंने उसको कॉलेज के बाहर से अपने साथ ले लिया था. मैं उस दिन अपनी बाइक लेकर आया था. और वह पीले रंग का लम्बा टॉप पहनकर आई थी जिसमें से उसके दोनों बब्स के बीच की लाइन साफ़ दिख रही थी. और उसका वह टॉप बस उसके घुटनों पर ही खत्म था. वह उस आधी बाहँ के टॉप में बहुत ही सेक्सी लग रही थी. उसने अपने गले में एक पेंडेंट पहना हुआ था. और उसने अपने हाथों में एक फैन्सी घड़ी और एक हाथ में बहुत सारी चूड़ियाँ पहन रखी थी. और वह एक चश्मा भी पहनकर आई थी।

दोस्तों उसको देखकर मेरा लौड़ा ऐसा खड़ा हुआ कि, बस पूछो ही मत, और वह अपनी कार लेकर लाई थी. और फिर हम दोनों उसकी कार में बैठे, और मैंने उससे कार में बैठते ही पूछा कि, आज कितनों के दिलों का खून करके आई हो तुम? और फिर वह मेरी तरफ बस मुस्कुराई. और फिर हम मॉल पहुँचे. और वहाँ पर मैंने फिल्म के पहले ही शो की 2 टिकट ली जो कि, सबसे ऊपर वाली लाइन में कौने की सीट की थी. पहला शो सुबह जल्दी का ही था तो वहाँ पर ज़्यादा भीड़ नहीं थी, और जो थी वह सारी आगे की तरफ थी. ऊपर वाली लाइन में 2 जोड़े और भी थे लेकिन वह हमसे बहुत दूर थे।

और फिर मैंने उसको सीट पर बैठाया और फिर मैं भी उसके साथ ही बैठ गया था, और फिर फिल्म भी शुरू हो गई थी. और फिर वह तो फिल्म को देख रही थी और मैं उसको देख रहा था और अपने मन ही मन में यही सोच रहा था इसके बब्स के ऊपर से इसका टॉप नीचे हो जाए और मुझको इसके गुलाबी बब्स दिख जाए. और तभी उसने मेरी तरफ देखा और उस समय मेरी नज़रें उसके बब्स पर थी. और फिर उसने मेरी तरफ देखा और फिर उसने मुझसे पूछा।

दीपशिखा :- क्या हुआ?

दिनेश :- कुछ भी तो नहीं।

दीपशिखा :- तो फिर तुम इतनी गौर से क्या देख रहे हो?

दिनेश :- नहीं बस ऐसे ही तुमको ही देख रहा था, आज तुम बहुत खूबसूरत लग रही हो।

दीपशिखा :- थैंक्स.

दिनेश :- अच्छा दीपशिखा अगर मैं तुमसे एक बात कहूँ तो तुम बुरा तो नहीं मनोगी ना?

दीपशिखा :- नहीं दिनेश. तुम बोलो तो सही।

दिनेश :- दीपशिखा मुझको तुम बहुत अच्छी लगती हो, जबसे मैंने तुमको देखा है, तब से मुझको कुछ और अच्छा ही नहीं लगता है. और तुमको देखते ही मुझको पहली नजर में तुमसे प्यार हो गया था. और फिर दीपशिखा चुप हो जाती है और वह कुछ बोलती नहीं है और अपना मुहँ नीचे करके कुछ सोचने लग गई थी।

और फिर मैं थोड़ी हिम्मत करके उसके चेहरे को ऊपर करके उसके होठों को किस करने लग गया था. और फिर मैं उसके होठों को चूसने लग गया था. और मेरे उस किस का उसने भी कोई विरोध नहीं किया था. और फिर वह मेरे किस करने और साथ-साथ मेरे बालों में हाथ फेरने लग गई थी. और वह भी मेरा पूरा साथ देने लग गई थी. और फिर कम से कम 5-7 मिनट तक हमने हमारा वह पहला किस किया था. और फिर हम दोनों के अलग होने के बाद वह शरमाने लग गई थी। और फिर मैंने उससे पूछा कि, तुमने मेरे सवाल का जवाब नहीं दिया? तो फिर उसने मुझको मेरी आँखें बन्द करने को कहा, और फिर उसने भी जवाब में मेरे होठों पर एक जबरदस्त किस किया. और फिर वह जब पीछे हटने लगी तो मैंने उसके बालों में अपना हाथ डालकर उसको अपने होठों की तरफ वापस खींच लिया और फिर मैं भी फिर से उसके होठों को चूमने लग गया था. फिर हम दोनों ही फिल्म के इंटरवेल तक वैसे ही एकदूसरे को किस करते रहे थे। और फिर इंटरवेल के बाद में तो मैंने उसको अपनी गोद में बैठा लिया था पहले तो वह थोड़ी आना-कानी कर रही थी लेकिन फिर बाद में मान भी गई थी. और फिर तो मैं उसको किस करने के साथ-साथ उसके बब्स को भी धीरे-धीरे दबा रहा था. और फिर मेरे ऐसा करने से अब वह भी धीरे-धीरे गरम होने लग गई थी. और यह सब मुझको उसके बब्स को दबाते हुए उसके बब्स से आती हुई गरमी से महसूस हो रहा था. मैंने उसके बब्स को खूब दबाया था लेकिन मैं उनको चूस नहीं पाया था. लेकिन मेरा लौड़ा एकदम तनकर खड़ा हो गया था. और वह उसको भी उसके कूल्हों के बीच में महसूस हो रहा था. और फिल्म खत्म होने तक हमने बस किस किये और बस उसके बब्स ही दबाए. और फिर हम यहाँ वहाँ घूमे और फिर हम दोनों अपने-अपने घर चले गये थे।

दोस्तों और फिर तो मैं रोज ही अकेले में उसको किस करता था, और उसके बब्स को दबाता, उसके बब्स को चूसता, और उसकी चूत में ऊँगली भी करता था मतलब हम दोनों जमकर फोरप्ले करते थे. कॉलेज में भी वह मेरे कहने पर सुबह जल्दी ही आ जाया करती थी. और फिर एक दिन मुझको पता चला कि, हमारे कॉलेज में एक जगह ऐसी भी है जहाँ पर टीचर्स, स्टूडेंट्स या और कोई भी नहीं जाता था. और वहाँ पर केवल कॉलेज के प्रेमी जोड़े ही मज़े लेते थे। और फिर एक दिन दीपशिखा काले रंग का और बिना बाहँ का टॉप पहनकर आई थी जो कि, उसके बब्स से ही शुरू हो रहा था. और उसने काले ही रंग का जीन्स का शॉर्ट्स भी पहन रखा था. और फिर जब मैं उसको उस जगह पर लेकर गया तो हमने देखा कि, वहाँ पर हमारे ही कॉलेज का एक लड़का अपनी गर्लफ्रेंड को किस कर रहा था. और उसकी गर्लफ्रेंड का एक बब्स उसके कपड़ों के बाहर निकला हुआ था जिसको वह दबा भी रहा था, और बीच-बीच में उसको चूस भी रहा था. दीपशिखा ने भी उस नज़ारे को देखा तो उसने मेरा हाथ कसकर पकड़ लिया था. और फिर मैं उसको गर्ल्स वाले टॉयलेट रूम में लेकर गया, वहाँ पर 4-5 कैबिन बने हुए थे।

तो फिर हम दोनों भी उनमे से एक में चले गये थे. और फिर अन्दर से दरवाजा बन्द करते ही मैं उसपर टूट पड़ा था. और फिर मैंने उसके बालों को पकड़ा और थोड़ा जबरदस्ती करते हुए मैं उसके होठों को चूमने लग गया था. और फिर मैं अपने दूसरे हाथ से उसके टॉप को नीचे करके उसकी काले रंग की ब्रा में से उसके गोरे और 32” के बब्स को बाहर निकालकर दबाने लग गया था. उसके गोरे बब्स के निप्पल हल्के से गुलाबी रंग के थे. और वह भी मुझको बड़े ही प्यार से किस कर रही थी. और फिर मैंने उसके गोरे बब्स के निप्पल को अपने मुहँ में लेकर चूसने लग गया था. और दूसरी तरफ मैं अपने एक हाथ को उसके शॉर्ट्स में से अन्दर डालकर उसकी मखमली चूत में अपनी ऊँगली को डालने लग गया था. और इस वजह से वह अपनी आँखे बन्द करके धीरे-धीरे सिसकारियाँ लेने लग गई थी, आहहह… इस्सस… ह्म्म्म… और फिर मैं उसके एक बब्स को अपने एक हाथ से दबाने लगा और दूसरे बब्स को अपने मुहँ में लेकर काटने लगा तो वह मुझसे कहने लगी कि, थोड़ा आराम से करो मेरे जानू, मैं कहीं भागकर तो नहीं जा रही हूँ ना. लेकिन मैं फिर भी कहाँ मानने वाला था. और मैं उसके बब्स को चूसता गया और काटता भी गया और साथ में उसकी चूत में अपनी ऊँगली भी तेज-तेज करने लग गया था।

और फिर मैंने उससे कहा कि, मुझको भी मेरा लंड चुसवाना है. और फिर मैं टॉयलेट की सीट पर बैठ गया था, और फिर वह भी अपने घुटनों पर आ गई थी. और फिर उसने मेरी पेन्ट का हुक खोला और फिर मेरा लंड बाहर निकाला जो कि, 7” लम्बा था. और फिर उसने धीरे-धीरे मेरे लंड पर किस करना चालू किया. और मैं भी अपने हाथ से उसके बब्स को मसल रहा था और दबा रहा था. और फिर वह अपनी जीभ को मेरे लंड पर फेरने लग गई थी. और फिर जैसे ही उसको और भी जोश आया तो वह और भी तेज-तेज मेरे लंड को अपने मुहँ में आगे-पीछे करने लग गई थी. मेरे लौड़े को वह ऐसे चूस रही थी जैसे कि, वह किसी लोलीपॉप को चूस रही हो. और फिर मेरी तो साँसे और भी तेज हो गई थी. और फिर मैं उसके बालों को उसके सिर के पीछे से अपनी मुट्ठी में पकड़कर उसके सिर को अपने लंड पर आगे-पीछे करने लग गया था. और मैं उसके मुहँ में अपना 7” का लंड उसके मुहँ के अन्दर तक डाल रहा था. और फिर यह सब हमने 5 मिनट तक किया. और फिर मैंने उसको टॉयलेट की सीट पर बैठने को कहा. और फिर जैसे ही वह खड़ी हुई तो मैंने उसकी जीन्स के शॉर्ट का बटन और चेन को खोल दिया था और फिर वह नीचे गिर गया था. और फिर उसके टॉयलेट की सीट पर बैठते ही मैंने उसकी टाँगों को खोला फिर उसकी चूत को अपने रुमाल से साफ़ किया क्योंकि उसकी चूत पूरी तरह से उसी के पानी से गीली हो रही थी. और फिर मैंने उसकी चूत पर जैसे ही किस करना चालू किया तो, वह सिहरने लगी थी।

और फिर मैंने उसकी एकदम साफ़ बिना बालों वाली एकदम गोरी और हल्की-हल्की गुलाबी सी चूत के दोनों होठों पर ऐसे किस किया, जैसे कि, मैं दीपशिखा के होठों को करता हूँ. और उसकी गोरी चूत के होठों को मैंने जैसे ही चूसा तो उसकी आँखे अपने-आप ही बन्द हो गई थी, और उसकी साँसे तेज हो गई. और मैं उसकी चूत को लगातार चूसे जा रहा था. दोस्तों कसम से उस समय मुझको बहुत मजा आ रहा था. और फिर मैंने उसकी चूत में अपनी जीभ डाली और फिर मैं अपनी जीभ से उसकी चूत को चोदने लग गया था. और इस वजह से वह भी पागलों की तरह आहें भरने लग गई थी. और फिर वह मुझसे कहने लगी कि, अब तो अपना लंड मेरी चूत में डालो ना जानू और इसको आज फाड़ दो ना, आज तुम अपनी इस दीपशिखा की चूत को चोद-चोदकर इसका भोसड़ा बना दो. और फिर उसने खुद ही अपनी चूत के ऊपर से मेरा सिर पकड़कर मुझको उठा लिया और हमने फिर से एकदूसरे को किस किया. और फिर मैंने उसको घोड़ी बनने को कहा. तो फिर वह फटा-फट से घोड़ी बन गई. और फिर मैंने भी अपना लंड उसकी चूत पर टिकाया और फिर मैंने अपना लंड उसकी चूत में धीरे-धीरे डालना शुरू किया तो थोड़ा सा ही अन्दर जाने के बाद उसको बहुत दर्द होने लगा तो मैं रुक गया था. तो फिर वह मुझसे बोली कि, जानू तुम रूको मत थोड़ा बहुत दर्द होगा तो मैं उसको सह लूँगी और तुम तो बस रूको मत और धीरे-धीरे चोदते रहो और एकदम से तेज झटके मत मारना वरना मेरी चीख निकल सकती है. तो फिर मैंने उसके कहे अनुसार धीरे-धीरे अपने लंड को उसकी चूत में अन्दर-बाहर करना शुरू किया. और मेरा लंड आधा ही गया था कि, उसको दर्द होने लगा पहले से भी तेज, तो फिर मैं वैसे ही अन्दर-बाहर करता रहा और साथ ही साथ मैं उसके ऊपर झुककर अपना हाथ उसकी चूत पर ले गया और फिर मैं अपनी ऊँगली से उसकी चूत को सहलाने लगा. उससे उसका दर्द फिर थोड़ा कम हो रहा था. और फिर वह मेरी गांड पर अपना हाथ रखकर मुझको मेरा लंड उसकी चूत में और अन्दर डालने को बोलने लगी, तो फिर मैंने भी झट से वही किया और अपना लौड़ा उसकी चूत के अन्दर डालने लगा। दोस्तों ये मजेदार कहानी आप कामलीला डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।

और साथ में अपने हाथ से उसकी चूत को भी मसलने लगा. जिससे वह भी मज़े लेने लग गई थी. और फिर वह बोलने की हालत में नहीं रही थी. लेकिन उसकी बॉडी से पता लग रहा था कि, वह क्या चाह रही है. और फिर मेरा पूरा लौड़ा उसकी चूत में था. और फिर मैं उसके बब्स को पकड़कर अपनी कमर को हिलाने लगा और मेरा लौड़ा उसमे समाने लगा था. और फिर मैं और थोड़ा तेज़ी से उसकी चूत को मारने लगा था और उसकी पीठ पर किस करते हुए उसके बब्स को भी दबाने लगा था और मसलने लगा था. और फिर मैंने उससे पूछा कि, जान तुमको मज़ा तो आ रहा है ना, और तुमको यह सब अच्छा तो लग रहा है ना? तो फिर वह मुझसे कुछ नहीं बोल पाई बस उसने हाँ में अपना सिर हिलाया. मेरे लंड को उसकी चूत में करीब 20-25 मिनट हो गये थे, और मैं यह नहीं चाहता था कि, किसी को हमारे यहाँ होने का पता चले तो फिर मैं उसकी चूत में झड़ने की तैयारी करने लगा और फिर मैं लगातार ही अपने लंड को दीपशिखा की चूत में ठोके जा रहा था. और फिर 5-7 मिनट के बाद जब मेरा झड़ने वाला था तो मैंने उससे पूछा कि, जान तुम्हारी चूत में ही निकाल दूँ या बाहर? तो फिर वह मुझसे कहने लगी कि, बाहर ही निकाल दो. लेकिन मैं तो चाहता था कि, मेरा पानी उसकी चूत में ही निकले क्योंकि यह उसकी पहली चुदाई थी। और पहली चुदाई का मज़ा ही कुछ अलग होता है. इसलिये मैंने उसकी बात को ना मानते हुए अपने लंड का लावा उसकी चूत में ही डाल दिया. और जब मेरा माल निकला तो वह भी बहुत ही ज्यादा मदहोश हो गई थी. और उस समय तो ऐसा लग रहा था कि, जैसे उसने 2 बोतल दारू चड़ा रखी हो।

और फिर समय भी काफ़ी हो गया था, और हमको जाना भी था तो, हमने जल्दी-जल्दी अपने कपड़े ठीक किये और फिर हम वहाँ से चुप-चाप बाहर निकल गये थे।

हाँ तो दोस्तों मेरी इस चुदाई के बाद तो मैंने मेरी गर्लफ्रेंड दीपशिखा की बहुत बार जमकर चुदाई करी थी।

धन्यवाद कामलीला के प्यारे पाठकों !!