चुदाई की ट्यूशन पढ़ाई बच्चे

हाय फ्रेंड्स, मेरा नाम Antarvasna aअनिल है, मेरी उम्र 27 साल की है, और मैं उत्तर-प्रदेश का रहने वाला हूँ. और मैं आज से 3 साल पहले पटना के एक कॉलेज से इंजीनियरिंग कर रहा था. और मैं आप सभी के सामने अपनी एक कहानी लेकर आया हूँ. दोस्तों यह सब आप लोगों के लिए तो बस एक कहानी ही होगी, लेकिन यह मेरे जीवन की एक सच्ची घटना है जो उन्ही दिनों मेरे साथ हुई थी जब मैं इंजीनियरिंग कर रहा था. और पटना में ही एक कमरा किराये से लेकर रहता था. तब मैंने अपनी पहली ही मुलाक़ात में मेरी मकान मालकिन आंटी की जमकर चुदाई करी थी. एक बार मुझसे चुदवाने के बाद तो वह आंटी मेरे लंड और मेरे सेक्स करने के तरीके पर इतनी फिदा हो गई कि, फिर तो मौका देखकर बार-बार वह मुझसे ही चुदवाने लगी थी. और मैंने भी कुछ दिनों तक उसको खूब जमकर चोदा था. और फिर मेरी इंजीनियरिंग पूरी हो गई थी तो मैं वहाँ से वापस आ गया था।

और फिर कुछ दिन तक घर पर रुकने के बाद मेरा रिजल्ट आने के बाद मैं नौकरी करने के लिए पटना वापस आया. और इस बार मैं सोचकर आया था कि, अब उस आंटी के पास बिलकुल भी नहीं जाऊँगा, तो फिर मैंने किसी दूसरे इलाके में एक कमरा किराए पर ले लिया. और फिर मैं नौकरी की तलाश करने लगा. और फिर कुछ दिन के बाद मुझको कोई नौकरी तो नहीं मिली तो मुझको एक बच्चे को ट्यूशन पढ़ाने का मौका मिला. वह कक्षा 6 का छात्र था. और फिर कुछ दिनों में ही उसको मेरी पढ़ाई समझ में भी आने लगी थी। हाँ तो दोस्तों मेरी यह कहानी मेरे उस स्टूडेंट की नहीं है बल्कि उसकी मम्मी के बारे में है।

हाँ तो दोस्तों अब मैं आप सभी को उसकी मम्मी के बारे में बताता हूँ. दोस्तों उसकी मम्मी का नाम अनीता था, और उसकी उम्र करीब 32-33 साल के लगभग कि तो होगी. वह थोड़ी मोटी सी थी, और वह बहुत गोरी भी थी. उसके बब्स उतने बड़े तो नहीं थे लेकिन साली की गांड का उभार बहुत ही कमाल का था. (दोस्तों मैं आप सभी को बता दूँ कि, मैं किसी भी लड़की/ भाभी में सबसे पहले उसकी गांड को ही देखता हूँ). तो फिर दोस्तों जिस दिन से मैंने उसकी गांड को बड़े गौर से देखा, उसी दिन से मैं उसकी गांड को मारने के बारे में सोचने लगा था।

दोस्तो, अब मैं आपको जो भी बताने वाला हूँ, वह आप में से बहुत सारे लोगों को लगेगा कि, यह सब तो झूँठ है, लेकिन आप सब मुझपर विश्वास करो, और मैं यह घटना आप सभी को इसीलिए बता रहा हूँ क्योंकि ऐसा मेरे साथ सच में हुआ है और इतनी जल्दीबाजी में हुआ जिसकी उम्मीद खुद मैंने भी कभी नहीं करी थी. दोस्तों आप सब तो जानते ही हो कि, आजकल वाट्स-एप कितना चल रहा है, तो मेरी इस चुदाई का श्रेय भी वाट्स-एप को ही जाता है. असल में वह आंटी मुझसे रोज ही वाट्स-एप पर ही पूछती थी कि, कब तक आओगे पढ़ाने के लिये? और मैं भी कभी-कभी उनके साथ चेट भी कर लिया करता था. उस आंटी के यहाँ पर एक काम करने वाली बाई भी आती थी शाम को. और उसके और मेरे आने का समय एक ही था. और वह जब भी झाड़ू लगाती या पोछा लगाती थी तो झुकने के कारण उसकी गांड पीछे से इतनी चौड़ी हो जाती थी कि, उसको देखकर मैं तो पागल ही हो जाता था. और उसको भी चोदने के ख्याल मन में आने लगते थे।

तो फिर दोस्तों हुआ कुछ इस तरह से कि, अचानक से उस काम वाली ने उनके घर पर आना बन्द कर दिया था. और 1-2 दिन तक तो उन आंटी ने भी कुछ नहीं बोला. लेकिन एक दिन वह बहुत गुस्से में थी क्योंकि अब सारा काम उसको खुद ही करना पड़ रहा था. तो फिर एक दिन जब मैं पढ़ाने के लिए उसके घर गया तो वह गुस्से में अपने बेटे को किसी बात के लिए डांट रही थी. और जब मुझको बात समझ में आई तो मैंने उनसे कहा कि, उस काम वाली का गुस्सा आप इसके ऊपर क्यों निकाल रही हो? और फिर वह कहने लगी कि, यह सभी ऐसी ही होती है, जब देखो तब छुट्टी मार लेती है. और फिर वह आंटी तो बार-बार कह रही थी कि, बस एक बार आ जाए फिर देखती हूँ उसको. तो फिर यह सुनकर मैंने भी कह दिया कि, हाँ आंटी मुझे भी बताना, मैं भी छोडूंगा नहीं उसको. मुझको भी उसने काफ़ी परेशान कर रखा है उसने. और यह सुनकर तो आंटी एकदम से चौंक गई और फिर वह मुझसे पूछने लगी कि, आपको कुछ कहा क्या उसने? क्या बात है? तब तो मैंने बहाना बना दिया कि, कुछ खास नहीं, बस ऐसे ही. और आंटी ने फिर से पूछा कि, ऐसे कैसे हो सकता है? उसने जरूर कुछ किया होगा या आपको कुछ बोला होगा तभी तो आप ऐसा बोल रहे हो. और फिर मैंने बोल दिया कि, कुछ नहीं आंटी, मैं अभी नहीं बता सकता, बाद में कभी बता दूँगा. और फिर जब मैं अपने कमरे पर वापस आ गया तो उस आंटी का मैसेज आया और उन्होनें कहा कि, अब बताओ कि, आखिर क्या बात है? तो फिर मैंने भी सोचा कि, यार यह तो पीछे ही पड़ गई है, और लगता है कि, अब सब कुछ बोलना ही पड़ेगा. और फिर मैंने भी उनके मैसेज का जवाब दे दिया कि, कुछ नही आंटी, मैं उसको जब भी देखता हूँ तो मन में ग़लत ख्याल ही आते है. और मैं इससे ज़्यादा और कुछ भी नहीं बता सकता हूँ. और फिर कुछ देर तक उस आंटी का कोई मैसेज नहीं आया. और फिर करीब 10-15 मिनट के बाद एक मैसेज आया और उसमें उन्होंने मुझसे पूछा कि, क्यों, पसंद आ गई क्या आपको वह? और फिर यह देखते ही मैं तो बहुत खुश हो गया और सोचने लगा कि, अब तो अपना काम बन जाएगा. और फिर मैंने उनको बोल दिया कि, ऐसी कोई बात नहीं है, बस थोड़ी सी ही पसन्द आ गई है. और फिर तो दोस्तों मैं आपको बता नहीं सकता कि, उस दिन करीब 3-4 घंटे तक मेरी वाट्स-एप पर उसके साथ चेटिंग होती रही, और अंत में जब मैंने उसको गुड बाय कहा तो मुझको अपने-आप पर यकीन ही नहीं हो रहा था कि, एक ही दिन में यह सब अचानक से कैसे हो गया।

उसकी काम करने वाली बाई को लेकर तो हमने बात शुरू करी थी. और 3-4 घन्टे में मैंने अनीता आंटी को पूरी बात बता डाली कि, वह आंटी मुझे कितनी पसन्द थी और कैसे मैं हमेशा उनके बारे में ही सोचता रहता हूँ. और वह सभी बातें भी जिनके कारण मैं उनपर मर मिटा था. और मुझको उनसे क्या चाहिए था? दोस्तों मैंने तो कभी सोचा भी नहीं था कि, वह इतनी आसानी से तैयार भी हो जाएगी. और ऐसा भी नहीं था कि, वह अपने पति से सन्तुष्ट नहीं थी. और फिर मेरे पूछने पर उसने बताया कि, पता नहीं क्यों पिछले कुछ महीनों से मुझको सेक्स में कुछ नया करने की जरूरत महसूस हो रही थी, और इसके लिये मुझको किसी नये साथी की तलाश थी. जिससे मुझको सेक्स में कुछ नयापन मिल सके, और मेरी कुछ सहेलियों ने मुझको बताया था कि, नये-नये लंड लेते रहने से सेक्स में बहुत मज़ा आता है और तभी से वह भी इस बारे में सोचती रहती थी. लेकिन मेरी हिम्मत नहीं हुई थी कि, कभी किसी से कुछ कह सकूँ. और फिर जैसे ही तुमने पहल की तो मैंने हाँ कर दी. और वैसे भी उसके परिवार में कोई ज़्यादा पढ़ा लिखा भी नहीं था, इसीलिए वह पढ़े-लिखे लोगों की काफ़ी इज़्ज़त करती थी, और जिस तरह से मैं उसके बेटे को पढ़ाता था वह मुझसे काफी प्रभावित हो गई थी. और फिर अगले दिन से तो मैं सीधे सेक्स चेट पर ही आ गया था. और फिर 3-4 दिन के बाद में तो मैंने उसको सेक्स करने लिए राज़ी भी कर लिया था. और फिर उसने मुझसे कहा कि, 2 दिन के बाद ट्यूशन के समय से 1 घंटा पहले आ जाना।

और फिर 2 दिन के बाद मैं ठीक उसके बुलाए समय पर उसके घर पहुँच गया था. और उस दिन उसके घर पर कोई भी नहीं था. उसने पहले से ही उसके बेटे को दूसरे कमरे में सुला दिया था. और फिर जैसे ही उसने मुझे देखा तो वह मुस्कुरा उठी, और फिर मैंने जल्दी से मेन गेट लगाया और फिर मैंने उसको अपनी बाहों में भर लिया था. और फिर मैंने उसके होठों से अपने होठों को सटा दिया था, और फिर मैं उसको बेतहाशा चूमने लग गया था, और फिर कुछ ही देर में वह भी मेरा पूरा साथ देने लग गई थी. और फिर मैंने उसके होठों को, उसकी जीभ को, उसके गले पर, उसके गालों पर हर जगह जी भर के किस किया और दाँत से भी काटने लगा. और इन सब से वह भी मदहोश सी हुई जा रही थी. और फिर किस करने के बाद मैंने उसको बोला कि, अब नहीं रहा जाएगा, चलो कमरे में चलते है. और फिर वह मुझको उसके बेडरूम में ले गई थी. और फिर मैंने उसके कपड़े उतारने शुरू कर दिए थे. दोस्तों और दिन तो वह साड़ी ही पहनती थी लेकिन उस दिन उसने सलवार सूट पहना हुआ था. और फिर उसका हाथ ऊपर करके जैसे ही मैंने उसका सूट हटाया तो उसके बब्स एकदम से बाहर निकल पड़े थे क्योंकि उसने ब्रा नहीं पहन रखी थी. और फिर मैंने उसके दोनों बब्स को अपने मुहँ में भरकर चूसना शुरू कर दिया था. और मैं उसके बब्स को ऐसे चूस रहा था कि, जैसे कोई छोटा बच्चा अपनी मामी का दूध पी रहा हो. और फिर मैंने अपनी जीभ से उसकी निप्पल को गीला किया और वहाँ पर भी दाँत से काटने लगा तो वह भी सिसकियाँ भरने लग गई थी. और फिर मैंने काफ़ी देर तक उसके बब्स को मसला और अपनी जीभ से उनको सहलाता भी रहा. और फिर करीब 10 मिनट के बाद मैंने उसको बेड पर लिटा दिया था, और फिर मैंने उसकी सलवार का नाडा खोलकर एक ही झटके में उसको उतार दिया था, दोस्तों कसम से उसकी जाँघों को देखकर तो मैं पागल ही हो गया था, साली की क्या मोटी-मोटी और एकदम चिकनी जाँघें थी. मुझको तो यकीन ही नहीं हो रहा था कि, मेरी नज़रों के सामने ऐसा गदराया हुआ बदन है. और फिर मैंने उसकी जाँघों को अपने हाथों से सहलाना शुरू किया और उनपर जीभ फेरना शुरू किया. और फिर थोड़ी देर के बाद मैंने उसको पलट दिया था।

दोस्तो अब मैं कैसे बताऊँ आप लोगों को कि, उसकी गांड को देखकर तो मैं पूरी तरह से अपने आपे से बाहर हो गया था. उसकी इतनी मोटी और गोरी-गोरी गांड थी कि, जो मैंने उस दिन से पहले कभी नहीं देखी थी. और फिर मैं मन ही मन सोचने लग गया था कि, लड़कियों की गांड भगवान इतने प्यार से क्यों बनाता है?

और फिर मैंने बड़े ही प्यार से उसकी पैन्टी को उतारा और फिर उसकी गांड की दरार को देखकर तो मुझपर नशा सा छा गया था. और फिर मैंने जी भर के उसकी गांड को अपनी जीभ से सहलाना शुरू कर दिया था, और मैं उसकी गांड को को ज़ोर-ज़ोर से मसलने भी लग गया था. और फिर मैंने अपने बेग में से एक तेल की बोतल निकाली जो कि, मैं अपने साथ में लेकर आया था. और फिर मैंने उसकी गांड की बड़े ही अच्छे तरीके से मालिश करी थी, और फिर मैंने उसकी गांड पर 2-3 थप्पड़ भी लगाए थे. और फिर मैंने उसको पलट दिया था. और अब मैंने उसकी चूत को देखा. उसकी चूत पूरी तरह से साफ़ थी जिसके कारण वह बहुत ही फूली हुई और खूबसूरत दिख रही थी, और फिर मैंने उसकी दोनों टाँगों को हवा में फैलाया और फिर उसके पैरों को उसके घुटनों से मोड़ दिया था, जिससे उसकी चूत का मुहँ मेरे सामने खुल गया था. और फिर धीरे से मैंने उसकी चूत को किस किया, और फिर मैंने उसकी चूत से अपनी जीभ सटाई. और फिर जैसे ही मैंने मेरी जीभ उसकी चूत पर रखी तो वह तड़प उठी थी. और फिर मैंने उसकी चूत में अपनी जीभ घुसाई और फिर मैं उसकी चूत को चाटने लगा. और फिर कुछ ही देर में उसकी चूत मेरे थूँक से पूरी तरह से गीली हो गई थी. और मैं चाटते-चाटते उसकी चूत को अपने दाँतों से भी काटने लगा था. और तभी आंटी ने मेरे सिर पर अपना हाथ रखा और उन्होंने मेरे सिर को दबाना शुरू कर दिया था. और फिर कुछ देर के बाद मैं वहाँ से उठा और फिर मैंने उससे पूछा कि, क्यों मज़ा आया मेरी जान? तो वह आंटी मुझसे बोली कि, उसने तो कभी सोचा ही नहीं था कि, तुम चुदाई के इतने बड़े खिलाड़ी निकलोगे. और फिर उसके मुहँ से यह सुनकर मैंने बोला कि, अब तुम्हारी बारी है जानेमन. और फिर मैंने अपनी पेन्ट उतार दी. और फिर उसने मेरे तंबू जैसे तने हुए अंडरवियर को देखा और वह उसके ऊपर से ही मेरे लंड को पकड़कर दबाने लगी. और फिर जब मेरा अंडरवियर उतरा तो मेरा विशाल लंड उसके सामने किसी काले साँप की तरह झूलने लगा था. और फिर उसको देखकर वह मुझसे बोली कि, बाप रे, तुम तो पूरे छुपे रुस्तम हो।

और फिर उसने अपना मुहँ खोला और फिर वह मेरे लंड को अपने मुहँ में लेकर चूसने लगी. और फिर थोड़ी ही देर में मेरा लंड तो पागल हो उठा था. और फिर मैंने उसके सिर पर हाथ रखकर उसके मुहँ में अपना लंड घुसाना शुरू कर दिया था. और फिर मेरे 5-7 धक्कों में ही उस आंटी का तो दम फूलने लगा और फिर खाँसते हुए उसने मेरा लंड अपने मुहँ से बाहर निकाल दिया था. और फिर वह मुझसे बोली कि, इतनी बेरहमी मत दिखाओ. आराम से चूसने दो ना. तो फिर मैंने उनको बोला कि ठीक है. और इस बार फिर उसने आराम से बड़ी देर तक मेरे लंड को चूसा. कभी थूक डाल-डालकर तो कभी मेरे लंड के चारों तरफ जीभ घुमा-घुमाकर बड़े ही प्यार से उसने मेरे लंड को चुदाई के लिए तैयार किया था. और तब मैंने उसको बोला कि, अब चुदाई का समय हो गया है. और वह तो कब से इसी का इन्तजार कर रही थी।

और फिर मैंने उसको डॉगी पोज़िशन में हो जाने को बोला. और फिर जैसे ही वह डॉगी पोजीशन में आई तो मैंने उसकी गांड पर ज़ोर से 4-5 थप्पड़ मारे और फिर मैंने उसकी गांड को अपने हाथों से फैलाया और फिर मैं उसके पीछे से ही उसकी चूत में अपना लंड घुसाने लगा. और फिर उसने भी अपनी चूत को मेरे लंड के पास सेट किया. और फिर मैंने एक ज़ोर का धक्का मारा और मेरा लंड उसकी चूत में घुस गया था. और फिर मैंने अपना 1 पैर उसकी कमर के बाजू में रखा, और उसकी गांड को अपने हाथों से दबोचकर उसको जमकर चोदने लगा. और वह भी अपना सिर पूरी तरह से नीचे झुकाकर चुदवा रही थी. और मैं उसकी गांड को अपने हाथों से पकड़कर उसको चोदे जा रहा था. और फिर उसको चोदते-चोदते ही मैंने अचानक से अपनी स्पीड बढ़ा दी थी, और मैं चुदाई के साथ-साथ उसकी गांड पर थप्पड़ भी मारने लगा था. और फिर कम से कम 8-10 थप्पड़ मैंने लगातार मारे और जिससे उसकी गोरी-गोरी गांड एकदम लाल हो गई थी. और वह आहहह… उफ्फ्फ… कर रही थी और फिर तो वह अपनी गांड को खुद ही आगे-पीछे करके मुझसे मुझसे चुदवा रही थी. और फिर मैंने भी आगे झुककर उसके झूलते बब्स को पकड़ लिया था. और फिर मैंने उसके कान में बोला कि, साली बहुत दिनों से तडपा रही थी मुझको, आज नहीं बचेगी तू मुझसे।

और फिर तो वह भी मेरे मुहँ से यह सुनकर बोलने लगी कि, हाँ कुत्ते, मैं भी देखती हूँ कि, कितना दम है तेरे लंड में. चोद साले, जितना चोद सकता है चोद. आज तो जो चाहे कर ले. मैं भी देखती हूँ तेरे लंड को आज कितनी देर तक टिक सकता है चुदाई के मैदान में. और फिर तो यह सुनकर मुझको और भी जोश आ गया और फिर मैंने उसके बाल पकड़कर उसको घोड़ी की तरह चोदना शुरू कर दिया था, उसकी जबरदस्त चुदाई से उसकी गांड से ठप-ठप की आवाज़ आ रही थी, और मुझको जन्नत का सुकून मिल रहा था. और फिर देर तक और चोदने के बाद मैंने अपना लंड उसकी चूत से बाहर निकाला और बेड पर लेटकर उसे मेरे लंड के ऊपर आकर बैठने को कहा. और फिर वह मेरे लंड के ठीक ऊपर आई और मेरे लंड को अपने हाथों में लेकर उसके ऊपर अपनी चूत को रखकर बैठ गई थी. और फिर मेरा लंड उसकी चूत में घप से घुस गया था. और उसकी मखमली गांड के नीचे मैं अपना हाथ रखकर उसकी गांड को ऊपर-नीचे उठाने लग गया था. और वह भी अपनी गांड को ऊपर उठा-उठाकर चुदवाने लगी थी. और फिर अचानक से मेरे लंड को जोश आ गया था और फिर मैंने इतनी तेज़ी से उसकी चूत में लंड पेलना शुरू किया कि, उसका पूरा बदन ही थरथराने लग गया था, और वह काँपने लग गई थी और सिसकारियाँ भरने लगी थी. और फिर 10 मिनट की उस जबरदस्त चुदाई के बाद मैं रुक गया था. और तब तक वह भी काफ़ी थक गई थी. और फिर मैंने उसको अपने ऊपर से हटाया और फिर उसको मैंने फिर से बेड पर लिटाकर उसकी जाँघों को फैलाया और फिर उसकी दोनों टाँगों के बीच में आकर उसकी चूत को खोलने लगा।

और फिर यह देखकर वह हैरान हो गई थी, और फिर वह मुझसे बोली कि, अभी और कितना चोदोगे? फोकट की चूत मिल गई है तो चोदे ही जा रहा है. और फिर मैंने उसको बोला कि, साली मेरा माल तो निकला ही नहीं अभी तक, और तुझको ऐसे कैसे छोड़ दूँ? और फिर यह कहकर मैंने उसकी चूत पर अपना लंड रखा, और फिर उसके होठों को अपने होठों में भरकर तेजी से फिर से उसकी चुदाई शुरू कर दी थी. अब तो वह बुरी तरह से कांप रही थी और आहहह… मार डाला रे तूने तो आज कह रही थी. और हम दोनों ही पूरी तरह से पसीने से भीग चुके थे. और तभी मैंने अपनी स्पीड को दुगना कर दिया था. और दनादन धक्के मारने शुरू कर दिए थे. और फिर करीब 20-25 धक्कों के बाद उसकी चूत में मैंने अपना गरमा-गरम लावा छोड़ दिया था. और उसकी चूत पूरी तरह से मेरे पानी से भर गई थी. और फिर मैं उसके ऊपर ही निढाल होकर लेट गया था. और फिर 15 मिनट के बाद उसने मुझे अपने ऊपर से हटाया और फिर वह बाथरूम में चली गई थी. और फिर मैंने भी खुद को साफ़ किया और कपड़े पहने और फिर मैं उसको किस करके वहाँ से चला आया था।

और फिर तो हमको जब भी मौका मिलता था तो हम दोनों जमकर चुदाई करते थे. पूरे एक साल तक उसकी चुदाई करने के बाद मैंने अब वह शहर छोड़ दिया है क्योंकि अब मेरी नौकरी बैंगलौर में लग गई है और उस आंटी से तो बस अब फ़ोन पर ही बात होती है।

धन्यवाद कामलीला के प्यारे पाठकों !!