पति भूल गया प्यार तो बस

हाय फ्रेंड्स, मेरा नाम सरला Antarvasna है और मैं 32 साल की एक शादीशुदा औरत हूँ. मेरा ससुराल जामनगर में है. मेरे पति की यहाँ पर एक कपड़े की दुकान है. मेरी एक बेटी है जो 6 साल की है. दोस्तों मेरे पति पिछले कुछ सालों से अपने काम में कुछ ज्यादा ही व्यस्त रहने लग गए थे, और उनके पास मेरे लिए और अपनी बेटी के लिए समय ही नहीं रहता था वह सुबह अपनी दुकान पर जाते और देर रात को वापस आते थे. और उनकी इस दिनचर्या की वजह से हमारी सेक्स लाइफ भी बहुत प्रभावित हो चुकी थी।

हाँ तो दोस्तों इन सब परिस्थितियों के चलते मेरे जीवन में भी कुछ समय पहले एक घटना घटी थी जिसको मैं कामलीला डॉट कॉम के माध्यम से आप सभी के सामने लेकर आई हूँ।

हाँ तो दोस्तों यह बात तब की है, जब मैं पिछले साल सर्दी की छुट्टियों में मेरी बेटी को लेकर अपनी मम्मी के घर पर जा रही थी. और मेरे पति तो हमको बस स्टेण्ड तक भी छोड़ने नहीं आए थे. और फिर मैं बस में चढ़ी तब मैंने देखा कि, एक जवान लड़के की बगल वाली सीट खाली थी. और फिर हमने एकदूसरे को देखा वह दिखने में बहुत अच्छा लड़का था. और उसको भी शायद मैं बहुत पसन्द आई थी. और फिर मैं उसके बगल में बैठ गई, और मेरी बेटी खड़ी थी तो वह मेरी बेटी को बोलने लगा कि, आओ मेरी गोद में बैठ जाओ. और फिर मैं उसको देखने लगी और फिर मैंने मेरी बेटी को बोला कि, जा बेटा चाचा की गोद में बैठ जा तो वह ना ना करने लगी, तो फिर मैंने उसको समझाकर उस लड़के की गोद में बैठा दिया. और फिर उसने अपना एक हाथ मेरी बेटी की कमर में डाला और उसको पकड़कर रखा और फिर बस भी चल दी थी. और फिर थोड़ी देर के बाद जब बस शहर से बहर निकली तो ड्राईवर ने बस की सभी लाइटें बन्द कर दी थी. और बस में सभी लोग सोने की तैयारी कर रहे थे. और फिर वह लड़का धीरे-धीरे मुझे छूने लगा. और उसका छूना मुझे भी अच्छा लगने लगा था क्योंकि मुझको मेरे पति के साथ सेक्स करे हुए एक अरसा बीत गया था. इसलिये मैं उससे कुछ नहीं बोली थी. और फिर जब उसकी हिम्मत और बढ़ गई थी तो वह मेरे बब्स को छूने लगा था तो फिर मैं भी थोड़ी उसकी तरफ झुक गई थी।

तो फिर वह भी समझ गया था कि, मुझको उसका ऐसा करना अच्छा लग रहा है तो उसने अपना पूरा हाथ ही मेरे बब्स पर रखा और फिर वह धीरे-धीरे मेरे बब्स को दबाने लगा था. लेकिन मैं तब भी उससे कुछ नहीं बोली तो वह फिर मेरे ब्लाउज में हाथ डालने लगा. तो फिर मैं उसकी तरफ और भी झुक गई थी. और फिर वह मेरे ब्लाउज में हाथ डालकर जैसे ही मेरे बब्स को दबाने लगा तो मैंने उसके हाथ पर अपना आँचल रखा और एकबार मैंने भी उसका हाथ दबाया. इतने में मेरी बेटी हलचल करने लगी तो फिर मैं समझ गई थी उस लड़के का लंड टाइट हुआ होगा और वह मेरे बेटी को चुभ रहा होगा. और फिर मेरी बेटी उठने लगी तो वह उससे बोला कि, क्या हुआ बेटी? बैठ जाओ. और जब वह उठने लगी तो मैं भी उससे बोली कि, बैठ जा चुप-चाप यह तो तेरे चाचा के जैसे ही तो है, बेटा बैठ जा. तो फिर वह फिर से बैठ गई और सोने लगी थी. और उस लड़के ने उसको उसकी कमर में हाथ डालकर दबा रखा था. और फिर वह जोर-जोर से मेरे बब्स को दबाने लगा था, और मैं भी उसका पूरी तरह से साथ दे रही थी. और इसी बीच उसने मेरी बेटी को एक मिनट के लिए उठाया. तो फिर मैं भी सब समझ गई थी. और फिर उसने झट से अपनी पेन्ट की चेन खोली और उसने मेरी बेटी को फिर से अपनी गोद में बैठाया. और अब तो मेरी बेटी को ज़्यादा तकलीफ़ होने लगी थी, और वह नींद में इधर-उधर हो रही थी. और फिर मैंने चुपके से देखा तो उसका लंड बाहर आया हुआ था. और फिर उत्तेजना में आकर मैंने मेरी बेटी को बोला चुप-चाप सो जा बस में सभी सो रहे है नहीं तो ड्राईवर अभी हमको यहीं जंगल में उतार देगा, और फिर मेरे डराने से वह सो गई थी।

और फिर वह लड़का फिर से ज़ोर-ज़ोर से मेरे बब्स को दबाने लगा तो मैंने धीरे से उसके हाथ पर अपना हाथ रखा और नीचे की तरफ खींचने लगी थी. तो फिर वह भी समझ गया था कि, मैं क्या चाह रही हूँ. और फिर वह मेरी जाँघों पर हाथ रखकर मेरी साड़ी को उठाने लगा और फिर उसने मेरी साड़ी के अन्दर अपना हाथ डाला और उधर मेरी बेटी भी बार-बार पीछे देखने की और उठने की कोशिश कर रही थी और बोल रही थी कि, मम्मी मुझको खड़ा होना है तो फिर मैंने उसको गुस्से में बोला कि, चुप-चाप बैठ जा और खिड़की के बाहर देख. और फिर जैसे ही उस लड़के ने मेरी चूत पर अपना हाथ रखा तो मेरी बेटी उछलने लगी थी. तो फिर मैं समझ गई थी जरूर उसका अब बुरी तरह से तन रहा होगा और वह मेरी बेटी को चुभ रहा होगा. और फिर मैंने उस लड़के की तरफ देखा और हम दोनों की आँखों में हवस झलक रही थी. और फिर वह मेरी चूत में अपनी ऊँगलियाँ घुसाने लगा तो इतने में मेरी बेटी उठने लगी तो मैंने फिर से उस पर गुस्सा किया और उसने झट से मेरी बेटी को अपनी गोद में बैठा लिया था. और फिर वह मेरी चूत में ज़ोर-ज़ोर से ऊँगलियाँ घुसाने लगा था और फिर मैं भी धीरे-धीरे आहहह… इस्सस… करने लगी थी। दोस्तों ये मजेदार सेक्स कहानी आप कामलीला डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।

और फिर मैं उसको देखने लगी और फिर मैं समझ गई थी कि, अब उसका निकलने वाला है तो उसने मुझको इशारा भी किया और इतने में मेरी बेटी चिल्लाकर उठ गई थी क्योंकि उसके पीछे उस लड़के की गरम पिचकारी छूट गई थी. और फिर जैसे ही मेरी बेटी उसकी गोद में सेर उठी तो मैंने झट से उसका लंड अपनी मुट्ठी में पकड़ा और खचा-खच उसकी तेजी से मूठ मारने लगी और मैंने मेरी बेटी को भी इशारे से चुप रहने को कहा. और फिर मेरे हाथ में उसका माल ही माल भर गया था और छप-छप की आवाज़ भी आने लगी थी. और वह धीरे-धीरे मुझसे बोल रहा था कि, बस करो बस करो लेकिन तब भी मैं उसकी खचाखच मूठ मार रही थी उसकी एक दो पिचकरी मेरी बेटी की फ्रॉक पर भी आ गई थी. और फिर मैंने झट से अपने पेटीकोट से उसका लंड साफ़ किया और फिर उसने अपना लंड अंदर डाला और फिर मैंने भी अपने हाथ साफ़ किये और मेरे कपड़े ठीक किए. और फिर इतने में ही बस स्टॉप भी आ गया था और मेरी बेटी रो रही थी और फिर मैं उसका हाथ पकड़कर उसको बाहर लाई और वह लड़का मुझे देख रहा था. और फिर मैं झट से बस स्टॉप के सामने वाले टॉयलेट में घुस गई।

और फिर मैंने मेरी बेटी के कपड़े और शरीर को साफ़ किया और फिर उसे शांत भी किया, और फिर हम बाहर आ गए थे. और हमारे सामने रास्ते पर ही वह लड़का भी खड़ा था. और फिर हमने फिर से एकदूसरे को देखा तो उसने मुझे फिर से इशारा किया तो मैं समझ गई थी कि, उसका लंड फिर से टाइट हो रहा है. और फिर वह मुझसे कहने लगा कि, पास ही में एक पुराना सिनेमा हॉल है चलो हम वहाँ चलते है. दोस्तों मेरी चूत में भी बड़ी जोर की आग लगी हुई थी तो फिर आख़िर हम मेरी बेटी को वहीँ बस स्टॉप की चाय की होटल पर सुलाकर और उस दुकान वाले से यह बोलकर कि, हम अभी फ्रेश होकर आते है तब तक तुम इस बच्ची का ध्यान रखना. और फिर हम उस सिनेमा हॉल में गये तो वह हॉल एकदम खाली था. और फिर वह मेरे बब्स को दबाने लग गया था और मुझको किस भी करने लग गया था. और वह अपने एक हाथ से मेरी चूत में ऊँगलियाँ भी डालने लग गया था. और फिर मैंने भी उसका लंड बाहर निकाला और फिर मैं उठी और मैंने अपनी साड़ी उठाई और अपनी पैन्टी को साइड में करके और उसके लंड को पकड़कर अपनी चूत में घुसाने लगी थी. उसका लंड मेरी चूत के अन्दर जाता रहा और मैं उसके ऊपर बैठती गई. और फिर देखते ही देखते उसका पूरा लंड मेरी चूत के अन्दर घुस गया था. और फिर मैं भी धीरे-धीरे सिसकियाँ लेने लगी और ऊपर से ज़ोर-ज़ोर से उसके लंड पर बैठती भी जा रही थी और वह भी नीचे से धक्का मारता जा रहा था. दोस्तों क्या मस्त लंड था उसका. मैं अब तेज-तेज ऊपर-नीचे होने लगी थी।

और फिर उसने मुझको वहीँ पर घोड़ी बनाकर भी चोदा था और फिर उस 20-25 मिनट की जबरदस्त चुदाई के बाद मेरी चूत माला भी शांत हो गई थी और हम दोनों भी ठंडे हो गए थे. और फिर हमने झट से अपने कपड़े ठीक किए और फिर हम दोनों वहाँ से चले आए थे. और फिर बस स्टॉप की होटल वाले को धन्यवाद देकर मैंने मेरी बेटी को गोद में लिया और फिर हम दोनों बस स्टॉप के बाहर आ गए थे. और फिर वह मुझको छोड़कर अँधेरे में कहीं चला गया था और फिर मैंने एक टॅक्सी करी और फिर मैं अपनी मम्मी के घर आ गई थी और तब तक सुबह भी हो गई थी। दोस्तों आज भी वह दिन याद करके मेरी चूत पानी छोड़ देती है।

धन्यवाद कामलीला के प्यारे पाठकों !!