टीचर ने पढ़ाई सेक्स की किताब

हाय फ्रेंड्स, मैं चंचल हूँ Antarvasna दोस्तों यह मेरी कामलीला डॉट कॉम पर पहली कहानी है, जो कि मेरी कुँवारी चूत की है. और मैं आज आपको अपनी उस पहली चुदाई की दास्तान को सुनाने जा रही हूँ।

दोस्तों यह आज से 3 साल पहले की बात है, और तब मैं 12 वीं क्लास में पढ़ती थी. और मेरी उम्र 19 साल की थी, मेरी लम्बाई 5.5 फुट की थी, मेरा बदन उस समय नाज़ुक था और मेरे फिगर का साइज़ 32-28-34 का था, मेरे बब्स थोड़े छोटे थे, मैं गोरी थी, मेरे बाल बहुत लम्बे और घने काले थे. मेरी एक बड़ी बहन भी है, जिसकी शादी भी 3 साल पहले हो चुकी थी. और अब मैं अपने मम्मी-पापा की इकलोती लड़की थी. मम्मी-पापा के अलावा हमारी दादी भी हमारे साथ ही रहती थी. हम लोग हमारे घर में ऊपर की तरफ रहते थे और नीचे की तरफ हमने 2 किरायेदार रखे हुए थे. और उनमें से नीचे की तरफ एक टीचर भी रहते थे जिनका नाम “अनिल” था जिनसे मैं ट्यूशन पढ़ती थी. और वो 30-32 साल के थे, उनके 2 बच्चे और बीवी उनके साथ ही रहते थे. अनिल जी की मैं बहुत इज्जत करती थी, और मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि, वो वही होगें जो मुझको पहली बार चोदेगें।

हालाँकि स्कूल में तो बहुत से लड़के मुझको लाइन मारते थे, पर मैं बहुत डरती भी थी. दोस्तों मेरी एक सहेली थी “शीतल” उसको भी उसके पडौस में रहने वाले लड़के ने कई बार चोद दिया था. और वह मुझको सब कुछ बताती थी. दोस्तों उसकी बातों को सुनकर मेरा मन भी बहुत करता था, पर डर भी बहुत लगता था. माफ़ करना दोस्तों मैं अपनी कहानी बताना तो भूल ही गई थी. अब मैं आपको आगे बताती हूँ।

अनिल सर मुझको गणित पढ़ाते थे, और मैंने कई बार नोट भी किया था कि वो मेरे बदन को बहुत घूरते रहते थे. पर मैंने कभी वैसा नहीं सोचा था. और फिर एकबार मुझको उन्होनें एक मैगज़ीन दी और कहा कि, चंचल इसको तुम अकेले में पढ़ना और किसी और को मत बताना. और उस दिन मैं पूरा दिन बेकरार रही, और फिर रात को मैंने अपने कमरे में वह मैगज़ीन खोली तो मैं उसको देखकर एकदम दंग रह गई थी क्योंकि उसमें चुदाई की तस्वीरें थी, और वो भी बिल्कुल नंगी. और उनको देखकर मैं एकदम गरम और लाल हो गई थी और मैंने उसकी एक-एक तस्वीर देख डाली थी, जिससे मेरे पूरे बदन में आग सी फ़ैल गई थी. और फिर इतने में मेरे फोन की घन्टी बजी, और फिर मैंने फोन उठाया तो वह अनिल सर थे. और फिर उन्होंने मुझसे कहा कि, चंचल कैसी लगी किताब? दोस्तों उस समय मेरी तो आवाज़ ही नहीं निकल रही थी. और फिर वह बोले कि, चंचल, घबराओ मत मैं भी तुमको ऐसे ही मज़े दूँगा, और तुम यह बात किसी को बताना मत। और फिर अगले दिन ट्यूशन में मैं उनसे आँख नहीं मिला पा रही थी. और वह मुझको देखकर हँस रहे थे. और उस रात फिर से 11.30 बजे उनका फोन आया, और वह बोले कि, चंचल तुम्हारे फ़ोन की आवाज थोड़ी कम कर दो, कोई सुन ना ले. और फिर वह बोले कि, तुमने कभी किस किया है? तो मैंने उनसे कहा कि, “नहीं”.

क्या?

क्या मैं तुमको किस करूं?

तो फिर मैंने उनसे कहा कि, “नहीं प्लीज़”

अच्छा, फोन पर तो कर ही सकते है, और फिर वह मुझको मनाने लगे, और गिडगिडाने लगे।

और फिर आखिर में मैंने उनसे कहा कि, ठीक है फोन पर तो कर लो” और फिर उन्होनें फोन पर मुझे एक लम्बी सी क़िस्स्सस्स दी. और उससे मैं भी गरम होने लगी थी और एक अजीब सी सिहरन मेरे पूरे बदन में दौड़ने लगी थी. और फिर वह बोले कि, यह तेरे होठ पर, यह तेरे गोरे गालों पर… और फिर किस करते-करते यह तेरे बब्स पर, और यह तेरी पतली कमर पर… दोस्तों मैं तो फ़ोन पर ही बिल्कुल गरम और लाल हो गई थी. और फिर उनके मुहँ से “यह तेरी चूत पर” सुनते ही मैं काँपने लगी थी. और फिर वह बोले कि, अब तू मुझको किस कर. लेकिन मैंने उनको मना कर दिया तो, वह फिर से मुझसे मिन्नतें करने लगे. और फिर मैंने कहा कि, “ठीक है, यह लो क़िस्सस्स”. तो वह कहने लगे हाय मेरी जान, आई.लव.यू.” और फिर वह बोले कि, कहाँ पर किया है? तो मैंने उनसे कहा “होठों पर” तो वह बोले कि, “प्लीज़ मेरे लंड पर भी करना… यह कितना तरस रहा है तेरे होठों के अहसास के लिए” और फिर उनके मुहँ से यह बात सुनकर मैं तो पागल सी हो गई, और मेरे कानों में जैसे किसी ने गरम लोहा डाल दिया हो. और फिर मैंने फोन रख दिया था. और उसके बाद फ़ोन की घन्टी कई बार बजी, पर मैंने उसको नहीं उठाया. और उस रात मैं ठीक से सो ना सकी थी। और फिर अगले दिन मैंने यह सब मेरी सहेली शीतल को बताया, तो वह मेरी बात को सुनकर हँस दी थी और फिर वह मुझसे कहने लगी कि, “यार तू चीज़ ही ऐसी है कि, कोई भी तेरे लिये पागल हो जाए। बेचारे हमारे सर, और फिर वह मुझसे कहने लगी कि, सुन वह तो अनुभवी भी है और वह तुझको खूब मज़े भी देगें एक बार उनसे चुदवाकर देख तो सही” और फिर उस दिन मैं ट्यूशन पर नहीं गई थी, और फिर रात को 11.45 बजे फिर से अनिल सर का फोन आया, और फिर वह फोन पर मुझसे माफी माँगने लगे. और फिर मेरा दिल भी पसीज गया, और मैंने उनसे कहा कि, “मैं नाराज़ नहीं हूँ, अब ठीक है” और फिर वह कहने लगे कि, “क्या हम फोन पर तो कर ही सकते है?” और फिर उसने मुझे मनाया तो फिर मैं मान गई थी. और फिर उसने मुझसे पूरे 30 मिनट तक फोन पर सेक्सी बातें करी थी. इतनी गन्दी-गन्दी और गरम कि, मैं 2 बार तो झड़ गई थी. और फिर वह तब तक बातें करता रहा जब तक मैंने उनको सच में 5 किस देने का वादा नहीं कर दिया था।

और फिर 2 दिन के बाद उनकी बीवी और बच्चे उनके गाँव चले गये थे, और अब तो वह कमरे में अकेले ही रहते थे. और फिर उस रात को उन्होनें मुझे फोन किया और मुझको उनके कमरे में आने को कहा, लेकिन मैं नहीं मानी और उससे कहा कि, “अगर तुमने और कुछ भी किया तो?” तो उन्होनें कसम खाई और कहा कि, “मेरी जान, बस 5 किस करूँगा, और कुछ नहीं, कसम से” और फिर बाद में, मैं मान गई थी. और फिर अपने कमरे को धीरे से बन्द करके मैं नीचे उनके कमरे के बाहर आ गई थी, और फिर हल्के से उनके कमरे का दरवाजा खुला और उन्होनें मुझे मेरा हाथ पकड़कर अन्दर खीँच लिया था. और उस कमरे के अन्दर बिल्कुल अंधेरा था. उन्होनें दरवाजा अन्दर से बन्द किया. और फिर उसने मुझे दीवार के सहारे खड़ा कर दिया, और फिर वह मेरे होठों को चूमने लगा, और धीरे-धीरे काटते हुए वह मेरे होठों को चूसने लगा, उसकी ज़ुबान मेरे दाँतों पर दबाव डाल रही थी, तो फिर मैं समझ गई थी कि, वह मेरे मुहँ में अपनी ज़ुबान डालना चाहता है, लेकिन मुझको बहुत शरम भी आ रही थी और फिर आख़िर में मैंने अपना मुहँ खोल ही दिया और उसकी ज़ुबान मेरे मुहँ में आ गई थी, और फिर उसने मेरी ज़ुबान को कस लिया और चूसने लगा, जिससे मैं तो पागल सी हो गई थी, और जैसे मुझको किसी जन्नत का मजा आ रहा हो।

दोस्तों मुझको नहीं मालूम था कि, इसमें इतना मजा भी आता है. और फिर मैं सोचने लगी कि, जब किस करने में ही इतना मजा है तो उस काम में कितना मजा आता होगा? और उधर वह मेरी जीभ को चूसे जा रहा था. और फिर मैंने महसूस किया कि, उसके हाथ मेरी पीठ पर चल रहे थे, और उसने मुझे अपनी तरफ कस भी लिया था. और अब अब मैं उससे चिपकी हुई थी, और उसका गरम बदन और साँसे मैं महसूस कर रही थी, और फिर उसका एक हाथ मेरे सीने पर रुक गया, और फिर वह हाथ धीरे से मेरे एक बब्स पर आ गया था। और उससे मेरी तो साँस ही रुक गई थी, और मैं पूरी तरह से काँप गई थी, और मैंने कसमसाकर उसको खुद से दूर हटाने की नाकाम कोशिश करी, पर उसने मुझको कस के दबोचा हुआ था. और फिर मैंने उससे कहा कि, ”प्लीज़ रुक जाओ, प्लीज़”. और फिर वह रुक गया और कहने लगा कि, “क्या हुआ?”

तो मैंने कहा कि, “प्लीज़ इनको हाथ मत लगाओ, क्योंकि हमारी बात सिर्फ़ किस तक ही थी, और यह तो बहुत ज़्यादा है, और मैं यह सब नहीं करूँगी प्लीज़, और मुझको अब जाने दो”. तो वह बोला कि, “ठीक है बाबा, किस की ही बात थी तो पाँच किस तो दो, अभी तो केवल एक ही हुआ है” पर मैं नहीं मानी, और वह मुझको मनाता रहा, और फिर वह करीब 10 मिनट तक मुझको मनाता रहा और रोने भी लग गया था, और फिर उसकी उस हालत पर मुझे बाद में तरस आ गया और मैं सिर्फ़ चार बाकी किस के लिए तैयार हो गई थी. और फिर उसने मेरा चेहरा अपने हाथों में लिया और फिर वह मेरे नीचे वाले होंठ को चूसने लगा. और फिर उसके लगातार 5 मिनट तक चूसते रहने से मैं बेताब हो गई थी. और फिर उसने मेरे हाथ को पकड़कर अपने कन्धे पर रखकर लपेट लिया था, जिससे मेरे बब्स उसकी छाती से चिपक गए थे, और फिर उसने अपने हाथों को मेरी पीठ पर फैरना शुरू कर दिया था. और फिर इसी तरह से करते हुए उसने फिर से मुझको फ्रेंच क़िस में उलझा लिया था, और मैं भी पूरी तरह से खो गई थी. और फिर उसने मुझसे कहा कि, तुम अब दीवार की तरफ मुहँ करके खड़ी हो जाओ. और फिर मैं उसकी बात को मान गई और फिर मैं दीवार की तरफ मुहँ करके खड़ी हो गई थी और मेरी पीठ उसकी तरफ थी. और फिर उसने मेरी कमर पर हाथ रखकर मेरे कान के नीचे जीभ से चाटने लगा, जिससे मैं पागल सी हो गई थी, और मुझको बहुत मजा आ रहा था. और फिर धीरे-धीरे उसने मेरी गर्दन पर काटना शुरू कर दिया था, और उस मदहोशी में मैं भी अब आहें भरने लगी थी।

और फिर उसने मेरे कान में कहा कि, “चंचल मेरी जान, तू बहुत नमकीन है, आई.लव.यू.”. और मैं भी सिर्फ़ “सररर” ही कह सकी थी. और फिर मैंने महसूस किया कि, मेरे दोनों कूल्हों के बीचों-बीच उसका वह गरम लोहा लगा हुआ था, और फिर मैं सोचने लगी कि, शायद वह मेरे पीछे बिना अंडरवियर के ही लगा हुआ था. और मुझको डर भी लग रहा था और अच्छा भी लग रहा था. और फिर मैं उत्तेजित सी हो गई थी, और फिर मैंने अपनी गांड उसकी तरफ कर दी थी ताकि उसका वो ठीक से सेट हो सके. और फिर अब उसके हाथ धीरे से मेरी सलवार के नाडे पर आ गए थे. और फिर उसने मुझे किस करते हुए एक ही झटके में मेरी सलवार को खोल दिया था. और फिर मेरी सलवार नीचे गिर गई तो फिर वह तुरन्त ही मेरी पैन्टी को भी कसके पकड़कर उतारने लगा. और अब मेरी नंगी गांड पर उसका लंड लगा हुआ था. और फिर उसने मेरा कुर्ता ऊपर किया तो मैंने भी उसका साथ देते हुए अपने हाथ ऊपर कर दिए थे, और फिर मेरा कुर्ता उतरने के बाद उसने पीछे से मेरी ब्रा का हुक भी खोल दिया था, और फिर एक ही झटके में उसने मेरी ब्रा हटाकर दूर फैंक दी थी. और फिर मैं तो शरम से लाल हो गई थी, क्योंकि मैं पहली बार किसी गैर मर्द के सामने नंगी हो रही थी।

और फिर उसने मेरे पीछे से ही मेरे बब्स को पकड़ लिया और वह उनको मसलने लगा. और फिर जब उसने मेरे निप्पल को मसलना शुरू किया तो मैं चिल्लाने लगी थी, लेकिन उसने मेरी कोई परवा ही नहीं करी थी बल्की उसने मुझको दीवार के सहारे कसके दबोचा हुआ था, और नीचे से मेरी गांड पर अपना लंड भी सटाया हुआ था, और मेरे बब्स उसकी मुट्ठी में थे. वह अपने हाथ की ऊँगली और अंगूठे के बीच में मेरे निप्पल को बड़ी बेदर्दी से मसल रहा था. और उससे मैं पागल सी हो गई थी. और फिर 10 मिनट के बाद उसने मुझको छोड़ दिया था. और फिर उसने मुझको बेड पर बैठने को कहा तो मैं बैठ गई थी. और फिर उसने बेड के साइड वाला लेम्प जला दिया था. और फिर जैसे ही उस कमरे में रोशनी हुई तो मैं अपने बदन को छुपाने लगी और चादर को खींचकर अपनी तरफ करने लगी थी, पर उसने वह चादर भी मुझसे छीनकर फैंक दी थी. और उस समय मैं एक शिकार की तरह अपने शिकारी के सामने थी, और वह मुझको ऊपर से लेकर नीचे तक निहार रहा था. और उसका लम्बा और तना हुआ लंड मेरे सामने था. और फिर मैंने शरमाकर अपनी आँखे बन्द कर ली थी. और फिर उसने मुझसे कहा कि, “चंचल अपनी आँखें खोलो और इसको प्यार करो, पकड़ो”. तो फिर मैंने उससे कहा कि, “नहीं प्लीज़” और फिर उसने ज़बरदस्ती मेरे हाथों को अपने लंड पर रख दिया, और कहने लगा कि, “पता है यह 7.5” लम्बा और 3” मोटा लंड है”, “चल साली अब इसको अपने मुहँ में ले, मेरी रंडी। दोस्तों ये कहानी आप कामलीला डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।

और फिर उसके मुहँ से रंडी सुनते ही मैंने झट से अपनी आँखे खोल दी थी और फिर मैंने गुस्से से उसको देखा तो वह समझ गया था, और फिर वह बोला कि, यार सेक्स में थोड़ा जंगलीपना तो होना ही चाहिये तभी तो मजा आता है. “चल अब चूस इसे, और चाट ले कुल्फी की तरह” नहीं, प्लीज़ यह नहीं तुम और कुछ भी कहोगे तो मैं करूँगी पर मुहँ में नहीं, प्लीज़” और फिर वह मायूस हो गया था. और फिर वह कहने लगा कि, “कोई बात नहीं जान, चल अब लेट जा” और फिर मैं लेट गई थी और अब वह खड़ा था और मैं बेड पर आधी लेटी हुई थी और मेरे पाँव जमीन पर ही थे. और फिर उसने मेरे पैर पकड़कर फैला लिए थे, और फिर उसने अपने लंड का टोपा मेरी चूत के ऊपर रख दिया था. और फिर वह मुझसे कहने लगा कि, “चंचल मेरी जान, तुझको थोड़ा दर्द होगा प्लीज़” और फिर मैंने भी हाँ में अपना सिर हिला दिया था. और फिर उसने एक झटका दिया तो उसके लंड का आधा टोपा मेरी चूत को फाड़ता हुआ अन्दर घुस गया था, और मैं दर्द से चिल्ला उठी थी और रोने लग गई थी. तो फिर वह भी रुक गया था, और फिर उसने मेरी गांड को थोड़ा ऊपर उठाकर एक गोल तकिया उसके नीचे रख दिया था, जिससे मेरी चूत थोड़ा ऊपर हो गई थी, और फिर वह भी मेरे ऊपर झुककर मेरे होठों को अपने मुहँ में लेकर उसने अपने लंड का एक ज़ोरदार झटका दिया तो मेरी तो चीख ही निकलते निकलते रह गई थी। और फिर उसने मेरे होठों को अपने होठों से सील कर दिया था, पर मैं फिर भी दर्द से कराह रही थी. और वह फिर से रुक गया था. अब तक उसका आधा लंड मेरी चूत में घुस चुका था, और फिर 5 मिनट के बाद उसने धीरे-धीरे अपने लंड को मेरी चूत में अन्दर-बाहर करना शुरू किया, लेकिन मैं अभी भी दर्द से मरी जा रही थी. तो फिर उसने रुककर मुझसे कहा कि, “साली अगर तू इसको अपने मुहँ में ले लेती तो मेरा लंड चिकना हो जाता और तुझे अब इतना दर्द नहीं होता, अब चिल्ला क्यों रही है चल अब सूखा ही ले” और फिर थोड़ा रुककर उसने एक और जोरदार झटका दिया तो, उसका सनसनाता हुआ पूरा लंड मेरी चूत में घुस गया था. और अब वह बिलकुल भी नहीं रुका और मुझे चोदने लगा, बिजली की तरह उसका लंड मेरी चूत में अन्दर-बाहर ही रहा था, और मैं दर्द से तड़प रही थी. और फिर 10 मिनट के बाद मुझे भी खूब मजा आने लगा और मैंने अपने दोनों पैर उसकी कमर पर कैंची की तरह कस दिए थे और फिर मैं भी अब गांड को उठा-उठाकर उसका साथ देने लगी थी. और फिर वह बोला कि, “शाबाश मेरी रानी, अब तो तू पूरी रंडी हो गई है”

मैं भी इस बीच अब तक 3 बार झड़ चुकी थी, और वह था कि, रुकने का नाम ही नहीं ले रहा था. और फिर 15-20 मिनट तक और चोदने के बाद, उसने मुझे घोड़ी बन जाने को कहा. और फिर मैं उठकर नीचे फर्श पर आ गई और घोड़ी स्टाइल में हो गई थी. और फिर उसने मेरी कमर को पकड़कर अपना लंड पीछे से मेरी चूत में डाल दिया तो मुझे फिर से दर्द होने लगा. लेकिन फिर उसने मुझे समझाया कि, बाद में तुमको भी बहुत मजा आएगा और यह चुदाई की सबसे अच्छी स्टाइल है. तो फिर मैंने भी कहा कि, हाँ मेरी सहेली भी यही कहती है. और फिर मैं मान गई और फिर मैं भी पीछे की तरफ धक्का मारकर उसका साथ देने लगी थी. और फिर 15 मिनट के बाद वह मेरी चूत में झड़ गया था. और फिर इस तरह से हम दोनों पूरी तरह से थक चुके थे. और फिर हम दोनों ही साथ-साथ लेट गए थे. और फिर उसने मुझे प्यार से चूमा, और फिर थोड़ी देर के बाद उसने मुझे एक गोली दी और कहा कि, यह खा ले इससे तू प्रेग्नेंट नहीं होगी। और इस तरह से रात के 3 बज चुके थे, और फिर मैंने अपने कपड़े पहने और फिर मैं अपने कमरे में चली गई थी. और फिर अगले दिन मैं बिस्तर से उठ भी नहीं पाई थी, और मैं स्कूल भी नहीं गई थी, और बस बुखार का झूँठा बहाना मारकर लेटी रही थी।

और फिर रात को फिर से 11.30 बजे उन सर का फोन आया, और फिर लाख कोशिश करने के बावजूद भी मैं अपने आप को रोक नहीं सकी थी, और फिर मैं उसके कमरे में फिर से आ गई थी. और फिर यह सब अगली 6-7 रातों तक चलता रहा था, और उसने मुझे एक पति के जैसा प्यार दिया था, और हर तरह से, हर स्टाइल में मुझे चोदा था. उसने मुझे बिस्तर के साथ बाँधकर भी मेरे साथ सेक्स किया था. और फिर 7 दिन के बाद जब उसकी पत्नी आ गई थी तो हमको अब वह सब रोकना पड़ा था और बाद में उसने अपने एक दोस्त के कमरे का इंतज़ाम किया, लेकिन हम 2-3 बार ही कर पाए थे. और हमारे इस नाज़ायज रिश्ते के बारे में उसकी बीवी को पता चल गया था, और फिर उसकी बीवी ने हमारा घर खाली कर दिया था।

धन्यवाद कामलीला के प्यारे पाठकों !!