मस्त भाभी की जबरदस्त चुदाई

हाय फ्रेंड्स, मेरा नाम Antarvasna रजत है मैं बिहार का रहने वाला हूँ मेरी लम्बाई 5.9 फुट की है और मेरी बॉडी कसरती है मेरा रंग साफ है. और मैं इस वेबसाइट का आप सभी की तरह एक नियमित पाठक हूँ. और आज मैं भी आप सभी के साथ अपना एक सच्चा सेक्स अनुभव बाँटना चाहता हूँ।

दोस्तों यह बात आज से 2-3 साल पहले की है जब मैं इन्दौर में अपनी मौसी की शादी में जा रहा था और उसके लिए मेरे गाँव से रात 10:30 बजे की ट्रेन थी, लेकिन मैं 9.30 बजे ही स्टेशन पर आ गया था और फिर मैं वहाँ पर बैठकर अपनी ट्रेन का इन्तजार करने लग गया था. और फिर मैं तभी इधर-उधर लड़कियों और भाभियों को ताड़ने लग गया था कि, तभी मेरी नज़र एक पटाखा माल पर पड़ी. सच में दोस्तों वह बहुत ही सेक्सी थी, उसके गोरे रंग ने और उसके कातिलाना फिगर ने मुझे उसका दीवाना बना दिया था. और फिर मैं उसके पास जाकर उसके फिगर को निहारने लगा था उसका फिगर 34-30-36 का बड़ा ही गजब का था. और मैं उसको देख-देखकर पागल हुआ जा रहा था. और बस मैं यह सोच रहा था कि, वह मुझको एक बार चोदने को मिल जाए बस।

और फिर इतने में ही मेरी ट्रेन भी आ गई थी और मैं तब भी वहीं पर खड़ा-खड़ा उसको देखता जा रहा था. और फिर उसने अपना सामान उठाया और फिर वह अपने पति और बच्चे के साथ अपने डिब्बे की तरफ जाने लगी थी. और फिर मैं भी अपने डिब्बे की तरफ जाने लगा था और फिर इतेफ़ाक़ से हम लोगों का डिब्बा एक ही निकला था. और फिर मैं यह देखकर खुशी से पागल हो गया था. उन लोगों के पास सामान ही इतना ज़्यादा था कि, वह उसको संभाल ही नहीं पा रहे थे, और फिर इसीलिये मैंने सोचा कि, क्यों ना मैं भी उनकी कुछ मदद कर दूँ. और फिर मैंने उस भाभी के हाथ से एक भारी भरकम सूटकेस ले लिया और फिर मैं उसको डिब्बे के अन्दर खींचने लगा था कि, इतने में एकदम से वह लड़खड़ा गई थी जिससे उसकी साड़ी का पल्लू नीचे गिर गया था. और फिर इसी बहाने से मुझको उसके खूबसूरत बब्स की गहराइयों का दीदार हो गया था, और फिर उसने भी मेरी तरफ शरमाते हुए देखा और एक बड़ी ही प्यारी सी मुस्कान के साथ उसने अपना पल्लू ठीक कर लिया और ऊपर आ गई थी और फिर मैंने उनके बैग और सूटकेस को उनकी सीट तक रखने में मदद की और मैं वही उनके सामने वाली सीट पर बैठ गया और अपना बैग भी रख दिया फिर वह लोग भी अपनी सीट पर बैठ गये थे. और अब वह भी बार-बार मुझे देखे जा रही थी और मेरी नज़र तो पहले से ही उस पर गड़ी हुई थी. और फिर कुछ देर तक ऐसे ही बैठ गया था और एक दूसरे को देखते-देखते फिर रात के 11.45 बज गये थे और सब अपनी-अपनी सीट पर जाकर सो चुके थे. मेरी ऊपर की बर्थ थी तो उसके पति ने मुझसे पूछा कि आप की सीट कौन सी है? तो मैंने उसे बताया तो फिर उसने पूछा कि, आप ऊपर जा रहे हो सोने? तो मैंने कहा कि, नहीं मैं नीचे ही ठीक हूँ आप अगर चाहो तो ऊपर वाली सीट ले सकते हो. और फिर उसने अपनी पत्नी से बोला जाओ तुम ऊपर जाकर सो जाओ मैं नीचे सो जाता हूँ. और फिर उसने मेरी तरफ देखा और अपने पति को मना कर दिया और बोली कि, आप ऊपर जाकर सो जाओ और छोटू को भी साथ लेते जाओ मैं यही नीचे सो जाऊंगी और आप को तो नींद में होश हवास रहता ही नहीं है इसलिए मैं नीचे रहकर अपने सामान पर भी नज़र रखूँगी. और फिर उसका पति चुपचाप ऊपर जाकर अपने बच्चे के साथ सो गया गहरी नींद में। और फिर मैं भी समझ गया था उसकी बातों और देखने के तरीके से कि, अब मेरी दाल गलने वाली है, और फिर हम एक दूसरे को कुछ देर तक ऐसे ही देखते रहे और फिर उसने मुझसे पूछा कि, नींद नहीं आ रही है आपको? तो मैंने कहा कि, नहीं. तो फिर उसने पूछा कि, कहाँ जा रहे हो आप? तो मैंने बताया उसे कि, मैं इन्दौर में एक शादी में जा रहा हूँ. और फिर उसने भी बताया कि, हम लोग भी इन्दौर ही जा रहे है, और उसने यह भी बताया कि, उसके पति एक ऑफीसर है और वह छुट्टी पर अपने ससुराल इन्दौर जा रही है ऐसे ही कुछ देर हम लोग एक दूसरे से बातें करते रहे इधर-उधर की और फिर मैंने उससे उसकी उम्र पूछी तो उसने पहले पूछा कि, आप क्या करोगे जानकर? तो मैंने उनसे कहा कि, बस ऐसे पूछ रहा था. तो फिर उसने बताया कि, वह 32 साल की है. तो फिर मैं तो हैरान हो गया था यह सुनकर क्योंकि उसकी उम्र 27-28 साल की लग रही थी. और फिर मैंने उससे कहा कि, आप इतनी खूबसूरत हो कि, आप की उम्र समझ में ही नहीं आ रही है. तो फिर उसने एक शरारती सी मुस्कान दी और कहा कि, सच में? चलो कोई तो मेरी खूबसूरती की तारीफ करने वाला मिला वरना मेरे पति तो बस काम में ही बिज़ी रहते है मुझसे और मेरी खूबसूरती से तो कोई मतलब ही नहीं है उनको।

और फिर मैं समझ चुका था कि, वह भी अब मेरे साथ आगे बढ़ना चाह रही है. और फिर उसने उठकर अपने पति की तरफ देखा कि, वह गहरी नींद में है की नहीं और वह बिल्कुल गहरी नींद में सो रहा था खर्राटे मारकर. और फिर मुझे इशारा करते हुए एक शरारती सी मुस्कान देते हुए वह टॉयलेट की तरफ जाने लगी. और फिर मैं भी उठकर उसके पीछे-पीछे चल दिया था रात का समय था और सब सो रहे थे, इसलिये हम पर ध्यान देने वाला कोई भी नहीं था. और ट्रेन में भीड़ भी ना के बराबर ही थी. और फिर वह टॉयलेट के दरवाज़े पर ही खड़ी थी और फिर उसने मुझे जल्दी आने का इशारा किया और फिर मेरा हाथ पकडकर उसने मुझे अन्दर खीँच लिया था और दरवाज़ा अन्दर से बन्द कर दिया और बोली कि, जो कुछ भी करना है जी भर के कर लो मेरी प्यास को भी बुझा दो मैं साल भर से प्यासी हूँ. और फिर वह मुझे पागलों की तरह चूमने लगी और मैं भी उसे किस करने लगा और उसके उसके रसीले गुलाबी होठों को चूसने और काटने लगा। और फिर मैंने उसका पल्लू नीचे गिरा दिया और उसके बब्स को उसके ब्लाउज के ऊपर से ही दबाने लगा दोस्तों सच में क्या बब्स थे उसके एकदम टाइट और फिर उनको काटने भी लगा था ऊपर से ही. और फिर एक-एक करके उसके ब्लाउज के हुक को खोलने लगा और उसके बब्स को भी मसलने लगा. और अब वह बस अपनी काले रंग की ब्रा में थी।

और फिर मैंने झट से उसकी ब्रा भी उतारकर फैंक दी थी और फिर मैं उसके बड़े-बड़े बब्स को चूसने काटने और मसलने लगा था और वह पागल सी हुए जा रही थी और ज़ोर-ज़ोर से आहें भर रही थी इसलिये मैंने अपने एक हाथ से उसका मुहँ बन्द किया और फिर से उसके बब्स पर हमला बोल दिया. उसके निप्पल बिल्कुल गुलाबी थे, जैसे कि, कुँवारी लड़कियों के होते है. और फिर मैंने उसकी पूरी साड़ी और पेटीकोट को भी उतार दिया था और फिर मैं उसकी पैन्टी के ऊपर से उसकी नर्म और गर्म चूत में ऊँगली डालना चालू करने लगा था, जिससे उसकी पैन्टी उसके पानी से गीली हो चुकी थी. और फिर मैं नीचे झुका और उसकी पैन्टी के ऊपर से ही उसकी चूत को चाटने लगा उसकी चूत की खुश्बू मुझे मदहोश कर रही थी. और वह ज़ोर-ज़ोर आहें भी भरे जा रही थी इसलीये मैंने अपना रुमाल निकाला और उसके मुहँ पर बाँध दिया ताकि उसकी आवाज़ कोई सुन ना ले बाहर. और फिर मैंने उसकी पैन्टी उतारी और उसकी चूत में अपनी दो उंगलियाँ घुसा दी. उसकी चूत एकदम गर्म और गीली थी और टाइट भी. मुझको तो ऐसा लग रहा था कि, वह शायद एक या दो बार के अलावा चुदी ही ना हो कभी. उसकी चूत पर छोटे-छोटे बाल भी थे। दोस्तों ये कहानी आप कामलीला डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।

और फिर मैं उसकी चूत को चाटने लगा और उसने भी कसके मेरे बालों को पकड़ लिया था और फिर उसने मुझे खड़ा किया और अपने मुहँ से रुमाल निकाला और फिर उसने मेरे भी सारे कपड़े उतार दिए और फिर मेरे लंड को अपने हाथों में पकड़ा और उसे देखने लगी और उसे किस करने लगी. और फिर जब थोड़ी देर के बाद मेरा लंड फिर से अपनी औकात पर आ गया तो मैंने उसे टॉयलेट के कमोड पर बैठाया और उसकी दोनों टाँगों को फैलाते हुए उसकी चूत में अपना लंड रगड़ने लगा और फिर उसे अन्दर डालने की कोशिश करने लगा पर उसकी चूत इतनी टाइट थी कि, मेरा लंड उसके अन्दर जा ही नहीं रहा था. और फिर उसने अपनी टांगे और फैलाई और मैंने भी अपनी पूरी ताक़त लगा दी. और फिर आख़िर में मेरा लंड उसकी चूत में घुस ही गया पर वह भी आधा और फिर वह मछली की तरह तड़पने लगी और फिर मैंने एक दो बार अन्दर-बाहर किया और लंड को फिर से बाहर निकाला और फिर से पूरी ताक़त के साथ अन्दर धकेल दिया और इस बार वह पूरा अन्दर चला गया था और फिर थोड़ी देर ऐसे ही मैं रुका रहा ताकि उसका दर्द कम हो जाए और फिर थोड़ी देर के बाद फिर से अन्दर-बाहर करना चालू कर दिया और फिर धीरे-धीरे फिर मैं अपनी चोदने की स्पीड को बढाता गया और फिर करीब 10-15 मिनट तक चोदने के बाद मैं उसके अन्दर ही झड़ गया था और वैसे ही कुछ देर तक उसके ऊपर ही पड़ा रहा था और फिर थोड़ी देर के बाद हम दोनों फ्रेश होकर एक दूसरे को किस करके वापस अपनी सीट पर आ गए थे।

धन्यवाद कामलीला के प्यारे पाठकों !!