मामी के बगीचे के आम का स्वाद चखा

हाय फ्रेंड्स, मेरा Antarvasna नाम विनय है, मेरी उम्र 25 साल की है सभी लंड वालों अपना लंड निकालकर अपने हाथ में ले लो और चूतवालियों अपनी पैन्टी को उतारकर अपनी ऊँगली या बैगन तैयार रखे. क्योंकि मेरी चुदाई की इस कहानी को पढ़ने के बाद आपसे सब्र नहीं होगा. दोस्तों मैं छत्तीसगढ़ का रहने वाला हूँ. और मैं एक बांका और खिलाड़ी के जैसे फुर्तीला नौजवान हूँ।

दोस्तों यह बात पिछले साल की ही है और यह सब हुआ यूँ कि, मैं अपनी गर्मी की हर छुट्टीयों में अपने मामा-मामी के घर जाया करता हूँ. और इस बार भी मैं उनके पास ही गया हुआ था। दोस्तों मेरे मामा की उम्र 40 साल के आस-पास है और मेरी मामी की उम्र भी 36 साल की है. लेकिन उनका कसा हुआ बदन देखकर कोई भी नहीं कह सकता कि, वह 36 साल की हो गई है. पर मैं यह ज़रूर कह सकता है की वह 27-28 साल की ज़रूर लग सकती है. उनके 34” की साइज़ के एकदम गोल बब्स हमेशा ही लोगों को चूसने के लिए बुलाते रहते है. और उनकी 30” की पतली कमर और ऊपर से उनके घुटनों तक लम्बे बाल, मानो सोने पे सुहागा. दोस्तों उनकी गांड भी बहुत उभरी हुई है. इसलिए दोस्तों अब मैं सीधा कहानी पर आता हूँ। दोस्तों ये कहानी आप कामलीला डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।

मेरे मामा उनके काम से ज्यादातर कस्बे से बाहर ही जाते रहते थे. और मेरी मामी के 2 बच्चे भी थे जो दूसरी और चोथी क्लास में पढ़ते थे और उनको स्कूल की बस आकर ले जाती थी. मामी ही घर की देखभाल और खेती के छोटे-मोटे काम देखती थी. और खेतों के बाकी दूसरे काम और मजदूरों से करवा लेती थी. दोस्तों पिछली गर्मी के मौसम में मैं वहीं पर था तो मामी ने मुझसे कहा कि, घर पर तो बच्चे भी नहीं है, और तुम भी अकेले परेशान हो जाओगे तो चलो मैं तुम्हे अपने बगीचे की ही सैर करवा दूँ. तो फिर मैंने भी हामी भर दी. और उससे पहले मेरे दिल में भी कभी भी मामी के लिए ग़लत ख़याल नहीं आया था. मामी आगे-आगे चल रह थी और मैं उनके पीछे-पीछे. जिससे मामी की उभरी हुई गांड की थिरकन मुझे मुझे साफ़-साफ़ दिख रही थी. और उनका बगीचा भी घर से 2-3 किलोमीटर की दूरी पर था और हम लोगों को खेतों के बीचो-बीच जाना था. और इस दौरान मैंने अपनी आँखे जी भरके सेंक ली थी और इसका असर मेरी पेन्ट के तंबू से पता चल रहा था। और फिर जब हम लोग बगीचे में पहुंचे तो मामी तब तक थक चुकी थी. और हम लोग अपने साथ में एक चादर लाए थे तो मामी उसको घास पर बिछाकर के आराम करने लग गई थी और उन्होनें मुझसे कहा कि, यही हम लोगों का बगीचा है. उनके बगीचे में करीब 15-20 आम के पेड़ थे जो काफ़ी बड़े और जिनमें से कुछ पर आम पक भी गये थे. और फिर मैंने मामी को देखा तो वह अपने पैरों को अपने हाथों से दबा रही थी।

और फिर मैंने मामी से पूछा तो वह कहने लगी कि, जब भी मैं अधिक दूर तक पैदल चलती हूँ तो मेरे पैरों में दर्द हो जाता है. तो फिर मैंने उनसे कहा कि, क्या मैं आपके पैरों की मालिश कर दूँ तो वह मुझको मना करने लगी. पर मामी का दर्द अधिक होने के कारण मैंने फिर से उनके पैर दबाने के लिए ज़ोर दिया तो मामी ने कहा कि, कोई देख लेगा तो क्या कहेगा? तो फिर मैंने उनसे कहा कि, इतनी गर्मी में दूर-दूर तक तो कोई नहीं दिख रहा है।

और फिर मामी भी मेरी बात को मान गई थी. और फिर मैं मामी के नरम-नरम पैरों को दबाने लगा पर मामी को कुछ ख़ास आराम नहीं मिला तो मैंने उनसे कहा कि, आप अपनी साड़ी को थोड़ी ऊपर कर लो तो मैं आराम से आपके पैर की मालिश कर पाऊँगा. तो फिर मामी ने एकबार तो मेरी तरफ एक अजीब सी नज़र से देखा और फिर वह भी मान गई थी. और फिर मैंने मामी की साड़ी को उनके घुटनों से ऊपर तक कर दी थी. दोस्तों मैं पहलीबार मामी की गोरी-गोरी जाँघों को देख रहा था. और मेरा लंड भी फनफना के खड़ा हो गया था. मेरा लंड तो पता नहीं कब से बेचैन था उस नजारे को देखने के लिए। और फिर मैं मामी के पैर की मालिश करता रहा. और फिर मालिश करते-करते ही मुझे पता चला की मामी ने पैन्टी तो पहन ही नहीं रखी है. क्योंकि मामी की चूत के बालों का अहसास मुझको मेरे हाथों पर हो रहा था और जिससे मेरे पूरे शरीर में सिहरन सी दौड़ रही थी, और मामी की आँखे बन्द थी। और फिर मैंने मामी से कहा कि, आप उल्टे होकर लेट जाओ. तो फिर मामी भी चुप-चाप उल्टी होकर लेट गई थी और फिर उन्होंने अपनी साड़ी खुद ही ऊपर कर दी थी. जिससे मामी की गांड का आधे से अधिक भाग दिखने लगा था. और फिर मुझको भी लगा कि, शायद मामी भी मुझसे चुदवाना चाहती है. और फिर मैंने फिर से मामी की मालिश शुरू कर दी थी और बीच-बीच में मैं उनकी गांड की गोलाईयों को भी छू रहा था और मेरी मामी भी अपनी आँखे बंद करके उस पल का पूरा मज़ा ले रही थी। और फिर थोड़ी देर में मामी पलट गई थी और फिर उन्होनें मुझसे कहा कि, तुमने बगीचा घूम लिया? तो मैंने उनसे कहा कि, हाँ और फिर अब मैं मामी के पेट की तरफ मालिश करने लगा।

मामी :- तो फिर क्या क्या देखा तुमने बगीचे में?

मैं :- आम, केला, सीसम. मामी आपके आम तो बड़े-बड़े हो गये है।

मामी :- इसका मतलब तूने अच्छे से नहीं देखा. कुछ आम तो पक भी गये है।

मैं :- मुझे कैसे पता चलेगा, आपने तो मुझको दिखाया ही नहीं. और उस समय मेरी नज़रें मामी के बड़े बब्स की तरफ थी।

मामी :- तेरे कहने का मतलब क्या है? लगता है तू अब बड़ा हो गया है।

मैं :- आप जानती हो?

मामी :- नहीं मामी ने चुटकी लेते हुए पूछा।

मैं :- मेरा मतलब आपके बब्स से था।

मामी :- झूट मूठ का गुस्सा करते हुए. तू क्या बोल रहा है? मैं तेरी मामी हूँ।

मैं :- लेकिन उससे पहले आप एक औरत हो, और वह भी जवान और मस्त।

मामी :- जवान और मैं? जवान तो तू है।

मैं -: नही मामी आज से पहले मैंने आपके जितनी सुंदर औरत और इतने सुडोल आम (बब्स) भी नहीं देखे है।

मामी :- मेरे पास भला कौन सा आम है?

मैं :- और फिर मैंने मामी के बब्स की तरफ इशारा किया।

तो मामी शरमा गई थी।

मैं :- मामी एकबार मुझको इनको छूने दो ना?

मामी :- नहीं कोई देख लेगा तो?

मैं :- अभी यहाँ कोई नहीं है. प्लीज़ मामी मान भी जाओ ना।

मामी :- ठीक है और फिर मामी ने अपना ब्लाउज उतार दिया था।

और फिर मैं मामी के ब्लाउज में हाथ डालकर उसे छूने लगा और फिर मैं उनको चूमने भी लगा और उनके आम का रस भी पीने लग गया था. और फिर मामी भी अब धीरे-धीरे गर्म होने लग गई थी. और फिर मैं मामी के होठों को भी चूसने लगा और अपने हाथ से मामी के बब्स को भी दबा रहा था. और मामी भी मेरा पूरा साथ दे रही थी. और फिर मामी ने मुझसे कहा कि, तुमने मेरे बगीचे के आम तो देख लिए अब मुझको केला नहीं दिखाओगे क्या?

तो फिर मैंने अनजान बनते हुए उनसे कहा कि, लेकिन बगीचे में तो अभी केले हुए ही नहीं है, तो इस बात पर मामी ने मुझे एक थप्पड़ मारा और कहा कि, बेवकूफ़ मैं तेरे केले की बात कर रही हूँ. और फिर मामी ने मेरी पेन्ट को उतार दिया था और जिससे मेरा लंड फनफनाकर बाहर निकल गया था. तो फिर मामी ने मुझसे कहा कि, वाह! तेरा लंड तो बहुत ताकतवर लगता है. और फिर मैंने उनसे कहा कि, मामी मेरे इस केले को चूसो ना. तो फिर मामी भी झट से अपने मुहँ में लेकर मेरे लंड को चूसने लगी. दोस्तों मेरी मामी चूसने में बहुत कमाल की थी. और मैं भी मामी के आम को चूस रहा था. और फिर मैंने उनसे कहा कि, आप लोग तो ज़मींदार हो. इस पर मामी ने कहा कि, हाँ हमारे पास बहुत सारे खेत है।

मैं :- झूँठ.

मामी :- नहीं सच में।

मैं :- तो फिर दिखाओ ना।

मामी -: कल दिखा दूँगी।

मैं :- नहीं अभी. मुझे अपना खेत दिखा दो. मेरे पास हल भी तो है।

मामी मेरा मतलब समझ गई थी, और फिर वह बोली…

मामी :- तेरे पास हल है तो मेरे खेत की जुताई भी तो करेगा ना, पर यहाँ पर कोई देख लेगा तो?

मैं -: कोई नहीं देखेगा।

और फिर इतना सुनते ही मामी ने मेरे लंड को अपने मुहँ से निकालकर अपनी साड़ी को अपनी कमर के ऊपर कर दिया था, और फिर उन्होंने मुझसे कहा कि, अब तुमको जो करना है कर लो. पर उन्होंने यह भी कहा कि, मैं पूरी साड़ी नहीं उतारूँगी। तो फिर मेरा तो मन एकदम से खिल उठा था. और मैं मामी की झांटो से भरी हुई चूत को पहलीबार देख रहा था. और फिर मैं मामी की चूत को चाटने लग गया था. और फिर मामी ने मुझसे कहा कि, तेरे मामा तो मेरी चूत को कभी चाटते ही नहीं है, वह तो बस सीधे ही लंड को अन्दर डाल देते है। और फिर मैंने उनसे कहा कि, आज मैं आपको ऐसा मज़ा दूँगा जिसको कि, आप कभी भी नहीं भूल पाओगी. और फिर मैंने मामी की चूत में अपनी दो ऊँगलियाँ डालकर अन्दर-बाहर करने लगा तो मामी भी अब धीरे-धीरे सिसकारी लेने लगी थी. आहहह… उहहह… उउम्म…

और फिर मामी ने मुझसे कहा कि, अब मुझसे सहन नहीं होता है, अब बस चोद दे अपनी मामी को, और बना ले अपनी रखैल. और फिर मैंने उससे कहा कि, रखैल नहीं रानी बनाऊँगा. और फिर मैंने भी देर ना करते हुए मैं अपने लंड को मामी की चूत पर रगड़ने लगा पर मामी इतनी उत्तेजित थी कि, उसने अपनी कमर को झटके से ऊपर उठाकर मेरा आधा लंड अपनी चूत में ले लिया था।

मामी :- आहहह… ऊहहह…. मज़ा आ गया. तेरा लंड बड़ा मस्त है।

मैं :- अभी तो आधा ही गया है आपकी चूत में।

मामी :- तब तो तेरा लंड मेरे चूत का आज बैण्ड ही बजा देगा।

और फिर मैंने अपना पूरा लंड मामी की चूत में पेल दिया था, और मामी के मुहँ से चीख निकल गई थी. और फिर मैं थोड़ा रुका. और फिर मैं धीरे-धीरे अपनी स्पीड को बढ़ाकर मामी को चोदने लगा।

मामी :- आज तक तू कहा तक. मेरी चूत इस लंड के लिए कब से तरस रही थी. आहहह….. उउउम… उफ़फ्फ़… ऊहहह…

मैं :- मेरी रानी मामी मैं तो अब आपके पास ही हूँ. जितना चाहे चुदवा लो।

मामी :- हाँ चोद और चोद अपनी रानी को।

उस पूरे बगीचे में फच फच और ठप ठप की आवाज़ गूँज रही थी। और मैं अपनी पूरी स्पीड में मामी को चोदे जा रहा था. और फिर मैंने उनसे कहा कि, मामी अब आप पलट जाओ।

मामी :- नहीं मुझे गांड नहीं मरवानी है।

मैं :- ठीक है, लेकिन मैं आपकी चूत को पीछे से चोदूंगा।

और फिर मामी पीछे घूम गई थी. और मामी की गांड को देखकर तो मेरा लंड तरस गया था. और फिर मैं मामी के बड़े-बड़े बालों को अपने हाथों में लेकर मामी को पीछे से चोदने लग गया था।

मामी :- ऊहहह… मैंने ऐसे पहले कभी नहीं चुदवाया. बहुत मज़ा आ रहा है. चोद खूब जी भर के चोद. आहहह… उहह… उम्म…

और फिर मैंने उनसे कहा कि, मैं अब झड़ने वाला हूँ…

मामी :- मैं भी झड़ने वाली हूँ, और तू मेरी चूत में ही अपना पानी गिरा दे. और फिर 5 मिनट के बाद में मैंने मामी की चूत में और थोड़ा उनके मुहँ में अपना लंड झाड़ दिया था. क्योंकि उनको मेरे पानी का स्वाद चखना था. और फिर 30 मिनट तक एकदूसरे से वैसे ही चिपककर आराम करने के बाद हम दोनों घर पर चले आए थे।

धन्यवाद कामलीला के प्यारे पाठकों !!